Practicing with SCERT Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Textbook Solutions Unit 5 Chapter 1 खुशबू रचते हैं हाथ Khushboo Rachte Hain Haath Poem Question Answer Notes Summary in Malayalam & Hindi improves language skills.
Khushboo Rachte Hain Haath Poem Class 8 Question Answer Notes Summary
SCERT Class 8 Hindi Unit 5 Chapter 1 Question Answer Kerala Syllabus खुशबू रचते हैं हाथ
Khushboo Rachte Hain Haath Poem Question Answer
विश्लेषणात्मक प्रश्न :
प्रश्न 1.
‘बदबू से फटते जाते इस टोले के अंदर खुशबू रचते हैं हाथ’ – इससे कवि का तात्पर्य क्या होगा?
ദുർഗന്ധം വമിക്കുന്ന ഈ ചെറിയ കോള നിയിൽ സുഗന്ധം പരത്തുന്ന കൈകൾ’ – ഇതിലൂടെ കവി എന്താണ് ഉദ്ദേശിക്കുന്നത്?
उत्तर:
इस कविता में कवि ने अगरबत्ती बनाने वालों के बारे में बताया है। ये लोग खुशबू से कोसों दूर हैं। अगरबत्ती का कारखाना अकसर किसी तंग गली में, घरों और सड़कों के किनारे गंदे पानी के बहाव के लिए बनाए गए रास्ता के पार और बदबूदार कूड़े के ढ़ेर के समीप होता है। ऐसे स्थानों पर कई कारीगर अपने हाथों से अगरबत्ती को बनाते हैं।
ഈ കവിതയിൽ കവി ചന്ദനത്തിരി ഉണ്ടാ ക്കുന്നവരെക്കുറിച്ചാണ് പറഞ്ഞിരിക്കുന്നത്. ഇവർ സുഗന്ധത്തിൽ നിന്നും ഒരുപാട് അകലെയാണ്. ഏതെങ്കിലും ഇടുങ്ങിയ തെരുവിലോ, മലിന ജലം ഒഴുക്കുന്ന ഓട കൾക്കപ്പുറത്തോ, ദുർഗന്ധം വമിക്കുന്ന മാലിന്യക്കൂമ്പാരങ്ങളുടെ അടുത്തോ ആണ് സാധാരണ ചന്ദനത്തിരി ഫാക്ടറികൾ സ്ഥിതി ചെയ്യുന്നത്. ഇത്രയും വൃത്തിഹീനമായ സ്ഥല ങ്ങളിലാണ് തൊഴിലാളികൾ തങ്ങളുടെ കൈ കൾ കൊണ്ട് ചന്ദനത്തിരി നിർമ്മിക്കുന്നത്.
प्रश्न 2.
खुशबू रचते हैं हाथ। – यहाँ ‘खुशबू रचना’ से क्या-क्या समझ सकते हैं?
സുഗന്ധം നിർമ്മിക്കുന്ന കൈകൾ ഇവി – ടെ സുഗന്ധം നിർമ്മിക്കുന്ന എന്നതിലൂടെ എന്തൊക്കെ മനസ്സിലാക്കാം?
उत्तर:
कवि का कहना है कि गंदगी में जीवन बितानेवाले लोगों के हाथ खुशबूदार पदार्थों की रचना करते हैं। ये लोग स्वयं विषम परिस्थितियों में अपना जीवन बिताते हैं। परंतु दूसरों का जीवन खुशहाल बनाते हैं। कवि यह भी कहना चाहता है कि हमें उनकी दशा सुधारने की बात सोचनी चाहिए।
കവി പറയുന്നത് മാലിന്യത്തിൽ ജീവിക്കുന്ന ആളുകളുടെ കൈകളാണ് സുഗന്ധപൂർ ണമായ പദാർത്ഥങ്ങൾ നിർമ്മിക്കുന്നത് എന്നാണ്. ഈ ആളുകൾ സ്വയം വിഷമ പരി സ്ഥിതിയിൽ ജീവിക്കുന്നവരാണ്. പക്ഷേ മറ്റുള്ളവരുടെ ജീവിതം സന്തോഷപൂർണമാ ക്കി തീർക്കുന്നു. നാം അവരുടെ അവസ്ഥ യിൽ മാറ്റം വരുത്താൻ ശ്രമിക്കണം.
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प्रश्न 1.
आगे…
खुशबू रचते हाथों वाला मुहल्ला कहाँ-कहाँ बसता है?
•
•
•
उत्तर:
• गलियों के बीच
• नालों के पार
• कूड़े-करकट के ढेरों के बाद
• बदबू से फटते टोले के अंदर
खुशबू रचने वाले हाथ की विशेषताएँ क्या-क्या हैं?
•
•
•
उत्तर:
• उभरी नसों वाले हाथ
• घिसे नाखूनों वाले हाथ
• पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ
• जुही की डाल से खुशबूदार हाथ
• गंदे कटे-पिटे हाथ
• जख्म से फटे हुए हाथ
प्रश्न 2.
पढ़ें और लिखें…
दुनिया की सारी गंदगी के बीच
दुनिया की सारी खुशबू
रचते हैं रहते हैं हाथ
– इन पंक्तियों पर विचार करें।
उत्तर:
कवि ने इन पंक्तियों में खुशबू बनाने वाले मज़दूरों के बारे में बताया है। ये मज़दूर दुनिया की सारी गंदगी के बीच रहने को विवश हैं। ऐसे गंदे स्थानों पर रहकर वे सारी दुनिया में सुगंध फैलाते हैं। ये मज़दूर गंदी जगहों पर रहकर गंदे हाथों से काम करके दुनिया को खुशी और सुगंध बाँट रहे हैं।
‘यहीं इस गली में बनती हैं
मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ’
– इन पंक्तियों का आशय क्या है?
उत्तर:
इस कविता में कवि ने उन खुशबूदार अगरबत्ती बनाने वालों के बारे में बताया है। अगरबत्ती का इस्तेमाल लगभग हर व्यक्ति करता है। इसकी खुशबू के कारण लोग इसे प्रतिदिन इस्तेमाल करते हैं। कवि कहता है कि इसी तंग गली में पूरे देश की प्रसिद्ध अगरबत्तियाँ बनती हैं। अगरबत्ती का कारखाना अकसर किसी तंग गली में, गंदे पानी बहाने वाले नालों के पार, बदबूदार कूड़े के पास आदि स्थानों पर होता है।
प्रश्न 3.
सोचें और लिखें, ये हाथ किन-किनके होंगे?

उत्तर:
| उभरी नसों वाले हाथ | गरीबी से सूखे आदमियों के |
| घिसे नाखूनों वाले हाथ | कड़ी मेहनतियों के |
| पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ | बच्चों के |
| जूही की डाल से खुशबूदार हाथ | लड़कियों के |
| गंदे कटे-पिटे हाथ | बड़ों के |
| जख्म से फटे हुए हाथ | मेहतरों के |
प्रश्न 4.
मज़दूर वर्ग के लोग ही इस दुनिया को सुंदर और खुशबूदार बनाते हैं। क्या इससे आप सहमत हैं? समर्थन करें।
उत्तर:
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि मज़दूर वर्ग के लोग ही इस दुनिया को सुंदर और खुशबूदार बनाते हैं
सड़कें, इमारतें, पुल, कारखाने, खेत, हर जगह मजदूरों की मेहनत छिपी रहती है। यदि मज़दूर न हों तो विकास की नींव ही न हो। मज़दूर वर्ग अपने पसीने से उस जीवन को आसान बनाते हैं जिसे बाकी वर्ग भोगते हैं। किसान और खेतिहर मजदूर मेहनत करके अन्न उगाते हैं, जो हर व्यक्ति की ज़रूरत है। माली फूलों की क्यारियाँ सजाते हैं, सफाई कर्मचारी शहरों को स्वच्छ और सुंदर रखते हैं। कारीगर, बुनकर, दर्जी जैसे श्रमिक समाज को रंग-बिरंगा बनाते हैं। इस प्रकार मजदूर वर्ग की मेहनत और त्याग ही समाज की असली पूंजी है।
प्रश्न 5.
कविता में प्रयुक्त शब्द ‘खुशबू’ सिर्फ खुशबू नहीं है। विचार करें और लिखें, यहाँ खुशबू और क्या-क्या हो सकती है?
उत्तर:
कविता ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ में ‘खुशबू’ शब्द केवल सुगंध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रतीकात्मक शब्द है। यह खुशबू उस मज़दूर के हाथों की है जो मिट्टी से सौंदर्य गढ़ता है – यानी ईंट, मकान, मूर्ति या फसल। यह खुशबू प्यार, सेवा, अपनापन और करुणा का प्रतीक है, जो किसी के हाथों से दूसरों के जीवन में फैलती है। कभी यह खुशबू एक चित्रकार की तूलिका, एक कुम्हार की चाक, एक बुनकर की करघा (ചർക്ക) या एक लेखक की लेखनी (പേന) की तरह भी होती है। यह खुशबू उन हाथों की है जो समाज के लिए कुछ रचते हैं, जैसे त्योहारों की तैयारी, पकवान बनाना, कपड़े सीना आदि। यह खुशबू उन लोगों की है जो संघर्ष के बीच भी उम्मीदों की रचना करते हैं। ये हाथ बदलाव, न्याय और उम्मीद की खुशबू रचते हैं।
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प्रश्न 6.
खुशहाल समाज के निर्माण में मज़दूर वर्ग की भूमिका’ विषय पर ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता के आधार पर लेख लिखें।

उत्तर:

‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता मजदूर वर्ग के श्रम, योगदान और गरिमा को उजागर करनेवाली एक सशक्त रचना है। यह सिर्फ कविता सिर्फ श्रम की महत्ता का बयान नहीं करती, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक श्रमिक समाज को सुंदर, समृद्ध और खुशहाल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कविता में ‘हाथ’ केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि सृजन का प्रतीक है। यही हाथ ईंट गढ़ते हैं,
चूल्हा जलाते हैं, खेतों में फसल उगाते हैं, कपड़े सिलते हैं, भवन बनाते हैं और इसीसे हमारे जीवन की बुनियादी ज़रूरतें पूरी होती हैं। मजदूर वर्ग सड़कें बनाते हैं, घरों की नींव रखते हैं, उद्योगों में उत्पादन करते हैं, खेतों में काम करते हैं। यदि उनका श्रम रुक जाए तो समाज की प्रगति भी रुक जाती है।
खुशहाल समाज के निर्माण में मजदूर वर्ग की भूमिका मौलिक और अमूल्य है। उनके श्रम का सम्मान करना, उन्हें उचित मजदूरी, स्वास्थ्य और शिक्षा देना समाज की ज़िम्मेदारी है।
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ എന്ന കവിത തൊഴിലാളി വർഗ്ഗത്തിന്റെ അധ്വാനം, പ്രൗഢി എന്നിവ കാട്ടുന്ന ഒരു ശക്തമായ രചനയാണ്. ഈ കവിത അധ്വാനത്തിന്റെ മഹത്വത്തെക്കുറിച്ച് മാത്രമല്ല പ തിപാദിക്കുന്നത്. മറിച്ച് എങ്ങനെയാണ് തൊഴിലാളി സമൂഹത്തെ സുന്ദരവും, സമൃദ്ധവും, സന്തോഷപ്രദവുമാക്കുന്നതിൽ തൻറെ മഹത്വപൂർണമായ പങ്കാളിത്തം വഹിക്കുന്നത് എന്നതു
കൂടിയാണ്.
കവിതയിൽ കൈ എന്നത് ശരീരത്തിലെ ഒരു അവയവം മാത്രമല്ല, പകരം സൃഷ്ടിയുടെ പ്രതീക മാണ്. ഇതേ കൈകളാണ് ഇഷ്ടിക നിർമ്മിക്കുന്നത്, വീട് ഉണ്ടാക്കുന്നത്, അടുപ്പ് കത്തിക്കുന്നത്, വയലിൽ വിളവ് ഉൽപാദിപ്പിക്കുന്നത്, തുണി തയ്ക്കുന്നത്. ഇതിലൂടെ നമ്മുടെ അടിസ്ഥനാവശ്യങ്ങൾ നിറവേറ്റപെടുന്നു. തൊഴിലാളി വർഗ്ഗം റോഡ് നിർമ്മിക്കുന്നു, വീടിന് തറ കെട്ടുന്നു. വ്യവസായങ്ങളിൽ ഉൽപാദനം നടത്തുന്നു, വയലിൽ പണിയെടുക്കുന്നു. അവരുടെ അധ്വാനം നിന്നുപോയാൽ സ് മഹത്തിന്റെ പുരോഗതി നിലയ്ക്കുന്നു.
സന്തോഷപ്രദമായ സമൂഹത്തിൻറെ നിർമ്മാണത്തിൽ തൊഴിയാളി വർഗ്ഗത്തിന്റെ പങ്കാളിത്തം മൗലികവും അമൂല്യവുമാണ്. അവരുടെ അധ്വാനത്തെ ആദരിക്കുകയും, അവർക്ക് ഉചിതമായ വേതനം, ആരോഗ്യ സംരക്ഷണം, വിദ്യാഭ്യാസം എന്നിവ നൽകുകയും ചെയ്യുക എന്നുള്ളത് സുഹത്തിന്റെ ഉത്തരവാദിത്വമാണ്
प्रश्न 7.
अनुबद्ध कार्य
अपने इलाके के कुछ मज़दूरों और उनके कामों को सूचीबद्ध करें और कक्षा के संकलन में जोड़ें।
उत्तर:


• कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
श्री अरुणकमल प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित कवि हैं। उन्हें अंग्रेज़ी एवं हिंदी भाषा पर समान रूप से अधिकार प्राप्त था। 1997 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। ‘नए इलाके में’ नामक कविता संग्रह की दूसरी कविता है ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ । गंदे इलाकों में रहकर अगरबत्तियाँ बनाने वाले श्रमिक वर्गों के बारे में कवि यहाँ बताया है।
जहाँ हाथ से खुशबूदार अगरबत्तियाँ बनाई जाती हैं ऐसे लघु उद्योग वालों का स्थान प्रायः गली, नालों के किनारे कूड़े के ढेरों के बगल में स्थित होते हैं। इस उद्योग में काम करनेवाले बूढ़े, जवान, बच्चे एवं नवयुवतियाँ भी होती हैं। ये लोग प्रायः गंदे दिखते हैं। लेकिन वे अपने हाथों में खुशबूदार विविध प्रकार की अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं!
प्रस्तुत कविता में कवि ने अगरबत्तियाँ बनानेवाले श्रमिकों के जीवन एवं उनके स्थल की दुर्दशा का चित्रण किया है। मजदूर वर्ग गरीबी एवं दयनीय स्थिति में जीने के लिए मज़बूर है।
ശ്രീ അരുൺ കമൽ പുരോഗമന വിചാരധാ രയാൽ സ്വാധീനിക്കപ്പെട്ട കവിയാണ്. അദ്ദേ ഹം ഇംഗ്ലീഷിലും ഹിന്ദിയിലും സമാനമായി
രചനകൾ നിർമിക്കുന്നയാളാണ്. 1997 ൽ അദ്ദേഹത്തിന് സാഹിത്യ അക്കാദമി പുരസ് ക്കാരം ലഭിച്ചിട്ടുണ്ട്. ‘नए इलाके में’ എന്ന കവിതാസംഗ്രഹത്തിലെ രണ്ടാമത്തെ കവിത യാണ് ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ മലിനമായ പദേശത്ത് താമസിച്ച് ചന്ദനത്തിരികൾ നിർമ്മി ക്കുന്ന തൊഴിലാളി വർഗ്ഗത്തെക്കുറിച്ചാണ് കവി ഇവിടെ പ്രതിപാദിച്ചിരിക്കുന്നത്.
കൈകൾ കൊണ്ട് സുഗന്ധമുള്ള ചന്ദനത്തി രികൾ നിർമ്മിക്കുന്നവരുടെ സ്ഥലം മിക്ക വാറും തെരുവുകളിലും, ഓടയുടെ തീരത്തും, മാലിന്യക്കൂമ്പാരങ്ങളുടെ സമീപത്തും മറ്റും ആണ് സ്ഥിതിചെയ്യുന്നത്. വൃദ്ധർമാരും, യുവാക്കളും, കുട്ടികളും, യുവതികളും ഒക്കെ ഈ വ്യവസായത്തിൽ ജോലി ചെയ്യുന്നവ രാണ്. ഇവരെ പൊതുവെ മലിനമായിട്ടാണ് കാണപ്പെടുന്നത്. പക്ഷേ അവർ തങ്ങളുടെ കൈകൾ കൊണ്ട് സുഗന്ധമുള്ള വിവിധതര ത്തിലുള്ള ചന്ദനത്തിരികൾ നിർമ്മിക്കുന്നു.
ഈ കവിതയിൽ കവി ചന്ദന ത്തിരികൾ നിർമ്മിക്കുന്ന തൊഴിലാളികളു ടെ ജീവിതത്തെക്കുറിച്ചും, അവരുടെ വാസ സ്ഥലത്തിന്റെ ദുരവസ്ഥയെക്കുറിച്ചും ആണ് ചിത്രീകരിച്ചിരിക്കുന്നത്. ഈ തൊഴിലാളി കൾ ദാരിദ്ര്യത്തിലും ദയനീയ അവസ്ഥയിലും ജീവിക്കാൻ വിധിക്കപ്പെട്ടവരാണ്.
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खुशबू रचते हैं हाथ निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या वाक्य में लिखें :
प्रश्न 1.
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता किसकी रचना है?
उत्तर:
अरुण कमल।
प्रश्न 2.
कवि का ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अगरबत्ती बनाने वाले हाथों से
प्रश्न 3.
अगरबत्ती का कारखाना अक्सर कहाँ होता है?
उत्तर:
किसी तंग गली में, घरों और नालों के पार, कूड़े- करकट के ढेर के समीप, बदबू से फटते टोले के अंदर।
प्रश्न 4.
अगरबत्ती बनानेवाले कारीगरों के हाथ कैसे होते हैं?
उत्तर:
उभरी नसों वाले हाथ घिसे नाखूनों वाले हाथ, पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ, जूही की डाल से खुशबूदार हाथ, गंदे कटे-पिटे हाथ, जख्म से फटे हुए हाथ।
प्रश्न 5.
कवि के अनुसार तंग गलियों में कितनी अगरबत्तियाँ बनती हैं?
उत्तर:
पूरे देश की अगरबत्तियाँ।
प्रश्न 6.
गंदे मुहल्ले के गंदे लोग किसकी खुशबू वाली अगरबत्तियाँ बनाते हैं?
उत्तर:
केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियाँ।
प्रश्न 7.
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ नामक कविता में कवि किसकी बात कर रहे हैं?
उत्तर:
खुशबू वाली अगरबत्तियाँ बनाने वाले गंदे (गरीब) लोगों के बारे में।
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प्रश्न 8.
‘उभरी नसों वाले हाथ’
‘घिसे नाखूनों वाले हाथ’ कविता में यह किसके लिए कहा है?
उत्तर:
अगरबत्तियाँ बनाने वालों के लिए।
प्रश्न 9.
केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियाँ कौन बनाता है?
उत्तर:
गरीब लोग।
प्रश्न 10.
पीपल के पत्तों से किन हाथों की तुलना की गई है?
उत्तर:
बच्चों के हाथों की।
प्रश्न 11.
नवयुवतियों के मेहनतकश हाथ कैसे होते हैं?
उत्तर:
जूही के डाल से खुशबूदार।
प्रश्न 12.
मेहनत करनेवाले हाथ कैसे होते हैं?
उत्तर:
कटे-पिटे व जख्मों से फटे।
प्रश्न 13.
कविता में कितनी तरह के हाथों की चर्चा की गई है?
उत्तर:
छह
प्रश्न 14.
‘खुशबू’ तथा ‘मशहूर’ के विपरीतार्थक शब्द क्या है?
उत्तर:
दुर्गंध, गुमनाम।
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Khushboo Rachte Hain Haath Poem Summary in Malayalam
खुशबू रचते हैं हाथ Summary in Malayalam
पाठ का सारांश :
(कई गलियों के बीच …………………… खुशबू रचते हैं हाथ) [Textbook page no. 80]
श्री अरुण कमल हिंदी कविता के महान कवियों में से एक माने जाते हैं। उनकी कविताओं में जीवन, संघर्ष और समाज की सच्चाइयों को उजागर किया जाता है। उनकी एक प्रमुख कविता है ‘खुशबू रचते हैं हाथ’।
कवि कहते हैं कि अगरबत्ती का कारखाना अकसर किसी तंग गली में, घरों और सड़कों के किनारे गंदे पानी बहाने के लिए बनाए नालों के पार, और बदबूदार कूड़े के ढेर के समीप होता है। बदबू से फटते ऐसे स्थानों पर कई कारीगर अपने हाथों से अगरबत्ती को बनाते हैं। |
ശ്രീ അരുൺ കമൽ ഹിന്ദി കവിതാശാഖയിലെ മഹാൻ കവികളിൽ ഒരാളായി അറിയപ്പെടുന്നു. അദ്ദേഹത്തിന്റെ കവിതകളിൽ ജീവിത സംഘർഷങ്ങളും, സമൂഹത്തിലെ സത്യങ്ങളും ആണ് കാണാൻ സാധിക്കുന്നത്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ഒരു പ്രസിദ്ധമായ കവിതയാണ് खुशबू रचते हैं हाथ’.
കവി പറയുന്നത് എന്തെന്നാൽ ഏതെങ്കിലും ഇടുങ്ങിയ തെരുവിലോ, മലിനജലം ഒഴുക്കുന്ന ഓടയ്ക്കപ്പുറത്തോ, ദുർഗന്ധം വമിക്കുന്ന മാലിന്യക്കൂമ്പാരങ്ങളുടെ അടുത്തോ ആണ് സാധാരണ ചന്ദനത്തിരി ഫാക്ടറികൾ സ്ഥിതിചെയ്യുന്നത് എന്നാണ്. ദുർഗന്ധം വമിക്കുന്ന ഇങ്ങനെ യുള്ള സ്ഥലങ്ങളിലാണ് തൊഴിലാളികൾ തങ്ങളുടെ കൈകൾ കൊണ്ട് ചന്ദനത്തിരി നിർമ്മിക്കുന്നത്.
(उभरी नसों वाले हाथ ………………… खुशबू रचते हैं हाथ) ………………… [Textbook page no. 81]
कवि कहता है कि अगरबत्ती बनाने वाले कारीगरों के हाथ तरह-तरह के होते हैं। किसी के हाथों में उभरी हुई नसें होती है। किसी के हाथों के नाखून घिसे हुए होते हैं। कुछ बच्चे भी काम करते हैं जिनके हाथ पीपल के नए पत्तों की तरह कोमल होते हैं। कुछ कम उम्र की लड़कियाँ भी होती हैं जिनके हाथ जूही के फूल की डाल की तरह खुशबूदार होते हैं। कुछ कारीगरों के हाथ गंदे, कटे-पिटे और चोट के कारण फटे हुए भी होते हैं। कवि कहता है कि दूसरों के लिए खुशबू बनानेवाले खुद न जाने कितनी और कैसी तकलीफों का सामना करते हैं।
കവി പറയുന്നത് ചന്ദനത്തിരികൾ നിർമ്മിക്കുന്നവരുടെ കൈകൾ പലതരത്തിലുള്ളവയാണ് എന്നാ ണ്. ചിലരുടെ കൈകളിൽ ഉയർന്നു പൊങ്ങിയ നാഡി ഞരമ്പുകൾ കാണാം. ചിലരുടെ കൈകള ടെ നഖങ്ങൾ തേഞ്ഞു പോയിരിക്കുന്നു. അരയാലിന്റെ പുതിയ ഇലകൾ പോലെ കോമളമായ കെ കളുള്ള കുട്ടികളും ഈ ജോലി ചെയ്യുന്നു. യുവതികളായ സ്ത്രീകളും ജോലിയിൽ ഏർപ്പെടുന്നു. ഇവരുടെ കൈകൾ മുല്ലപ്പൂവിന്റെ ശാഖകൾ പോലെ സുഗന്ധമുള്ളവയാണ്. ചില തൊഴിലാളി കളുടെ കൈകൾ മലിനവും, മുറിവുകൾ കാരണം മുറിഞ്ഞതും ആണ്. മറ്റുള്ളവർക്ക് വേണ്ടി സുഗന്ധം നിർമ്മിക്കുന്ന ഇവർ സ്വയം എന്തൊക്കെ കഷ്ടപ്പാടുകളാണ് അഭിമുഖീകരിക്കുന്നത്.
(यहीं इसी गली में बनती हैं ……………….. खुशबू रचते हैं हाथ) [Textbook page no. 81]
कवि कहता है कि इसी तंग गली में पूरे देश की प्रसिद्ध अगरबत्तियाँ बनती हैं। उस गंदे मुहल्ले के गंदे लोग (गरीब लोग) ही केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी की खुशबू वाली अगरबत्तियाँ बनाते हैं। यह एक विडंबना है कि दुनिया की सारी खुशबू उन गलियों में बनती है जहाँ दुनिया भर की गंदगी समाई होती है। |
കവി പറയുന്നത് ഈ ഇടുങ്ങിയ തെരുവിലാണ്, രാജ്യം മുഴുവനും പ്രസിദ്ധമായ ചന്ദനത്തിരികൾ ഉണ്ടാക്കുന്നത്. മലിനമായ കോളനിയിലെ മലിനമായ ആളുകളാണ് (ദരിദ്രർ) കൈത പ്പൂവ്, റോസാപ്പൂവ്, രാമച്ചം, നിശാഗന്ധി എന്നിവയുടെ സുഗന്ധമുള്ള ചന്ദനത്തിരികൾ ഉണ്ടാക്കുന്നത്. ലോകത്തിലെ എല്ലാ വൃത്തിഹീനമായ തെരുവുകളിലാണ്, ലോകത്തിലെ മുഴുവൻ സുഗന്ധങ്ങളും നിർമ്മിക്കപ്പെടുന്നത് എന്നത് വിരോധാഭാസം തന്നെയാണ്.
खुशबू रचते हैं हाथ Poem कवि परिचय
कविता (अरुण कमल)
अरुण कमल

अरुण कमल का जन्म 15 फरवरी 1954 को बिहार में हुआ। वे हिंदी के साहित्य के समकालीन कवि हैं जो प्रगतिशील विचारधारा से संपन्न हैं। उनका वास्तविक नाम अरुण कुमार है। उनका पहला कविता संग्रह ‘अपनी केवल धार’ 1980 में प्रकाशित हुआ। 1989 में उनका दूसरा संग्रह ‘सबूत’ प्रकाशित हुआ और 1996 में तीसरा संग्रह ‘नए इलाके में’, जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस संग्रह की दूसरी कविता है ‘खुशबू रचते हैं हाथ’।
ബീഹാറിൽ 1954 ഫിബ്രവരി 15 നാണ് അരുൺ കമൽ ജനിച്ചത്. അദ്ദേഹം പുരോഗമന ചിന്തയാൽ സമ്പന്നമായ ഹിന്ദി സാഹി ത്യത്തിലെ സമകാലീന കവിയാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ യഥാർത്ഥ പേര് അരുൺ കുമാർ എന്നാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ, ആദ്യത്തെ കവിതാസംഗ്രഹമായ ‘अपनी केवल धार’ 1980 ൽ പ്രസിദ്ധീകരിച്ചു. അദ്ദേഹത്തിന്റെ രണ്ടാമത്തെ കവിതാസംഗ്രഹമായ ‘सबूत’ 1989 ലും മൂന്നാമത്തെ സംഗ്രഹമായ ‘नए इलाके में 1996 ലും പ്രസിദ്ധീകരിച്ചു.’नए इलाके में’ എന്ന കവിതാ സംഗ്രഹത്തിന് സാഹിത്യ അക്കാദമി പുരസ്ക്കാരം ലഭിച്ചു. ഈ കവിതാ സംഗ്രഹത്തിലെ രണ്ടാമത്തെ കവിതയാണ് ‘खुशबू रचते हैं हाथ’.
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खुशबू रचते हैं हाथ शब्दार्थ
मदद लें :
गली – തെരുവ്, Street, तंग रास्ता
कई – ധാരാളം
नाला – ഓവുചാൽ, घरों और सड़कों के किनारे गंदा पानी बहने का मार्ग।
पार – മറുവശത്ത്
कूड़ा करकट – മാലിന്യം, कचरा,
ढेर – കൂമ്പാരം, heap
के बाद – ശേഷം
बदबू – ദുർഗന്ധം
फटते जाते – ദുർഗന്ധം വമിക്കുന്ന
टोले के अंदर – छोटी बस्ती के भीतर, ചെറിയ കോളനിയുടെ ഉള്ളിൽ
खुशबू – സുഗന്ധം
रचते हैं – ഉണ്ടാക്കുന്നു, बनाते हैं।
हाथ – കൈ
उभरी – प्रकट हुई, പ്രകടമായി
नस – നാഡി, Nerve
घिसे नाखूनों – തേഞ്ഞ നഖങ്ങൾ, worn out nails
पीपल – അരയാൽ വൃക്ഷം
पत्ते – ഇലകൾ
नए-नए हाथ – പുതിയ പുതിയ കൈകൾ
जूही की डाल – മുല്ലയുടെ ശാഖ
खुशबूदार – സുഗന്ധമുള്ള
गंदे – മലിനമായ
कटे-पिटे – മുറിവേറ്റ
जख्म से फटे – മുറിവ് കാരണം പൊട്ടിയ
मुल्क – പ്രദേശം
मशहूर – പ്രസിദ്ധമായ
अगरबत्तियाँ – ചന്ദനത്തിരികൾ
मुहल्ला – കോളനി
केवड़ा – കൈതപ്പൂവ് (Screwpine flower)
गुलाब – റോസാപ്പൂവ്
खस – രാമച്ചം(Khus roots)
रातरानी – നിശാഗന്ധി
गंदगी – മാലിന്യം