Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

प्रश्न 1.
कविता पढ़कर भरें –
जैसे-बच्चा रो रहा है, फिर भी बिस्कुट कुतरता है।
i. युवक थका हुआ है, फिर भी…….
उत्तर:
अपने कुचले सपनों को सहला रहा है।

ii. बूढ़े ने अपनी आँखों को हाथों से ढाँप लिया है, फिर भी….
उत्तर:
भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के बारे में कवि क्यों आशंकित है?
उत्तर:
उसे उखाड़ ले जाया सकता है अथवा तोड़ भी जा सकता है।

प्रश्न 3.
चित्र-वाचन
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 1
उत्तर:
लड़के-लड़कियाँ अपने खेल-खूद, विश्राम आदि के लिए प्रयुक्त पार्क का विनाश देखकर चिंतित हैं। वे शायद यह सोचते होंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है, यहाँ पर इसको रोकने के लिए कोई नहीं है आदि… आदि..। पार्क, समुद्र तट, प्रपात, पहाड़ आदि ऐसी सार्वजनिक स्थल हैं, जो आज घटते जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों के नष्ट होने से मानसिक उल्लास की सुविधा और अवसर कम हो जाते हैं। इससे मनुष्य संघर्ष में पड़ जाता है।

हम इनको यह सांत्वना दें कि ऐसे आगे न होने देंगे। संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत देकर इस जगह को संरक्षित रखेंगे। उनके खेल-खूद और मानसिक उल्लास केलिए उचित स्थान ढूँढ देंगे। पोस्टर, पत्र आदि द्वारा जनजागरण और जनमत जगायेंगे।

प्रश्न 4.
‘समाज-निर्माण में सार्वजनिक जगहों का योगदान’ पर लेख लिखें।
उत्तर:
सार्वजनिक जगहों का महत्व
सार्वजनिक जगह सामाजिकता का संगम-स्थान है। पार्क, समुद्र-तट, प्रपात की जगह, पहाड़ आदि इस प्रकार की हैं। हमें उसे संभालना चाहिए। सरकार की ओर से इन सार्वजनिक स्थानों को संभालने के लिए सदा ध्यान होना चाहिए। यदि दूसरों के सुख-दुख पर हमदर्दी है तो, इनका संरक्षण ज़रूर होगा। सार्वजनिक स्थानों का विनाश होते समय मनुष्य का पराजय होता है, स्वार्थ की विजय होती है। सार्वजनिक जगहों का संरक्षण करना आज अत्यंत प्रासंगिक है। यह इसलिए कि सार्वजनिक जगह आज घटती जा रही है।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।?
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि देखते हैं कि पार्क में वर्षों पुरानी एक पत्थर की बैंच पड़ी है। कवि उस बैंच के चार दृश्य हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। एक दृश्य में एक रोनेवाला बच्चा पत्थर की बैंच पर बैठ कर रोता है। लेकिन वह विस्कुट कुतरते हुए चुप हो जाता है। दूसरे दृश्य में एक थका हुआ युवक अपने कुचले हुए सपनों को सहलाकर बैंच पर बैठा है। तीसरे दृश्य में एक रिटायर्ड बुढ़ा भरी दोपहरी में हाथों से आँखें ढाँपकर सो रहा है। चौथा दृश्य एक प्रेम-जोड़ा का है जो बैंच पर बैठकर जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

Plus One Hindi पत्थर की बैंच Important Questions and Answers

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर रोता हुआ बच्चा
बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है
जिसपर एक थका युवक
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है
जिसपर हाथों से आँखें ढाँप
एक रिटायर्ड बूढ़ा भर दोपहरी सो रहा है
जिसपर वे दोनों
जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता का है?
उत्तर:
पत्थर की बैंच ।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच पर कौन-कौन बैठे हैं?
उत्तर:
बच्चा, चुवक, बूढ़ा, प्रेमी-प्रेमिका आदि बैठे हैं।

प्रश्न 3.
बच्चा क्या कर रहा है?
उत्तर:
रोता हुआ बच्चा बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है।

प्रश्न 4.
युवक क्या कर रहा है?
उत्तर:
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है।

प्रश्न 5.
रिटायर्ड बूढ़ा क्या कर रहा है?
उत्तर:
हाथों से आँखें ढाँप भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 6.
‘वे दोनों’ कौन-कौन हैं?
उत्तर:
वे दोनों प्रेमी-प्रेमिका हैं।

प्रश्न 7.
‘वे दोनों’ क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
अशा जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 8.
सबों ने पत्थर की बैंच का सहारा लिया। क्यों?
उत्तर:
पत्थर की बैंच किसी की निजी सामग्री नहीं है। बैंच पार्क में उपस्थित है। कोई उस पर जाकर बैठ सकता है। बच्चा, युवक और बूढा तीनों अपने अपने विकट समय में है। विश्राम करने के लिए तीनों पार्क की बैंच का आश्रय लेते हैं।

प्रश्न 9.
पत्थर का बैंच किसका प्रतीक है?
उत्तर:
घटती सार्वजनिक जगह का प्रतीक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर अंकित हैं आँसू, थकान
विश्राम और फ्रें की स्मृतियाँ
इस पत्थर की बैंच के लिए भी
शुरु हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इस उखाड़ कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बैंच पर!

प्रश्न 1.
इस पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के लिए क्या शुरु हो सकता हैं?
उत्तर:
हत्याओं का सिलसिला।

प्रश्न 3.
पत्थर की बैंच पर क्या-क्या अंकित हैं?
उत्तर:
कवि ने देखा, पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं।

प्रश्न 4.
कवि को किस बात का पता नहीं है?
उत्तर:
पता नही कि सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा उस पत्थर की बैंच पर।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि ने देखा कि पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं। लेकिन यह सब जाननेवाला कवि आशंकित हो जाता है। यह इसलिए है कि किसी दिन इस पत्थर की बैंच के लिए हत्याओं का सिलसिला शुरु हो सकता है। उसे उखाड़ कर ले जाया सकता है। अथवा तोड़ भी जा सकता है। कवि को यह नहीं मालूम है कि सबसे पहले इस पत्थर की बैंच पर कौन आसीन हुआ होगा? अर्थात कवि डरता है कि इस पत्थर की बैंच के बारे में अधिकार स्थापित करने केलिए कब लड़ाई शुरु हो जायेगी।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है। जाति, धर्म, राजनीति, स्वार्थता आदि के नाम पर और उनकी सस्ती प्रतिस्पर्धा के लिए सार्वजनिक स्थलों का शिकार बनकर उन्हें सत्यनाश न करना चाहिए।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

सूचना : निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

इस पत्थर की बेंच के लिए भी
शुरू हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इसे उखाड़कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बेंच पर।

प्रश्न 1.
यह कवितांश के कवि कौन है?
उत्तर:
चन्द्रकांत देवताले

प्रश्न 2.
कविता के ‘आसीन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए।
(खड़ा, बैठा, सुना)
उत्तर:
बैठा

प्रश्न 3.
कवि को किसका संदेह है?
उत्तर:
कवि का संदेह यह है कि इस पत्थर की बेंच पर सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले हिंदी का विख्यात कवि है। समकालीन कविता के क्षेत्र में वे अत्यंत ख्याति प्राप्त है। ‘पत्थर की बेंच’ समकालीन सामाजिक समस्याओं को सूचित करनेवाली एक कविता है।

सार्वजनिक जगहों के नाश पर कवि आशंकित है। कवि की आशंका यह है कि पत्थर की बेंच के लिए भी किसी दिन हत्याओं का सिलसिला शुरू हो सकता है। अपनी स्वार्थता के लिए कोई भी, किसी भी समय ऐसे सार्वजनिक जगहों का सर्वनाश कर सकता है। कवि का डर यह है कि इन जगहों के नाश होने पर साधारण जनता अपनी संवेदनाओं को कैसे शांत कर सकेगा।

‘पत्थर की बेंच’ एक समकालीन कविता है जिसमें सार्वजनिक जगहों के नाश पर आशंकित कवि को हम देख सकते हैं।

पत्थर की बैंच Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 7

पत्थर की बैंच शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ

प्रश्न 1.
पात्र और घटनाओं का सही मिलान करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 1
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 2

प्रश्न 2.
संक्षेपण करें: “एक बूढ़ा आदमी, जिसके बाल सफ़ेद हो गए थे इसके फल मेरे नाती-पोते खाएँगे।”
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 3

सत्कृत्य:
बूढ़े आदमी से नवजवान ने समझा कि पेड़ पौधे लगाने से प्रकृति सुन्दर हो जाती है और भविष्य में उपयोग में आता है।

प्रश्न 3.
संभ्रांत महिला रेलगाड़ी से कुछ चीजें बाहर फेंकती जा रही है तब सहयात्री और संभ्रांत महिला के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार करें।
उत्तर:
संहयात्री : यह आप क्या फेंक रही हैं?
महिला : मैं…….?
सहयात्री : हाँ…. हाँ…….
महिला : तुम देखते नहीं?
सहयात्री : इसलिए तो पूछता हूँ।
महिला : ये तो बीज हैं।
सहयात्री : बीज?
महिला : हाँ… हाँ… फल-फूलों के बीज हैं।
सहयात्री : इनको खिड़की से क्यों फैंकती हैं?
महिला : इनमें कुछ जड़ पकड़ लेंगे।
सहयात्री : तो फिर?
महिला : तब फायदा होगा।
सहयात्री : फायदा? किस प्रकार?
महिला : फूलेंगे, फलेंगे।
सहयात्री : तब?
महिला : मनुष्य के लिए उपयोगी होंगे।
सहयात्री : अरे बापरे! आप तो महान कार्य कर रही हैं।
महिला : यह लो….आप भी फेंकिए।
सहयात्री : हाँ…… हाँ….. दीजिए।

प्रश्न 4.
मान लें, रेलगाड़ी में सफर करनेवाली वृद्ध संभ्रांत महिला की नज़र डिब्बे में चिपके हुए विज्ञापन पर पड़ती है जो रक्तदान के महत्व को रेखांकित करता है। संकेतों के सहारे वह विज्ञापन तैयार करें।

  • समभाव
  • सहिष्णुता
  • मानव-प्रेम
  • जीवनदान

उत्तर:

स्वास्थ्य मंत्रालय का विज्ञापन
‘रक्तदान महादान है।’

भाईयो,…… बहनो,…..
रोगावस्था में पीड़ित भाई-बहनों से समभाव रखिए । सहिष्णुता और अनुकंपा रखकर जान बचाने के लिए रक्तदान करके सहायता दीजिए। रक्तदान जीवनदान ही है!! सरकारी रक्तदान केन्द्रों में जाकर खुशी से रक्तदान कीजिए!! आपका रक्त कटेगा नहीं बढ़ेगा!! दूसरों की जान बचेगी।

प्रश्न 5.
‘आज भी वह रक़म अमेरिका में ज़रूरतमंदों के हाथों में घूम रही है’ – मान लें, वह रक़म अपने वर्तमान अनुभवों का आत्मकथा के रूप में ज़िक्र करती है। वह आत्मकथांश लिखें।
उत्तर:

मैं हूँ जरूरतमंदों के सामने

मैं रकम हूँ। मैं साधारण रकम नहीं। मैं एक अपूर्व रकम हूँ। मैं जन्म से अमेरिकी हूँ। अमेरिका के प्रसिडेंट बेंजमिन फ्रैंकलीन के हाथों से मेरा जन्म हुआ। मुझे प्रसिडेंटजी ने एक गरीब विद्यार्थी की सहायता में दिया था। मैंने उसे भाग्यवान् बनाया। विद्यार्थी ने मुझे वापस करने के लिए प्रसिडेंट के पास गया। लेकिन, बेंजमिनजी ने उससे बतायाः “आप इसे अपने ही पास रखिए और जब आपके पास कोई ऐसा ही ज़रूरतमंद आये तो उसे यह दे दीजिए” । उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया। आज भी मैं अमेरिका के ज़रूरतमंदों के हाथों में घूम रही हूँ। मैं कितना सौभाग्यवान हूँ! ज़रूरत पड़े, मुझे बुलाईए। मैं ज़रूर आऊँगा।

मेरे इतने जीवनकाल से मैंने समझा कि समाज की पूँजी धनवानों के हाथों में है। पूँजी का समुचित विवरण से समाज का संतुलन होता है। जरूरतमंदों के हाथों में पूँजी का सौगुना मूल्य होगा। मैं रकम, पूँजी समान है। मैं जरूरतमंदों को जीवनदान करता हूँ।

Plus One Hindi आनंद की फूलझडियाँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
ज़मीन कौन खोद रहा था?
उत्तर:
एक बूढ़ा आदमी।

प्रश्न 2.
बूढ़े आदमी क्या बो रहे हैं?
उत्तर:
आम की गुठलियाँ।

प्रश्न 3.
नौजवान के प्रश्न पर बूढ़े का उत्तर क्या था?
उत्तर:
भविष्य में दूसरों की भलाई के लिए आम की गुठलियाँ बो रहा हूँ।

प्रश्न 4.
पूर्वजों के मनोवृत्ति का फल क्या है?
उत्तर:
वर्तमान के लोगों के लिए भलाई होती है।

प्रश्न 5.
लेखक ने सुंदर स्वभाव की परिभाषा कैसे दी है?
उत्तर:
अशा दूसरों को सुख और आनंद पधुंचानेवाले सात्विक आनंद का स्वभाव।

प्रश्न 6.
हमारे पूर्वजों की इसी मनोवृत्ती का फल है, जो हम जगह-जगह अमराई देखते हैं। कौन-सी मनोवृत्ति?
उत्तर:
अपने स्वार्थी जीवन को त्यागकर दूसरों को सुख और आनंद पहुँचाने के सुंदर स्वभाव की मनोवृत्ति ।

प्रश्न 7.
बूढ़ा आदमी का ‘आम की गुठलियाँ बोना’ घटना का मुख्य आशय क्या है?
उत्तर:
हमें दूसरों को सुख और आनंद पहूँचानेवाले सात्विक आनंद के स्वभाव अपनाना चाहिए।

प्रश्न 8.
मान लें, रेलगाड़ी में सफर करनेवाली वृद्ध संभ्रांत महिला की नज़र डिब्बे में चिपके हुए विज्ञापन पर पड़ती है जो रक्तदान के महत्व को रेखांकित करता है। संकेतों के सहारे वह विज्ञापन तैयार करें।

  • समभाव
  • सहिष्णुता
  • मानव-प्रेम
  • जीवनदान

उत्तर:

स्वास्थ्य मंत्रालय का विज्ञापन
‘रक्तदान महादान है।’

भाईयो,…… बहनो,…..
रोगावस्था में पीड़ित भाई-बहनों से समभाव रखिए। सहिष्णुता और अनुकंपा रखकर जान बचाने के लिए | रक्तदान करके सहायता दीजिए। रक्तदान जीवनदान ही है!! सरकारी रक्तदान केन्द्रों में जाकर खुशी से रक्तदान कीजिए!! आपका रक्त कटेगा नहीं बढ़ेगा!! दूसरों की जान बचेगी।

प्रश्न 9.
संभ्रान्त महिला किस उम्मीद से फल और फूलों के बज़ फेंक रही है?
उत्तर:
उनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेगें तो लोगों का इससे कुछ फायदा होगा।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।

एक वृद्ध संभ्रांत महिला रेलगाड़ी से सफ़र कर रही थी। वे खिड़की के पास बैठकर, बीच-बीच में अपनी मुट्ठी से कुछ चीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं। एक सहयात्री ने, जो यह देख रहा था, पूछा, “यह आप क्या कर रही हैं?” उस महिला ने जवाब दिया, “ये सुंदर फलों और फूलों के बीज़ हैं। मैं इन्हें इस उम्मीद से फेंक रही हूँ कि इनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेंगे तो लोगों का इससे कुछ फायदा होगा । पता नहीं इस रास्ते से फिर गुजरूँ या न गुजरूँ, इसलिए क्यों न मैं इस संधि का उपयोग क लूँ?”

i. रेलगाड़ी से कौन यात्रा कर रहीं थी?
उत्तर:
एक वृद्ध संभ्रात महिला।

ii. वे क्या कर रही थीं?
उत्तर:
अपनी मुट्ठी से सुंदर फलों और फूलों के बीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं।

iii. सहयात्री ने क्या पूछा?
उत्तर:
सहयात्री ने पूछा : यह आप क्या कर रही हैं?

iv. गद्यांश का संक्षेपण करें।
उत्तर:
एक वृद्ध संभ्रात महिला रेलगाड़ी से सफर करते समय सुंदर फलों और फूलों के बीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं। उनका उद्धेश्य था कि उनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेंगे तो, लोगों का उससे कुछ फायदा होगा।

v. संक्षेपण केलिए उचित शीर्षक दें।
उत्तर:
जन-सेवा।

प्रश्न 11.
हमें किसके परे रहना चाहिए?
उत्तर:
घर भौतिकवाद और भोग-विलास की हाय-हाय से परे ।

प्रश्न 12.
किस प्रकार के लोगों को देखकर मानव जाति के भविष्य पर श्रद्धा और विश्वास कर सकते हैं?
उत्तर:
जमाने के अंधकार में भी आनंद की फुलझड़ियों से प्रकाश फैलाते रहनेवालों को देखकर ।

प्रश्न 13.
बेंचमिन फ्रांक्लिन ने विद्यार्थी की मदद कैसे की?
उत्तर:
उन्होंने विद्यार्थी को बीस डॉलर देकर मदद की।

प्रश्न 14.
कुछ दिनों के बाद विद्यार्थी डॉलर लौटाने आए तो फ्रांक्लिन ने क्या कहा?
उत्तर:
उन्होंने कहा : “मुझे याद तो नहीं है कि मैंने यह रक़म आपको कब दी। लेकिन खैर, आप इसे अपने ही पास रखिए और जब आपके पास कोई ऐसा ही जरूरतमंद आए तो उसे यह दे दीजिए।”

प्रश्न 15.
बीस डॉलर किनके हाथों में घूम रही है?
उत्तर:
जरूरतमंदों के हाथों में।

प्रश्न 16.
ज़रूरतमंद कौन-कौन हो सकता है?
उत्तर:
सहायता मिलने के लिए व्याकुल रहनेवाले सभी लोग ज़रूरतमंद होते हैं।

प्रश्न 17.
हमारा जीवन मुसीबतों से भरा पड़ा है । कैसे?
उत्तर:
अब लड़ाई, गरीबी, महंगाई और गुलामी से।

प्रश्न 18.
दुनिया रहने लायक कैसे बनी?
उत्तर:
निस्वार्थ और आदर्श-प्रिय लोगों की उपस्थिति से।

प्रश्न 19.
पैसा वापस देने आया छात्र औह बेंजमिन फ्रैंकलीन के बीच का वार्तालाप तैयार करें?
उत्तर:
छात्र : नमस्कार जी!
फ्रैंकलीन : नमस्कार।
छात्र : आप मुझे जानते हैं?
फ्रैंकलीन : याद नहीं, लगता है कि देखा है।
छात्र : मैंने आप से कुछ डॉलर माँग लिया था।
फ्रैंकलीन : कब?
छात्र : कुछ साल पहले मेरी पढ़ाई केलिए। अब मेरी पढ़ाई खतम हुई। वह डॉलर वापस देने आया हूँ।
फ्रैंकलीन : यह डॉलर मुझे नहीं, किसी ज़रूरतमंद को दो।
छात्र : आप का मन कितना अच्छा है!
फ्रैंकलीन : तुम से कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति माँगे है तो उसे यह डॉलर दो। जाओ।
छात्र : ठीक है, धन्यवाद ।

प्रश्न 20.
किसके लिए छीना-झपटी होती थी?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए।

प्रश्न 21.
टिकट बाबू किन बातों को सुना-अनसुना करके अपना काम करते रहे?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए छीना-झपटी करनेवालों के परिहासों और धमकियों को।

प्रश्न 22.
टिकट बाबू की परेशानी का कारण क्या था?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए बड़ी भीड़ थी। वहाँ पर छीना-झपटी होती थी। छोटी-सी खिड़की से टिकट के लिए घुसानेवाले अनेक हाथों को टिकट देने केलिए टिकटबाबू अकेला था।

प्रश्न 23.
टिकट बाबू पर इन शब्दों का अजीब असर पड़ा । क्यों?
उत्तर:
लेखक ने टिकट बाबू की परेशानी समझकर बड़ी सहानुभूति से व्यवहार करके मुसाफिरों को शांत किया।

प्रश्न 24.
टिकट बाबू को नई ताकत कैसे मिली?
उत्तर:
लेखक की सहानुभूति के शब्दों से टिकट बाबू को नयी … ताकत मिली।

प्रश्न 25.
टिकट बाबू का हृदय कब मोम-सा हो गया?
उत्तर:
टिकट बाबू के प्रति लेखक सहानुभूति दर्शाने पर।

प्रश्न 26.
टिकट बाबू से संबंधित घटना का ज़िक्र करते हुए लेखक अपने मित्र को पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:

स्थान,
तारीख,

प्रिय मित्र रामू,

तुम कैसे हो? ठीक हो न? यहाँ पर मैं ठीक ही हूँ।
रामू, कुछ दिन पहले अपने काम से मुंबई जाने के लिए मैं टिकट लेने गया। वहाँ पर बड़ी छीना-झपटी होती थी। टिकट बाबू बड़ी परेशानी में था। लोग हल्ला करते थे, टिकट बाबू का परिहास करते थे। कुछ लोग उनको धमकी भी करता था। लेकिन टिकट बाबू इन बातों को सुना- अनसुना करके आपना काम करते रहे। मैं पास ही खड़ा था। मैंने बड़ी सहानुभूति से टिकट बाबू के बारे में यात्रियों से बात की। मेरी सहानुभूति देखकर टिकटबाबू को बड़ा आश्वास मिल गया। उन्होंने जल्दी मेरा टिकट दे दिया और एक नए उत्साह से अन्य यात्रियों को वे टिकट देने लगे।

प्रिय मित्र, दुसरों की कठिनाइयों को समझकर हमें व्यवहार करना चाहिए। हमारे कर्म और वचन से दूसरों को आश्वास मिला चाहिए।
यहाँ पर तुम कब आवोगो? तुम्हारी प्रतीक्षा में मित्र,

(हस्ताक्षर)
शेवड़े।

पताः
नाम

प्रश्न 27.
क्लर्क का तमाम दिन कैसे बीतता है?
उत्तर:
बैंक के रूखे आँकड़ों से माथापच्ची करते -करते क्लर्क का तमाम दिन बीतता है।

प्रश्न 28.
क्लर्क के किस गुण का सम्मान किया गया?
उत्तर:
अच्छी हस्तलिपि का।

प्रश्न 29.
क्लर्क का चेहरा प्रसन्नता से क्यों खिल उठा?
उत्तर:
लेखक के थोड़े-से शब्दों द्वारा क्लर्क के जीवन में किंचितमात्र सुख पहुँचने पर।

प्रश्न 30.
लेखक को क्यों प्रसन्नता महसूस हुई?
उत्तर:
प्रय लेखक को थोड़े-से शब्दों द्वारा बैंक के क्लर्क के जीवन में थोड़ा सुख पहूँचते देखकर लेखक को प्रसन्नता महसूस हुई।

प्रश्न 31.
बैंक का क्लर्क अपनी हस्तलिपि की तारीफ सुनने पर बहुत खुश हुआ। घर आने पर पत्नी उसकी खुशी का कारण जानना चाहती है-दोनो के बीच का संभावित वार्तालप लिखें।
उत्तर:
पत्नी : आज आप बहुत खुश है ….
क्लर्क : हाँ-हाँ….
पत्नी : कारण क्या है?
क्लर्क : एक कारण है।
पत्नी : मुझे भी बताओ….
क्लर्क : तुम जानना चाहती हो?
पत्नी : क्यों नहीं?
क्लर्क : तुम अनंत गोपाल शेवड़े को…
पत्नी : ओहो… सुप्रसिद्ध लेखक?
क्लर्क : जानती हो उन्हें?
पत्नी : सुनी तो है।
क्लर्क : आज उन्होंने मेरे बैंक में…
पत्नी : बैंक में?
क्लर्क : आये थे।
पत्नी : तो ?
क्लर्क : उन्होंने मेरी हस्तलिपि की …..
पत्नी : प्रशंसा की?
क्लर्क : हाँ…हाँ…
पत्नी : बड़ी बात है।
क्लर्क : हाँ…हाँ…

प्रश्न 32.
बैंक क्लर्क ने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? वह डायरी तैयार करें।
उत्तर:
तारीख
आनंद नगर :
आज का दिन बहुत अच्छा है। आज मुझे मिली प्रशंसा एक पंखुडी के समान मुझे अब भी सहलाती है। वह आदमी कितना अच्छा है! आज पहली बार बैंक के बोरिंग समय में कुछ राहत मिली। उस आदमी ने खाता खोलने के लिए आया था। मैं उनका नाम और पता लिखते समय उन्होंने मेरी हस्तलिपि पर ध्यान दिया और कहा ‘ब्यूटिफुल’! मेरा मन खुशी से भरा। सब लोगों ने मेरी हस्तलिपि देखी थी, पर किसीने भी मुझ से कुछ नहीं कहा था । अब मैं गर्व का अनुभव करने लगा। बड़ी खुशी से मैंने उनसे बातें कीं। पत्नी से भी यह बात कही। यह दिन में कभी नहीं भूलूंगा।

प्रश्न 33.
आनंद की फुलझड़ियाँ निबन्ध में लेखकने रेल विभाग के एक टिकट बाबू से करुणा प्रकट की थी। उस दिन के टिकट बाबू की डायरी तैयार करें।
उत्तर:

तारीख

आनंद शहर :
आज का दिन अच्छा दिन था। एक आदमी ने मुझे आज ठीक समझा है। यह बात मेरे मन में खुशी भरती है। यात्रियों की भीड़, उनकी परेशानियाँ, धमकियाँ आदि – आदि ने मुझे बहुत परेशानियाँ देती थीं। टिकट कौंटर में हर दिन अकेला रह गया हूँ। मेरी कठिनाइयों पर किसी ने ध्यान नहीं किया था। पर आज एक सज्जन ने मुझपर ध्यान देकर मेरी मदद की। टिकट लेने केलिए खड़े लोगों से मेरी परेशानियों के बारे में बताने की कृपा उन्होंने की। यह एक अजीब बात थी। उनकी सहानुभूति देखते वक्त मेरा हृदय मोम जैसा बन गया। वे शब्द मेरे मन में सांत्वना देने लायक थे। उस घटना के बाद मैं शांत भाव से टिकट देने में समर्थ हुआ।

वे कौन होंगे? जाते वक्त उन्होंने कहा कि फिर मिलें। ज़रूर उनसे मिलना चाहिए। ऐसे सज्जनों से परिचय पा लेना कितनी अच्छी बात है! आज का दिन मैं कभी नहीं भूलूंगा।

प्रश्न 34.
निम्नलिखित अर्थों के समानार्थी मुहावरों को लेख से छाँटकर लिखें।
(नष्ट होना, विपत्ति के दिनों के बाद सुख का दिन आना, सहन करना, हिम्मत करना, किसी के अच्छे काम की न्यायदृष्टि से प्रशंसा करना)
उत्तर:
रसातल में जाना = नष्ट होना
दिन फिरना = विपत्ति के दिनों के बाद सुख का दिन आना
ताना कसना = सहन करना
दिल कडा करना = हिम्मत करना
दाद देना = किसी के अच्छे काम की न्यायदृष्टि से प्रशंसा करना

प्रश्न 35.
सूचनाः यह गद्यांश पढ़िए और नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

नाविक भोलाराम रेलगाड़ी के वातानुकूलित डिब्बे में बैठ रहे थे। उनके पास काफ़ी रुपये थे। एक लड़की भी उस डिब्बे में आ बैठी। उसने नाविक से बातें शुरू की। उसने अपनी गरीबी का जिक्र किया तो नाविक ने पूछा कि इतनी गरीबी में भी वातानुकूलित डिब्बे में तुम क्यों यात्रा कर रही हो? तब लड़की ने कहा कि उसकी शादी तय हो चुकी है। और अपने ससुरालवालों को प्रभावित. करने केलिए वह इस डिब्बे में यात्रा कर रही है। फिर उस लड़की ने नाविक से कुछ रुपया माँग लिया तो उसने देने से इनकार कर दिया। तब लड़की ने उसको धमकी देकर कहा कि मुझे बीस हज़ार रुपये दें दो, नहीं तो मैं तुम्हारे ऊपर झूठे इल्ज़ाम लगाउँगी। गाड़ी रुकी तो लड़की ने पुलिस से कहा कि नाविक ने अपने हाथ से मेरा मुँह बंद कर लिया और दूसरे हाथ से मुझे खींचकर मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की है। लेकिन जाँच करने पर पुलिस को मालूम हुआ कि नाविक के दोनों हाथ कटे हुए हैं। झूठे इल्ज़ाम लगाने के अपराध में लड़की पकड़ी गयी।
(इल्ज़ाम – आरोप, इज्जत लूटना – अपमानित करना)

i) इस गद्यांश से कौन सा सन्देश मिलता है?
उत्तर:
हमें कभी भी कपट न होना चाहिए।

ii) इस गद्यांश का संक्षेपण करें और उचित शीर्षण लिखे।
उत्तर:
कपटता :
एक लड़की ने भोलाराम नामक एक बिना हाथवाला नाविक के साथ रेलगाड़ी में यात्रा करते समय धोखा देने की कोशिश की। पुलिस आकर लड़की को पकड़ा।

प्रश्न 36.
हिंदी भारत की राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा है- ‘सीखें हिंदी, सिखाएँ हिंदी’ – इस विषय पर निबंध लिखिए।
उत्तर:

सीखें हिंदी, सिखाएँ हिंदी

भारत में अनेक भाषाएँ हैं। भाषाओं को उपभाषाएँ और प्रादेशिक भाषाएँ भी हैं। लेकिन भारत के अधिकांश लोगों से बोलनेवाली भाषा हिंदी है। इसलिए हिंदी को भारत की संपर्क भाषा के रूप में माना जाता है। हिंदी भारत की राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा है। हिंदी एक सरल भाषा है। हमें यह जानने से खुशी होगी कि संसार में सबसे ज्यादा बोलनेवाली तीसरी भाषा हिंदी है। आज हिंदी अन्तर्देशीय भाषा के रूप में प्रचलित होती जाती है।

भारत विविधता का देश है। लेकिन हिंदी एकता की कड़ी है। भारत की संस्कृति हिंदी से जुड़ी रहती है। हिंदी समृद्ध साहित्य से भी संपन्न है।

हिंदी का प्रचार करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। हिंदी के प्रचार से भारत में एकता बढ़ेगी। इससे यह .मतलब नहीं है कि अन्य प्रादेशिक भाषाएँ महत्वपूर्ण नहीं है और वे तिरस्कृत हो जायें। प्रादेशिक भाषाओं का भी संरक्षण होना चाहिए। हिंदी के प्रचार से भारत की अखंडता सदा सुरक्षित रखें।

आनंद की फूलझडियाँ Previous Years Questions & Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर वार्तालाप तैयार कीजिए।
संभ्रान्त महिला रेलगाड़ी से कुछ चीजें बाहर फेंकती जा रही थी। तब सहयात्री और संभ्रान्त महिला के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार कीजिए। सहायक बिंदुः

  • रेलगाड़ी से चीजें बाहर फेंकना
  • सहयात्री द्वारा पूछा जाना
  • निःस्वार्थ सेवा
  • दुनिया में रहने लायक

उत्तर:
सहयात्री : यह आप क्या फेंक रही हैं?
महिला : मैं……?
सहयात्री : हाँ…. हाँ…….
महिला : तुम देखते नहीं?
सहयात्री : इसलिए तो पूछता हूँ।
महिला : ये तो बीज हैं।
सहयात्री : बीज?
महिला : हाँ… हाँ… फल-फूलों के बीज हैं।
सहयात्री : इनको खिड़की से क्यों फैंकती हैं?
महिला : इनमें कुछ जड़ पकड़ लेंगे।
सहयात्री : तो फिर?
महिला : तब फायदा होगा।
सहयात्री : फायदा? किस प्रकार?
महिला : फूलेंगे, फलेंगे।
सहयात्री : तब?
महिला : मनुष्य के लिए उपयोगी होंगे।
सहयात्री : अरे बापरे! आप तो महान कार्य कर रही हैं।
महिला : यह लो….आप भी फेंकिए।
सहयात्री : हाँ…… हाँ….. दीजिए।

प्रश्न 2.
मान लीजिए, आनंद की फूलझड़ियाँ इस निबंध का लेखक आत्मकथा लिखता है। आत्मकथा में टिकट बाबू के प्रसंग का उल्लेख है। निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर वह आत्मकथांश तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • लेखक का मुंबई जाना।
  • टिकट काऊंटर के पास भीड़ लगना ।
  • टिकट बाबू का परेशान होना ।
  • लेखक द्वारा टिकट बाबू के प्रति सहानुभूति प्रकट करना।

उत्तर:
आत्मकथा  :
कुछ साल पहले की बात है। मुझे जल्द ही मुंबई पहूँचना था। मैं टिकट लेने केलिए टिकट काउंटर पहूँचा । लड़ाई के कारण गाड़ियों की संख्या कम थी। इसलिए काउंटर के पास बहुत भीड़ लगी हुई थी। टिकट बाबू परेशानी से टिकट बनाते थे। लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे ठीक तरह से सभी लोगों को टिकट बन नहीं पा रहे थे। लोगों की ओर से कई प्रकार के बुरे टिप्पणियाँ उन पर हो रहे थे। इसका असर उपनर और बुरी तरह से हो रहे थे। बाबू कितने ही ईमानदारी से काम करें लोग उनपर शक से बात करते थे। यह सब देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। वह पूरी ताकत से काम कर रहे थे, फिर भी लोग उनपर गालियाँ दे रहे थे। मैं वहाँ के लोगों को समझाया कि बाबू बहुत कोशिश कर रहे हैं और उसे कुछ समय दीजिए। मैं बाबु से ऐसे बातें किया कि उसे कुछ आश्वास मिला। मेरा सहानुभूति का असर उनपर हुआ। वह फिर पूरी कोशिश की और मुझे धन्यवाद भी अदा की। मुझे पूरा यकीन था कि अच्छे वाक्यों का अच्छा असर हो जायेगा।

आनंद की फूलझडियाँ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 8

आनंद की फूलझडियाँ शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 13

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

प्रश्न 1.
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है’, चाँद क्यों ऐसा कह रहा है?
उत्तर:
आदमी स्वयं उलझनें बनाकर अपने आप को उसमें फँस देता है। फिर, बैचेन होकर वह न जगता है, न सोता है।

प्रश्न 2.
आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है- अपना मत प्रकट करे।
उत्तर:
कवि रामधारी सिंह दिनकर के अभिप्राय में आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है। वह आज बनता है और कल फूट जाता है। कभी कभी यह बात ठीक है। लेकिन सदा ऐसा नहीं होता। स्वप्न को आदमी यथार्थ में ले आकर महान कार्य करता है। हमें व्यर्थ में स्वप्न न देखना चाहिए। यथार्थ में फलनेवाले स्वप्न देखना चाहिए। अब्दुल कलाम जी ने कहा है: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 3.
कवि के बदले रागिनी क्यों बोल उठी?
उत्तर:
स्पप्न को ठीक रूप से समझने में असमर्थ होकर कवि मौन रहा। इसलिए रोगिनी बोल उठी।

प्रश्न 4.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?
उत्तर:
धारवाली।

प्रश्न 5.
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?
उत्तर:
व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कविता में प्रस्तुत किया गया है।

चाँद और कवि अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 6.
समान भाववाली पंक्ति चुनकर लिखें।
a. स्वप्नों को आग में गलाकर लोहा बनाता है।
b. मनु पुत्र के कल्पना भरे सपने तीखे होते हैं।
c. चाँद इतना पुराना है कि उसने मनु का जन्म और मरण देखा है।
d. आदमी स्वयं उलझनें बनाकर चैन खो बैठता है।
उत्तर:
a. आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
b. जिसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है।
c. मैं कितना पूराना हूँ?, मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते।
d. उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता है और फिर वैचैन हो जगता न सोता है।

प्रश्न 7.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।

प्रश्न 8.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

  • पंक्तियों का विश्लेषण किया है।
  • अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
  • पंक्तियों के विचार से अपने विचार की तुलना की है।

प्रश्न 9.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है। कवि से चाँद कहता है कि मनुष्य विचित्र जीव है। यह इसलिए है कि आदमी जान-बूझकर उलझनें उत्पन्न करता है, उसीमें फंस रहता है, फिर बेचैन होकर उसको नींद तक दुस्सह होता है ।चाँद सृष्टि के पुराने पदार्थ होने पर अहं करता है। चाँद कहता है कि उसने आदि मानव मनु के जन्म और मरण देखा है। चाँदनी में पागल की तरह बैठ स्वप्नों को यथार्थ में परिवर्तन करने का परिश्रम करनेवाले कवि को चाँद तुच्छ मानता है। हमारे समाज में कई प्रकार की रूढ़ियाँ हैं। वे सदा परिवर्तन के विरुद्ध खड़ी रहती हैं। कवितांश में चाँद रूढ़ियों का प्रतिनिधि है। परिवर्तन एक क्षण में नहीं होता। उसके पीछे दशकों की कल्पनाएँ और स्वप्न समाहित हैं। परिवर्तन केलिए कल्पना करनेवालों और स्वप्न देखनेवालों का प्रतिनिधि हैं कवि। कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 1

प्रश्न 10.
निम्नांकित कथन पर अपना विचार प्रस्तुत करें
“महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।”
– डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर:
सपनों का महत्व
जीवन को आगे बढ़ाने के लिए स्वप्ने होना आवश्यक है। दिवास्वप्नों से कोई उपयोग नहीं। ये जल के बुलबुले समान है। यथार्थ से इनको कोई संबंध नहीं है। हमें सच्छे स्वप्न देखना चाहिए। महान व्यक्ति ही महान सपने देखते हैं। महान स्वप्नों से ही महान कार्य निकलते हैं। महान लोग व्यर्थ स्वप्नों को कभी प्रधानता नहीं देते। महान लोग अपने स्वप्नों को यथार्थ में बदल देने के लिए उत्सुक रहते हैं। अब्दुल कलामजी ने ठी कहा है कि: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है।
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बैचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?
मैं चुका हैं देख मनु को जनमते-मरते?
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी पर बैठ स्वपनों पर सही करते।

i) यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
रामधारी सिंह दिनकर की ‘चाँद और कवि’ से।

ii) यहाँ किन के बीच बातचीत हो रही है?
उत्तर:
चाँद और कवि के बीच।

iii) कविता के ‘अनोखा’ शब्द का समानार्थी शब्द लिखें?
उत्तर:
विचित्र।

iv) निम्नलिखित शब्दों के लिए कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें? आसमान, विचित्र, मानव
उत्तर:
गगन, अनोखा, आदमी

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है,
किंतु, तो भी धन्य; टहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु, मेरी रागिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तू?
स्वप्न मेरे बुलबुले हैं? हे यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!
मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
और उसपर नींव रखती हूँ नए घर की,
इस तरह, दीवार फ़ौलादी उठाती हूँ।

i) चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न किसके समान है?
उत्तर:
जल के बुलबुले के समान।

ii) बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
कवि।

iii) कवि केलिए कौन बोलने लगी?
उत्तर:
कवि की रागिनी। (कवि की काव्य चेतना, कविता)

iv) कवि आग में किसको गलाकर लोहा बनाता है?
उत्तर:
स्वप्न को।

v) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

आदमी के स्वप्न की तुलना जल के बुलबुलों से चाँद करता है। बुलबुलों से खेलकर कवि कविता बनाता है। क्षण में टूट जानेवाले बुलबुलों को सच मानकर कविता करनेवाले कवि पर चाँद यहाँ व्यंग्य करता है।

चाँद का व्यंग्य -परिहास सुनकर कवि चुप रहा। पर, परिवर्तन की आग मन में छिपाई हुई कवि की काव्य चेतना आर्थात कविता चुप नहीं रह सकी। वह चाँद को ललकारने लगी। अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई काव्य चेतना चाँद से सही पहचान करने को बताती है। काव्य चेतना की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ा करती है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, उन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

प्रश्न 14.
उलझनों में फँसकर कौन बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
आदमी।

प्रश्न 15.
कौन उलझनें बनाता है?
उत्तर:
प्रणा मानव।

प्रश्न 16.
आदमी किस में फँसकर बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
उलझनों में

प्रश्न 17.
किसने मनु को जनमते -मरते देखा है?
उत्तर:
चाँद ने।

प्रश्न 18.
‘पागल कहकर चाँद किसका उपहास करता है?
उत्तर:
स्वपनों को यथार्थ में परिवर्तित करने का परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि को।

प्रश्न 19.
बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
परिवर्तन के लिए परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि।

प्रश्न 20.
स्वप्न जल का बुलबुला है या नहीं, क्यों?
उत्तर:
स्वप्न केवल जल का बुलबुला नहीं। यह इसलिए कि परिवर्तन का तूफान सपनों में समावेश हुआ है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 16

प्रश्न 21.
चाँद का उपहास सुनकर कौन चुप रहा?
उत्तर:
कवि।

प्रश्न 22.
रागिनी ने चाँद से क्या-क्या कहा?
उत्तर:
अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई चाँद से सही पहचान करने को रागिनी बताती है। रागिनी की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को अपने मनन की आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ी करती है।

प्रश्न 23.
स्वप्नो को गलाकर रागिनी (कविता) क्या बना देती है?
उत्तर:
लोहा बनाती है।

प्रश्न 24.
लोहे की नींव पर किसकी स्थापना होती है?
उत्तर:
नए घर की फौलादी दीवार की।

प्रश्न 25.
नए घर की दीवार कैसे होती है?
उत्तर:
फौलादी।

प्रश्न 26.
यहाँ दीवारों को फौलादी क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मन में उठनेवाले विचार चाहे शुरु में अस्पष्ट दिखते हो, परंतु मन रूपी धौंकिनी में गल-गलाकर वे सुदृढ़ बनते जाते हैं। वे विचार समाज को सुदृढ़ बनाने में काम आते हैं।

प्रश्न 27.
मनु के स्थान पर आज कौन है?
उत्तर:
मानव।

प्रश्न 28.
मनु-पुत्र के हाथ में बाण और तलवार के रूप में क्या-क्या है?
उत्तर:
विचार और स्वप्न।

प्रश्न 29.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?

प्रश्न 30.
जिह्वा, तीर, खड़ग- आदि शब्दों के समानार्थी पद कविता से छाँटकर लिखें।
उत्तर:
जिह्वा = जीभ, तीर = बाण, खड़ग = तलवार

प्रश्न 31.
स्वर्ग के सम्राट को क्या खबर पहूँचाना है?
उत्तर:
जिस को स्वप्नजीव कहकर उपहास करता है, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

प्रश्न 32.
स्वर्ग के सम्राट से क्या ललकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूकियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है।

प्रश्न 33
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?

Plus One Hindi चाँद और कवि Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आदमी का स्वप्न? वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है;
किंतु, तो भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु मेरी रोगिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तूऊ
स्वप्न मेरे बुलबुले है? है यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
चाँद और कवि

प्रश्न 2
कविता के ‘रागिनी’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (उपन्यास, नाटक, कविता, कन्या)
उत्तर:
कविता

प्रश्न 3.
जल के बुलबुले की विशेषता क्या है?
उत्तर:
जल के बुलबुले आज बनते हैं और कल फिर टूट जाते हैं।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री रामदारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध कविता ‘चाँद और कवि’ से है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि हे दिनकर। उर्वशी, रेणुका, कुरुक्षेत्र आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। चाँद कवि को मानव के पागलपन के बारे में कहते हैं। कवि जवाब के रूप में कहते हैं कि आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला जैसा है – आज बनता हैं कल टूट जाते हैं। फिर भी वह धन्य है क्योंकि आदमी ऐसे स्वप्नों से खेलकर कविता बनाता है।

अर्थात् नये नये सृजन करते है। कवि के अंतर की रागिनी बोलती है कि चाँद तुम जो पानी और बुलबुले कहकर पुकारनेवाला मानव का स्वप्न असल में आग हैं। तुम इसे ठीक तरह से पहचानते नहीं। .. यहाँ कवि सरल भाषा में समाज को आह्वान कर रहे हैं कि हम मानव किसी भी बात में पीछे नहीं होना चाहिए। हम जिसे स्वप्न के रूप में देखते हैं कह कर भी डालते हैं। छात्रों को जागरित होकर प्रयत्न करने का प्रोत्साहन देनेवाले कविता है यह।

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, इन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

1. यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
2. कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (तलवार, तेज, बाण, रोज़)
3. मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
4. कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

चाँद और कवि Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 3

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 5

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 6

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 9

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 12

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 13

चाँद और कवि Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 14
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 15

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

प्रश्न 1.
बीमारियाँ कैसे जन्म लेती हैं?
उत्तर:
बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में मच्छर पैदा होना एक सामान्य बात है, जिसके परिणामस्वरूप मलेरिया व डेंगु जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं।

प्रश्न 2.
बीमारियाँ कैसे फैलती हैं?
उत्तर:
स्थाई निवारण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। इसलिए बीमारियाँ फैलती हैं।

आपकी आवाज़ अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
चर्चा करें – संपादकीय लेखन कैसे?

चर्चा बिंदु :

  • विषय का चुनाव
  • विषय के ज़रूरी तथ्य
  • समस्या-प्रस्तुति का ढाँचा
  • समर्थन का तरीका
  • संपादकीय भाषा
  • शीर्षक

(सहायक संकेत-परिशिष्ट, पृष्ठ संख्या-110-111, संपादकीय)

प्रश्न 2.
‘बढ़ती बीमारियाँ’ में
a. किस विषय की चर्चा हुई है?
b. विषय-प्रस्तुति के लिए कौन-कौन से तथ्य जुटाए हैं?
c. समस्या का समर्थन करने के लिए क्या-क्या तर्क उठाए हैं?
d. समस्या प्रस्तुत करने के लिए कौन-सी भाषा-शैली का प्रयोग किया है?
e. संपादकीय का शीर्षक कैसे चुना है?
उत्तर:
a. राजधानी दिल्ली में बढ़ती बीमारियों की चर्चा हुई है।
b. विषय संबंधी आवश्यक जानकारी, सांख्यिकीय स्पष्टीकरण ज़रूरी प्रस्ताव आदि तथ्य जुटाए हैं।
c. स्थिति की गंभीरता, सरकार का उत्तरदायित्व आदि तर्क उठाये है।
d. सरल शब्दों में आकर्षक एवं प्रभावशाली भाषा शैली।
e. समकालीन समस्या संबन्धी।

यह रपट पढ़ें

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 1

प्रश्न 3.
रपट के लिए एक नया शीर्षक लिखें।
शीर्षक की परख, मेरी ओर से

  • पढ़ने को प्रेरित करता है।
  • केंद्र आशय को उद्दीप्त करता है।
  • भ्रमात्मकता से रहित है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से ‘बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ’ पर संपादकीय तैयार करें।

  • कच्ची-टूटी सड़कें
  • गाड़ियों की बढ़ती संख्या
  • ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन
  • नशीली चीज़ों का उपयोग
  • नियमों का सज़ पालन
  • जागरण-कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमकार 19 मार्च 2016
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ

केरल में सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती जाती हैं। कल कोल्लम जिले में एक मिनी बस के पलटने से 2 लोगों की मृत्यु हो गयी और 12 लोग घायल हो गये। सड़क कच्ची-टूटी अवस्था में है। गाड़ियों की संख्या रोज़ बढ़ती जाती है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता जाता है। सरकार की ओर से आवश्यक ध्यान इन बातों पर नहीं है। अनेक ड्राईवर लोग नशीली चीज़ों के उपयोग करके गाड़ियाँ चलाते हैं। इनको पकड़ने के लिए सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाता है। नियमों का सख्त पालन पर सरकार की ओर से ज़रूरी ध्यान होना चाहिए। जनजागरण-कार्यक्रम भी होना चाहिए। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सहयोग देना चाहिए।

प्रश्न 4.
संपादकीय की परख, मेरी ओर से

  • तथ्यों की सटीक प्रस्तुति हुई है।
  • समस्या के विभिन्न कारण प्रस्तुत किए हैं।
  • समस्या-समाधान के सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
  • अनावश्यक विस्तार नहीं है।
  • आकर्षक शीर्षक है।

उत्तर:
संपादकीय समाचार पत्र या अन्य पत्रिका का अभिमत प्रकट करनेवाला एक लेख है। जनहित और जनमत संपादकीय का विषय होना चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक या अन्य समस्याओं पर अपना मंतव्य प्रकट करना संपादकीय के विषय का जरूरी तथ्य होता है। आवश्यक जानकारी और तथ्यों का समाहर करना संपादकीय लिखने के पहले ज़रूरी है। मर्म छूटे बिना विषय को संक्षिप्त रूप में प्रकट करना चाहिए। विषयानुकूल तथ्यों का समर्थन और विरोधी विचारों का खंडन संपादकीय में होना चाहिए। भाषा प्रवाहमय और सरल शब्दों में होनी चारिए। विषयोचित आकर्षक शीर्षक होना चाहिए। संपादकीय का अंत अत्यंत प्रभावशाली होना चाहिए। संपादकीय रोचक एवं पठनीय होना भी है।

प्रश्न 5.
संपादकीय तैयार करें- जनसंख्या विस्फोडन पर दैनिक समाचार में छापने योग्य संपादकीय तैयार करें। जल की कमी और जल का दुरुपयोग जीव-जंतुओं के लिए खतरा उत्पन्न करता है।

  • जल जीवन का आधार
  • जल प्रदूषण और दुरुपयोग
  • जल की सुलभता में कमी
  • जल शोषण के प्रकार
  • जल स्रोतों का संरक्षण

उत्तर:

दैनिक सूरज –
सोमवार 19 मार्च 2016
बढ़ती जल-समस्या

केरल में अनेक नदियाँ हैं। वर्षा का भी कमी नहीं है। लेकिन शुद्ध जल का अभाव केरल की सबसे बड़ी समश्या हो रही है। जीवन का आधार है जल। यह जानकर भी केरल सरकार की ओर से पानी के संरक्षण केलिए उचित ध्यान नहीं होता। केरल की नदियों के और जलाशयों का जल निरंतर प्रदूषण है खतरे में है। जल का दुरुपयोग भी खूब होता रहता है। इसके प्रति सरकार और संबंधित अधिकारी लोग ध्यान क्यों नहीं देते? जल की सुलभता में कमी से केरल जनता की कठिनाईयाँ निरंतर बढ़ती रहती है। विभिन्न प्रकार से जल का शोषण हो रहा है। अक्सर अधिकारी लोग इसके लिए साथ देते रहते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण करना अनिवार्य है। सरकार के जल-विभाग की ओर से तुरंत इस दिशा में उचित कर्मपरिपाटियों की आयोजना होनी चाहिए। नहीं तो, सरकार सतर्क रहिए! सरकार से पेयजल और शुद्ध जल मिलने केलिए हड़ताल करने के लिए जनता मज़बूर हो जायेगी।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 2

प्रश्न 6.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’

बच्चे ओस की बूंदों की तरह एक दम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं। लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों के विरुद्ध अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश बच्छे सुरक्षाहीन वातावरण में रहते हैं। बच्चों के विरुद्ध बढ़नेवाले अत्याचारों को नियंत्रण में रखने के लिए कोई रास्ता है? मार्ग तो है, लेकिन मन नहीं है। निषकलंक बच्चों को अत्याचार के कारण अनावश्यक रूप से कष्ट सहने के अवसर होना बिलकुल पैशाचिक है, राक्षसीय है। अत्याचार बढ़ने का मुख्य कारण मानविकता का अभाव ही है। बड़ों के मन में मानविकुजा के भावों को जागरूक रखना चाहिए। सरकार की ओर से सख्त, नियमों के पालन के लिए सतर्कता होनी चाहिए। अपराधियों की मनोवृत्ति में बदलाव लाने के लिए सरकारी और अन्य संस्थाएँ सदा परिश्रम करते रहना चाहिए। अपराधियों को कठिन दंड दिलाने में विलंब न होना चाहिए। बच्चे देवदूत जैसे हैं। बच्चों से ही राष्ट्र की प्रगति हो सकती है। बच्चों के विरुद्ध कोई अत्याचार न होना चाहिए। हमारे बच्चे अत्याचारों से सदा सुरक्षित रहें।

प्रश्न 7.
सड़कों की बुरी हालत पर एक संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
हमारी सडकों की हालत

हमारी सडकें आजकल सुगम यात्रा के पथ नहीं हैं। सभी जगह गड्ढे हैं। उन गड्ढों से बचाकर गाडी चलाना आसान नहीं। बारिश के समय सड़कों की हालत और बुरी हो जाती है। बारिश के मौसम में सड़कें लोगों को इस भ्रम में डालती है कि वे सडक है या तालाब? इस स्थिति के बारे में हमेशा सूचित करते हुए भी सड़क परिवहन विभाग का ध्यान इस बात पर नहीं आया है। वह विभाग ज़रूरत के अवसर पर कुछ न कुछ करता है पर यह पर्याप्त नहीं है। हमारी सड़कों की रक्षा और लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को इस विषय पर ज़रूर ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से वृक्षारोपण: हमारा दायित्व पर एक संपादकीय तैयार करें।

  • पेड़ों की बरबादी – मौसम पर बुरा असर
  • जीव -जंतुओं पर असर
  • प्राकृतिक -संतुलन पर बुरा असर
  • मानव की स्वार्थता
  • वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2015
वृक्षारोपण: हमारा दायिच्च

पेड़-पौधों के बिना हमें जीना असंभव है। पुराने ज़माने से मनुष्य और पेड़ के बीच अटूट संबंध रहा है। शुद्धवायु मिलने के लिए, भोजन मिलने के लिए, छाया मिलने के लिए ऐसे अनेक लाभ के लिए पेड़ लगाकर संरक्षण करना जरूरी है। लेकिन आज पेड़ों की बड़ी बरबादी हो रही है। सरकार की ओर से इसको रोकने के लिए उचित कर्मपरिपाटी न होती। अक्सर यह भी होता है कि भ्रष्टाचारवाले सरकारी अधिकारी लोग पेड़ों की बरबादी के लिए साथ देते भी है। इसकी ओर सरकार जागरूक रहना चाहिए।

पेड़ -नशीकरण से मौसम पर बुरा असर होता है। जीवजंतुओं का उत्तरजीवन में बाधा होती है। प्राकृतिकसंतुलन पर भी बुरा असर होता है। मानव की स्वार्थता, संबंधित अधिकारी वर्ग के भ्रष्टाचार और लापरवाही आदि से पेड़ों की बरबादी न होनी चाहिए। वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व है। वृक्षारोपण प्रत्येक नागरिक का और सरकारी संस्था का दायित्व है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायें और हमारे पर्यावरण का संरक्षण करें। राज्य सरकार इस दिशा में नेतृत्व, मातृका और प्रोत्साहन सदा देते रहे।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 7

प्रश्न 9.
बाज़ार में रिंग-टोन कंपनी की ओर से नया मोबाईल फोन आया है। उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
नया मोबाईल आया है!!!
रिंग-टोन कंपनी की ओर से!
बहुरंगी है!
डेढ़ साल की वारंटी है।
2 जीबी मेमरी मुफ्त!
अदला-बदला की सुविधायें भी हैं।
जल्दी खरीद लीजिए।
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: रिंग-टोन कंपनी, आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 10.
मान लें, अनंतपुरम के शांतिनगर में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनाया है। दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस मकान के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

Plus One Hindi आपकी आवाज़ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
‘जनसंचार माध्यम का प्रभाव – छात्रों में लाभ और हानि’ इस विषय पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट – आधुनिक युग का वरदान
  • बटन दबाने पर दुनिया भर की खबरें
  • दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क
  • युवा पीढ़ी का आकर्षण
  • विपत्तियाँ – माध्यमों का दुरुपयोग

उत्तर:

संपादकीय
दैनिक भास्कर 28.08.2016
जनसंचार माध्यम का प्रभाव
छात्रों में लाभ और हानि

आज हम तकनीकी विकास को सबसे ज़्यादा प्रमुखता देते हैं। मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट आदि तकनीकी विकास के कारण हमें वरदान के रूप में मिले हैं। समय, दूरी आदि का मतलब ही आज बदल गया है। एक बटन दबाने से दुनिया भर की खबरें हमें मिलते है। कितने भी दूर के लोगों से हमें आसानी से बात कर सकते हैं। पहले चिट्टी के माध्यम से दिनों या हफ्तों के बाद मिलते थे वह आज निमिष मात्रा में मिल जाते है। मोबैल और इन्टरनेट से दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क करना इतना आसान हो गया है कि दूरी आज मिट गया है। इसप्रकार के माध्यमों का प्रभाव युवा पीढ़ी में सबसे ज़्यादा हैं। आज इसका प्रभाव इतना है कि वह बाकी सब को छोडने लगे हैं। इसमें कुछ सामाजिक विपत्तियाँ भी है। बड़े लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। समय माध्यमों में ……………… रहने से नष्ट हो जाते है। कई लोग देखे में भी पड़ जाते हैं। समाज में आवश्यक आदान-प्रदान भी युवा पीढ़ी में कम हो रहे हैं।

हमें सतर्कता से काम करना चाहिए कि सामाजिक माध्यम हमारा विकास केलिए है – हम माध्य केलिए नहीं।

प्रश्न 2.
आज हम देख रहे हैं कि व्यक्ति अपना घर साफ करता है और वह गंदगी सड़क या बाहर फेंकता है। इस प्रसंग में ‘स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज के लिए अनिवार्य है’ – इस विषय पर निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से संपादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • सफाई का महत्व
  • गंदगी से हानियाँ
  • वातावरण को साफ रखना नागरिक का कर्तव्य
  • सख्त नियमों का पालन
  • स्वच्छता की शुरुआत घर से
  • अनेक प्रकार की बीमारियाँ
  • जागरण कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार 15 अगस्त 2016
स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज केलिए
अनीवार्य

आधुनिक समाज में सब लोग सफाई का महत्व जानते हैं। सफाई केवल दिखाने केलिए नहीं बल्कि हमारे सुरक्षा केलिए है। गंदगी से कई प्रकार के बीमारियाँ फैलते है। आज कई प्रकार के बुखार फैल रहे हैं। मच्छर और मक्खी के कारण ही इसी प्रकार के बीमारियाँ ज्यादा फैल रहे हैं। ये दोनों जीव गंदगी में ही तेज़ी से बड़ते है। इसलिए हमें जल्द ही गंदगी को रोकना ही चाहिए।

स्वच्छता की शुरुवात घर से ही शुरू होता है। घर का और आसपास के वातावरण के साफ रखना नागरिक रा कर्तव्य है। लेकिन आजकल हम नागरिक ही गंदगी फैलने का कारण हो जाते हैं। कभी कभी घर की गंदगी को सड़क पर ही फेंकते हैं।

सरकारी तौर पर कई जानकारी योजनायें सफाई केलिए हो रहे हैं। कई संस्थायें और व्यक्तियों द्वारा भी सफाई के प्रोत्साहन केलिए कार्यक्रम हो रहे हैं। फिर भी कई लोग यह अपना कर्तव्य न मानकर समाज के विनाशक हो जाते हैं। हमें जानकारी के साथ सख्त नियमों का भी आवश्यकता है। नियमों का पालन हमारा कर्तव्य है। हमें प्रतिज्ञा करना है कि हम सब मिलकर हमारा ही रक्षा केलिए काम करने केलिए तैयार होंगे।

प्रश्न 3.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 4
निम्नलिखित विषय पर सहायक बिंदु के आधार से सम्पादकीय तैयार कीजिए। विषयः ‘प्रदूषण – जैव मण्डल का अस्तित्व संकट में’
सहायक बिंदु:

  • प्रदूषण – जल, वायू और मिट्टी
  • प्रदूषणजन्य रोग
  • कूड़े-कचरे से बायोगैस
  • जैव कृषि का महत्व

उत्तर:

दैनिक भास्कर
10/5/2017
प्रदूषणः जैव मण्डल
का अस्तित्व संकट में

आज सब लोग जानते हैं प्रदूषण माने क्या है। सम्पूर्ण धरती प्रदूषण से विषलिप्त हो गया है। प्रकृति की स्वाभाविक हालत में आनेवाले हानिकारक परिवर्तन को ही प्रदूषण कहते हैं। जल, वायु और मिट्टी में प्रदूषण हो रहा है। रासायनिक पदार्थों, प्लास्टिक, विविध तरह के कचरे- यह सब हमारे पर्यावरण पर बुरा असर कर रहा है। यह हम जानते हैं लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं करते हैं। जनता कहते हैं इसके ज़िम्मेदार सरकार हैं। सरकार कहते हैं नागरिक अपना दायित्व ठीक तरह से न निभाने से प्रदूषण बड़ते हैं। एक दूसरे को दोषी कहने से इस समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। सरकार, नागरिक, संस्थायें – सब एकत्रित होकर प्रदूषण से प्रकृति को बचाने का प्रयत्न शुरू करता है।

पहले हमारे मन में यह सोच ठीक तरह से भरना होगा कि यह हमारा ही भलाई के लिए है। हम ही नहीं आनेवाली पीढ़ी के लिए भी हमें इस प्रकृति को बचाते रहना चाहिए। कई प्रकार के प्रदूषणजन्य रोग होते हैं तो इससे बचाव भी हमारे पास है। कूड़े-कचरे के सही रूप में उपयोग करके – बयोग्यास, कम्पोस्ट आदि का निर्माण करनी है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग बंद करना हैं। कीटनाशकों से बचने के लिए जैवकृषि का महत्व का प्रोत्साहन करना है। प्लास्टिक का उपयोग कम करना हैं। सरकार द्वारा जानकारी योजनायें करवाना हैं और जनता यह अपना दायित्व समझने है। आनेवाले कल के लिए हमें इस पर्यावरण को बचाने का प्रण लेना हैं।

प्रश्न 5.
सापदकीय तैयार कीजिए। विषयः हिंदी का प्रचार
सहायक बिंदुः

  • भारतीय भाषाओं में हिंदी का स्थान
  • हिंदी दिवस का महत्व
  • जनसाधारण का विचारविनिमय
  • भारतीयता का विकास

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार, 20 अप्रैल 2017
हिंदी हमारी पहचान

भारतीय भाषाओं में हिंदी सबसे श्रेष्ठ और महान है। भारत के अलावा अनेक देशों में हिंदी लेखक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी प्रचारक, हिंदी सेवी आदि लोग काम कर रहे हैं। आज हिंदी शासकों, राष्ट्राध्यक्षों की भी भाषा बन गई है जो संसार के एक सौ बीस देशों में किसी-न-किसी रूप में प्रचलित भी है। प्रचीन भारत और संस्कृति के बारे में जानने का सशक्त माध्यम है हिंदी भाषा और इसका सशक्त साहित्य। आज विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी उभर आ रही है। विश्व हिंदी सम्मेलन इसका सशक्त प्रमाण है। इसके अलावा पूरे भारत भर में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में आज हिंदी का प्रचार इतना बढ़ गया है कि जो व्यक्ति हिंदी जानता है वह पूरे भारत के किसी भी कोने में जाकर आसानी से बात कर सकता है और जीवन बिता सकता है। क्योंकि आज हिंदी जनसाधारण के विचारविनिमय का माध्यम बन गई है। एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सब को मिलकर हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए काम करना है। भारतीयता का विकास भी इसमें निहित है। राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का विकास प्रत्येक भारतीयों के हाथ में निहित है। जिसके पास राष्ट्रभाषा नहीं है उसका कोई राष्ट्र भी नहीं है।

||जय हिंद, जय हिंदी||

आपकी आवाज़ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 6

आपकी आवाज़ Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

प्रश्न 1.
ब्लैक फिल्म देखें। (फिल्म देखते वक्त इन मुद्दों पर बारीकी से ध्यान दें)

  • पात्रों का अभिनय
  • संवादों की प्रासंगिकता
  • दृश्यों की विविधता
  • कथा का प्रवाह

प्रश्न 2.
फिल्म के आधार पर लिखें।

  • सबसे आकर्षक दृश्य
  • सबसे श्रेष्ठ अभिनेता
  • सबसे हृदयस्पर्शी संवाद
  • सबसे दर्दनाक दृश्य

प्रश्न 3.
फिल्म के निम्नांकित अंगों के लिए गुणवत्ता के अनुसार दें (अधिकांश)

  • कथा
  • पटकथा
  • अभिनय
  • छायांकन
  • साज-सज्जा
  • ध्वन्यांकन
  • संपादन
  • निदेशन

फिल्म से समीक्षा की ओर…

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समीक्षा में किन-किन बिंदुओं की चर्चा की गई है?
उत्तर:
पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, संपादन-कार्य, छायांकन, ध्वन्यांकन, अभिनय, गीत, प्रार्श्व संगीत आदि की चर्चा की गयी है।

प्रश्न 2.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

प्रश्न 3.
फिल्म समीक्षा की परख, मेरी ओर से

  • फिल्म का संक्षिप्त परिचय दिया है।
  • अभिनय की खूबियाँ/कमियाँ बताई हैं।
  • निदेशक की क्षमता को अंकित किया है।
  • फिल्म के अन्य बिंदुओं की (पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, ध्वन्यांकन, संपादन, गीत आदि) चर्चा की है।
  • अपने विचारों का समर्थन किया है।

प्रश्न 4.
मान लें, ब्लैक फिल्म थियटर में 100 दिन पूरी करते वक्त पोस्टर में यह अनुशीर्षक (Caption) निकलता है।

संजय लीला भंसाली के निदेशन में अमिताभ बच्चन और राणी मुखर्जी के अभिनय-जीवन की अनमोल प्रस्तुति
‘ब्लैक’
101 वें दिन की ओर…

पोस्टर में छपने के लिए इसी प्रकार के विभिन्न अनुशीर्षक लिखें।
उत्तर:
i) सौ दिन के बाद भी ब्लैक भीड़ भरी।
ii) 101 वें दिन ……… 350 शो……. गजब! गजब!!
iii) सारा शहर ‘ब्लैक’ के पीछे

प्रश्न 5.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
i) तारे ज़मीं पर – फिल्मी समीक्षा
बच्चे ओस की बूंदों की तरह एकदम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं, लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों को अनुशासन के नाम पर तमाम बंदिशों में रहना पड़ता है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी (दर्शील सफ़ारी) का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों और पेटिंग में लगता है। उसके मातापिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता। ईशान घर पर माता-पिता की डाँट खाता है और स्कूल में शिक्षकों की। कोई भी यह जानने की कोशिश नहीं करता कि ईशान पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। इसके बजाय वे ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं।

खिलखिलाता ईशान वहाँ जाकर मुरझा जाता है। वह हमेशा सहमा और उदास रहने लगता है। उस पर निगाह जाती है आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ (आमिर खान)की। निकुंभ उसकी उदासी का पता लगाते हैं और उन्हें पता चलता है कि ईशान बहुत प्रतिभाशाली, लेकिन डिसलेक्सिया की बीमारी से पीड़ित है। उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। अपने प्यार और दुलार से निकुंभ ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं।

कहानी सरल है, जिसे आमिर खान ने बेहद प्रतिभाशाली तरीके से परदे पर उतारा है। पटकथा की बुनावट एकदम चुस्त है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं। ईशान का स्कूल से भागकर सड़कों पर घूमना, ताज़ा हवा में साँस लेना, बिल्डिंग के कलर होते देखना, फुटपाथ पर रहनेवाले बच्चों को आज़ादी से खेलते देखकर उदास होना, बरफ़ का लड्डू खाना जैसे दृश्यों को देख कई लोगों को बचपन की याद ताज़ा हो जाएगी।

सभी बच्चों का दिमाग और सीखने की क्षमता एक-सी-नहीं होती। फ़िल्म देखते समय हर दर्शक इस बात को महसूस करता है। ईशान की भूमिका में दर्शील सफ़ारी इस फ़िल्प की जान है। अमीर खान मध्यांतर में आते हैं और छा जाते हैं। टिस्का चोपड़ा (ईशान की मम्मी) ने एक में की बेचैनी को उम्दा तरीके से पेश किया है। विपिन शर्मा (ईशान के पापा), सचेत इंजीनियर और सारे अध्यापकों का अभिमय भी अच्छा है। प्रसून जोशी द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत भी अच्छा है। फ़िलम की फोटोग्राफी बहुत ही प्रभावशाली हैं।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 1Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 3

ii) पूस की रात – फिल्मी समीक्षा
किसान का जीवन कितना करुणापूर्ण है! खेती से उसको कोई सुख नहीं मिला। पूरा जीवन गरीबी में गुज़रता है। इन बातों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाली एक सुंदर फिल्म है ‘पूस की रात’। प्रेमचंद की एक छोटी कहानी गुलजार के निदेशन में फिल्म के रूप में पर्दे पर आयी है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है।

एक गरीब किसान हल्कू अपनी पत्नी के साथ रहता है। खेत में फसल पकने लगी है। रात के समय खेत में नीलगायों के आने की संभावना है। इसलिए हल्कू रात में खेत का पहरावा करता है। हड्डियाँ भी तोडनेवाली ठंड में वह अपने कुत्ते का साथ गीत गाकर या बातें करके ठंड से बचने की कोशिश करता है। गर्मी के लिए वह चिलम फूंकता भी है।

खेती के लिए महाजनों से लिए पैसे वापस देने में भी वह असमर्थ है। हल्कू की पत्नी के मत में खेती की अपेक्षा मज़दूरी करना ही अच्छा है। एक ठंडी रात में हल्कू ठंड सह न सका। वह कुछ सूखे पत्ते लाकर आग जलाकर उसके साथ नाच गाकर सर्दी से बचकर लेटा। आग की गर्मी के कारण उसको गहरी नींद मिली। पर उस रात में आग फैलकर सारी फसल जल गयी। सबेरे पत्नी आकर हल्कू को उठाते वक्त ही उसने देखा कि सारा खेत जल चुका है। रोती हुई पत्नी से हल्कू ने कहा कि ‘अच्छा हुआ…. आज से रात में ठंड सहने की ज़रूरत नहीं है।’

हल्कू की ये बातें उसकी निराशा से उत्पन्न हैं। खेत में कठिन काम करने पर भी या सभी कठिनाइयाँ सहने पर भी किसान को कोई फायदा नहीं मिलता है। इन बातों को स्पष्ट रूप में गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘पूस की रात’ में व्यक्त किया है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। कुत्ते का साथ हल्कू का वार्तालाप, चंद्रमा की सुविधा का वर्णन, नीलगायों को भगाने की आवाज़ आदि के प्रसंगानुकूल दृश्य दर्शकों को मज़ा देनेवाले ही हैं।

किसान के दैन्य दिखाने के लिए फटे हुए कंबल को दिखाते वक्त उसकी गरीबी हमारे मन पर चोट लगाती है। प्रेमचंद किसानी जीवन की दर्दनाक कहानी लिखनेवाला कहानीकार है। उनकी एक कहानी को गुलजार ने ज्यादा चमकदार बनाकर फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है। रघुवीर करण और मानसी उपध्याय ने अपने अपने पात्रों को उज्वल बनाए। दोनों का अभिनय देखकर हम विस्मित हो जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में रूपकुमार का एक अच्छा गीत है। दिन और रात के समय के दृश्यों की फोटोग्राफी भी अव्वल दर्जे की है। संपादन अच्छा हुआ है। पटकथा भी बहुत अच्छा हुई है। साज-सज्जा अनुकूल ही है। ध्वन्यांकन उत्तम कोटि की है।

Plus One Hindi ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखिए। सहायक बिंदुः

  • फिल्म का कथासार
  • पात्रों का अभिनय
  • निदेशक की भूमिका
  • पटकथा, संवाद, छायांकन, गीत आदि
  • फिल्म की समग्रता पर अपना दृष्टिकोण

उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 5

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 6

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 8

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक स्पर्श जहाँ भाषा बनता है 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे

प्रश्न 1.
जो दिल खोजौं आपना मुझ-सा बुरा न कोय- कबीर ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर:
मनुष्य में भलाई और बुराई का मिश्रण होता है। परंतु, मनुष्य अपनी बुराई को छिपाकर दूसरों की बुराई बताते फिरता है। अपने आपको सुधारने को हमें ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दूसरों की बुराई खोज देखने के लिए हमें इच्छुक न रहना चाहिए। संक्षेप में कबीर का मत है अपने को पहचानना सच्चे ज्ञानी का लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रभुता का महत्व समझाने के लिए कबीर ने किसका सहारा लिया है?
उत्तर:
चींटी का।

प्रश्न 3.
दुख काहे होयइससे क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सुख और दुख जीवन के सत्य हैं। दुख में सब लोग आश्रय की याद करते हैं। तब दुःख कम हो जाता है। लेकिन सुख आने पर लोग उसी आश्रय को भूल जाते हैं। कबीर के अभिप्राय में यह कृतघ्नता और अज्ञता से होता है।

प्रश्न 4.
सच्चा शूर कैसे बनता है?
उत्तर:
जिसे जाति, वर्ण, कुल आदि के भेदभाव की चिंता नहीं, वही सच्चा शूर है। दूसरे शब्तों में समभाव की भावना रखनेवाला सच्चा शूर बनता है।

दोहे अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 5.
समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढ़ लें।
कोई, शूर, संभाला, ढूँढ़ना, धूलि, वर्ण, स्मरण, क्यों, मिला
उत्तर:
कोई = कोय
शुर = सूरमा
संभाला = समाय
ढूँढना = खोजौं
धूली = धूरि
वर्ण = बरन
स्मरण = सुमिरन
क्यों = काहे
मिला = मिलिया

प्रश्न 6.
समान आशयवाला चरण दोहे से चुन लें।
a. दूसरा कोई भूखा न रहे।
b. सुख में कोई स्मरण नहीं करता।
c. मैं बुरे लोगों को ढूँढ़ने निकला।
d. हाथी के सिर पर धूलि है।
e. काम, क्रोध और लालच से भक्ति नहीं होती।
उत्तर:
a. साधु न भूखा जाय।
b. सुख में करे न कोय
c. बुरा जो देखन मैं चला
d. हाथी के सिर धूरि
e. कामी, क्रोधी, लालची, इनते भक्ति न कोय

प्रश्न 7.
व्याख्या करें-
साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।
उत्तर:
यह दोहा निर्गुण भक्त कवि कबीरदास का है। कवि भगवान से केवल यह प्रार्थना करते हैं कि अपने कुटुंब को संभालने के धन मिल जाये। कवि की प्रार्थना है कि संवयं कभी भी भूखा न रहे और संसार में कोई भी भूखा न रहे। मनुष्य में सदा धन और संपत्ति का लालच रहता है। वह संपत्ति के पीछे दोड़ता रहता है। घन के प्रति मनुष्य में जो लालच है, उसे सीमित और नियंत्रित रखने का उपदेश कवि यहाँ देते हैं।

प्रश्न 8.
ये तत्व किन-किन दोहों से संबंधित हैं?
a. अहं दूर होने से महत्व बढ़ता है।
b. सुख और दुख में स्मरण करना है।
c. अपने को पहचाननेवाला सच्चा ज्ञानी है।
d. जीवन की शांति सादगी में है।
e. समभाव शूर का लक्षण है।
उत्तर:
a. प्रभुता से प्रभु दूरि
b. जो सुख में सुमिरन करै, तो दुःख काहे होय
c. जो दिल खोजौं आपना, मुझ-सा बुरा न कोय
d. लघुता से प्रभुता मिले
e. भक्ति करै कोई सूरमा।, जाति, बरन कुल खोय।।

प्रश्न 9.
‘जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय’- अपना विचार प्रकट करें।
उत्तर:
यह दोहा संत कवि कबीरदास का है। निर्गुण भक्ति शाखा के प्रमुख कवि कबीरदास कहते हैं कि हमें सुख और दुःख दोनों में ईश्वर का स्मरण समभाव से करना चाहिए। मनुष्य साधारणतः केवल दुःख आते समय ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। सुख में ईश्वर से भक्ति रखनेवाला दुर्लभ होता है। कबीर के अभिप्राय में सुख में ईश्वर का स्मरण करनेवाले को दुःख कभी भी नहीं होता। अंधविश्वास को दूर करके सच्छी भक्ति की ओर मन रखने को कबीर इस दोहा द्वारा उपदेश देते हैं।

प्रश्न 10.
‘कबीरदास की रचनाएँ कालजयी एवं प्रासंगिक हैं’- इस विचार से जुड़े दोहों का संकलन करके प्रस्तुत करें। कबीर के दोहों का आलाप करें।
उत्तर:
काल्हि करै सो आज कर, आज करै सो अब
पल में परलय होयगा, बहुरि करैगा कब।।
पाहन पूजै हरि मिलै, तो मैं पूनँ पहार
ताते या चाकि भलि, पीस खाय संसार।।
मुंड़ मुड़ाए हरि मिलै, सब कोई लेय मुड़ाय।
बार-बार के मुँड़ते, भेड़ न बैकुंड जाय।।
तेरा साई तुझ में, ज्यों पुहुपन में बास।
कस्तूरी का मिरग ज्यों, फिरि फिरि ढूँदै घास।।
माखी गुड़ में गड़ि रही, पंख रह्यो लिपटाय।
हाथ मलै और सिर धुने, लालच बुरी बलाय।
माया मुई न मन मुआ, मरि मरि गया सरीर
आसा त्रिष्णा न मुई, यौँ कहि गया कबीर।।
पानी बाढ़े नाव में, घर में बाढ़े दाम।
दोऊ हाथ उलीचिए,यही सयानो माक।।

प्रश्न 11.
कबीरदास किसे ढूंढने चला?
उत्तर:
बुरा देखने को चला।

प्रश्न 12.
अपना दिल खोजने पर कबीर को क्या पता चला?
उत्तर:
कबीर को पता चला कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं।

प्रश्न 13.
कौन दुनिया में सबसे बुरा है?
उत्तर:
अपने आपको न सुधारनेवाला।

प्रश्न 14.
चींटी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
शक्कर।

प्रश्न 15.
हाथी के सिर पर क्या है?
उत्तर:
धूली।

प्रश्न 16.
लोग कब आश्रय का स्मरण करते हैं?
उत्तर:
दुःख में।

प्रश्न 17.
लोग कब आश्रय का स्मरण नहीं करते हैं?
उत्तर:
सुख में।

प्रश्न 18.
दुख काहे होय – इससे क्या तात्पर्य है?

प्रश्न 19.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी पद क्या है?
उत्तर:
सुमिरन।

प्रश्न 20.
कौन-कौन भक्त नहीं बनता?
उत्तर:
कामी, क्रोधी और लालची।

प्रश्न 21.
कौन भक्ति कर सकता है?
उत्तर:
जाति, वर्ण, कुल आदि को महत्व न देनेवाला सच्चा शूर अर्थात, समभाव की भावना में जीनेवाला भक्ति कर सकता है।

प्रश्न 22.
‘साई’ शब्द का समानार्थी पद लिखें।
उत्तर:
स्वामी।

प्रश्न 23.
कबीरदास ‘साई’ से क्या चाहते हैं?
उत्तर:
चाहते हैं कि उनको साई से इतना मिले जिससे उनका कुटुंब चला सकें। वे यह भी चाहते हैं कि कोई भी भूखा न रहे। दूसरे शब्दों में वह जीवन में शांती देनेवाली उदार मनोभावना साई से चाहते हैं।

Kerala Plus One दोहे Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 1 एवं 2 का उत्तर लिखिए।

लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

प्रश्न 1
‘धूली’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (चींटी, हाथी, धूरि, दूरि)
उत्तर:
धूरि

प्रश्न 2.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास निर्गुण भक्तिशाखा के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रसिद्ध कवि है। मानव-प्रेम, सामाजिक बोध आदि को वह प्रमुखता देते थे।

कबीरदास प्रस्तुत दोहे में कहते हैं कि लघुता से ही हमें प्रभुता मिलेंगे और जहाँ प्रभुता है वहाँ से अहं का भाव दूर होता है। अर्थात सादगी से ही जीवन सफल होगा। उदाहरण केलिए कबीरदास कहते हैं कि चींटी छोटे होने पर भी शक्कर लेकर चलते हैं। बड़े हाथी के सिर में अक्सर धूल ही होते हैं। शक्ति, बड़प्पन, कायबल आदि से नहीं बल्की व्यवहार के कारण ही एक व्यक्ति में उन्नति और अवनति होते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और 3 एवं 4 के उत्तर लिखिए।
कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सुरमा, जाति बरन कुल होय।।

प्रश्न 3.
‘वर्ण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
बरन

प्रश्न 4.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास प्रस्तुत दोहे से भेद-भावों को छोड़ने केलिए आह्वान करते हैं। भक्तकाल के निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के सर्वश्रेष्ट कवि है कबीरदास। उन्होंने अपने समय समाज में प्रचलित सभी धर्मी की बुराइओं का खंडण किया। काम, क्रोध, लालच आदि से भक्ति नहीं होते हैं। भक्ति होने केलिए वीरों को जाति, वर्ण, कुल आदि विचार छोड़ना चाहिए। जाति, वर्ण, कुल आदि में सोचनेवाले लोगों में काम, क्रोध, लालच आदि पैदा होते हैं। इसलिए असली वीरों को यह बातों को छोड़कर खुले मन से व्यवहार करना चाहिए।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िए और 5 एवं 6 तक के उत्तर लिखिए।
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

प्रश्न 5.
‘स्मरण’ शब्द का समानार्थी शब्द दोहे से ढूँढकर लिखिए।
उत्तर:
सुमिरन

प्रश्न 6.
इस दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

सूचनाः

निम्नलिखित दोहा पढ़िये और प्रश्न 7 से 8 के उत्तर लिखिए।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझसा बुरा न कोय।।

प्रश्न 7.
‘कोई’ शब्द के लिए दोहे में प्रयुक्त शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (खोजौं, देखन, आपना, कोय)
उत्तर:
कोय

प्रश्न 8.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास भक्तिकाल के निर्गुण भक्तिधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। कबीरदास के एक प्रसिद्ध दोहा है। आपकी रचनायें साखी, सबद और रमैनी के नाम से तीन भागों में विभक्त है।

प्रस्तुत दोहे में कबीरदास सामाजिक जीवन में देखनेवाली सच्चाई को दिखाया है। हम दूसरों के बुराई सोचते रहते हैं। लेकिन हम अपने आप पर खोजते ही नहीं। अगर ऐसे करते हैं तो पता चलेगा कि असली बुराई हम में ही है। दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने आपको देखों। समाज में अच्छे और सच्चे जीवन बिताने की आवश्यकता कबीर बताते हैं।

सुचना :

निम्नलिखित दोहा पढ़कर 9 और 10 का उत्तर लिखिए।
साई इतना दीजिए, जामें कुटुम्ब समय।
मैं भी भूखा न रहूँ. साधू न भूखा जाय।।

प्रश्न 9.
‘संभालना’ शब्द का आशय दोहे के किस शब्द से मिलता है?
उत्तर:
समाय

प्रश्न 10.
दोहे का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
कबीरदास हिन्दी के विख्यात रहस्यवादी कवि है। उन्होंने नीति संबंधी अनेक दोहे लिखा है।

कबीर का परिवार साधु-संतों का है। वे कहते हैं, हे भकवान! मुझे इतना ही दीजिए जिससे मेरा परिवार चल सकें। वे चाहते हैं कि कोई भी भूखा नहीं रह जाए। कबीर की राय में जीवन की शांति सादगी में है।

Plus One Hindi दोहे भावार्थ:

1. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजौं आपना, मुझ सा बुरा न कोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 5

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि बुरे लोगों को ढूँढते ढूढते वे चले। लेकिन कोई बुरा आदमी नहीं मिला। अंत में उन्होंने अपने दिल में खोज़ा। अर्थात्, अपने बारे में सोचा। तब समझ लिया कि अपने समान बुरा दूसरा कोई नहीं हैं। कवि का मतलब यह है कि दूसरों की बुराईयों पर ध्यान देने के पहले अपने आप को सुधारना ज़रूरी है।

2. लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु दूरि।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 7

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 8

भावार्थ:
कवि कहते हैं कि हम विनम्रता दिखाएँ तो हमें ईश्वरीयत्व मिलेगा। लेकिन हम अहंकार दिखाएँ तो ईश्वर हमसे दूर होगा। उदाहरण के रूप में कवि कहते हैं कि छोटी चींटी उससे बड़ा शक्कर लेकर चलती है। लेकिन बड़ी शरीरवाले हाथी के सिर पर मलिन धूल है। कवि का मतलब हैं कि हम दुसरों से विनय के साथ व्यवहार करें तो ईश्वर सदा हमारे साथ रहेंगे। अहंकार से जियें तो ईश्वर हमें छोड़ देंगे। मूल्यहीन अध्यात्मिकता पर आलोचना करके यहाँ कवि विनम्रता के महत्व के बारे में हमें ज्ञान देते हैं।

3. दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 9

भावार्थ:
कबीरदास कहते की दुख में हम सब ईश्वर का स्मरण करते हैं। लेकिन सुख के अवसर पर कोई भी ईश्वर का स्समरण नहीं करता। कवि पूछते हैं कि जो लोग सुख में ईश्वर का स्मरण करते हैं तो उनको दुख कैसे होगा? अर्थात् हमेशा ईश्वरस्मरण में रहनेवालों को दुख कभी नहीं होता। यहाँ जीवन में ईश्वर स्मरण की ज़रूरत कवि हमें सिखाते हैं। सच्ची आध्यात्मिकता के मूल्य पर कवि यहाँ पर बल देते हैं।

4. कामी क्रोधी लालची, इनते भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई सूरमा, जाति बरन कुल खोय।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 10

भावार्थ:
कामी, क्रोधी, लालची लोगों में भक्ति नहीं होती। लेकिन, जाति, वर्ण और कुल के परे सभी लोगों से समभाव से व्यवहार करनेवाले शूर के मन में सच्ची भक्ति होती है। भक्ति में हृदय की पवित्रता और समभावना जगानेवाली ये पंक्तियाँ द्वारा कवि मूल्यहीन और कपट धार्मिकता पर यहाँ पर आलोचना करते हैं। (धार्मिकता = മതജീവിതം, आलोचना = വിമർശനം)

5. साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 11

भावार्थ:
कबीरदास ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हे ईश्वर! आप हमें इतना धन दीजिए कि जिससे अपने कुटुंब को हम संरक्षण कर सकें। कबीरदास यह प्रार्थना भी करते हैं कि हे भगवान! आपका आशीर्वाद हो कि साधु लोग भी भूखा न रह जायें और मैं भी भूखा न रहूँ। दूसरों की कष्टताओं पर ध्यान रखने के बारे में कवि यहाँ बताते हैं। धनार्जन के पीछे दौड़नेवालों की आलोचना कवि यहाँ पर करते हैं।

दोहे Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 1

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 4

दोहे Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 5 दोहे 13

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस

जुलूस अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समानार्थी शब्द नाटक में ढूँढ़ें
दृश्य – 1 जनयात्रा, विरुद्ध, विक्रय, शासक, चिंता, निर्दय
दृश्य – 2 आज्ञा, वाणी, प्रकार, लक्ष्य, पालन, इच्छा, केवल, देश, हानि, विषाद, सहन
दृश्य – 3 घायल, अंत
दृश्य – 4 पास, धीरे, कुशल, ओजपूर्ण
उत्तर:
जनयात्रा = जुलूस
विरुद्ध = के खिलाफ
विक्रय = बिक्री
शासक = दारोगा
चिता = परवाह
निर्दय = दल्लाद
आज्ञा = हुक्म
वाणी = जुबान
प्रकार = किस्म
लक्ष्य = मक्सद
पालन = तामिल
इच्छा = मंशा
केवल = महज़
देश = कौम
हानि = नुक्सान
विषाद = मलाल
सहन = बरदाश्त
घायल = जख्मी
अंत = आखिर
पास = नज़दीक
धीरे = आहिस्ता
कुशल = खैसियत
ओजपूर्ण = जोशीला

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कथन किस पात्र का है ?
a. हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
b. जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कबका मिल गया होता।
c. हमारा बड़ा आदमी तो वही है जो लंगोटी बाँधे नंगे पाँव घूमता है।
d. एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो।
e. मर तो हम लोग रहे जिनकी रोटियों का ठिकाना नहीं।
f. हमारा मक़सद इससे कहीं ऊँचा है।
उत्तर:
a. दारोगा बीरबल सिंह का।
b. दीनदयाल का।
c. मैकू का।
d. शंभुनाथ का।
e. मैकू का।
f. इब्राहिम अली का।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथन इब्राहिम अली के चरित्र की किन-किन विशेषताओं को उजागर करता है?
a. हम दुकानें लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।
b. आप अपने सवारों, संगीनों और बंदूकों के ज़ोर से हमें रोकना चाहते हैं-रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।
c. हमारे भाईबंद ऐसे हुक़्मों की तामील करने से साफ़ इनकार कर देंगे।
d. जिस दिन हम इस लक्ष्य पर पहुँच जाएँगे, उसी दिन स्वराज्य सूर्य का उदय होगा।
उत्तर:
a. अहिंसावाद, ईमानदारी।
b. वीरता, साहसिकता, दृढनिश्यच।
c. पत्र देशप्रेम, दृढनिश्चय।
d. प्रतीक्षा, प्रत्याशा।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
जुलूस’ नाट्यरूपांतर का मुख्य कथापात्र है इब्राहिम अली। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में इब्राहिम अली स्वतंत्रता सेनानियों का नेता है। इब्राहिम अली के नेतृत्व में स्वराजियों का जुलूस जा रहा है। महात्माजी के अहिंसावाद का अनुयायी है इब्राहिम अली। बड़ी ईमानदारी से इब्राहिम अली अहिंसा का पालन करता है। इसलिए दारोगा बीरबल सिंह से अलीजी कहते है: “हम दूकानों लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं।” इब्राहिमजी में बड़ी वीरता और साहसिकता है। उनके दिल में बड़ी प्रतीक्षा और प्रत्याशा है।

वे कहते हैं: “स्वराज्य सूर्य का उदय होगा” वे बड़े दृढ़ निश्चयवाले नेता भी हैं। फिर भी, इब्राहिम अली के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका देशप्रेम ही है। भारतमाता के लिए अपनी जान बलिदान करने के लिए वे तैयार हो जाते हैं। देशप्रेम से वे कभी भी पीछे नहीं होते हैं। उनका देशप्रेम दृढनिश्चय से अलंकृत है। इब्राहिमजी कहते है: “रोक लीजिए! मगर आप हमें लौटा नहीं सकते।” इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

चरित्र पर प्रकाश डालनेवाले संवादों का विश्लेषण किया है।
चरित्र की विशेषता समझी है।
विशेषताओं के आधार पर टिप्पणी लिखी है।
चरित्र की विशेषताओं का समर्थन अपने दृष्टिकोण से किया है।

नाटक का मंचन करें।

मंचन की गतिविधियाँ

नाटक-वाचन

  • यह वैयक्तिक/दलीय हो सकता है। वाचन के द्वारा पूरे नाट्यदल कथा से तादात्म्य स्थापित करता है।

मंचन पूर्व चर्चा

  • नाटक की पृष्ठभूमि, तकनीकी क्षेत्र, पात्र आदि में सही अवधारणा उत्पन्न करने में यह चर्चा काम आती है। इससे कथापात्र के अनुरूप अभिनेता के चयन में ठीक दिशा मिल जाती है।

मंच की अवधारणा

  • प्रकाश, शब्द-विन्यास, मेक-अप, मंच-निर्माण आदि मंच के अनिवार्य अंग हैं, हालांकि कक्षा-प्रस्तुति के समय स्कूल में उपलब्ध सामग्रियों से काम चला सकते हैं।

सृजनपरता

  • नाटक की पटकथा, मंचन के लिए एक रूपरेखा मात्र है। निदेशक तथा अभिनेता कल्पना और क्षमता के अनुरूप मंचन को सृजनात्मक बनाएँ।

प्रश्न 5.
हमें किसीसे लड़ाई करने की ज़रूरत नहीं।
उत्तर:
दीनदयाल का।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों के अर्थ को सूचित करनेवाले मुहावरे कोष्ठक से चुनकर लिखें। (धाक बैठ जाना, जान हथेली पर लेना, दुम दबाकर भागना)
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का बोलबाला है।
ii. गाँधीजी देश के लिए मरने तक को तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी डरकर भागेंगे।
उत्तर:
i. सरकार पर बड़े आदिमियों का धाक बैठ जाता है।
ii. गाँधीजी देश के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।
iii. पुलीस को देखने पर स्वराजी दुम दबाकर भागेंगे।

प्रश्न 7.
पहले दीनदयाल दूकान बंद कर जुलूस में भाग लेने का निश्चय नहीं करता है, क्यों?
उत्तर:
शहर के कोई बड़ा आदमी जुलूस में नहीं था। दीनदयाल में देशप्रेम की कमी तब थी।

प्रश्न 8.
मैकू क्यों हंस रहा है?
उत्तर:
शंभुनाथ और दीनदयाल की बातें सुनकर मैकू हंस रहा है।

प्रश्न 9.
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी कौन है? क्यों?
उत्तर:
मैकू की नज़र में बड़ा आदमी महात्मा गाँधी है। वे देश की स्वतंत्रता के लिए जान हथेली पर लेने के लिए तैयार होते थे।

प्रश्न 10.
स्वराजियों का मकसद क्या है?
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति है।

प्रश्न 11.
भाईबंद किसके हुक्म को साफ इनकार करेंगे? क्यों?
उत्तर:
अंग्रेजों के हुक्म को भाईबंद साफ इनकार करेंगे। यह – इसलिए कि भाईबंद स्वतंत्रता चाहते हैं।

प्रश्न 12.
स्वराजी क्यों दारोगा को अंग्रोज़ों का पिट्ठ कहते हैं?
उत्तर:
अंग्रोजों का आज्ञानुवर्ती है दारोगा। दारोगा के मन में देशप्रेम न होने के कारण स्वराजी ऐसा कहते हैं।’

प्रश्न 13.
‘मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ?’ यहाँ लोगों की मनोवृत्ति में कौन-सा परिवर्तन आया है?
उत्तर:
देशप्रेम की भावनाएँ उदित हो गयी हैं।

प्रश्न 14.
मैकू के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है मैकू। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है। नाटक में मैकू सड़क से लगे बाज़ार का एक दुकानदार है। वह चप्पल बेचनेवाला है। वह बड़ा हँसमुख आदमी है। मैकू अंग्रेज़ों और देशप्रेमहीन लोगों का बड़ा आलोचक है। मैकू कहता है : “जो हमारी दशा सुधारने के लिए अपनी जान हथेली पर लिए फिरता है, वह है महात्मा गाँधी। उसके आगे हमें किसी बड़े आदमी की परवाह नहीं।”

उसके दिल में बड़ा देशप्रेम है। भारत की स्वतंत्रता की प्रतीक्षा उसके दिल में दृढ़ रहती है। वह एक बार कहता है: “अब तो भाई, रुका नही जाता… मैं भी जुलूस में शामिल होऊँगा…..”

इस प्रकार हम देखते हैं कि इब्राहिम अली का चरित्र देशप्रेम, अहिंसावाद, प्रत्याशा, वीरता, आत्मविश्वास, दृढनिश्चय, ईमानदारी आदि से शोभित है।

प्रश्न 15.
शंभूनाथ के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपांतर का एक कथापात्र है शंभूनाथ। यह नाट्यरूपांतर की रचना चित्रा मुद्गल ने की है। इसका मूलरूप प्रेमचंद की ‘जुलूस’ कहानी है।

नाटक में शंभुनाथ सड़क से लगे बाजार का एक दूकानदार है। शंभुनाथ घटनाओं को नकारात्मक दृष्टि से देखनेवाला आदमी है। स्वतंत्रता सेनानियों का जुलूस देखकर शंभुनाथ अपनी नकारात्मक दृष्टि से कहता है: “सब के सब काल के मुँह में जा रहे हैं।” वह एक भीरु आदमी भी है। जुलूसवालों को देखकर वह कहता है: पुलिस …… मार-मार कर भगा देगी। शंभुनाथ हँसी-मज़ाक आदमी भी है। मैकु को चिढ़ाकर शंभुनाथ कहता है: “ठिठया काहे रहा? लगता है आज बिक्री अच्छी हो गयी है?” फिर भी, शंभुनाथ के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका देशप्रेम ही है। वह एक साहसी देशप्रेमी है। देश के लिए अपना जीवन बलि देने के लिए वह तैयार हो जाता है। इस दिशा में शंभुनाथ का यह कथन समर्थक है: “मैं कैसे अपनी दुकान खुली रख सकता हूँ? एक दिन तो मरना ही है, जो कुछ होना है हो….”

इस प्रकार हम देखते हैं कि शंभुनाथ का चरित्र देशप्रेम, प्रत्याशा, वीरता, दृढनिश्चय आदि से शोभित है।।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 1

प्रश्न 16.
बीरबल सिंह के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

Plus One Hindi जुलूस Important Questions and Answers

सूचनाः
जूलूस नाट्यरूपान्तर के बीरबलसिह के निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 1 का उत्तर लिखिए।

बीरबलसिंह

  • तुम लोगों को आगे जाने का हुक्म नहीं है।
  • फिर से सोच ले। बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा।
  • अभी तो वक्त है, इब्राहिम अली साहब….. आप मेरे सामने से हट जाएँ।

प्रश्न 1.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:

चरित्र चित्रण – बीरबल सिंह

बीरबल सिंह अंग्रेज़ सरकार के दारोगा है। वह एक भारतीय है फिर भी अंग्रेज़ों केलिए काम करते हैं। एक अधिकारी का भाव उस में है। वह सरकार के वफादार हैं। इसीलिए सरकारी हुक्म के बारे में कहते हैं। वह अपने शक्ति पर भरोसे रखते हैं। उसमें उत्साह की कमी भी नहीं हैं। वह इब्राहिम अली को आदर भी करते हैं। गुण और दोष से मिश्रित है बीरबल सिंह।

सूचनाः
जुलूस नाट्यारुपांतर के दीनदयाल का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न 2 का उत्तर लिखिए।

दीनदयाल

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • जुलूस के चौरास्ते पर पहुँचते ही हंटर लेकर बिल पड़ेगा।
  • दुकान बंद कर मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू!

प्रश्न 2.
इस कथन के आधार पर दीनदयाल के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दीनदयाल एक दूकानदार है। वह नाटक के आरंभ में केवल अपना काम करनेवाला दिखता है। लेकिन परिवर्तनशील पात्र हैं। पहले वह स्वराजियों के विरोध करता था। लेकिन अंत में वह भी स्वराजियों के साथ हो जाते हैं। वह एक साधारण व्यक्ति है। उसे अंग्रेज़ों से डर है। फिर भी वह जुलूस में भाग लेना चाहते हैं। एक अच्छा इनसान है वह। देश-प्रेम भी उनके मन में है।

सूचनाः
जुलूस नाट्यरूपांतर के बीरबलसिंह का निम्नलिखित कथन पढ़िये और प्रश्न का उत्तर लिखिए।

बीरबल सिंह

  • हमारा हुक्म क्या आपको सुनाई नहीं पड़ा?
  • फिर से सोच ले! बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा!
  • सिपाहियो! लाठी चार्ज करो!

प्रश्न 3.
इस कथन के आधार पर बीरबलसिंह से चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘जुलूस’ नाट्यरूपान्तर में प्रस्तुत पाठभाग में बीरबल सिंह का चरित्र खलनायक (aleyod) का है। बीरबल सिंह दारोगा है। जुलूस में निकले स्वतंत्रता सानानियों को रोकने के लिए वह प्रयत्न करता है। अंग्रेज़ों का आज्ञानुवर्ती बनकर स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी क्रूरता से वह मारता है। वह एक निर्दय दारोगा है। जुलूस का नेता इब्राहिम अली के ऊपर बीरबल सिंह घोड़े को चढ़ाता है। स्वराजियों के अभिप्राय में बीरबल सिंह “जल्लाद दारोगा! अंग्रेज़ों का पिठू है।” बीरबल सिंह का चरित्र इतना नीच होने पर भी, यह वास्तव है कि अंत में वह अपने देशद्रोही कर्मों पर पछताता है और सच्चा देशभक्त बन जाता है।

सूचना :
जुलूस नाट्यारुपान्त्र के इब्राहिम अली का निम्नलिखित कथन पकिए और प्रश्न 4 का उत्तर लिखिए। –

इब्राहिम अली

  • दारोगा साहब। मैं आपको अतमीनान दिलाता हूँ कि किसी किस्म का दंगा-फसाद न होगा।
  • वापस तो हम न जाएँगे। आपको या किसी को हमें रोकने का हक नहीं।
  • आप बेटन चलाएँ दारोगाजी।

प्रश्न 4.
इस कथन के आधार पर इब्राहिम अली के चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इब्राहिम अली
इब्राहिम अली जुलूस नाटक से एक प्रमुख पात्र है। वह स्वतंत्रता सेनानियों के नेता है। एक नेता के लिए सभी आवश्यक गुण उसमें हैं। वह अपने आप पर भरोसा रखते हैं और अपने पास रहनेवाले लोगों के बारे में भी सोचते हैं। वह अपने वचन निभाने के लिए तैयार है। वह अहिंसावादी है। इसलिए दंगा-फसाद करना नहीं चाहता। वह अपने हक को पूरी तरह समझते है और निडर भी है। दारोगा के बेटन से नहीं डरते हैं। एक सच्चा नेता, मानवतावादी, अहिंसावादी और परोपकारी है इब्राहिम अली।

सूचनाः
‘जुलूस’ के दीनदयाल के ये कथन पढ़िये और प्रश्न 5 का उत्तर लिखिए।

  • जुलूस निकालने से स्वराज मिल जाता तो कब का मिल गया होता।
  • नया दरोगा बीरबल सिंह बड़ा जल्लाद है मैकू।
  • दुकान बंद कर, मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ मैकू।

प्रश्न 5.
कथनों के आधार पर दीनदयाल का चरित्रचित्रण कीजिए।
उत्तर:
दीनदयाल जुलूस का एक पात्र है। वह बाज़ार में एक दूकान चलाता है। स्वराजियों के प्रति पहले उसके मन में घृणा थी। लेकिन जब उसे यह पहचान हुआ कि ये स्वराजी लोग भारत के लिए ही जुलूस चला रहे हैं और अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन चला रहे हैं, तब उसकी चिंताओं में बदलाव भी आ जाता है। अंत में वह भी जुलूस में भाग लेता है। वह सच्चा देशप्रेमी एवं ईमानदार है।

जुलूस Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 5

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 6

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 7

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 10

जुलूस Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 14
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 15
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 4 जुलूस 16

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है

कोलाज देखें
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 1
प्रश्न 1.
इस दृश्य ने आपके दिल में कौन-सी प्रतिक्रिया जगाई?
उत्तरः
हमारे देश में बालश्रम करनेवाले कई बच्चे हैं। कठिन काम करके जीते समय भी उनके मन में कई प्रतीक्षाएँ रहती हैं। बालश्रम रूपी बाज. निरीह बचपनों को उठाते वक्त भी वे अपना भविष्य सुंदर आशावरी आँखों से देखने को उत्सुक रहते हैं।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 12

प्रश्न 2.
पादटिप्पणी की परख, मेरी ओर से
उत्तरः
बालश्रमः घातक गीध

प्रश्न 3.
लक्ष्यार्थ पर केंद्रित है।

प्रश्न 4.
समूचे भाव को आत्मसात किया है।

प्रश्न 5.
प्रभावशाली है।

प्रश्न 6.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी के नाम पत्र..
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नाम हरिता एम
2. डाक का पूरा पता हरितम, शांति नगर, तिरुवनंतपुरम22
3. सूचना का विषय बालश्रम को रोकने के लिए रोज़गार मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित।
4. माँगी गई सूचना का विवरण 1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? तो बालश्रम रोकने और उसके खिलाफ़ समाज को सचेत करने के कौन कौन से प्रावधान हैं?
2. मंत्रालय द्वारा रोज़गार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? कार्यालय का दूरभाषा उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम के लिए प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?
5. सूचना डाक या दस्ती में। डाक द्वारा।

तिरुवनंतपुरम
10-07-2014

(हस्ताक्षर)
हरिता एम
उत्तरः

दस रूपए

प्रेषक,
हरिता. एम
हरितम, शांति नगर
तिरुवनंतपुरम

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली

महोदय,
विषय: बालश्रम को रोकने की कार्रवाइयों से संबंधित।
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005

1. क्या भारत में बालश्रम पर कानूनी रोक है? समाज को सचेत करने के लिए कौन-कौन से प्राविधान हैं?
2. रोजगार जगहों में सूचना पट लगवाने की कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. बालश्रम के बारे में पता चलने पर किस कार्यालय में सूचना देनी है? उस कार्यालय का दूरभाष उपलब्ध करा सकते हैं? बालश्रम को प्रेरित करनेवालों को मिलनेवाला अधिकतम दंड क्या है?

भवदीय,
(हस्ताक्षर)
हरिता. एम.

तिरुवनंतपुरम,
10-07-2014

यह हमारा अधिकार है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 7.
पत्र के आधार पर लिखें।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 2

उत्तरः
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 3

पाठकनामा पढ़ें

सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
को बड़ी परेशानी होती है।
चिट्टारिपरंब में लगभग तीन
अधिकारियों के सामने कई
हज़ार छात्र अध्ययन कर रहे
बार यह समस्या लाई गई. पर
है। वे शहर की विभिन्न जगहों
काई फायदा नहीं हआ। जल्द
से आते हैं। अधिकांश छात्र
ही-जल्द इसपर कार्रवाई करने
बस का सहारा लेते हैं। बस
की ज़रूरत है।
कम होने की वजह से छात्रों

– राजेश कुमार
सदस्य, अध्यापक-अभिभावक संघ

प्रश्न 8.
पाठकनामा के विषय पर क्या कार्रवाई की गई, उसकी जानकारी पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, जिला परिवहन कार्यालय, कण्णूर के नाम एक सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तरः
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
सड़क परिवहन कार्यालय,
कण्णूर।

1. आवेदक का नाम राजेश कुमार
2. डाक का पूरा पता राजेश भवन, चिट्टारिपरंब, कण्णूर 12.
3. सूचना का विषय बस्सों की कमी के बारे में सडक परिवहन कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना 1. नगरों से गाँव की ओर का विवरण ज्यादा बसें चलाने केलिए कौन कौन से प्राविधान हैं?
2. विद्यार्थियों की यात्रा संबंधी परेशानियाँ दूर करने केलिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

कण्णूर
15.03.2016

आवेदक,
(हस्ताक्षर)
राजेश कुमार (सदस्य अध्यापक अभिभावक संघ)
जी.ऐच्य.एस.एस.
चिट्टारिपरंय, कण्णूर 12.

प्रश्न 9.
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 13
उत्तरः
प्रेषक,
के, राजेशकुमार
सदस्य, अध्यापक अभिभावक संध
सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल
चिट्टारिपरंब, कण्णूर

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
सड़क परिवहन कार्यालय
कण्णूर 12

महोदय,
विषय: सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, चिट्टारिपरंब के छात्रों की परिवहन की कार्रवाइयों की सूचना प्राप्त करने से संबंधित
संदर्भ: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

1. स्कूली छात्रों के परिवहन संबंधी कानूनी अधिकार क्या क्या है?
2. छात्रों के परिवहन अधिकार को लगू करने के लिए परिवहन-मंत्रालय द्वारा कौन-कौन सी कार्रवाइयाँ ली गई हैं?
3. चिट्टारिपरंब में छात्रों को समस्या दूर करने के लिए कौन-कौन से कार्य किए गए हैं?

कण्णूर
10.8.2014

भवदीय
(हस्ताक्षर)
के. राजेशकुमार

पाठकनामक पढ़ें

विजयनगर में पानी बहुत कम मात्रा में आता है और वह भी अशुद्ध होता है। इस सन्दर्भ में हम समय-समय पर अधिकारियों का ध्यान इस और अकृष्ट कराते आए हैं, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया तथा अभी तक कोई कार्यवाही भी नहीं हुई।…..

अजय शर्मा
75/496 जयपूर

प्रश्न 10.
पाठनामा के विषय पर क्या कारवाई की गई, जानकारी पाने केलिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, लोक कर्म विभाग, जयपूर के नाम एक सूचना आधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
लोक कर्म विभाग,
जयपूर।

1. आवेदक का नाम अजय शर्मा
2. डाक का पूरा पता विजय नगर, 75/496 जयपूर
3. सूचना का विषय विजयनगर की पानी समस्या के संबंधित में की गयी कार्रवाइयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण 1. विजयनगर में पानी कम मात्रा में और वह भी अशुद्ध आने के संबंध में क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी है?
2. स्थल अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने केलिए की गयी बातों पर क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

विजय नगर
15.03.2016

अजय शर्मा,
विजय नगर, 75/496 जयपूर

सब्जियों में विषैले वरत्तुओं का प्रयोग

अशोक नगर: रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हैं। केरल के अधिकांश लोग इस बात से वाकिफ नही है। खाद्य पर जितने भी रासायनिक वस्तुओं का प्रयोग हो रहा है, वे स्वास्थ्य केलिए हानिकारक है। कैंसर जैसे बीमारियाँ बढ़ाती है।

प्रश्न 11.
श्रीमती सरलादेवी, 8/375, अशोकनगर, कोट्टयम, रासायनिक प्रयोगों को रोकने केलिए सरकार की ओर से की गयी कारवाइयों की सूचना पाने केलिए राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर, (State Food Safety Commissioner) तैय्क्काड़, तिरुवनन्दपुरम के नाम एक सूचना आधिकार पत्र लिखती है। वह सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
राज्य खाद्य सुरक्षा कम्मीशनर,
तैयक्काड़,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नाम श्रीमती सरलादेवी
2. डाक का पूरा पता 8/375, अशोक नगर, कोट्टयम
3. सूचना का विषय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रूप में सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोग से संबंधित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण 1. रामपुरा से केरल में आ रही सब्जियों में विषैले रासायनिक वस्तुओं के प्रयोगों को रोकने के लिए क्या क्या कार्रवाइयाँ ली गयी हैं?
2. खाध्य पदार्थों में विषैले रासायनिक वस्तुओं की उपस्थिति को रोकने केलिए सरकार की ओर से क्या क्या प्राविधान लिए गये हैं?
5. सूचना डाक या दस्ती में  डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कोट्टयम
15.03.2016

श्रीमती सरलादेवी,
8/375 अशोक नगर, कोट्टयम

यह रपट पढ़ें।

वर्षकालीन बीमारियाँः स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर आलप्पुषा: केरल में वर्षाकालीन बीमारियां फैल रही हैं। बीमारियों की स्थाई रोकधाम की माँग ज़ोर पकड़ रही है। इस दिशा में सरकार हर साल लाखों रुपए व्यय कर रही है। मलेरिया, डेंगु और अन्य जलजन्य रोगों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएँ बनाई हैं।….

प्रश्न 12.
वर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए गिरीश कुमार, अशोक विहार, आलप्पुषा की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
स्वास्थ्य विभाग,
केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नाम गिरीश कुमार
2. डाक का पूरा पता अशोक विहार, आलप्पुषा
3. सूचना का विषय वर्षकालीन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा की गई कार्रवाइयों से संबन्धित।
4. माँगी गयी सूचना का विवरण 1. वर्षकालीन रोगों की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गई?
2. नगरपालिका द्वारा विविध प्रकार के जलजन्य रोगों के सूचनापट लगवाने का प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में  डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

आलप्पुषा
15.03.2016

गिरीश कुमार,
अशोक विहार, आलप्पुषा

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

स्कूल में गंदगी:
संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा
1000 छात्रों के लिए तीन शौचालय
स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री

प्रश्न 13.
स्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए सरकार द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए सुमन, सदस्य, अध्यापक अभिभावक संघ, सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल, पालक्काड़ की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, शिक्षा विभाग, केरल सरकार, तिरुवनंतपुरम् के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
शिक्षा विभाग, केरल सरकार,
तिरुवनन्तपुरम।

1. आवेदक का नाम सुमन
2, डाक का पूरा पता जी. एच. एस. एस. पालक्काड
3. सूचना का विषय स्कूल और आसपास को स्वच्छ रखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा किए जानेवाले कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना का विवरण 1. स्वच्छता की सीख स्कूली जीवन से होनी चाहिए: मंत्री के इस आज्ञा को प्रायोगिक बनाने के लिए क्या क्या कारवाईयाँ की गयी?
2 स्कूल में गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने के खतरे के बारे में प्रधान अध्यापकों को सूचना देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में  डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

पालक्काड
15.03.2016

सुमन,
जी. एच. एस. एस. पालक्काड

निम्न सुर्खियाँ पढ़िए।

दहेज कम होने पर दुल्हें ने शादी से इनकार कर दिया।
दहेज माँगा: युवक की गिरफ्तारी
दहेज के विरोध में महिलाओं का जुलूस

प्रश्न 14.
सार्वजनिक सूचना अधिकारी, समाज कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम दहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में सूचना पाने के लिए मनीषा परवीण, रागविहार, तिरुवनंतपुरम सूचना का अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए

सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
समाज कल्याण मंत्रालय,
नई दिल्ली।

1. आवेदक का नाम मनीषा परवीण
2 डाक का पूरा पता रागविहार, तिरुवनंतपुरम
3. सूचना का विषय दहेजप्रथा पर कानूनी रोक के संबंध में समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. मांगी गयी सूचना 1. दवेदप्रथा की रोकधाम का विवरण के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा दहेजप्रथा की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डाक या दस्ती में डाक द्वारा  डाक द्वारा

आवेदक.
(हस्ताक्षर)

तिरुवनंतपुरम
15.03.2016

मनीषा परवीण,
रागविहार, तिरुवनंतपुरम

निम्न सुर्खियाँ पकिए।

देश में नारी-उत्पीडन पर रोक की जरूरत
नारी-उत्पीडन रोकने के लिए सरकार कटिबद्ध
नारी-उत्पीडन: कानूनी दंड अपर्याप्त

प्रश्न 15.
कुमारी अंजली, 13 सी / कण्णूर, नारी-उत्पीडन रोकने की दिशा में सरकार की ओर से की गई कार्रवाइयों की सूचना पाने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी, गृह विभाग, केरल सरकार के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार करती है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:
दस रूपए
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी,
गृह विभाग,
केरल सरकार

1. आवेदक का नाम कुमारी अंजली
2. डाक का पूरा पता 13 सी / कण्णूर।
3. सूचना का विषय नारी उत्पीडन रोकने के लिए सरकार द्वारा की गयी कारवाईयों से संबंधित
4. माँगी गयी सूचना का विवरण 1. नारी उत्पीडन की रोकधाम के लिए अब तक क्या क्या कारवाईयाँ की गयी हैं?
2. गृह विभाग, केरल सरकार द्वारा नारीउत्पीडन की रोकधाम के संबंध में आमजनता को जानकारी देने के लिए कोई प्रबन्ध किया या नहीं?
5. सूचना डक या दस्ती में  डाक द्वारा

आवेदक,
(हस्ताक्षर)

कण्णूर
15.03.2016

कुमारी अंजली,
13 सी / कण्णूर

Plus One Hindi यह हमारा अधिकार है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न सुखियाँ पढ़िए।
सुरक्षा की कमी: रेल-गाड़ी में स्त्री पर आक्रमण
रेल-यात्रा में स्त्रियों की सुरक्षा पर अधिक जोर देना है: सुप्रीम कोर्ट
स्त्रियों की सुरक्षा के लिए रेलगाड़ी में ज्यादा पुलीस की नियुक्ति की जाएगीः रेल मंत्री

आजकल रेल-गाड़ी में स्त्रियों पर आक्रमण बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा की जानेवाली कारवाईयों की जानकारी पाने के लिए राकेश कुमार, मयूर विहार, नई दिल्ली की ओर से सार्वजनिक सूचना अधिकारी, रेल मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम सूचना अधिकार पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:
सेवा में,
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
रेल मंत्रालय, नई दिल्ली।

1. आवेदक का नाम राकेश कुमार
2. आवेदक का पता मयूर विहार, नई दिल्ली
3. सूचना का विषय रेलगाड़ी में स्त्रियों पर होनेवाले आक्रमण को रोकने केलिए की गई कार्यवाइयों से संबंधित
4. मांगी गई सूचना का विवरण 1. इस साल रेलगाड़ी में स्त्रियों पर कितना आक्रमण अभी तक हुआ है?
2. रेलगाड़ी में स्त्री सुरक्षा केलिए कौन कौन से प्रावधान है?
3. इसी मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किये हैं और कितने लोगों को सजा मिला है?
4. तकनीकी विकास से रेलगाड़ी के सुरक्षा में कोई नया सुविधा इस्तेमाल किया है या नहीं।
5. सूचना डाक या दस्ती में  डाक द्वारा

नई दिल्ली,
20.06.2016

आवेदक,
राकेश कुमार
मयूर विहार,
नई दिल्ली

यह हमारा अधिकार है Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 8

यह हमारा अधिकार है Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 3 यह हमारा अधिकार है 11

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु

प्रश्न 1.
सूखे तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
निराशा।

प्रश्न 2.
उषा शब्द किन-किन की ओर इशारा करता?
उत्तर:
प्राची में आनेवाली उषा प्रकाश-किरण के रूप में लालिमा लेकर आती है। कवि की रागात्मक दुनिया में आनेवाली उषा, प्रेमिका के रूप में जीवन में सौंदर्य की लालिमा लेकर आती है। संक्षेप में उषा प्रणयातुर दिलों में उपस्थित प्रतीक्षा,संतोष, तीव्रानुभूति आदि की ओर इशारा करता है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
छायावाद में कवि कोमल पदावलियों का प्रयोग करते थे। निम्नलिखित शब्दों के स्थान पर कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें।
वसंत, मौसम, भूमि, आकाश, जंगल, शिशिर, कलि, किसलय, मलयसमीर, आँख, कमल, प्रभात, पूरब, समुद्र, चाँद, रात
उत्तर:
वसंत = मधुऋतु
मौसम = दो दिन
भूमि = वसुधा
आकाश = नभ
जंगल = झाड़खंड
शिशिर = पतझड़
कलि = कुसुम
किसलय = पल्लव
मलयसमीर = मलयानिल
आँख = नयन
कमल = नलिन
प्रभात = उषा
पूरब = लघुप्राची
समुद्र = जलधि
चाँद = शशि
रात = निशि

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय व्यक्त करें।
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।
उत्तर:
प्रेम के ऐकांत सृजन कार्य में कोई बाधा उपस्थित नहीं करनी है। अपने में जो कुछ सुन्दर हैं, उसे प्रेम-युग्मों को देना है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित छायावादी प्रवृत्तियों को सूचित करनेवाली पंक्तियाँ लिखें।
प्रकृति चित्रण
मानवीकरण
सौंदर्यवर्णन
प्रेमानुभूति
उत्तर:
प्रकृति चित्रण – ‘जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी मेरी लघुप्राची में
मानवीकरण – ‘आ गई है भूली-सी यह मधुऋतु दो दिन को
सौंदर्यवर्णन – ‘हँसी भरे उस अरुण अधर का राग रंगेगा दिन को
प्रेमानुभूति – ‘चुंबन लेकर और जगाकर मानस नयल नलिन को

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की कविता है ‘मधुऋतु। यह एक सुंदर कविता है। ‘मधुऋतु’ छायावादी कविता है। कविता में वसंतऋतु का सुंदर वर्णन हुआ है। वसंतऋतु आ गया है। वह भूली-सी है। कवि उसे एक व्यथा – साथिन के समान देखते हैं। कवि अपने मन में उसके लिए छोटी कुटिया बना देते हैं। कवि कहते हैं कि प्रेमी रहता है भूमि और आकाश के बीच में। प्रेमविहीन लोग यहीं पर नहीं रहते। कवि का प्रेम वसंतऋतु रूपी प्रेमिका से हुआ है। इससे कवि के हृदय प्रेममय हो गया है। इस प्रेममय वातावरण में आशा के नये अंकुर झूलते हैं। इस प्रेममय वातावरण में मलयानिल बहकर आता है। उसकी लहरें सिहर मर देती है। मलयानिल कवि के मानस नयन नलिन को चुंबन करके जगाता है।

वसंतऋतु में प्रभात लालिमा से भरा-हुआ रहता है। संसार में हमेशा रोशनी भी रहती है। वसंतऋतु में चाँदनी फैल जाती है और प्रकृति डिम की बूंदों की वर्षा करती है। वसंतऋतु में प्रेम का एकांत सृजन कार्य होता है। कवि निवेदन करते हैं कि इस में किसी को बाधा उपस्थित नहीं करनी है। कवि का उपदेश है अपने में जो कुछ सुन्दर है उसे प्रेम-युग्मों को दे देना है। ‘मधुऋतु’ में प्रकृति चित्रण, मानवीकरण, सौंदर्यवर्णन, प्रेमानुभूति आदि छायावादी प्रवृत्तियों का सुन्दर समावेश हुआ है। पदावली अत्यंत कोमल है। पंक्तियों का आशय आसानी से समझ सकते हैं। शीर्षक सार्थक और संगत है।

प्रश्न 5.
आस्वादन-टिप्पणी की परख, मेरी ओर से कवि का परिचय है।
उत्तरः
ये पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। वसंतऋतु आ गया है। वह एक साथिन के समान है। उसका मन व्यथा से भरपूर है। मैं उसके लिए एक सुंदर कुटिया बना दूंगा। प्रणयहीन दिलवाले लोगों को यहाँ पर प्रवेश निषेध है। वसंतऋतु के आगमन के कारण मेरे मन में नयी नयी आशाएँ एवं प्रतीक्षाएँ भर रही हैं। अब मेरा जीवन किसलयों से निर्मित लघुभव-सा हो गया है। मेरा यह सुंदर जीवन किसी को कोई कष्ट न देनेवाला है। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है-यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है।

प्रश्न 6.
कविता की काव्यधारा और रचनाकाल की सूचना है।
उत्तर:
* प्रकृति वर्णन
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को

* प्रेम
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!

* सौंदर्य
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में

* मानवीकरण
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को

* लाक्षणिकता
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,

* चित्रमयता
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!

* काल्पनिकता
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो

* कोमलकांत पदावली
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो

* मधुरता
अंधकार का जलधि लाँधकर
आवेंगी शशि-किरनें

* सरसता
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

प्रश्न 7.
कविता का सार है।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु कविता से है। प्रसाद छायावादी कविता के क्षेत्र के प्रमुख है। झरना, लहर, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। प्रेम, प्रकृति,सौंदर्य, मानवीकरण आदि छायावादी कविताओं की सभी विशेषतायें आपके कविता में देख सकते हैं। वसंद (मधुऋतु) आने पर प्रकृति में कई प्रकार के परिवर्तन आते हैं। इन परिवर्तनों को कवितांश में प्रकट किया है। आशा के नए-नए अंकुर झूलेंगे और पल्लव रोमांचित हो जाएँगे। मेरे किसलय का लघु मनोहर संसार किसको बुरा लगेगा यानि किसीको बुरा नहीं लगेगा। रोमांचित मलयानिल की लहरें काँपते हुए आएँगी और मन में नयनरूपी कमल को चूमकर जगाएँगी। यहाँ कवि सरल शब्दों में वसंद के आगमन के साथ आनेवाली परिवर्तनों को दिखाया है। परिवर्तनल के लिए हमारा मन परिवर्तन बहुत आवश्यक है। हमें अच्छे बातों को स्वीकार करना ज़रूरी है। यह प्रासंगिक कविता है।

प्रश्न 8.
अपने दृष्टिकोण में कविता का विश्लेषण किया है।
(काव्यधारा और रचनाकाल के अनुरूप भाषा, प्रतीक आदि।)
उत्तर:
प्रकृति वर्णन, प्रेम, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रसयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि हैं।

प्रश्न 9.
इन बिंदुओं पर ध्यान देते हुए कविता का आलाप करें।
भावानुकूल प्रस्तुति
उचित ताल-लय
सटीक शब्द-विन्यास

प्रश्न 10.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मधुऋतु
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूँ,
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे उपर नभ हो,
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में।
भागो सूखे तिनको!
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा किनको?

i) इन पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद।

ii) ‘जंगल’ का समानार्थी शब्द कवितांश से ढूँढकर लिखें।
उत्तर:
झाड़खंड।

iii) ‘भागो सूखे-तिनको’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वसंत ऋतु में पतझड़ के सूखे तिनकों-पत्तों का कोई स्थान नहीं होता, ठीक उसी प्रकार प्रणयातुर दिल में दुख और निराशा का भी कोई स्थान नहीं। प्रणयहीन दिलों को प्रणय के दुनिया में कोई जगह नहीं है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।
जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी
मेरी लघुप्राची में,
हँसी भरे उस अरुण अधर का
राग रँगेगा दिन को।
अंधकार का जलधि लाँघकर
आवेंगी शशि-किरने
अंतरिक्ष छिड़केगा कन-कन
निशि में मधुर तुहिन को
इस एकांत सृजन में कोई
कुछ बाधा मत डालो
जो कुछ अपने सुंदर से हैं
दे देने दो इनको।

i) मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरके कॉपती।

ii) प्रेमिका के कमल-नयनों को कौन चूमता है?
उत्तर:
मलयानिल।

iii) रात में हिमकणों को कौन छिड़कता है?
उत्तर:
अंतरिक्ष।

iv) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
पंक्तियाँ ‘मधुऋतु’ कविता से प्रस्तुत हैं। ‘मधुऋतु’ एक सुंदर छायावादी कविता है। ‘मधुऋतु’ की रचना की है कवि जयशंकर प्रसाद ने। हिंदी के सुप्रसिद्ध छायावादी कवि हैं जयशंकर प्रसाद। प्रकृति सदा सक्रिय रहती है। वह अपने आपको सदा अलंकृत रहती है। हमें प्रकृति में कोई बाधा न डालनी चाहिए। हमें प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ाने में सदा तत्पर रहना चाहिए। हमसे प्रकृति का विनाश नहीं, बल्कि प्रकृति का संरक्षण होना चाहिए। छायावादी कविता से युक्त प्रेम, प्रकृति वर्णन, सौंदर्य, मानवीकरण, लाक्षणिकता, चित्रमयता, काल्पनिकता, कोमलकांत पदावली, मधुरता, सरसता आदि गुणों से संपन्न है प्रस्तुत कवितांश। हमें दूसरों की जिंदगी में कोई बाधा न डालनी है यह संदेश कवितांश द्वारा कवि हमें देते हैं। साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्यार रखने का संदेश भी हमें मिलता है। प्रकृति संरक्षण, पारस्परिक प्रेम समभाव, सक्रियात्मकता आदि का भी संदेश हमें इस कवितांश से मिलता है।

प्रश्न 12.
‘अरे आ गई है भूली सी यह’ – कौन आ गई है?
उत्तर:
मधुऋतु’।

प्रश्न 13.
‘मधुऋतु’ रूपी प्रेमिका क्यों भूली-भटकती-सी आई है?
उत्तर:
प्रेमिका के मन में प्रेमी के प्रति तीव्र अनुराग है। कोई भी प्रेमिका अपनी प्रणय भावना खुल्लम-खुल्ला प्रकट करना नहीं चाहती। दिल में प्रणय छिपाकर वह भूली-भटकी सी आ रही है।

प्रश्न 14.
प्रेमी नई व्यथा-साथिन के लिए क्या करना चाहता है?
उत्तर:
छोटी -सी कुटिया रच देना चाहती है।

प्रश्न 15.
प्रेम का नीड़ कहाँ स्थित है?
उत्तर:
नीचे की वसुधा और ऊपर के नभ-दोनों से अलग।

प्रश्न 16.
जंगल के पतझड़ में किसको भाग जाना है?
उत्तर:
सूखे तिनके को (प्रणयहीन दिलवाले लोगों को)।।

प्रश्न 17.
वसंत के आगमन पर कौन-सी ऋतु चली जाती है?
उत्तर:
शिशिर (पतझड़ की ऋतु)

प्रश्न 18.
‘पतझड़’ का समानार्थी शब्द क्या है?
उत्तर:
शिशिर।

प्रश्न 19.
पतझड़ (शिशिर) की क्या क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
झाड़खंड में पतझड़ होता है। तिनके, पत्ते आदि सूखकर नीरस और शुष्क बन जाता है।

प्रश्न 20.
वसंत की विशेषताएँ क्या क्या होती है?
उत्तर:
अंकुर झूलते हैं। पल्लव पुलकित हो जाते हैं। मलयानिल की लहरों से नलिन खिल जाते हैं। जवा कुसुम-सी उषा खिलेगी। अंधकार का जलधि लाँघकर शशि-किरण आती हैं। निशि में अंतरिक्ष मधुर तुहिन छिड़केगा।

प्रश्न 21.
वसंत किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
प्रेम और आशा से प्रणयातुर दिल को मोहक और मादक बनानेवाली प्रेयसी का प्रतीक होता है।

प्रश्न 22.
अगर वसंत प्रेम और आशा का प्रतीक है तो पतझड़ किन-किन का प्रतीक हो सकता है?
उत्तर:
दुख और निराशा से भरे प्रणयहीन दिलों का प्रतीक होता है।

प्रश्न 23.
वसंत के आगमन से प्रेमी के मन में किसका अंकुर झूलने लगता है?
उत्तर:
आशा के अंकुर।

प्रश्न 24.
लाल कुसुम के समान उषा कहाँ खिलेगी?
उत्तर:
कवि के लघुप्राथी में।

प्रश्न 25.
उषा कहाँ उदित होती है?
उत्तर:
लघुप्राची में।

प्रश्न 26.
उदय के समय आसमान में कौन सा रंग फैल जाता है?
उत्तर:
लाल रंग।

प्रश्न 27.
उषा का आगमन कैसा है?
उत्तर:
जवा कुसुम-सी।

प्रश्न 28.
अंधकार के सागर को पारकर कौन आता है?
उत्तर:
शशि-किरने।

प्रश्न 29.
प्रेमयुग्मों को आपस में क्या दे देना है?
उत्तर:
जो कुछ अपने सुंदर से हैं-उनको दे देना है।

प्रश्न 30.
वसंत ऋतु में प्रकृति को मोहक बनानेवाले अंग कौनकौन से हैं?
उत्तर:
वसंत ऋतु में प्रकृति को खूबसूरती प्रदान करने में अंकुर, किसलय, कलियाँ, फूल, पत्ते, तित्तली, भ्रमर, कोयल, मंदपवन सबकी अपनी-अपनी भूमिका है।

प्रश्न 31.
‘मेरे किसलय का लघुभव’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी एक के बिना प्रकृति की सुंदरता अधूरी रह जाती है। उस सुंदरता में किसलय भी अपना एक छोटा संसार रचता है।

प्रश्न 32.
एकांत में कौन बैठे हैं?
उत्तर:
प्रेमयुग्म।

प्रश्न 33.
‘कुछ बाधा मत डालो’ कवि क्यों ऐसा कहता है?
उत्तर:
वसंतकाल अपनी संपूर्ण भंगिमा के साथ पूरे प्रकृति में छा रहा है। इस एकांत सृजन कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। वसंतकाल में वसंत और प्रकृति अपनी सुंदरतम चीज़ों को बिना माँगे आपस में समर्पित करते हैं। यही समर्पण सृजन सौंदर्य का रहस्य होता है। प्रेमिका अपने संपूर्ण रूप – सौंदर्य से युक्त होकर प्रेमी के जीवन में छा रही है। प्रेमी – प्रेमिका के मिलन और प्रणय-सृजन के अपूर्व एवं रहस्यमयी बेला में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 34.
सृजन का सौंदर्य कैसे पूर्ण होता है?
उत्तर:
प्रेम के चरमोत्कर्ष क्षणों में प्रेमी-प्रेमिका का दुवैतभाव समाप्त हो जाता है और दोनों एकाकार हो जाते हैं। सृजन के वे क्षण सृष्टि के सुंदरतम सौंदर्य की वेला भी है।

Plus One Hindi मधुऋतु Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
अरे आ गई है भूली-सी
यह मधुऋतु दो दिन को,
छोटी-सी कुटिया मैं रच दूं.
नई व्यथा साथिन को!
वसुधा नीचे ऊपर नभ हो.
नीड़ अलग सबसे हो,
झाड़खंड के चिर पतझड़ में
भागो सूखे तिनको!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 2.
कविता के ‘नम’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (आकाश, नीड़, भूमि, पतझड़)
उत्तर:
आकाश

प्रश्न 3.
वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को क्या करना है?
उत्तर:
कवि कहते हैं कि वसंत के आगमन पर सूखे तिनकों को भागना है क्योंकि वसंत नयी प्रतीक्षा का समय है।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश श्री जयशंकर प्रसाद के मधुऋतु नामक कविता से है। प्रसाद जी छायावादी कवियों में अग्रणी है। झरना, आँसू, कामायनी आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। कवि के साधारण जीवन में वसंत ऋतु अचानक आ गई है। वसंत काल केवल कुछ दिन केलिए आता है। इसलिए कवि अपनी छोटी सी कुटिया में प्रेम के नई व्यथा सहेली केलिए रचना चाहता है। कवि का कहना है कि वह अपना नीड़ यानी घर धरती और आकाश के बीच सृजन करना चाहता है। प्रेम साधारण जीवन से परे है। अपने जीवन रूपी जंगल से सूखे तिनकों को भागने केलिए कवि कहते है क्योंकि वसंत केलिए वह अपने आपको सजाना चाहता है।

यहाँ कवि तत्सम शब्दों से प्रेम और उसकी पीड़ा का वर्णन करते हैं। जीवन में कुछ खोने से ही कुछ प्राप्त करेगा। यह एक छात्रानुकूल कविता हैं। नयी पीढ़ी को आह्वान करते है कि त्याग से ही हमारे जीवन में तरक्की होगा।

सूचना :

निम्नलिखित कवितांश पदें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा. किनको?
सिहर भरी कैंपती आवेंगी
मलयानिल की लहरें,
चुंबन लेकर और जगाकर
मानस नयन नलिन को।

प्रश्न 5.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
मधुऋतु

प्रश्न 6.
कविता के ‘नयन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (कमल, आँख, हवा, लहर)
उत्तर:
आँख

प्रश्न 7.
मलयानिल की लहरें कैसे आती हैं?
उत्तर:
सिहर भरी कैंपती आवेंगी मलयानिल की लहरें।

मधुऋतु Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 1
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 4

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 12

मधुऋतु Glossary

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 2 मधुऋतु 14

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप

प्रश्न 1.
‘उसे शाक-सा लगा’ क्यों?
अनुताप
“बाबूजी आइए…… मैं पहुँचाए देता हूँ।”
एक रिक्शेवाले ने उसके नज़दीक आकर कहा,
“असलम अब नहीं आएगा।” “क्या हुआ उसको?”
रिक्शे में बैठते हुए उसने लापरवाही से पूछा। पिछले
चार-पाँच दिनों से असलम ही उसे दफ्तर पहुंचाता रहा था।

“बाबूजी, असलम नहीं रहा…”
“क्या?”
उसे शाक-सा लगा,
“कल तो भला चंगा था।
“उसके दोनों गुर्दो में खराबी थी, डाक्टर ने रिक्शा
चलाने से मना कर रखा था,”
उसकी आवाज़ में गहरी उदासी थी,
“कल आपको दफ्तर पहुंचाकर लौटा तो पेशाब बंद हो
गया था, अस्पताल ले जाते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था ……”
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 1
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 2

प्रश्न 2.
इनके साथ हमदर्दी जताना बेवकूफ़ी होगीयहाँ यात्री का कौनसा मनोभाव प्रकट हो रहा है?
उत्तर:
श्रमिक वर्ग के प्रति उपेक्षा का मनोभाव और सहजीव के प्रति संवेदना हीनता का मनोभाव।

प्रश्न 3.
वह किसी अपराधी की भाँति सिर झुकाए रिक्शे के साथ-साथ चल रहा था, क्यों?
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 3

अनुताप अनुवर्ती कार्य

ये प्रसंग किन-किन पात्रों से संबंधित हैं?

प्रश्न 4.
i) उसे शाक-सा लगा। उसकी
ii) आवाज़ में गहरी उदासी थी।
iii) उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
iv) कल की घटना उसकी आँखों के आगे सजीव हो उठी।
v) एकबारगी उसकी इच्छा हुई कि रिक्शे से उतर जाए।
vi) किसी कार के हार्न से चौंककर वह वर्तमान में आ गया।
vii) उसके लिए यह चढ़ाई खास मायने नहीं रखती थी।
viii) वह अपराधी की भाँति सिर झुकाए चल रहा था।
उत्तर:
i) यात्री को शाक-सा लगा।
ii) रिक्शेवाले की आवाज़ में गहरी उदासी थी।
iii) असलम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
iv) कल की घटना यात्री की आँखों के आगे सजीव हो उठी।
v) एकबारगी यात्री की इच्छा हुई कि रिक्शे से उत्तर जाए।
vi) किसी कार के हार्न से चौककर यात्री वर्तमान में आ गया।
vii) रिक्शेवाले के लिए यह चढ़ाई खास मायने नहीं रखती थी।
viii) यात्री अपराधी की भाँति सिर झुकाए चल रहा था।

प्रश्न 5.
यात्री का मन संघर्ष से भरा था। वह अपना संघर्ष डायरी में लिख रहा है। वह डायरी लिखें।
उत्तर:

2014 माच 5. बुधवार

नटराज नगरः
आज मेरे लिए बड़ा मानसिक संघर्ष का दिन है। रिस्शेवाला असलम की मृत्यु की खबर सुनकर मैं व्याकुल हो गया। असलम के प्रति मुझसे हमदर्दी का अभाव हुआ। मेरा दिल पश्चाताप से उत्पन्न अनुताप से भरा है। नटराज टाकीज़ के पास की चढ़ाई पार करते समय मुझे असलम की रिक्शे से उतरना था। मैं नहीं जानता था कि असलम के गुर्यों में खराबी थी। मज़बूत कदकाठी रिक्शेवाले से हमदर्दी से मैंने ज़रूर व्यवहार किया। फिर भी मेरा आत्मसंघर्ष मैं कैसे निकालूँ?

असलम के प्रति मेरी श्रद्धांजलि…. हे भगवान! मुझे माफी दें….. भगवान मुझे अच्छी नींद दें।

प्रश्न 6.
असलम की मृत्यु की खबर
उत्तर:
पत्नी : लगता है आप बड़ी परेशानी में हैं?
यात्री : हैं… हाँ… आप ने ठीक समझी।
पत्नी : क्या हुआ?
यात्री : एक रिक्शावाला…
पत्नी : रिक्शावाला?
यात्री : मैं बताता हूँ।
पत्नी : हाँ…हाँ… क्या नाम है उसका?
यात्री : असलम।
पत्नी : आप और असलम के बीच….
यात्री : असलम की मृत्यु हो गयी।
पत्नी : अरे बापरे! कैसे?
यात्री : उसके दोनों गुदों में खराबी थी।
पत्नी : हे भगवान! तो?
यात्री : मैंने यह न जानकर उससे….
पत्नी : उससे?
यात्री : रिक्शा चला कर बिना हमदर्दी से व्यवहार किया।
पत्नी : आह!
यात्री : मैं पश्चाताप विवश हूँ।
पत्नी : मैं समझ सकती हूँ।
यात्री : पश्चाताप से उत्पन्न अनुताप से…..
पत्नी : अनुताप से…
यात्री : मेरे मन ने….,
पत्नी : साफ बताईए….
यात्री : मुझे उदास बना लिया है।
पत्नी : हाँ….हाँ… मैं ने अब समझ ली आप की परेशानी का कारण।
यात्री : मैं क्या करूँ?
पत्नी : चिंता छोडिए। असलम के परिवार के लिए कुछ हम कर देंगे।
यात्री : जरूर! आप एक चाय बनाईए।
पत्नी : जी हाँ….. अब तैयार होगा।

प्रश्न 7.
असलम के प्रति अपना व्यवहार
उत्तर:
यात्री अपराधी ही है। यह इसलिए है कि असलम के प्रति यात्री द्वारा दिखाई गयी उपेक्षा के कारण असलम की मृत्यु हो गयी थी।

प्रश्न 8.
हमदर्दी का अभाव
उत्तर:
अनुताप
सालों के बाद मैं उस दिन की याद में आत्मकथा लिखता हूँ। असलम नामक एक रिक्शावाला मुझे दफ्तर ले जाता था। एक दिन दफ्तर जाते समय असलम का साथी रिक्शावाले से मैंने समझा कि असलम मर गया है। असलम के दोनों गुर्दो में खराबी थी। डॉक्टर ने रिक्शा चलाने से उसे मना कर रखा था। मुझे यह नहीं मालूम था। यह न जानकर मैंने असलम से रिक्शा चलाया। रिक्शे में बैठ कर चढ़ाई पर मैंने उसे बड़ी परेशानी दी।

रिक्शा चलाते हुए असलम धीरे-धीरे कराह रहा था। बीच-बीच में एक हाथ से पेट पकड़ लेता था। दाहिना हाथ गद्दी पर जमाकर असलम बड़ी कठिनाई और परेशानी से चकाई पर रिक्शा खींच रहा था। वह बुरी तरह हाँफ रहा था। उसके गंजे सिर पर पसीने की नन्हीं नन्हीं बूंदें दिखाई देने लगी थीं। लेकिन असलम के प्रति मेरे व्यवहार में हमदर्दी का बड़ा अभाव हुआ था। आज सालों के बाद भी मेरे मन से असलम की दयनीय अवस्था का चित्र न मिट जाता। मेरा मन पश्चाताप से उत्पन्न अनुताप से आज भी भर रहा है। असलम! आप को मेडी श्रद्धांजली क्षमायाचना के रूप में मैं समर्पित करता हूँ।

प्रश्न 9.
पश्चाताप से उत्पन्न अनुताप
उत्तर:
मित्र : अरे! आप क्यों इतना उदास हैं?
यात्री : मैं…. उदास….
मित्र : हैं… हाँ… बड़ी उदासी मैं हैं आप
यात्री : आप ने ठीक समझा।
मित्र : अरे! बापरे! क्या हुआ?
यात्री : एक रिक्शावाला…
मित्र : हाँ…हाँ… क्या नाम है उसका?
यात्री : असलम।
मित्र : आप और असलम के बीच….
यात्री : असलम की मृत्यु हो गयी।
मित्र : अरे बापरे! कैसे?
यात्री : उसके दोनों गुदों में खराबी थी।
मित्र : हे भगवान! तो?
यात्री : मैंने यह न जानकर उससे….
मित्र : उससे?
यात्री : रिक्शा चला कर बिना हमदर्दी से व्यवहार किया।
मित्र : आह!
यात्री : मैं पश्चाताप विवश’हूँ।
मित्र : मैं समझ सकता हूँ।
यात्री : पश्चाताप से उत्पन्न अनुताप से…..
मित्र : अनुताप से…
यात्री : मेरे मन ने….
मित्र : साफ बताईए….
यात्री : मुझे उदास बना लिया है।
मित्र : हॉ….हाँ… मैं ने अब समझ लिया आप की उदासी का कारण।
यात्री : मैं क्या करूं?
मित्र : चिंता छोडिए। असलम के परिवार के लिए कुछ कर दीजिए।
यात्री : जरूर।

डायरी की परख, मेरी ओर से

प्रश्न 10.
घटना की सूचना है।
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 4

प्रश्न 11.
संवेदना की अनुभूति है।

प्रश्न 12.
आत्मसंघर्ष की अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 13.
आत्मपरक शैली है।
उत्तर:
कहानी
ii) अलारक्खी क्यों हताश थी?
iii) उपर्युक्त अंश का संक्षेपण करें।
iv) अलारक्खी के उस दिन की डायरी कल्पना करके लिखिए।
v) उपर्युक्त अंश केलिए उचित शीर्षक दें।

नीचे दिए मुद्दों के आधार पर अनुताप शीर्षक की सार्थकता पर अपना विचार प्रकट करें-

प्रश्न 14.
पाठ के केंद्र भाव को सूचित करता है।
उत्तर:
अनुताप’ शीर्षक बिलकुल सार्थक है। पाठ का केन्द्रभाव यात्री का अनुताप ही है। इसको यह शीर्षक ठीक सूचित करता है। पाठ पढ़कर चरमसीमा तक पहुँचने के लिए शीर्षक हमें प्रेरित करता है। पाठ का संक्षिप्त हम शीर्षक से समझ सकते हैं। इन कारणों से अनुताप शीर्षक सार्थक और संगत है।

प्रश्न 15.
चरमसीमा तक पढ़ने को प्रेरित करता है।

प्रश्न 16.
संक्षिप्त, पर स्पष्ट है।

प्रश्न 17.
सार्थक एवं संगत है।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित पाठभाग का अनुवाद मातृभाषा में कीजिए:
आगे वह कुछ नहीं सुन सका। एक सन्नाटे ने उसे अपने आगोश में ले लिया….। कल की घटना उसकी आँखों के आगे सजीव हो उठी। रिक्शा नटराज टाकीज़ पार कर बड़े डाकखाने की ओर जा रहा था। रिक्शा चलाते हुए असलम धीरे-धीरे कराह रहा था। बीच बीच में एक हाथ से पेट पकड़ लेता था। सामने डाक बंगले तक चढ़ाई ही चढ़ाई थी। एकबारगी उसकी इच्छा हुई थी कि रिक्शे से उतर जाए। अगले ही क्षण उसने खुद को समझाया था – रोज़ का मामला है….. कब तक उतरता रहेगा….. ये लोग नाटक भी खूब कर लेते हैं, इनके साथ हमदर्दी जताना बेवकूफी होगी….. अनाप-शनाप पैसे माँगते हैं, कुछ कहो तो सरे आम रिक्शे से उतर पड़ा था, दाहिना हाथ गद्दी पर जमाकर चढ़ाई पर रिक्शा खींच रहा था। वह बुरी तरह हाँफ रहा था, गंजे सिर पर पसीने की नन्हीं-नन्हीं बूंदे दिखाई देने लगी थीं…..।
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 6

प्रश्न 19.
‘उसे शाक-सा लगा’ – क्यों?
उत्तर:
असलम की आकस्मिक मृत्यु की खबर सुनकर और जीवन की क्षणिकता के बारे में सोचकर यात्री को शाक-सा लगा।

प्रश्न 20.
‘उसकी आवाज़ में गहरी उदासी थी। क्यों?
उत्तर:
अपने साथी असलम की मृत्यु के कारण और उसको नष्ट हो जाने के कारण रिकशेवाले की आवाज़ में गहरी उदासी थी।

प्रश्न 21.
‘वह किसी अपराधी की भाँति सिर झुकाए रिक्शे के साथ-साथ चल रहा था’, क्यों?
उत्तर:
अपने सहजीव के प्रति दिखाई गई उपेक्षा से उत्पन्न पश्चाताप के कारण।

प्रश्न 22.
ये प्रसंग किन-किन पात्रों से संबंधित हैं?

a. उसे शाक-सा लगा।
उत्तर:
यात्री से।

b. उसकी आवाज़ में गरही उदासी थी।
उत्तर:
मज़बूत कदकाठी रिक्शेवाले से।

c. उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
उत्तर:
असलम से।

d. कल की घटना उसकी आँखों के आगे सजीव हो उठी।
उत्तर:
यात्री से।

e. एकबारगी उसकी इच्छा हुई कि रिक्शे से उतर जाए।
उत्तर:
यात्री से।

f. किसी कार के हार्न से चौंककर वह वर्तमान में आ गया।
उत्तर:
यात्री से।

g. उसके लिए यह चढ़ाई खास मायने नहीं रखती थी।
उत्तर:
मज़बूत कदकाठी रिक्शेवाले से।

प्रश्न 23.
वह अपराधी की भाँति सिर झुकाए चल रहा था।
उत्तरः
यात्री से।

प्रश्न 24.
‘वह किसी अपराधी की भाँति सिर झुकाए रिकशे के साथ चल रहा था।’ अपराधी की भाँति कौन चल रहा था?
उत्तर:
यात्री।

प्रश्न 25.
यात्री सिर झुकाए रिकशे के साथ अपराधी जैसे क्यों चल रहा था?
उत्तर:
असलम के प्रति दिखाई गयी उपेक्षा से उत्पन्न पश्चाताप के कारण।

प्रश्न 26.
यात्री के मनोभाव के साथ ‘अनुताप’ लघुकथा के शीर्षक का कोई संबंध है?
उत्तर:
‘अनुताप’ शीर्षक से बिल्कुल संबंध है। यात्री द्वारा असलम के प्रति दिखाई गयी उपेक्षा के कारण असलम की मृत्यु हो गयी थी। यात्री के मन में इससे उत्पन्न पश्चाताप ‘अनुताप’ शीर्षक से संबंधित है।

प्रश्न 27.
‘वह किसी अपराधी की भाँति सिर झुकाए रिकशे के साथ चल रहा था। यात्री पश्चाताप से विवश होकर अपनी बहन को पत्र लिखता है। प्रस्तुत पत्र तैयार करें।
उत्तर:
स्थान,
तारीख,

प्रिय बहन रमा,
तुम कैसी हो? ठीक हो न? मैं यहाँ पर ठीक हूँ। फिर भी, दो दिनों से मेरा मन बहुत दुःखित है। मेरे परिचय का एक रिक्शवाला था। वह मुझे रोज दफ्तर ले चलता था। उसका नाम असलम है। कल असलम की आकस्मिक मृत्यु हो गयी। उसकी मृत्यु में मेरा भी दायित्व है। उसके दोनों गुों में खराबी थी। लेकिन उसके प्रति मेरी ओर से बड़ी उपेक्षा हो गयी। उसकी मृत्यु केलिए यह भी एक कारण बना। उसके प्रति मुझसे दिखाई गयी उपेक्षा से उत्पन्न पश्चाताप और अनुताप से मेरा मन विवश हो रहा है। असलम के प्रति मेरी श्रद्धांजलि जरूर है। फिर भी, रमा मैं विवश हूँ।

मुझे जवाब देकर सान्तवना देना।

(हस्ताक्षर)
तुम्हारा भाई

सेवा में,
रमा,
गाँधी नगर,
कोच्ची

प्रश्न 28.
सूचनाः यह गद्यांश पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों का उत्तर लिखें।
राम और श्याम अनाथ बालक थे। दिन भर काम करके वे जहाँ आश्रय मिलते वहाँ सो जाते थे। वे पढ़े-लिखे नहीं थे। बच्चे स्कूल जाते वक्त वे दोनों बडी इच्छा से देखते थे। एक दिन स्कूल जानेवाले एक बच्चे से उन्होंने अपने पढ़ने का आग्रह बताया। बच्चे ने स्कूल जाकर अपने अध्यापक से सारी बातें बताई। दूसरे दिन अध्यापक, प्रधानाध्यापक से चर्चा करके इन बालकों के पास आया। उनकी दीनता देखकर अध्यापक को बहुत दुख हुआ। उन्होने बालकों के पढ़ने का आग्रह भी समझा। वे उन दोनों को अपने घर ले गए, भोजन और कपडे दिए। स्कूल में भर्ती करवा दिया और रहने का आयोजन भी किया।

i) राम और श्याम के मन में क्या आग्रह था?
उत्तर:
पढ़ने का आग्रह था।

ii) अध्यापक को बहुत दुःख क्यों हुआ?
उत्तर:
राम और श्याम की दीनता देखकर

पढ़ने का आग्रह

अनाथ बालक राम और श्याम अनपढ़ थे। उनके मन में पढ़ने के लिए बड़ी इच्छा थी। उनकी इच्छा समझकरएक स्कूल के अध्यापक उन्हें मुफ्त में पढ़ने का प्रबंध कर दे दिया।

iv) संक्षेपण केलिए उचित शीर्षक दें।
उत्तर:
पढ़ने की इच्छा।

v) बच्चे ने स्कूल जाकर अपने अध्यापक से सारी बातें बताई। बच्चा और अध्यापक के बीच का वार्तालाप तैयार कीजिए।
उत्तर:
बच्चा : अध्यापक जी….
अध्यापक : हाँ…. हाँ… क्या बात है?
बच्चा : आज मैं स्कूल आते समय…..
अध्यापक : हाँ….. आगे बोलो…
बच्चा : दो अनाथ बालकों को देखा …..
अध्यापक : ओहो ……. फिर?
बच्चा : वे हमारे स्कूल में……
अध्यापक : स्कूल में?
बच्चा : पढ़ना चाहते हैं।
अध्यापक : अरे बापरे!
बच्चा : आप कृपया इनकी सहायता कीजिए।
अध्यापक : मैं प्रधान अध्यापक से बात करूँगा।
बच्चा : धन्यवाद गुरुजी।
अध्यापक : तुम क्लास जाओ।
बच्चा : जी गुरुजी।

अनुताप Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 8
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 11

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 12

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 13
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 14

अनुताप शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 15
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 16
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 1 Chapter 1 अनुताप 17