Practicing with SCERT Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Textbook Solutions Unit 3 Chapter 1 जब हम धीरे चलते हैं Jab Hum Dheere Chalte Hain Question Answer Notes Summary in Malayalam & Hindi improves language skills.
Jab Hum Dheere Chalte Hain Class 8 Question Answer Notes Summary
SCERT Class 8 Hindi Unit 3 Chapter 1 Question Answer Kerala Syllabus जब हम धीरे चलते हैं
Jab Hum Dheere Chalte Hain Question Answer
विश्लेषणात्मक प्रश्न :
प्रश्न 1.
“मेरे पास हाँ के अलावा कोई जवाब न था” – लेखक के इस कथन का तात्पर्य क्या है?
എന്റെ കൈവശം അതെയെന്നല്ലാതെ മറ്റൊ രുത്തരം ഉണ്ടായിരുന്നില്ല. ലേഖകന്റെ, ഈ പ്രസ്താവനയുടെ ഉദ്ദേശ്യമെന്താണ്?
उत्तर:
लेखक मेट्रो में स्केचिंग करते रहते थे। अचानक एक दिन एक लड़की आकर कला थिएत्रो नामक संस्था में न्योता दिया तो अच्छा लगा। वे एक चलता-फिरता थिएटर शुरू करना चाहते थे। लेखक को इस यात्रा में चित्र खींचने का मौका मिला तो वे खुश हुए। |
ലേഖകൻ മെട്രോയിൽ ചിത്രരചന നടത്തി ക്കൊണ്ടിരുന്ന ആളായിരുന്നു. പെട്ടെന്ന് ഒരുദി വസം ഒരു പെൺകുട്ടീ വന്ന് കലാ ശിയാ എന്ന സ്ഥാപനത്തിലേക്ക് ക്ഷണം നൽകി യപ്പോൾ സന്തോഷം തോന്നി. അവർ സഞ്ച രിക്കുന്ന ഒരു തിയേറ്റർ തുടങ്ങാൻ ആഗ്രഹി ച്ചിരുന്നു. ഈ യാത്രയിൽ ലേഖകന് ചിത്രം വരയ്ക്കാനുള്ള അവസരം കിട്ടിയപ്പോൾ അദ്ദേഹം സന്തോഷിച്ചു.
प्रश्न 2.
‘हमें कहीं पहुँचने की जल्दी नहीं थी’ – इस कथन में कला थिएत्रो की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
‘ഞങ്ങൾക്ക് എവിടെയും പെട്ടെന്ന് എത്തേണ്ടതില്ലായിരുന്നു’ – ഈ പ്രസ്താവനയിൽ കലാ ഥിയായുടെ എന്ത് സവിശേഷതയാണ് പ്രകടമാകുന്നത്?
उत्तर:
कला थिएत्रो के इस प्रोजेक्ट का मकसद स्लो ट्रैवल का अनुभव लेना था। वे रास्ते में कहीं भी रुककर नाचने-गाने-बजाने लगते थे। जिस शहर में शाम को परफार्म करते, वहीं रात गुज़ारते थे।
കലാഥിയായുടെ ഈ പ്രൊജക്ടിന്റെ ലക്ഷ്യം സ്ലോ ട്രാവലിന്റെ സുഖം അന ഭവിക്കുക എന്നതായിരുന്നു. അവർ വഴി യിൽ എവിടെവച്ചും താമസിച്ച് നൃത്തം ചെയ്യുകയും, പാട്ട് പാടുകയും, വാദ്യോപ കരണങ്ങൾ വായിക്കുകയും ചെയ്തിരുന്നു. ഏത് പട്ടണത്തിലാണോ വൈകിട്ട് കലാപ കടനം നടത്തുന്നത് അവിടെത്തന്നെ രാത്രി കഴിച്ചുകൂട്ടുകയായിരുന്നു.
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प्रश्न 3.
‘टस-से-मस न हुआ’ – इस प्रयोग का मतलब क्या है?
‘टस से मस न हुआ’- എന്ന പ്രയോഗത്തിന്റെ അർത്ഥമെന്താണ്?
उत्तर:
इसका अर्थ होता है जरा भी नहीं हिला, बिल्कुल भी नहीं बदला किसी पर कोई असर नहीं हुआ।
ഇതിന്റെ അർത്ഥം, അല്പം പോലും ചലി ച്ചില്ല, ഒട്ടും മാറ്റം വന്നില്ല, ഒരു പ്രഭാവവും ചെലുത്തിയില്ല എന്നിങ്ങനെയാണ്.
प्रश्न 4.
‘उसकी जड़ ऊपर थी जो फूलों की तरह लग रही थी’। ऐसा कोई दृश्य आपने कभी, कुछ अलग तरीके से महसूस किया है?
പൂക്കളെപ്പോലെ തോന്നിപ്പിക്കുന്ന അതിന്റെ വേരുകൾ മുകളിലായിരുന്നു’ ഇങ്ങനെയുള്ള ഏതെങ്കിലും ദൃശ്യങ്ങൾ നിങ്ങൾ വേറിട്ട രീതിയിൽ അനുഭവിച്ചിട്ടുണ്ടോ?
उत्तर:
एक दुख के पल में, जब किसीकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उनमें सूरज की किरण पड़ते ही इंद्रधनुष झलकने लगा।
ദുഃഖമുള്ള സമയത്ത്, കണ്ണിൽ കണ്ണുനീർ നിറയുമ്പോൾ, അതിൽ സൂര്യരശ്മി പതിക്കു മ്പോൾ മഴവില്ല് കാണപ്പെടുന്നു.
प्रश्न 5.
बालकनी में खड़ी महिला के लिए मैत्तेयो ने वहाँ खड़े होकर परफार्म किया- यहाँ मैत्तेयो का कौन-सा मनोभाव प्रकट होता है?
ബാൽക്കണിയിൽ നിൽക്കുന്ന സ്ത്രീക്ക് വേണ്ടി തയ്യോ അവിടെ നിന്ന് കൊണ്ട് പെർഫോം ചെയ്തു. ഇതിൽ മെതയ്യോയുടെ എന്ത് മനോഭാവമാണ് പ്രകടമാകുന്നത്?
उत्तर:
बालकनी पर खड़ी महिला ने कहा कि वे चल नहीं सकती। यह सुनकर मैत्तेयो को उनपर दया आई होगी। कला सभी को खुश कराने के लिए है। जहाँ भी हो, जैसे भी हो वहाँ रहकर परफार्म करना है। यही उनका तरीका होगा। मैत्तेयो दयालू एवं दूसरों को माननेवाला व्यक्ति महसूस होता है।
ബാൽക്കണിയിൽ നിൽക്കുന്ന സ്ത്രീ എനി ക്ക് നടക്കാൻ കഴിയില്ല എന്ന് അറിയിച്ചു. ഇത് കേട്ടപ്പോൾ മെതയ്യോയ്ക്ക് ആ സ്ത്രീ യോട് ദയ തോന്നിയിരിക്കാം. കല എല്ലാവരെ യും സന്തോഷിപ്പിക്കാൻ ഉള്ളതാണ്. എവിടെ യായാലും, എങ്ങനെയായാലും പെർഫോം ചെയ്യണം. ഇതായിരുന്നു അദ്ദേഹത്തിന്റെ രീതി. മെതയ്യോ ദയാലുവും, മറ്റുള്ളവരെ അനുസരിക്കുന്നവനുമായ വ്യക്തിയായി തോന്നുന്നു.
प्रश्न 6.
‘अचानक लगा जैसे हम किसी धागे से बँधे हुए हों । यहाँ कला की कौन-सी विशेषता प्रकट होती है?
പെട്ടെന്ന് തോന്നി ഞങ്ങൾ ഏതോ ചരടിനാൽ ബന്ധിക്കപ്പെട്ടിരിക്കുന്നു എന്ന്.’ ഇവിടെ കലയുടെ ഏത് സവിശേഷതയാണ് പ്രകടമാകുന്നത്?
उत्तर:
कला एक दूसरे को बाँधने वाली शक्ति है। लोग एक ही कला कृति को देखते या सुनते हैं, उनमें एक जैसा महसूस करते हैं। कला के माध्यम से हम एक दूसरे की संस्कृति को समझते हैं। कला भाषाई दीवारों को तोड़ देता है। इससे सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है। कला लोगों को दूसरों की ज़िंदगी झाँकने का मौका देती है।
കല ആളുകളെ പരസ്പരം ബന്ധിപ്പിക്കുന്ന ശക്തിയാണ്. ഓരോ കലാരൂപം കാണുക യോ, കേൾക്കുകയോ ചെയ്യുമ്പോൾ അവർ ഒരുപോലെ അനുഭവിക്കുന്നു. കലയിലൂടെ പരസ്പരം സംസ്ക്കാരം മനസ്സിലാക്കാൻ സാധിക്കും. കല ഭാഷയുടെ മതിലുകളെ പൊ ട്ടിച്ചെറിയുന്നവയാണ്. ഇതിലൂടെ സാമൂഹി ബന്ധം ദൃഢമാകുന്നു. കല എന്നത് മറ്റുള്ളവ രുടെ ജീവിതത്തിൽ എത്തിനോക്കാനുള്ള അവസരം നൽകുന്നു.
प्रश्न 7.
लेखक को पहले पेड़ का चित्र बनाने का मन नहीं था, पर बाद में बनाने लगा। क्यों?
ലേഖകന് ആദ്യം മരത്തിന്റെ ചിത്രം വരയ്ക്കാൻ തോന്നിയിരുന്നില്ല. പക്ഷേ പി ന്നീട് വരയ്ക്കാൻ തുടങ്ങി. എന്തുകൊണ്ട്?
उत्तर:
जब यह पता चला कि वह पेड़ उस जगह के मालिक ने एल्फी की याद में लगाया था, तो उसे बनाने का मन आया। एल्फी को फिआक्को बुरी हालत में मिला था। एल्फी ने उसकी बड़ी तीमारदारी कर उसे तंदुरुस्त किया।
ആ മരം അ സ്ഥലത്തിന്റെ ഉടമ എൽഫിയുടെ ഓർമ്മയ്ക്കായി നട്ടുപിടിപ്പിച്ചതാണ് എന്ന് അറിഞ്ഞപ്പോൾ, അത് വരയ്ക്കണമെന്ന് തോന്നി. എൽഫിക്ക് ഫിയാക്കോയെ വളരെ മോശമായ അവസ്ഥയിലാണ് ലഭിച്ചത്. എൽഫി വളരെയധികം ശുശ്രൂഷകൾ നൽ കിയാണ് അതിനെ ആരോഗ്യവാനാക്കിയത്.
प्रश्न 1.
आगे…
घटनाओं को क्रमबद्ध करें।
• मेट्रो में लेखक की मुलाकात लुआना से होना।
• फिआक्को के साथ यात्रा की शुरुआत होना।
• नदी के पास फिआक्को का रुक जाना।
• क्रिस्टीना का फिआवको को बालियाँ दिखाना।
• खेत में जाकर कैथरीना का गाना।
• बालकनी पर खड़ी महिला के लिए मैत्तेयो का परफार्म करना।
• लेखक के पेड़ का चित्र खींचने का प्रयास करना।
उत्तर:
• मेट्रो में लेखक की मुलाकात लुआना से होना।
• फिआक्को के साथ यात्रा की शुरुआत होना।
• नदी के पास फिआक्को का रुक जाना।
• क्रिस्टीना का फिआक्को को बालियाँ दिखाना।
• खेत में जाकर कैथरीना का गाना।
• बालकनी पर खड़ी महिला के लिए मैत्तेयो का परफार्म करना।
• लेखक के पेड़ का चित्र खींचने का प्रयास करना।
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प्रश्न 2.
पढ़ें
‘हमारा पिछला परफॉरमेंस अच्छा नहीं हुआ था। हम सब तनाव में थे। पर आज जैसे ही कुर्दिस्तान के अशित और ईरान के मेंहदी ने साज़ बजाते हुए गाना शुरू किया तो सब मज़े से उनके आस-पास नाचने लगे। अचानक लगा जैसे हम किसी धागे से बँधे हुए हैं। लगा, जैसे हम जैतून की पत्तियों से सरसरा रहे हैं।’
‘उस दिन के अपने परफॉरमेंस के बारे में कैथरीना अपनी डायरी में लिखती है।’ – कैथरीना की वह डायरी लिखें।

उत्तर:
20 जनवरी 1970
आज का दिन मेरे लिए अविस्मरणीय रहा। मैं बहुत भावुकता से गाना गाई । गाते-गाते मैं रोने लगी। जैतून के कुछ पत्ते एलन शॉ के स्केचबुक पर पड़ें। वे आँसू के तरह लगे । कुर्दिस्तान के अशित और ईरान के मेंहदी ने साज़ बजाते हुए गाना शुरू किया तो सब मज़े से उनके आस-पास नाचने लगे। अचानक लगा जैसे हम किसी धागे से बँधे हुए हैं। कला सबको मिलानेवाली शक्ति है। हम सब एक ही कला-कृति को देखते या सुनते हैं तो उनमें एक जैसा अनुभव करते हैं। कला के माध्यम से एक दूसरे की संस्कृति समझ सकता है। यह भाषाई दीवारों को तोड़ देता है, सामाजिक जुड़ाव बढ़ा देता है। कल की शुभाप्रतीक्षा के साथ…
प्रश्न 3.
पढ़ें और लिखें…
“एक महिला ने अपनी बालकनी पर आकर कहा कि वे चल नहीं सकती हैं। इसलिए नहीं आ पाएँगी। यह सुनकर मैत्तेयो ने वहीं खड़े होकर उनके लिए परफार्म किया।”
इस अवसर पर महिला और मैत्तेयो के बीच में हुई बातचीत लिखें।
उत्तर:
महिला: अरे बेटा, तुम वहीं रुककर अकॉर्डियन बजा सकते हो?
मैत्तेयो: क्यों नहीं? आप नीचे आईए।
महिला: बेटा, मैं नीचे नहीं चल सकती।
मैत्तेयो: ठीक है, मैं यहीं रुककर बजाता हूँ।
महिला: मेरी टाँगें टूट चुकी है।
मैत्तेयो: तो फिर यह धुन खास आपके लिए होगी। कौन-सी पसंद है? धीमी या थिरकने वाली?
महिला: धीमी । उसमें तो हवा भी रुककर सुनती है।
मैत्यो: तो सुनिए। (अकॉर्डियन बजाता है।)
महिला: क्या नाम है तुम्हारा?
मैत्तेयो: मैत्तेयो
महिला: तुमने आज मेरे दिल की सोई हुई बातों को जगा दिया।
मैत्यो: शुक्रिया जी। अब विदा लेता हूँ।
• ‘जो चीज़ मुझे पसंद है मुझे वही करते रहना चाहिए।’
इस कथन पर आपका विचार क्या है? टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
‘जो चीज़ मुझे पसंद है मुझे वही करते रहना चाहिए’ – यह विचार व्यक्ति की अपनी खुशी और मानसिक शांति की ओर इशारा करता है। जब हम वही करते हैं जो हमें पसंद है तो उसमें लगन, ऊर्जा और रुचि अपने आप आ जाती है। यह न केवल हमें खुशी देता है, बल्कि हमारे काम की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसलिए अगर हमारी पसंद का कार्य हमारे विकास और दूसरों की भलाई में सहायक हो, तो उसे निरंतर करते रहना सही और प्रेरणादायक होता है।
• प्रकृति और कला के बीच अभिन्न संबंध है। इस विषय पर लेख तैयार करें।
उत्तर:
प्रकृति स्वयं एक महान कलाकार है। इसकी हर रचना में सौंदर्य, तालमेल और गहराई छिपी होती है। कला प्रकृति से प्रेरणा लेकर उसे भावनाओं, रंगों, रेखाओं और ध्वनियों के माध्यम से व्यक्त करती है। आज चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, साहित्य और नृत्य में प्रकृति एक प्रमुख प्रेरणा- स्त्रोत बनी हुई है। किसी चित्रकार के लिए सूर्योदय का दृश्य, किसी कवि के लिए वर्षा की बूँदें, किसी संगीतकार के लिए पंछियों की चहचहाहट सबकुछ एक सजीव रचना का आरंभ हो सकता है। कला मनुष्य और प्रकृति के बीच सेतु का कार्य करता है। प्रकृति और कला एक दूसरे का पूरक है। यह संबंध न केवल मनुष्य की संवेदनाओं को गहराता है बल्कि जीवन को भी सुंदर एवं समृद्ध बनाता है।
प्रश्न 4.
अनुबद्ध कार्य
अपनी किसी एक यात्रा का विवरण तैयार करें।

उत्तर:
मेरी शिमला यात्रा का विवरण
पिछली गर्मियों के दिन मैं और अपना परिवार शिमला घूमने निकला। हमने चंडीगढ़ से शिमला तक की दूरी बस द्वारा तय की। जैसे-जैसे बस पहाड़ों की ओर बढ़ती गई, वैसे-वैसे मौसम सुहावना होता गया। हमने मॉल रोड के पास एक होटल में ठहरने की व्यवस्था की थी। अगले दिन के घुड़सवारी, हिमालय नेचर पार्क और बर्फ़ से पहाड़ियों ने मन मोह लिया। रास्ते में सेब के बागान भी दिखाई दिए, जिन्हें देखकर बहुत खुशी हुई।
तीसरे दिन हमने जाखू मंदिर की यात्रा की, जो हनुमान को समर्पित है, और ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। वहाँ तक पहुँचने के लिए रोपवे का अनुभव भी बेहद रोमांचक था। तीन दिन की यात्रा कब बीत गया, पता नहीं चला। जब वापसी का समय आ गया तो उदास हो गया। लेकिन खुशी भी थी कि प्रकृति की गोद में कुछ पल सुकून और आनंद के साथ बिताए। ऐसी यात्राएँ जीवन में नयापन और ऊर्जा भर देती हैं।
जब हम धीरे चलते हैं निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या वाक्य में लिखें:
प्रश्न 1.
‘जब हम धीरे चलते हैं’ यात्राविवरण का लेखक कौन है?
उत्तर:
एलन शॉ
प्रश्न 2.
लेखक कौन – सा काम करता था?
उत्तर:
स्केचिंग
प्रश्न 3.
लेखक के पास आनेवाली लड़की का नाम क्या है?
उत्तर:
लुआना
प्रश्न 4.
लुआना की संस्था का नाम क्या है?
उत्तर:
कला थिए
प्रश्न 5.
‘कला थिएत्रो’ कहाँ चलता-फिरता थिएटर शुरू करना चाहती थी?
उत्तर:
इटली के फ्रिउली में।
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प्रश्न 6.
लुआना इस ग्रुप में कौन-सा रोल निभाता है?
उत्तर:
डांसर का
प्रश्न 7.
इस प्रोजेक्ट का मकसद क्या था?
उत्तर:
स्लो ट्रैवल का अनुभव लेना।
प्रश्न 8.
मध्यकाल में किसके ऊपर सामान बाँधकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते थे?
उत्तर:
गधे के ऊपर।
प्रश्न 9.
इस ग्रुप की गधे का नाम क्या था?
उत्तर:
फिआक्को
प्रश्न 10.
फिआक्को का मालिक कौन है?
उत्तर:
एल्लीया
प्रश्न 11.
ग्रुप की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर:
नदी से दुआ माँगने से।
प्रश्न 12.
क्रिस्टीना ने फिआक्को को क्या दिखाकर मनाया था?
उत्तर:
गेहूँ की बालियाँ
प्रश्न 13.
लेखक की मंडली का सबसे छोटा सदस्य कौन है?
उत्तर:
मैत्तेयो
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प्रश्न 14.
मैत्तेयो कहाँ रहता है?
उत्तर:
स्लोवेनिया और इटली के बोर्डर पर
प्रश्न 15.
मैत्तेयो कौन – सा बाजा बजाता था?
उत्तर:
अकॉर्डियन
प्रश्न 16.
लेखक कौन-से पेड़ के नीचे बड़े-से कैनवास पर चित्र बना रहा था?
उत्तर:
जैतून के पेड़ के नीचे
प्रश्न 17.
लेखक ने किसको उलटा बनाया?
उत्तर:
शहर के चर्चे को
प्रश्न 18.
मंडली का आखिरी परफॉर्मेस कहाँ हुआ था?
उत्तर:
कोर्डोवाडो नाम के एक कम्यून के एक किले में
प्रश्न 19.
फिआक्को के असली मालिक का नाम क्या था?
उत्तर:
एल्फी
प्रश्न 20.
बगीचे के बीच का पेड़ किसकी याद में लगाया था?
उत्तर:
एल्फी की याद में
प्रश्न 21.
फिआवको अब कितने साल का है?
उत्तर:
चौदह साल का
प्रश्न 22.
कौन-सा चित्र पूरी यात्रा की इंतेहा बन गया?
उत्तर:
पेड़ का चित्र, जिसमें फिआक्को शामिल था और हल्की बारिश की बूँदें पत्ते बनाये।
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Jab Hum Dheere Chalte Hain Summary in Malayalam
जब हम धीरे चलते हैं Summary in Malayalam
पाठ का सारांश :
(मैं हमेशा की तरह मेट्रो में स्केचिंग करता घर लौट रहा था ………………… चित्रो में दर्ज करने का न्योता दिया। मेरे पास हाँ के अलावा कोई जवाब न था।) [Textbook page no. 43&44]
ഞാൻ പതിവുപോലെ മെട്രോയിൽ സ്കെച്ചിംഗ് നടത്തിക്കൊണ്ട് ചിത്രം വരച്ച് വീട്ടിലേ യ്ക്ക് മടങ്ങുകയായിരുന്നു. അതായിരുന്നു എന്റെയൊരു വിനോദം. ഒരു പെൺകുട്ടി എന്റെ ചിത്രം വരക്കുന്നതും നോക്കി കൊണ്ടിരുന്നു. ലുവാന എന്നായിരുന്നു അവളുടെ പേര്. എന്റെ സ്കെച്ചിംഗ് ബുക്കിനോട് വളരെ താല്പര്യം തോന്നിയ അവൾ തന്റെ വിസിറ്റിംഗ് കാർഡ് എനിക്ക് നൽകി. എന്നിട്ട് കാണാം എന്ന ഉറപ്പിൽ പിരിഞ്ഞു. കുറച്ച് ദിവസങ്ങൾക്ക് ശേഷം സുഹൃത്തായ മാനുവലിന്റെ കൂടെ അവൾ തന്നെ കാണാനായി വന്നു. അവരുടെ സ്ഥാപനം ഇറ്റലിയിലെ ഫ്രീലി എന്ന ഗ്രാമത്തിൽ ഒരു സഞ്ചരിക്കുന്ന തീയേറ്റർ (നാടകശാല) നടത്താൻ ആഗ്രഹിച്ചിരുന്നു. ഇതിൽ ചിത്രകാരൻമാർ, സംഗീ തജ്ഞർ, നർത്തകർ, ഫോട്ടോഗ്രാഫർ എന്നിവരെല്ലാം ഉൾക്കൊള്ളണമെന്ന് ആഗ്രഹിച്ചിരുന്നു.
ലുവാന ഈ ഗ്രൂപ്പിനെ ഏറ്റവും മികച്ച നർത്തകിയായിരുന്നു. അവളായിരുന്നു അവരുടെ യാത്രയെ ചിത്രങ്ങളിലൂടെ അവതരിപ്പിക്കാനുള്ള ക്ഷണം എനിക്ക് നല്കിയത്. ‘ശരി’ എന്നല്ലാതെ എന്റെ കയ്യിൽ വേറെ മറുപടി ഉണ്ടായിരുന്നില്ല.
(इस प्रोजेक्ट का मकसद स्लो ट्रैवल का अनुभव लेना था …………………… कईयों की आँखें भीग गई। मुझे नदी दुआ माँगना बहुत अच्छा लगा।) [Textbook page no. 44&45)
ഈ പ്രൊജക്ടിന്റെ ലക്ഷ്യം, പതുക്കെയുള്ള സഞ്ചാരത്തിന്റെ അനുഭവം ആസ്വദിക്കുക എന്നതായിരുന്നു. മദ്ധ്യകാലഘട്ടത്തിൽ കഴുതപ്പുറത്ത് ഭാരം കെട്ടിവെച്ച് ഒരു സ്ഥലത്ത് നിന്നും മറ്റൊരു സ്ഥലത്തേക്ക് കൊണ്ടുപോകുന്ന പതിവുണ്ടായിരുന്നു. നമ്മുടെ വഴിയും ഏകദ്ദേശം മദ്ധ്യകാലഘട്ടത്തി ലതെന്ന് തോന്നിപ്പിക്കുന്ന വഴിയായിരുന്നു. പല പല പട്ടണങ്ങളിൽ കൂടിയായിരുന്നു യാത്ര. നമ്മുടെ കൂടെ ‘ഫിയാക്കോ’ എന്ന പേരുള്ള ഒരു കഴുതയുണ്ടായിരുന്നു. നമ്മൾ എപ്പോഴും അതിന്റെ പുറകെ സഞ്ചരിച്ചിരുന്നത് ഫിയാക്കോയുടെ ഉടമസ്ഥനായ എല്ലായായും നമ്മുടെ കൂടെ ഉണ്ടായിരുന്നു. യാത്രയുടെ ഇടയിൽ എവിടെയൊക്കെ ഫിയാക്കോ നിൽക്കുന്നുവോ അവിടെയൊക്കെ നമ്മളും നില്ക്കുക എന്നതായിരുന്നു ആ യാത്രയുടെ രീതി.
നമുക്ക് ധൃതിപിടിച്ച് എവിടെയും എത്തിച്ചേരേണ്ട ആവശ്യമില്ലായിരുന്നു. അതു കൊണ്ടുതന്നെ യാത്ര പല സ്ഥലങ്ങളിലായി നിന്ന് പാട്ടുപാടുകയും ഉല്ലസിച്ചും ഒക്കെയായിരുന്നു യാത്ര. ഏത് പട്ടണത്തിലാണോ പെർഫോമൻസ് നടന്നിരുനന്ത് അന്ന് രാത്രി അവിടെ തങ്ങുക എന്ന തായിരുന്നു പതിവ്. ഞാൻ ഇത് മുഴുവൻ ചിത്രങ്ങളാക്കി പേപ്പറിൽ പകർത്തിക്കൊണ്ടിരുന്നു.
നദിയോട് ആഗ്രഹം വാങ്ങിയായിരുന്നു തുടങ്ങിയത്. കത്രീന മനോഹരമായ ഒരു ഗാനം ആലപിച്ചു, പലരുടെയും കണ്ണുകൾ നിറഞ്ഞു കവിഞ്ഞിരുന്നു. നദിയോട് അനുഗ്രഹം വാങ്ങുക എന്നത് എനിക്ക് സുന്ദരമായ അനുഭവമായി തോന്നി.
(अचानक फिआवको चलते-चलते रुक गया।… अकॉर्डियन पर उसकी बनाई खूबसूरत धुनें हवाओं को थिरका देती थी।) [Textbook page no. 46&47)
മുന്നോട്ടുനീങ്ങികൊണ്ടിരിക്കെ ഫിയാക്കോ പെട്ടെന്ന് നിന്നു. മുന്നിൽ നദി മറിക്കട ക്കണമായിരുന്നു. നമ്മളും ഫിയാക്കോയുടെ പുറകിലായി നിന്നു. ഫിയാക്കോ നദി മുറിച്ചുകടക്കാൻ തയ്യാറായില്ല. കുറച്ചുപേർ വിശ്രമിച്ചും പഴങ്ങൾ കഴിച്ചും നേരം കഴിച്ചുകൂട്ടി. എല്ലാവരും പരസ്പ രം ഫിയാക്കാതെ നിർബന്ധിച്ചു. പക്ഷേ ഫിയാക്കോ അനങ്ങിയതേ ഇല്ല. മൂക്കാൽ മണിക്കൂറിനു ശേഷം ക്രിസ്റ്റീന ഫിയാക്കോയെ ഗോതമ്പു കതിരുകൾ കാണിച്ചു. അതു നോക്കിക്കൊണ്ട് ഫിയാക്കോ റോഡ് മുറിച്ചുകടന്നു, പക്ഷേ എല്ലാവരും ഫിയാക്കോയോടൊപ്പം നീങ്ങിയില്ല. എല്ലാവരും ഒരുമിച്ചാ യിരുന്നെങ്കിലും കുറച്ചുപേർ സംസാരത്തിൽ മുഴുകിയിരുന്നു.
കത്രീന മറുവശം ഗോതമ്പു വയലിൽ ചെന്ന് പാടാൻ തുടങ്ങി. എല്ലാവരെയും ആകർ ഷിക്കുന്ന ശബ്ദമായിരുന്നു കത്രീനയുടേത്. കുറച്ചുപേർ വയലിൽ നിന്നും ഗോതമ്പുചെടികൾ പറിച്ചെ ടുത്തു.ഞാൻ ഒരു കൈയിൽ ഗോതമ്പു ചെടി തിരിച്ചു പിടിച്ചു നോക്കി. അതിന്റെ വേരുകൾ മുകളിൽ പൂക്കളെപോലെ നിൽക്കുന്നത് കാണാമായിരുന്നു.
നമ്മുടെ സംഘത്തിലെ ഏറ്റം ചെറിയ അംഗമായിരുന്നു. ‘മെത്തയോ’ പകുതി ഫ്രഞ്ച്കാരും പ കുതി ഇറ്റലിക്കാരനുമായിരുന്നു. സ്ലൊവേനിയയുടെയും ഇറ്റലിയുടെയും ബോർഡറിലായിരുന്നു മെത്തയാ താമസിച്ചിരുന്നത് . നമ്മൾ കൂട്ടി എന്ന് വിളിച്ചാണ് മെത്തേയോയെ സംബോധന ചെയതിരുന്നത്. അദ്ദേഹം സംഗീത ഉപകരണങ്ങൾ വായികുമ്പോൾ എല്ലാവരും അതിൽ മുഴുകി പോവാറുണ്ടായിരുന്നു. അക്കാർഡിയനിൽ വൈക്കോയെ സംഗീയ ആലപിക്കുമ്പോൾ കേട്ടു നിൽകുന്നവർക്ക് നൃത്തം ചെയ്യാനുള്ള ഒരു പ്രചോദനം ഉണ്ടാകുമായിരുന്നു.
(दिन में हम जहाँ से भी गुज़रते…. उसी समय जैतून के कुछ पत्ते मेरी स्केचबुक पर गिरे। मुझे वह आँसू की तरह लगे) [Textbook page no.47]
ഏത് വഴിയിലൂടെയാണോ ഞങ്ങൾ കടന്നു പോകുന്നത്, അവിടെയെല്ലാം ജനങ്ങൾ നമുക്ക് ഷോ’ അവതരിപ്പിക്കാനുള്ള അവസരം (ക്ഷണം) തരുമായിരുന്നു. താഴെ ഇറങ്ങാൻ സാധിക്കാതെ ബാൽക്കണിയിലിരുന്ന ഒരു സ്ത്രീ ആവശ്യപ്പെട്ടതുപ്രകാരം മെത്തയോ അവിടെ നിന്നുകൊണ്ട് അവർക്കു വേണ്ടി പെർഫോം ചെയതു.
ഞാൻ ഒരു ഒലിവ് മരത്തിനുതാഴെ ഇരുന്നുകൊണ്ട് വലിയൊരു കാൻവാസ്സിൽ ചിത്രം വരയ്ക്കുക യായിരുന്നു. പെർഫോമൻസ് നടന്നുകൊണ്ടിരിക്കുന്ന സ്റ്റേജും അവിടെ തന്നെയായിരുന്നു.
എന്റെ ഇഷ്ടപ്പെട്ട ഒലിവ് മരത്തിന് താഴെയിരുന്ന ഞാൻ ഏറെ സിന്തോഷവാനായിരുന്നു. എന്നെ സംബന്ധിച്ചിടത്തോളും ഒലിപ് മരത്തിലെ ഇലകൾ വളരെ സുന്ദരമാണ്
ഞാൻ ചിത്രങ്ങളിലൂടെ ആ പട്ടണത്തിലെ ക്രസ്ത്യൻ പള്ളികളെ തിരിച്ച് പിടിച്ച് എന്റെ പേനയുടെ പോലെ രൂപം നൽകി. ഞാൻ ചിത്രം വരച്ചുകൊണ്ടിരിക്കെ കത്രീന പാടി പാടി അവസാനം കരയാൻ തുടങ്ങി. ആ സമയത്ത് ഒലിവ് മരത്തിന്റെ ഇലകൾ എന്റെ സ്കെച്ച് ബുക്കിലേക്ക് വീഴാൻ തുടങ്ങി. എനിക്ക് അത് കണ്ണു നീരുപോലെ. തോന്നി.
(हमारा पिछला परफॉरमेंस अच्छा नहीं हुआ था। हम सब तनाव में थे…… मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।) [Textbook page no. 47&48]
നമ്മുടെ കഴിഞ്ഞ പെർഫോമൻസ് മികച്ചതായിരുന്നില്ല. എല്ലാവരും വാല്ലത്ത് മാനസിക സം ഘർഷത്തിലായിരുന്നു. കർദിസ്ഥാനിലെ അശ്തിയും ഇറാനിലെ മെഹന്ദിയും തുടങ്ങിയ സംഗീത ഉപ കരണങ്ങളിലൂടെ സംഗീതം മുഴങ്ങാൻ തുടങ്ങിയപ്പോൾ -എല്ലാരും ചുറ്റുപാടും നൃത്തം ചെയ്യാൻ തുടങ്ങി. നമ്മളെല്ലാവരും ഒരുചരടിൽ ബന്ധിക്കപ്പെട്ടതുപോലെ തോന്നി. ഒലിവുമരത്തിന്റെ ഇലകൾ തഴുകി തലോടുന്നതുപോലെ അനുഭവപ്പെട്ടു.
കോർവാഡോ കമ്യണിലെ ഒരു കൊട്ടാരത്തിലായിരുന്നു നമ്മുടെ അവസാനത്തെ പെർഫോമൻസ് നടന്നത്.
അവിടെ ചെന്നപ്പോഴാണ് ആൽഫിയാണ് ഫിയാക്കോയുടെ യഥാർഥ ഉടമസ്ഥന്റെ പേര് എന്ന് എനിക്ക് മനസ്സിയായത് അതിനുശേഷമാണ് ആൽഫിയുടെ മകനായ എല്ലിയോ ഫിയാക്കോയെ സം രക്ഷിക്കാൻ തുടങ്ങിയത്. എല്ലിയോ ഉൾപ്പെടെ എല്ലാവരും പൂന്തോപ്പിലേയ്ക്ക് പോയി. പൂന്തോപ്പിന്റെ മദ്ധ്യത്തിൽ ഒരു വൃക്ഷമുണ്ടായിരുന്നു. എനിക്ക് ഇറ്റാലിയൻ ഭാഷ പരിമിതമായി മാത്രമേ മന സ്സിലാകുമായിരുന്നുള്ളൂ. അവിടുത്തെ ആളുകൾ വളരെ ദുഃഖിതരായി എന്തൊക്കെയോ സംസാരിച്ചു കൊണ്ടിരിക്കുന്നുണ്ടായിരുന്നു.
पहले तो उस पेड़ का चित्र बनाने का मेरा मन नहीं था। … इस चित्र को हमारी पूरी यात्रा की इंतेहा की तरह मानिए।) [Textbook page no. 49]
വലിയ പ്രത്യേകതകളൊന്നും ഇല്ലാത്തതിനാൽ ആദ്യം തന്നെ ആ വൃക്ഷത്തിന്റെ ചിത്രം വരക്കാൻ എനിക്ക് മനസ്സിൽ തോന്നിയതേ ഇല്ല. പിന്നീടാണ് ആ സ്ഥലത്തിന്റെ ഉടമ ആൽഫിയുടെ ഓർമ്മയ്ക്കായി വളർത്തിയതാണ് ഈ വൃക്ഷം എന്ന് മനസ്സിലായത്. വളരെ മോശമായ അവസ്ഥയിലാ യിരുന്നു ആൽഫിക്ക് ഫിയാക്കോവിയെ ലഭിച്ചത്. നല്ല രീതിയിൽ ചികിത്സിച്ച് ആൽഫി അവനെ ആരോഗ്യവാനാക്കിമാറ്റി. ഇന്ന് പിയാക്കോവിന് പതിനാല് വയസ്സായി.
ഞാൻ ആ വൃക്ഷത്തിന്റെ ചിത്രം വരക്കാൻ തുടങ്ങി. അപ്പോഴേക്കും ഫിയാക്കോ ഓടിക്കൊണ്ട് വൃക്ഷത്തിന് അടുത്തേക്ക് വന്നു. ഞാൻ ഫിയാക്കോവിനെയും ചിത്രത്തിൽ ഉൾപ്പെടുത്തി. വൃക്ഷത്തിന്റെ ഇലകൾ വരച്ചുതുടങ്ങിയപ്പോഴേക്കും നേരിയ മഴ പെയ്യാൻ തുടങ്ങി. ഇലകൾ വരച്ചുപൂർത്തിയാക്കാതെ ഞാൻ സ്കെച്ച് ബുക്ക് തുറന്നുവെച്ചു അതൊരു അത്ഭുത നിമിഷമായിരുന്നു. മഴത്തുള്ളികൾ വരച്ച ഇലകളിൽ ചിത്രങ്ങളായിരുന്നു. ഇത്ര സുന്ദരമായ ചിത്രം എനിക്ക് ഒരിക്കലും വരയ്ക്കാൻ കഴി ഞ്ഞിരുന്നില്ല. ഈ ചിത്രത്തെ നമ്മുടെ യാത്രയുടെ ക്ലൈമാക്സായി പരിഗണിക്കാം.
(उस शाम का परफॉर्मेस ज़बरदस्त था । सब खुश थे….. मेरा यकीन बढ़ा है कि जो चीज़ मुझे पसंद है, मुझे वही करते रहना चाहिए।) Textbook page no. 49]
ആ ദിവസത്തെ പെർഫോമൻസ് വളരെ മനോഹരമായിരുന്നു. എല്ലാവരും സന്തോഷവാൻ മാരായിരുന്നു. ഈ യാത്ര നമ്മളെ പ്രിയപ്പെട്ട സുഹൃത്തുക്കളാക്കി മാറ്റി. നമ്മുടെ ഹൃദയമിടിപ്പിന് (മനസ്സിനിഷ്ടമായ) ചേരുന്ന പ്രവർത്തികൾ ചെയ്യുകയും അത് പങ്കുവയ്ക്കാൻ സാധിക്കുന്നവരോട് ചേർത്തു നിൽക്കാൻ കഴുകയും ചെയ്താൽ ഈ ലോകം വളരെ മനോഹരമായിരിക്കും. ഈ യാത്രയിലൂടെ എനിക്ക് ഒരുപാട് മാറ്റം സംഭവിച്ചിട്ടുണ്ട്. നമുക്ക് ഏറ്റവും ഇഷ്ടമുള്ളത് ചെയ്യുവാനുള്ള വിശ്വാസം ഈ യാത്ര എനിക്ക് സമ്മാനിച്ചിട്ടുണ്ട്.
जब हम धीरे चलते हैं लेखक परिचय
यात्रा विवरण (एलन शॉ)
एलन शॉ

एलन शॉ बर्लिन में रहने वाला भारतीय कलाकार, चित्रकार, एनीमेटर और कहानीकार हैं। उनका जन्म 1973 को बिहार में हुआ था। उन्होंने नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिजाइन, अहमदाबाद से एनीमेशन फिल्म मेकिंग में विशेषज्ञता के साथ संचार डिजाइन की पढ़ाई की है। वे 25 से ज़्यादा सालों से अपने जीवन को स्केचबुक में रिकॉर्ड कर रहे हैं। उनको बच्चों के लिए चित्र बनाना और यात्रा करना बहुत पसंद है।
എലൻഷോ ബർലിനിൽ താമസിക്കുന്ന ഭാരതീയനായ കലാകാര നും, ചിത്രകാരനും, അനിമേറ്ററും, കഥാകൃത്തും ആണ്. ബീഹാറി ൽ 1973 ലാണ് അദ്ദേഹം ജനിച്ചത്. അദ്ദേഹം നാഷണൽ ഇൻസ്റ്റി റ്റ്യൂട്ട് ഓഫ് ഡിസൈൻ, അഹമ്മദാബാദിൽ നിന്നും അനിമേഷൻ സിനിമാനിർമ്മാണത്തിൽ വൈദ ഗ്ധ്യം നേടിയതിനൊപ്പം, ആശയവിനിമയ രൂപകൽപ്പനയിലും ഡിഗ്രി കരസ്ഥമാക്കി. ഇരുപത്തി അഞ്ച് വർഷത്തിലേറെയായി അദ്ദേഹം തന്റെ ജീവിതം സ്കെച്ച് ബുക്കിൽ റിക്കോഡ് ചെയ്ത് കൊണ്ടിരി ക്കയാണ്. അദ്ദേഹത്തിന് കുട്ടികൾക്ക് വേണ്ടി ചിത്രം വരയ്ക്കാനും, യാത്ര ചെയ്യാനും വളരെ ഇഷ്ടമാണ്.
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जब हम धीरे चलते हैं शब्दार्थ
मदद ले :
धीरे चलते हैं – മെല്ലെ നടക്കുന്നു.
हमेशा – എപ്പോഴും
स्केचिंग – ചിത്രരചന
दिलचस्प – താൽപ്പര്യം
वादा किया – വാക്ക് കൊടുത്തു
संस्था – സംഘം
चलता-फिरता – സഞ്ചരിക്കുന്ന
बेहतरीन – മികച്ച
चित्रों में दर्ज करना – ചിത്രത്തിന് രൂപം നൽകുക, चित्रों का रूप देना
न्योता – ക്ഷണം, Invitation
मकसद – ലക്ഷ്യം, Aim
स्लो ट्रैवल – സമയമെടുത്തുള്ള യാത
गाथा – കഥ
गुज़रना – കഴിച്ചുകൂട്ടുക
यूँ कहें – ഇങ്ങനെ പറയാം
उकेरता रहता – വരച്ചുകൊണ്ടിരുന്നു. was sketching
शुरुआत – ആരംഭം
दुआ माँगना – പ്രാർത്ഥിക്കുക
आँखें भीग गई – കണ്ണുകൾ നനഞ്ഞു
मनाना – അനുനയിപ്പിക്കുക
टस से मस न होना – അനങ്ങാതിരിക്കുക, Not to stir
पौने घंटे बाद – മുക്കാൽ മണിക്കൂറിന് ശേഷം
गेहूँ की बालियाँ – ഗോതമ്പിന്റെ കതിരുകൾ
बातों में मशगूल थे – സംസാരത്തിൽ മുഴുകിയിരുന്നു
मज़े में थे – ഉത്സാഹത്തിലായിരുന്നു
कशिश – ആകർഷണം,, Attraction
खिंचे चले आए – ആകർഷിക്കപ്പെട്ട് വന്നു, आकृष्ट होकर चले आए।
बालियाँ उचकाई – बालियाँ काटी। കതിരുകൾ പറിച്ചു.
उलटा चलना – വിപരീത ദിശയിൽ
जड़ – വേര്
मंडली – കൂട്ടം
सदस्य – അംഗം, member
समा बंध जाना – സമാധിയിലേർപ്പെടുക
अकॉर्डियन – एक तरह का बाजा, ഒരു തര ത്തിലുള്ള വാദ്യോപകരണം
धुनें – രാഗം, Tune
थिरकाना – അംഗചലനങ്ങളോടെ നൃത്തം ചെയ്യിക്കുക
जैतून के पेड़ – ഒലിവ് മരങ്ങൾ, olive trees
पसंदीदा – ഇഷ്ടമുള്ള
आँसू – കണ്ണുനീർ, Tears
तनाव – സംഘർഷം, Tension
साज – संगीत का वाद्य यंत्र (സംഗീതത്തിന്റെ വാദ്യോപകരണം)
धागे से बँधना – ചരട് കൊണ്ട് ബന്ധിപ്പിക്കുക
सरसराना – കാറ്റിന്റെ സർ എന്ന ശബ്ദം
ख्याल रखना – देखभाल करना സംരക്ഷിക്കുക
खास – വിശേഷപ്പെട്ട
तीमारदारी करना – പരിപാലിക്കുക
तंदुरुस्त – ആരോഗ്യവാൻ
जादुई ल – മാന്ത്രിക നിമിഷം
शामिल कर लिया – ഉൾപ്പെടുത്തി
इंतेहा – अंतिम सीमा, അവസാന അടയാളം
ज़बरदस्त – मजबूत, ശക്തം
साझा करते – പങ്കിട്ടുകൊണ്ട്
खूबसूरत – മനോഹരം
बदलाव – മാറ്റം
यकीन – വിശ്വാസം