Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 15 कहना नहीं आता

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 15 कहना नहीं आता Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 15

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।

कहना नहीं आता
तुम्हें कहना नहीं आता
कहने क्यों चले आए
पहले कहना सीखो
फिर अपनी बात कहना

जिनके पास कहने को है
जो कहना चाहते हैं
जिन्हें कहना नहीं आता
मैं उनमें से एक हूँ।

प्रश्न 1.
‘तुम्हें कहना नहीं आता’
‘तुम्हें’ किन-किनका प्रतिनिधित्व करते हैं?
उत्तर:
भारत के शोषित और उपेक्षित लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न 2.
‘पहले कहना सीखो
फिर अपनी बात कहना’
ऐसा कौन कह रहा है?
उत्तर:
समाज का शक्तिशाली शोषक वर्ग

प्रश्न 3.
‘मैं उनमें से एक हूँ’
‘मैं’ किन-किनका प्रतिनिधि है?
उत्तर:
भारत में हाशिए पर छोडे गये शोषित और उपेक्षित जनता का प्रतिनिधि है।

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
निशब्द जनता
‘कहना नहीं आता’ एक प्रतीकात्मक कविता है। यह आधुनिक काव्य-शैली की कविता है। इसके कवि सुप्रसिद्ध हिंदी कवि पवन करण हैं।

भारतीय समाज के लगभग 80 प्रतिशत लोग हाशिए पर जीनेवाले हैं। वे शोषित और उपेक्षित हैं। वे अपनी पीड़ा और व्यथा मौन सहती हैं। वे अपनी बात कहना चाहते हैं, लेकिन उसे कहने का अवसर नहीं दिया जाता है। वे अपने संघर्ष कहने की कोशिश करते हैं, तो दुत्कारते हुए कहा जाता है ‘तुम्हें कहना कहाँ आता है।’ उनसे यह चेतावनी दी जाती है ‘जाओ पहले कहना सीखकर आओ। तब आकर अपनी बात कहना।’ कवि कहते हैं कि कवि भी इन बेचारों में से एक है जो कहना चाहते हैं, लेकिन चुप रहते हैं।

‘कहना नहीं आता’ भारत के विविधता भरे समाज के एक बड़ा भाग, जो शोषित और उपेक्षित है, उसका प्रतिनिधित्व करती है। कविता की भाषा सरल है, लेकिन प्रतीकात्मकता के कारण सशक्त है। छोटी कविता द्वारा बड़े यथार्थ को कवि ने प्रस्तुत किया है। भाषा प्रवाहमयी एवं साधारण जनता की समझ की है। कविता प्रासंगिक है। शीर्षक अत्यन्त प्रभावमय है।

Plus One Hindi कहना नहीं आता Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘हाशिएकृत नारी’ संगोष्ठी संबन्धी बातें;
उत्तरः
विषयः भगवान ने मनुष्य को नर और नारी दोनों की सृष्टि की। नर और नारी परस्पर पूरक हैं। एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं है। लेकिन संसार में समय की गति में नारी तिरस्कृत अवस्था में पड़ गयी। संसार-भर यह दुरवस्था लोक-सृष्टि के आरंभ से उपस्थित है। परिवर्तन तो ज़रूर हुए हैं। लेकिन आज भी नारी तिरस्कृत अवस्था में है। इस अवस्था को चर्चा के मुख्य विषय बनाकर संगोष्ठी चलाना सचमुच उचित है।

उपविषय -1 नारी की पार्श्ववत्कृत अवस्था का ऐतिहासिक दृष्टिकोण में।
उपविषय -2 नारी की पर्श्ववत्कृत अवस्था भारतीय दृष्टिकोण में।
उपविषय -3 धार्मिक ग्रन्थों में नारी संबंधी सिद्धान्त।
उपविषय -4 भारत की कुछ आदर्श महिलाएँ।
उपविषय -5 नारी ही नारी का शत्रु है।

उपसंहार : कुछ ऐसी महिलायें भारत में और अन्य देशों में ज़रूर हैं जो समाज की मुख्यधारा में श्रद्धेय हो गयी हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर विशेषकर भारत में अधिकांश नारियाँ हाशिए पर ही है। आयोजनाएँ अनेक तो हो रही हैं, जिनसे नारी की अवस्था सुधर जाये । नारी के पार्श्ववत्कृत अवस्था से मोचित कराने के लिए हम साथ दें। नारी को अपने ही पैरों पर खड़ी रहने के लिए हम सदा साथ दें। ‘How old are you’ जैसी फिल्मों में प्रस्तुत निरुपमा जैसी नारियों की ओर आगे बढ़ने के लिए नारी सत्ता को हम जगायें। नारी होना अभिशाप नहीं, वरदान है। नारी हाशिए पर नहीं, मुख्यधारा में उपस्थित होनी चाहिए।

संगोष्ठीः आलेख
भागवान ने मनुष्य को नर और नारी के रूप में सृष्टि की। नर और नारी बराबर के हैं। वे परस्पक पूरक हैं। एक के अलावा दुसरे का अस्तित्व नहीं है।

संसार के विकास के आरंभ से ही नारी तिरस्कृत अवस्था में है। भारत में नारी को ‘देवी माँ’ समझा जाता है। ‘मनुस्मृति’ में नारी के बारे में विकल दृष्टिकोण रखने पर भी भारतीय संस्कृति में नारी ज़रूर बड़े महत्वपूर्ण स्थान में है। फिर भी, दुनिया में सबसे पार्श्ववत्कृत नारीगण भारत में ही है। रानी लक्ष्मी बाई, कल्पना चौला, मदर तेरेसा जैसी अनेक आदर्श महिलाओं को भारत ने ही जन्म दिया है। फिर भी, कुटुंब, समाज, रोज़गार आदि सभी क्षेत्रों में भारत के नारीगण बड़े पैमाने पर पार्श्ववत्कृत अवस्था में ही है। बालिका भ्रूणहत्या, अशिक्षित स्त्री संख्या, बालिका विवाह, नारी आत्महत्या, दहेज-प्रथा आदि अनेक क्षेत्र हैं, जिनसे हमें मालूम होता है कि भारतीय नारी तिरस्कृत और उपेक्षित अवस्था में फँस गयी है।

नारी को विशेषकर भारतीय नारी को पार्श्ववत्कृत अवस्था से उठायें। नारी कभी भी नारी का शत्रु न बन जाये। स्त्री सत्ता की खूबियों से भारत का भविष्य उज्ज्वल बनायें।

निम्नांकित गद्यांश पढ़ें और नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर लिखें।

एक दिन विष्णुजी के पास गए नारदजी। उसने विष्णुजी से पूछा, ‘मर्त्यलोक में वह कौन है भक्त तुम्हारा प्रधान?’
विष्णुजी ने कहा, ‘एक सज्जन किसान है, प्राणों से प्रियतम।’ नारद ने कहा, ‘मैं उसकी परीक्षा लूंगा’। यह सुनकर विष्णु हँसे और कहा कि, ‘ले सकते हो।’ नारदजी चल दिए। पहूँचे भक्त के यहाँ।

उसने देखा – हल जोतकर आया दुपहर को एक किसान को । किसान अपने घर के दरवाज़े पहूँ च क र रामजी का नाम लिया; स्नान-भोजन करके फिर चला गया काम पर ।

शाम को फिर वह आया दरवाज़े, फिर नाम लिया; प्रातःकाल चलते समय एक बार फिर उसने राम का मधुर नाम स्मरण किया। ‘बस केवल तीन बार!’ नारद चकरा गए- “दिवारात जपते हैं नाम ऋषि-मुनि लोग किंतु भगवान को किसान ही यह याद आया।”

प्रश्न 1.
‘मानव की दुनिया’ इस अर्थ में प्रयुक्त शब्द कौन-सा हैं।
उत्तर:
मर्त्यलोक

प्रश्न 2.
नारदजी के आश्चर्य का क्या कारण था?
उत्तर:
ऋषि-मुनि लोग दिवारात भगवान का नाम जपते हैं।
लेकिन, भगवान को किसान की याद आती है।

प्रश्न 3.
गद्यांश के आधार पर नारदजी और विष्णुजी के बीच के वार्तालाप लिखें।
उत्तर:
नारद : जय हो!
विष्णु : कहिए नारदजी।
नारद विष्णु : मर्त्यलोक में …..
विष्णु : हाँ… आगे कहिए……
नारद : आप का प्रधान भक्त कौन है?
विष्णु : किसान है।
नारद : यह तो आश्चर्य की बात है।
विष्णु : मेरा नाम जपते हैं।
नारद : कौन-कौन?
विष्णु : दिवारात ऋषि-मुनि।
नारद : हाँ…. हाँ
विष्णु : लेकिन मैं केवल…..
नारद : केवल?
विष्णु : किसान को याद करता हूँ।
नारद : यह क्यों?
विष्णु : किसान अन्नदाता है।
नारद : ओहो! यह तो महान बात है।

कहना नहीं आता Summary in Malayalam

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी

प्रश्न 1.
मिलान करके लिखें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 1
उत्तर:
Resource = संसाधन
Trash = कूड़ेदान
Computer = संगणक
Search = खोज
Editing = ईक्षण
Keyboard = कुंजी पटल
Save = सहजें
Public = सार्वजनिक

Plus One Hindi समय के साथ हम भी Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही मिलान करके लिखें।
उत्तर:
Internet = बहिर्पात
Computer = अनचाहा
Spam = अंतर्जाल
Output = संगणक

प्रश्न 2.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(बातचीत, संचिका, मंडलिया, श्रेणियाँ, महत्वपूर्ण, अतंर्पात, ईक्षण)
i. Important
ii. Chats
iii. Categories
iv. File
v. Input
vi. Editing
उत्तर:
i. Important = महत्वपूर्ण
ii. Chats = बातचीत
iii. Categories = श्रेणियाँ
iv. File = संचिका
v. Input = अतंर्पात
vi. Editing = ईक्षण

प्रश्न 3.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(संसाधन, बर्हिपात, विषयहीन, गोपनीयता, अगला चरण, अधिक जानें, कुडेदान, खोज)
उत्तर:
i. Trash = कुडेदान
ii. Next Step = अगला चरण
iii. Search = खोज
iv. Output = बर्हिपात
v. Privacy = गोपनीयता
vi. Resource = संसाधन

प्रश्न 4.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(संसाधन, अंतर्जाल, प्रारूप, सार्वजनिक, प्रस्थान, खोज़, सचिका)
उत्तर:
i. Public = सार्वजनिक
i. Format = प्रारूप
iii. Sign out = प्रस्थान
iv. Internet = अंतर्जाल
v. File = सचिका
vi. Resource = संसाधन

प्रश्न 5.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(कूड़ेदान, संसाधन, संकेत, प्रक्रम, बातचीत, प्रस्थान, ख़ोज़, महत्वपूर्ण, सचिका)
उत्तर:
i. Symbol = संकेत
ii. Important = महत्वपूर्ण
iii. Resource = संसाधन
iv. Chats = बातचीत
v. Programme = प्रक्रम
vi. Trash = कूड़ेदान

प्रश्न 6.
कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
(अगला चरण, सार्वजनिक, साझा करें, प्रारूप, कूड़ेदान, संकेत, बातचीत, प्रस्थान)
उत्तर:
i. Chats = बातचीत
ii. Public = सार्वजनिक
iii. Trash = कूड़ेदान
iv. Next Step = अगला चरण
v. Share = साझा करें
vi.Format = प्रारूप

प्रश्न 7.
सही मिलान करें।
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उत्तर:
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प्रश्न 8.
सही मिलान करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 14 समय के साथ हम भी 4
उत्तर:
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समय के साथ हम भी Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
सूचनाःनिम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित .. हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(खोज, रद्द करें, प्रस्थान, ईक्षण, गोपनीयता, संचिका, कूड़ेदान)
1. Cancel
2. Editing
3. File
4. Trash
5. Privacy
6. Search
उत्तर:
1. Cancel – रद्द करें
2. Editing – ईक्षण
3. File – संचिका
4. Trash – कूड़ेदान
5. Privacy – गोपनीयता
6. Search – खोज

प्रश्न 2.
सूचनाःनिम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(संचिका, गोपनीयता, खोज, बातचीत, ईक्षण, संकेत, साझा करे)
1. Chats
2. Editing
3. File
4. Search
5. Symbol
6. Privacy
उत्तर:
1. Chats – बातचीत
2. Editing – ईक्षण
3. File – संचिका
4. Search – खोज
5. Symbol – संकेत
6. Privacy – गोपनीयता

प्रश्न 3.
सूचनाः निम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिन्दी शब्द चुनकर मिलान कीजिए।
(अगला चरण, सार्वजनिक, साझा करें, बातचीत, प्रारूप, कूड़ेदान, संकेत)
1. Chats
2. Public
3. Trash
4. Next Step
5. Share
6. Format
उत्तर:
1. Chats = बातचीत
2. Public = सार्वजनिक
3. Trash = कूड़ेदान
4. Next Step = अगला चरण
5. Share = साझा करें
6. Format = प्रारूप

प्रश्न 4.
सुचना: निम्नलिखित 1 से 6 तक के प्रश्नों का उचित हिंदी शब्द कोष्ठक से चुनकर मिलान कीजिए।
(गोपनीयता, रद्द करें, अंतर्जाल, प्रक्रिया, खोज, खाता जोड़ें, बाचचीत)
1. Cancel
2. Chats
3. Internet
4. Privacy
5. Process
6. Sign in
उत्तर:
1. Cancel : रद्द करें
2. Chats : बातचीत
3. Internet : अंतर्जाल
4. Privacy : गोपनीयता
5. Process : प्रक्रिया
6. Sign in : खाता जोड़ें

प्रश्न 5.
कोष्ठक से उचित हिंदी शब्द चुनकर मिलान कीजिए।
(संसाधन, तारांकित, ईक्षण, प्रक्रम, बहिपति, गोपनीयता, सहेजें)
Editing :
Output :
Save :
Resource :
Programme :
Privacy :
उत्तर:
Editing : ईक्षण
Output : बहिर्पात
Save : सहेजें
Resource : संसाधन
Programme : प्रक्रम
Privacy : गोपनीयता

समय के साथ हम भी Summary in Malayalam

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समय के साथ हम भी Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध

प्रश्न 1.
छोटे भाई के प्रति बड़े भाई का लगाव सूचित करनेवाले वाक्य चुनें।
जैसेः खेल में अकेला होने पर भाई आकर मेरी मदद करता है।
उत्तर:
अकसर भाई मेरी वजह से ही हारते। फिर भी वे मुझसे कभी कुछ नहीं कहते थे।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित चरित्रगत विशेषताओं के आधार पर तालिका भरें।

  • पश्चातापग्रस्त
  • दोस्ताना
  • ईर्ष्यालु
  • झूठा
  • सहानुभूतिवाला

उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 1

प्रश्न 3.
‘वे मुझसे प्यार करते थे और मेरे प्रति उनका रुख एक संरक्षक की ज़िम्मेदारी जैसा था’ – ‘अपराध’ कहानी के आधार पर बड़े भाई की चरित्रगत विशेषताओं को विस्तार दें।
उत्तर:

सच्चा भाई

उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी के दो मुख्य कथापात्रों में से एक है बड़ा भाई। एक पैर को बचपन में पोलियो हो जाने से बड़ा भाई अपाहिज था। अपाहिज होने पर भी, खेल-खूदों में वह बड़ा तत्परता रखता था। बड़ा भाई अच्छा तैराक था। हाथ के पंजों की लड़ाई में वह बहुत निपुण था। खड़ब्बल जैसे खेलों में वह डूबा जाता था। खेल में विजय होते समय अतिप्रसन्न होना उसका स्वभाव था। छोटे भाई की ओर बड़े भाई के दिल में बड़ी हमदर्दी और वत्सलता थीं। बड़े भाई के चरित्र पर भाईचारे का गुण प्रकट करते हुए उदय प्रकाश जी लिखते हैं, छोटे भाई के प्रति उसका ‘रूख एक संरक्षक की जिम्मेदारी जैसा था”।

बड़े भाई के चरित्र पर दया, उदारता, सहायकस्वभाव आदि भी हम देखते हैं। वह बड़ा क्षमाशील था। भाईचारे में वह बड़ा ईमानदार था। शत्रुता मनोभाव उसके चरित्र में कभी भी हम नहीं देखते।

‘बहुत सुंदर थे, देवताओं की तरह…..’। उसकी सुन्दरता शरीर में ही नहीं, मन में भी था। त्याग, क्षमा, संयम, मौन-सहन आदि विशिष्ट गुणों से बड़े भाई का चरित्र अलंकृत है। दोस्ताना, सहानुभूति आदि चारित्रिक विशिष्टताओं से भी बड़ा भाई हमें आकर्षित करता है।

संक्षिप्त में हम इस प्रकार कहें बड़े भाई का चरित्र दूसरों में ईर्ष्या और आत्महीनता जगाने तक उदात्त और उत्कृष्ट था। छोटे भाई ने बड़े भाई के सामने अपनी अवस्था के बारे में खुद कहा है: “मैं ईर्ष्या, आत्महीनता, …… की आँच में झुलस रहा था।”

प्रश्न 4.
विवश छोटा भाई सालों बाद क्षमा माँगते हुए अपने बड़े भाई को पत्र लिखता है। वह पत्र लिखें।
(अथवा)
‘भाई ही मुझे क्षमा कर सकते हैं, जिन्हें मेरे झूठ का दंड भोगना पड़ा’। इस प्रसंग को लेकर लेखक, भाई को पत्र लिखता है। पत्र तैयार करें।
(अथवा)
‘तो इस अपराध के लिए मुझे क्षमा कौन कर सकता है’ – पश्चाताप से विवश छोटा भाई सालों बाद क्षमा माँगते हुए अपने बड़ा भाई को पत्र लिखता है। वह पत्र लिखें।
उत्तर:

शहडोल,
15.03.2016

प्रिय भाई,
आप कैसे हैं? कुशल में हैं न? आप जैसे एक भाई होना मेरा बड़ा सौभाग्य है।
भाई, मैं आप से एक बात साफ बताना चाहता हूँ। उस दिन मेरा खड़ब्बल चट्टान से टकराकर उछला और सीधे मेरे माथे पर आकर लगा। माथा फूट गया और खून बहने लगे। मैंने रोते हुए माँ को बताया कि मुझे आपने खडब्बल से मारा है। भाई! मुझे अच्छी याद है, इस पर आपको पिताजी से बहुत मार खाना पड़ा।

आज मैं पश्चाताप से विवश हूँ। आप के पैर पकड़कर क्षमा माँगता हूँ। मुझे क्षमा देंगे न? आप तो पहले ही बहुत अच्छे चरित्र के थे। आप शरीर और दिल दोनों में सुन्दर थे। मेरा अपराध क्षमा कीजिए….. कृपया क्षमा कीजिए…. आपको भागवान सदा संतुष्ट रखें……

(हस्ताक्षर)
आपका छोटा भाई

सेवा में,
जोन के.के.
सुन्दर घर,
बड़ा गाँव पी.ओ.

प्रश्न 5.
स्मृति में जब भी वे आँखें जाग उठती हैं, मेरी पूरी चेतना, ग्लानि, बेचैनी और अपराध-बोध से भर उठती है। छोटे भाई की प्रायश्चित भरी वाणी है। आवश्य ही आपको या आपके …….. को ऐसा कोई अनुभव हुआ होगा। उस अनुभव का वर्णन करें।
उत्तर:
जब मैं पाँचवीं कक्षा में पढ़ रहा था, तब मेरी जिंदगी में एक घटना हुई। उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी में वर्णित घटना के समान था वह घटना। ‘अपराध’ के कथापात्रों के समान माँ-बाप के लिए हम दो ही संतान थीं तब घर में। मैं और मेरा छोटा भाई। मैं स्वभाव से तेज़ था। कोपशील और स्वार्थ भी था। लालच भी था।

माँ ने एक दिन घर में बिरियाणी बनायी थी। खाने के समय के लिए बिरियाणी को माँ ने सुरक्षित रखा था। माँबाप खेत गये। इस अवसर का लाभ उठाकर मैंने बिरियाणी चोरी की। जब माँ वापस आयी, तब माँ को मालूम हुई कि बिरियाणी कम हो गयी है। माँ ने मुझे बुलाकर पूछा। लेकिन मैंने माँ से झूठ बोला कि छोटा भाई ने चोरी की है। बड़ी निपुणता से मैं ने माँ को समझाया कि मैं ने यह चोरी देखी है। मेरी बात को माँ ने विस्वास किया। छोटे भाई को पकड़कर माँ ने खूब मारा। छोटा भाई बड़ी आवाज में रोता था।

आज वर्ष अनेक बीत गये। छोटे भाई के विवाह का शुभदिन आ रहा है। मैंने यह निश्चय किया है कि शादी के पहले मैं अपने अपराध को छोटे भाई के सामने बताकर माफी माँगूगा।

Plus One Hindi अपराध Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
मैं सबसे छोटा था और अकेला था। क्यों?
उत्तर:
उसका भाई और पूरे गाँव के सभी लड़के उससे छह वर्ष बड़े थे।

प्रश्न 2.
मुझे अपने भाई से ईर्ष्या होती थी, क्यों?
उत्तर:
भाई को बहुत सारे दोस्त थे।

प्रश्न 3.
भाई आकर मेरी मदद करते । कब?
उत्तर:
सब खेलते समय छोटा होने के कारण अकेला पड़ जाता तो, भाई आकर मदद करते थे।

प्रश्न 4.
दूसरे लड़के छोटे भाई को अपने पाली में शामिल क्यों नहीं करते थे?
उत्तर:
पाली में उसे शामिल करके हार का खतरा नहीं उठाना चाहते थे।

प्रश्न 5.
जोड़ी और पालीवाले खेलों में बड़े भाई क्या करते थे?
उत्तर:
बड़े भाई अपनी पाली में छोटे भाई को शामिल कर लेते थे।

प्रश्न 6.
“अकसर भाई मेरी वजह से ही हारते। फिर भी वे मुझसे कभी कुछ नहीं कहते थे.” क्यों?
उत्तर:
भाई के लिए लेखक एक उत्तरदायित्व की तरह था। लेखक को भाई बहुत प्यार करते थे और लेखक के प्रति भाई का रुख एक संरक्षक की जिम्मेदारी जैसा था। भाई यह जिम्मेदारी सदा निभाना चाहते थे।

प्रश्न 7.
शाम की धूप की विशेषता क्या है?
उत्तर:
शाम की धूप शरीर में उल्लास भरा करती है।

प्रश्न 8.
खडब्बल कैसे खेलता था?
उत्तर:
लकड़ी की छोटी-छोटी डंडियाँ हर लड़के के पास थीं। पूरी ताकत से खडब्बल को जमीन पर, आगे की ओर गति देते हुए, सीधे मारा जा रहा था।

प्रश्न 9.
छोटे भाई में किसकी ताकत न थी?
उत्तर:
छोटे भाई में इतनी ताकत न थी कि वह खड़बल को उतनी दूर तक पहुँचाता, जबकि वहाँ एक होड़, एक प्रतिद्वंद्धिता शुरु हो जाये।

प्रश्न 10.
गुस्से और तनाव में और ज्यादा ताकत से वे खड़ब्बल फेंक रहे थे-कौन?
उत्तर:
बड़ा भाई।

प्रश्न 11.
‘मुझे पहली बार यह लगा कि मैं वहाँ कहीं नहीं – क्यों?
उत्तर:
खड़ब्बल खेल में जीतते समय बड़ा भाई एक बार भी छोटे भाई की ओर नहीं देखता था। इतना ही नहीं, छोटे भाई को बड़ा भाई पूरी तरह उस समय भूलता था।

प्रश्न 12.
बड़े भाई के प्रति छोटे भाई के मन में कौन-सा भाव पैदा हुआ था?
उत्तर:
एक बहुत जबरदस्त प्रतिकार पैदा हो रहा था।

प्रश्न 13.
छोटा भाई किसकी आँच में झुलस रहा था?
उत्तर:
ईर्ष्या, आत्महीनता, उपेक्षा और नगण्याता की आँच में झुलस रहा था।

प्रश्न 14.
छोटे भाई के माथे पर कैसे चोट लगी?
उत्तर:
अचानक छोटे भाई का खड़ब्बल चट्टान से टकराकर उछला और सीधे उसके माथे पर आकर लगा। माथा फूट गया और खून बहने लगा।

प्रश्न 15.
बड़े भाई तेज़ी से दौड़ नहीं पा रहा था, क्यों?
उत्तर:
बड़े भाई का दायाँ पैर पोलियो का शिकार था।

प्रश्न 16.
घर पहुँचकर छोटे भाई ने माँ से क्या कहा?
उत्तर:
छोटे भाई ने माँ से यह कहा कि उसे बड़े भाई ने खड़ब्बल से मारा है।

प्रश्न 17.
बड़े भाई के प्रति छोटे भाई के मन में प्रतिकार की भावना क्यों उत्पन्न हुई?
उत्तर:
छोटे भाई के मन में ऐसा लग रहा था कि बड़े भाई के सामने वह कहीं नहीं है। बड़े भाई से इस प्रकार की उपेक्षा का अनुभव महसूस करने के कारण उसके दिल में बड़े भाई के प्रति प्रतिकार की भावना उत्पन्न हुई।

प्रश्न 18.
बड़े भाई की आँखों में करुणा और कातरता थीं- क्यों?
उत्तर:
बड़े भाई के विरुद्ध छोटा भाई झूठ बोल देने पर बड़े भाई को पिताजी से पीट सहना पड़ा। इसलिए बड़े भाई की आँखों में करुणा और कातरता थीं।

प्रश्न 19.
छोटे भाई के मन में जब बचपन की उस घटना की स्मृतियाँ आती हैं तब उसे कैसा अनुभव होने लगता है?
उत्तर:
छोटे भाई की पूरी चेतना ग्लानि, बेचैनी और अपराध बोध से भर आती है।

प्रश्न 20.
वे इस घटना को पूरी तरह भूल चुके हैं – कौन?
उत्तर:
बडा भाई।

प्रश्न 21.
छोटे भाई ने अपने अपराध के लिए क्षमा माँगनी चाही, लेकिन असफल रहा – क्यों?
उत्तर:
माँ-बाप मर गये थे। बातों की सत्यावस्था ठीक-ठीक उन्हें समझाने के लिए अब अवसर नहीं। इतना ही नहीं बड़ा भाई इन पूरी बातों को भूल गया है।

प्रश्न 22.
अब यह निर्णय बदला नहीं जा सकता -क्यों?
उत्तर:
छोटे भाई के झूठ का दंड बड़े भाई को भोगना पड़ा। लेकिन बड़ा भाई यह घटना बिलकुल भूल चुके थे। उस समय झूठ बोलने का जो निर्णय लिया था वह गलत और अन्यायपूर्ण था। लेकिन वह निर्णय बदलना अब संभव नहीं।

प्रश्न 23.
बड़े भाई के विरुद्ध छोटे भाई से हुए अपराध के बारे में बताकर अपने मित्र के नाम पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार कीजिए।
उत्तर:

स्थान,
तारीख,

प्रिय मित्र,
मेरी बात जानकर तुम असंतुष्ट हो जाओगे कि यह कितनी पुरानी बात है! लेकिन मेरे मन में यह अब भी एक काँटा जैसी है वह बात।

बात यह है कि बचपन में एक दिन मेरा भाई मुझे भूलकर खड़ब्बल खेल रहा था। छोटा होने के कारण अपनी पाली में उस दिन उन्होंने मुझे शामिल नहीं किया था। जीतने की खुशी में भाई ने मेरी और देखा तक नहीं। इससे में रो पड़ा। मैं अकेले खड़ब्बल को पत्थर पर फेंककर खेलते वक्त अचानक वह मेरे माथे पर लगा। भाई मेरे पास दौडकर आये। लेकिन मैं ने उसको रोका | माँ से मैंने झूठ कह दिया कि भाई ने मुझे मारा है। पिताजी ने उन्हें इस पर खूब पीटा। यह सज़ा मिलते समय भाई ने मुझपर करुणा भरी दृष्टि से देखा। भाई का वह कारुणिक अवस्था मेरी स्मृति में अब भी है। मैं उस गलती केलिए क्षमा माँगना चाहता हूँ। लेकिन कैसे? माँ-बाप मर गये। भाई यह बात भूल गया है। मेरा मन अशांत है। मित्र, तुम इसकेलिए एक परिहार बता दो।

मेरा विश्वास है कि तुम जवाब ज़रूर दोगे।

प्यार से,
(हस्ताक्षर)
नाम

प्रश्न 24.
कहानी का अंश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मैंने भाई का चेहरा देखा। वे मेरी ओर देख रहे थे। उनकी आँखें लाल थीं और उनमें करुणा और कातरता थीं, जैसे वे मुझसे याचना कर रहे हों कि में सच बोल दूं। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उन्हें सज़ा मिल चुकी थी। फिर इतनी जल्द बात को बिलकुल बदलना मुझे संभव भी नहीं लग रहा था। क्या पता, पिताजी फिर मुझे ही मारने लगते। में डर रहा था।

i. यह किस कहानी का अंश है?
उत्तर:
उदय प्रकाश की ‘अपराध’ कहानी का।

ii. बड़े भई की आँखों में कौन-सा भाव था?
उत्तर:
करुणा और कातरता थीं।

iii. छोटा भाई क्यों डर रहा था?
उत्तर:
छोटे भाई ने जो बात बताई थी उसे जल्द बिलकुल बदलना उसे संभव नहीं लग रहा था। इसलिए पिताजी सच जानते समय छोटे भाई को भी पिताजी से मार मिलने की संभावना थी। इन बातों से छोटा भाई डर रहा था।

iv. उस दिन के छोटे भाई की डायरी लिखें।
उत्तर:

25 मार्च 2016

शहडोल :
आज मेरे लिए बिलकुल बुरा दिन था। मैंने झूठ बोलकर बड़े भाई को पिताजी के सामने अपराधी बनाया। बेचारा भाई! उनकी आँखें उस समय लाल हो गयी थीं। उनमें करुणा और कातरता थीं। वे मुझसे मौन याचना कर रे थे कि मैं पिताजी से सच बोल दूं। लेकिन मुझसे वह नहीं कर पाया। बड़े भाई को पिताजी से मेरे झूठ से सजा मिल गया। मैं विवश हो गया था। जल्द बात को बिलकुल बदलना मुझे संभव भी नहीं लग रहा था। मुझे यह डर भी था कि पिताजी मुझे सच जानते समय बुरी तरह मारेंगे।

हे भगवान! मुझसे बड़ा अपराध हो गया। मुझे क्षमा कर । भाई को अनुग्रह दे। मुझे नींद नहीं आती। मेरा मन बहुत व्याकुल है।

प्रश्न 25.
वह एक धीर, निडर एवं साहसी सैनिक था। अपने देश की सेना का नेतृत्व करनेवाला सेनानायक। उन दिनों दुश्मन सेना के साथ उनका युद्ध चल रहा था। दोनों सेनाओं में काफी विनाश हो चुका था। फिर भी सेनानायक निडर होकर अपनी सेना का नेतृत्व कर रहा था। हर दिन युद्ध समाप्त होने के बाद सब अपने-अपने डेरे में जाया करते थे। सेनानायक का निर्देश था कि कोई उसे तंग न करे क्योंकि शाम को वह भगवान की पूजा करेगा। रात को सैनिकों ने देखा कि सेनानायक कहीं जा रहा है। मैनिकों ने चुपचाप उनका पीछा किया। उन्होंने देखा कि सेनानायक युद्ध के मैदान में घायल पड़े सैनिकों की सेवा कर रहा है।, घावों में पट्टी बाँध रहा है और दवा लगा रहा है। आश्चर्य की बात यह थी कि उनमें शत्रु पक्ष के घायल सैनिक भी थे। सैनिकों के पूछने पर सेनानायक ने कहा कि घायलों की सेवा करते समय शत्रु और मित्र का भेद-भाव न दिखाएँ। इनकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है।

i. सेनानायक रोज़ शाम को कहाँ जा रहा था?
उत्तर:
सेनानायक युद्ध के मैदान में घायल पड़े सैनिकों की सेवा कर रहा था, घावों में पट्टी बाँध रहा था और दवा लगा रहा था। आश्चर्य की बात यह थी कि उनमें शत्रु पक्ष के घायल सैनिक भी थे।

ii. सेनानायक की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर:

साहसी सैनिक

सैनिक में बड़ा नेतृत्व गुण था। इसलिए वे सेनानायक बन गये। वे बड़े बुद्धिमान थे। शत्रुओं को पराजित करने के लिए उन्होंने बुद्धि से काम किया। निर्भयत्व उसके चरित्र का एक विशिष्ट गुण था। सेनानायक वीर-शूर होने पर भी बड़ी सेवा मनोभाव से जीनेवाले भी थे। वे आदर्श सैनिक थे। एक आदर्श सैनिक शत्रुसेना के सामने भी मर्यादा और सेवाभाव से व्यवहार करता है। सेनानायक की रोगी – शुश्रूषा से हमें ज्ञात होते हैं कि उनका चरित्र आदर्श और मर्यादा से अलंकृत था।

प्रश्न 26.
यह घटना पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
शादी में कार मिली। पत्नी ने अपने पति से कहाः सुनो, हम भी एक ड्राइवर रख लें? तुम्हारे घर में कई कारें थीं, तुमने कार चलाना क्यों नहीं सीखा? कई कारें थीं तो कई ड्राइवर भी थे….. कार चलाना सीखने की कभी ज़रूरत भी महसूस नहीं हुई….फिर भी मैंने सीखनी चाही थी, पर पापा-मम्मी ने नहीं सीखने दी। क्यों? भाई ने सीखी थी। एक बार उसका एक्सीडेंट हो गया… यह समझो कि वह मरते मरते बचा था, तब से उसकी ड्राइविंग पर पाबंदी लगा दी गई थी और मुझे भी सीखने से मना कर दिया। एक्सीडेंट क्या ड्राइवर से नहीं हो सकता? हो सकता है किंतु खतरा अक्सर आगे बैठनेवाले का ही होता है, हाध-पैर टूटेंगे या मरेगा तो ड्राइवर मरेगा।

i. शादी में क्या मिली?
उत्तर:
शादी में कार मिली।

ii. एक्सीडेंट में खतरा अक्सर किसका होता है?
उत्तर:
आगे बैठनेवाले का ही होता है।

iii. पत्नी ने कार चलाना क्यों नहीं सीखा?
उत्तर:
कार चलाते समय पत्नी के भाई को बुरी तरह एक्सीडेंट हो गयी थी। वह मरते – मरते बचा था। तब से पापामम्मी ने भाई की ड्राइविंग पर पाबंदी लगा दी गयी और पत्नी को भी सीखने से मना कर दिया।

iv. उपर्युक्त घटना का संक्षेपण करें।
उत्तर:
शादी में मिली कार एक्सीडेंट की डर से पत्नी नहीं चलाती है। पति से पत्नी ड्राइवर को रखने का आग्रह प्रकट करती है। लेकिन पत्नी को पति समझाता है कि ड्राइवर को भी एक्सीडेंट हो सकता है।

v. संक्षेपण के लिए शीर्षक लिखें।
उत्तर:
ड्राइविंग और एक्सीडेंट।

vi. मान लें, शादी में पत्नी को नई मॉडल कार मिली है। उस पॉडल कार की बिक्री बढ़ाने केलिए अखबार में छपे कंपनी का विज्ञापन तैयार करें।
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 2

अपराध Previous Years Questions & Answers

प्रश्न 1.
‘अपराध’ कहानी का ये वाक्य पढ़िए।
“मैं अपने इस अपराध के लिए क्षमा माँगना चाहता हूँ।
इस अपराध की सज़ा पाना चाहता हूँ।”
अपने अपाहिज भाई का पिताजी से सज़ा दिलाते हुए उस दिन की छोटे भाई की डायरी तैयार कीजिए।

  • भाई का प्यार
  • खडब्बल के खेल में भाई की जीत
  • उपेक्षा की तीव्र वेदना
  • माँ बाप से झूठ बोलना

उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 3

अपराध Summary in Malayalam

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अपराध शब्दार्थ

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 16
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 17
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 18
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 19
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 13 अपराध 20

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख

प्रश्न 1.
‘इस ठंडी रात में भी हमी दो व्यक्ति बाहर हैं। दोनों के बाहर रहने का विशेष कारण अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
यहाँ के दो व्यक्ति ‘दुःख’ कहानी का नायक दिलीप और दूसरा खोमचे बेचनेवाला लड़का है। दिलीप की पत्नी हेमा व्यर्थ रूठकर माँ के घर चली गयी है। इससे दुःखित होकर दिलीप मिंटो पार्क में मन बहलाने को गया था। इसलिए दिलीप अपने घर से बाहर था। खोमचे बेचनेवाला लड़का रोजी रोटी के लिए पकौड़े बेचने के लिए उसकी झोंपड़ी से बाहर था।

प्रश्न 2.
‘मैं इस जीवन में दुख ही देखने को पैदा हुई हूँ….. दिलीप ने आगे न पढ़ा, पत्र फाड़कर फेंक दिया’। हेमा का दिलीप के नाम का वह पत्र कल्पना करके लिखें।
उत्तर:

आमरा,
15.3.2015

प्रिय दिलीप,
आप कैसे हैं? माँ के घर मैं दुःख सहती सहती जीती हूँ। मैं इस जीवन में दुःख देखने को पैदा हुई हूँ। आप को मुझ से कोई प्यार नहीं है। मैं सदा आप को प्यार करती रहती हूँ। आप मुझे समझते क्यों नहीं? आप जैसे एक पति से क्या मुझे संतोष मिलेगा कभी? मेरी प्रतीक्षा है आप यहाँ पर जल्दी आ जायें और मुझे ले जायें। लगता हूँ मैं वापस आने के बाद आप मुझे दुःख फिर नहीं देंगे। दाम्पत्य जीवन के बारे में मुझमें कितनी आशाभिलाषाएँ थीं? सब निष्फल हो गयीं। आप के यहाँ आने की प्रतीक्षा में,

(हस्ताक्षर)
हेमा, आप की पत्नी

सेवा में,
दिलीप के.के.
मिंटो पार्क पि.ओ.
आरती नगर

प्रश्न 3.
‘मिट्टी ते तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था’। उस दिन की दिलीप की डायरी लिखें।
उत्तर:

मार्च 15, 2014

मिंटो नगरः
आज मेरे लिए बड़े मानसिक संघर्ष का दिन था। हेमा रूठकर माँ के घर चली गयी। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। पार्क से वापस आते समय खोमचे बेचनेवाले एक छोटे-से लड़के से मेरी भेंट हुई। कितना गरीब लड़का है वह!! मैंने उससे खोमचे खरीदे। दाम देने पर वापस देने के लिए उसके पास छुट्टे भी नहीं थे। उसकी माँ कितनी बेचारी औरत है? लेकिन, माँबेटे के बीच का प्यार देखकर मुझे आश्चर्य हो गया। उस लड़के के घर से मुझे उसली दुःख की पहचान हुई। मैंने वहाँ के दुःख को हेमा के दुःख से तुलना की। हेमा का दुःख बनावटी है। हेमा का दुःख अमीरी-प्रदत्त नकली दुःख है। वह रसीला दुःख है। लड़के और उसकी माँ का दुःख अभाव-प्रदत्त असली दुःख है।

हे भगवान! हम अमीरों को क्षमा कर। हेमा को मनपरिवर्तन दे। नींद आ रही है। गहरी तो नहीं…….

प्रश्न 4.
बच्चे की माँ और दिलीप, दोनों के मुँह से निकलते हैं – भूख नहीं है।
दोनों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इस कथन की विवेचना करके टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
दिलीप एक धनी आदमी है। उसकी पत्नी हेमा रूठकर माँ के घर चली गयी। इस पर दिलीप बड़ी निराशा में है। निराशा और मानसिक संघर्ष के कारण उसे भूख नहीं लगती। लेकिन, बच्चे की माँ दरिद्रता में है। अवश्य भोजन के लिए उसके पास सुविधा नहीं है। उसके पास केवल दो सूखी रोटयाँ हैं। उनको माँ बच्चे को खिलाना चाहती थी। स्वयं भूखी रहकर बेटे को रोटियाँ खिलाने के प्रयत्न में माँ झूठ बोलती है: ‘भूख नहीं है’। बेटे के प्रति बड़ी वत्सलता होने के कारण भी माँ कहती है: ‘भूख नहीं’। दिलीप के बिना भूख की अवस्था मानसिक संघर्ष के कारण से है, लेकिन माँ के बिना भूख का कारण दरिद्रता है।

प्रश्न 5.
स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली है और उसे निकाल दिया है।
मशीनीकरण ने एक ओर सुविधाएँ पैदा की हैं तो दूसरी ओर उसने बेरोज़गारी को बढ़ावा दिया है। मशीनीकरणः सकारात्मक बनाम नकारात्मक ।
‘मशीनीकरण के गुण-दोष’ – पर एक आलेख तैयार करें।
उत्तर:
मशीनीकरण ने एक ओर सुविधायें पैदा की हैं तो, दूसरी ओर उसने बेरोज़गारी को बढ़ावा दिया है। आज साधारण जीवन के सभी क्षेत्रों में मशीनीकरण तीव्र गति पकड़ रही है। घर में, दफ्तर में, स्कूल में, कारखानों में – सभी जगहों पर मशीनीकरण बहुत साधारण हो गया है। अनेक स्कूलवालों ने छात्रों के लिए गाड़ी का प्रबन्ध किया है। लेकिन अनेक स्कूल अधिकारियों ने आजकल इस सुविधा को रोक दिया है। मशीनीकरण एक बड़े पैमाने तक अच्छा है। इससे समय का लाभ होता है। नये नये आविष्कारों से विज्ञान और प्रौद्योगिकि का विकास होता है।

ऐसे गुण होने पर भी मशीनीकरण से अनेक बुराइयाँ भी होती हैं। मशीनीकरण की सबसे बड़ी बुराई इससे वातावरण का प्रदूषण होता है। इससे मानव अनेक प्रकार की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। आपसी संबन्ध कम हो जाता है। मशीनीकरण के आगमन के पहले लोगा हिलमिलकर काम करते थे। इससे सामाजिकता बढ़ती थी। लेकिन मशीनीकरण ने अणुपरिवार को बढ़ावा दिया है।

उदाहरण के लिए पहले छात्रगण शिक्षाकेन्द्रों की ओर पैदल जाते थे। इससे स्वास्थ्य, मेल-मिलाप आदि संरक्षित रहते थे। लेकिन शिक्षा केन्द्रवाले मोटरों की सुविधा देने से मेल-मिलाप कम हो गया। अनेक छात्रों का स्वास्थ्य भी कम कसरत से बिगड़ जाने लगा।

मशीनीकरण से गुण है, साथ-साथ दोष भी है। अतिमशीनिकरण न हो जाये। कम मशीनीकरण भी न हो जाये।

Plus One Hindi दुःख Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
मन वितृष्णा से कब भर जाता है?
उत्तर:
जिसे मनुष्य सर्वापेक्षा अपना समझ भरोसा रखता है, जब उसीसे अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो तो, मन वितृष्णा से भर जाता है।

प्रश्न 2.
बहुत से लोग उसे ‘अति’ कहेंगे। किसे?
उत्तर:
दिलीप द्वारा हेमा को दिये गये स्वतंत्रता, आदर, आतंरिकता और अनुरक्त भरे प्यार को ।

प्रश्न 3.
हेमा माँ के घर क्यों चली गई?
उत्तर:
उसकी सहेली के साथ दिलीप सिनेमा देख आने के कारण रात भर हेमा रूठी रहकर सुबह उठते ही वह माँ के घर चली गई।

प्रश्न 4.
दिलीप को किसपर भय हुआ?
उत्तर:
समय को बीतता न देखने पर दिलीप को भय हुआ।

प्रश्न 5.
अपने निकटतम व्यक्ति से अपमान और तिरस्कार होने पर मनुष्य की दशा क्या हो जाती है?
उत्तर:
मन वितृष्णा से भर जाता है।

प्रश्न 6.
जिंदगी में कभी-कभी एक-एक मिनट गुज़ारना भी मुश्किल हो जाता है- कब?
उत्तर:
वितृष्णा और ग्लानि में स्वयं यातना बन जाते समय ।

प्रश्न 7.
दिलीप क्यों व्याकुल था?
उत्तर:
दिलीप अपनी पत्नी हेमा को बड़ी आंतरिकता से प्रेम करता था। उसको पूर्ण स्वतंत्रता देता था। उसे बहुत आदर करता था। उसके प्रति बहुत अनुरक्त भी था। लेकिन, हेमा दिलीप के प्रति अविश्वास प्रकट करके अपने घर चली गई। इससे दिलीप व्याकुल था।

प्रश्न 8.
दिलीप के मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई। कब?
उत्तर:
मिंटो पार्क के एकांत में एक बेंच में बैठे समय सिर में ठंड लगने से।

प्रश्न 9.
दिलीप ने संतोष का एक दीर्घ निश्वास लिया। क्यों?
उत्तर:
अपनी आकस्मिक मृत्यु द्वारा पत्नी हेमा से बदला लेने का निश्चय करने पर दिलीप ने संतोष का एक दीर्घ निश्वास लिया।

प्रश्न 10.
दिलीप का मन कुछ हल्का हो गया था – कब?
उत्तर:
स्वयं सह अन्याय के प्रतिकार की एक संभावना देख दिलीप का मन कुछ हल्का हो गया।

प्रश्न 11.
बिजली के लैंप किस प्रकार अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहा था?
उत्तर:
बिजली के लैंप निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहा था।

प्रश्न 12.
स्वयं सह अन्याय के प्रतिकार की एक संभावना देख उसका मन कुछ हल्का हो गया था यहाँ प्रतिकार की संभावना क्या थी?
उत्तर:
दिलीप की मृत्यु । (मिंटो पार्क में बेंच पर एकांत बैठने से सिर में ठंड लग जायेगा, बीमार हो जाएगा, मर जाएगा, दिलीप के शवशरीर के पास पछताकर हेमा बैठेगी।)

प्रश्न 13.
‘सौर जगत के यह अद्भुत नमूने थे’। यहाँ अद्भुत नमूने क्या है?
उत्तर:
मनुष्यों के अभाव की कुछ भी परवाह न कर, लाखों पतंगे गोल बाँध-बाँध कर सड़क के लैंपों के चारों ओर नृत्य कर रहे थे।

प्रश्न 14.
मनुष्य के बिना भी संसार कितना व्यस्त और रोचक है। कैसे?
उत्तर:
प्रकृति के सुंदर दृश्यों से। (सड़क किनारे स्तब्ध खड़े बिजली के लैंप निष्काम और निर्विकार भाव से अपना प्रकाश सड़क पर डाल रहे थे। लाखों पतंगे गोले बाँघबाँध कर, इन लैंपों के चारों ओर नृत्य कर रहे थे। वृक्षों के भीगे पत्ते बिजली के प्रकाश में चमचमा रहे थे। पदछाईयाँ सुन्दर दृश्य बना रही थीं। सड़क पर पड़ा प्रत्येक भीगे पत्ते और लैंपों की किरणों के बीच संवाद हो रहा था। ये सब देखकर दिलीप सोचता है कि मनुष्य के बिना भी संसार कितना व्यस्त और रोचक है।)

प्रश्न 15.
कोई श्वेत-सी चीज़ दिखाई दी। वह कौन थी?
उत्तरः
एक छोटा-सा लड़का सफेद कुर्ता- पायजामा पहने, एक थाली सामने रखे कुछ बेच रहा है।

प्रश्न 16.
खोमचे बेचनेवाले छोटे लड़के की हालत का वर्णन कैसे किया गया है?
उत्तर:
लड़का सफेद कुर्ता- पायजामा पहने, एक थाली सामने रखे कुछ बेच रहा है। बहुत छोटा उम्रवाला था। क्षुद्र शरीर था। सर्द हवा में बालक सिकुड़ कर बैठा था। रात में सौदा बेचनेवाला सौदागर लड़के के पास मिट्टी के तेल की ढिबरी तक नहीं थी।

प्रश्न 17.
उसने आशा की एक निगाह उसकी ओर डाली, और फिर आँखें झुका लीं। यहाँ बालक की कौन-सी चरित्रगत विशेषता प्रकट होती है?
उत्तर:
बिक्री की प्रतीक्षा में बालक ने आशा की एक निगाह दिलीप पर डाली। गरीब होने पर भी वह स्वाभिमानी है, बिक्री के लिए हाथ फैलाना या याचना करना वह नहीं चाहता। इसलिए उसने आँखें झुका लीं।

प्रश्न 18.
‘लड़के के मुख पर खोमचा बेचनेवालों की-सी चतुरता नहीं थी, बल्कि उसकी जगह थी एक कातरता’ – यहाँ ‘चतुरता’ एवं ‘कातरता’ शब्दों का तात्पर्य क्या है?
उत्तर:
चतुरता = निपुणता, कातरता = दीनता

प्रश्न 19.
ठंडी रात में कौन-कौन बाहर हैं?
उत्तर:
दिलीप और खोमचेवाला बालक।

प्रश्न 20.
कौन-सी चीज़ मनुष्य-मनुष्य में भेद की सब दीवारों को लाँघ जाती है?
उत्तर:
मनुष्यत्व।

प्रश्न 21.
बालक की प्रफुल्लता दिलीप के किस प्रश्न से उड़ गई?
उत्तर:
‘कुछ कम नहीं लेगा’ प्रश्न से।

प्रश्न 22.
दिलीप क्यों लड़के के घर चला?
उत्तर:
लड़के का घर देखने का कौतूहल जाग उठने से।

प्रश्न 23.
‘आठ पैसे का खोमचा बेचने जो इस सर्दी में निकला है उसके घर की क्या अवस्था होगी, यह सोचकर दिलीप सिहर उठा’- क्या आप सोच सकते हैं कि बालक के घर की अवस्था क्या होगी?
उत्तर:
बहुत दरिद्र अवस्था।

प्रश्न 24.
बच्चे ने घबराकर कहा- ‘पैसे तो घर पर भी न होंगे’। दिलीप सिहर उठा। दिलीप के सिहर उठने का कारण क्या होगा?
उत्तर:
बच्चे के जीवन की दरिद्र अवस्था के बारे में जानकर ।

प्रश्न 25.
लड़के की माँ को नौकरी से हटा दिया। क्यों?
उत्तर:
लड़के की माँ बाबू के घर में अढ़ाई रूपया महीना लेकर चौका-बर्तन करती थी। लेकिन जगतू की माँ ने दो रूपये पर यह काम करने को तैयार हो गई। इसलिए लड़के की माँ को नौकरी से हटा दिया।

प्रश्न 26.
बाबू की घरवाली ने माँ को हटाकर जगतू की माँ को रख लिया है। यहाँ समाज की कौन-सी मनोवृत्ति प्रकट है?
उत्तर:
धनी लोग गरीबों को गरीबीपन का शोषण करते हैं। यहाँ नौकरी के क्षेत्र में होनेवाले आर्थिक शोषण का दृश्य है।

प्रश्न 27.
जगतू की माँ को नौकरी से क्यों निकाल दिया?
उत्तर:
जब स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली, तब जगतू की माँ को नौकरी से निकाल दिया।

प्रश्न 28.
स्कूलवालों ने लड़कियों को घर से लाने के लिए मोटर रख ली है और उसे निकाल दिया है। यहाँ कहानीकार किस सामाजिक समस्या की ओर इशार करते है?
उत्तर:
मशीनीकरण के कारण गरीब लोगों की नौकरी नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 29.
‘एक बड़ी खिड़की के आकार का दरवाज़ा’ – के प्रयोग से कहानीकार क्या बताना चाहते हैं?
उत्तर:
खोमचे बेचनेवाले लड़के के घर की शोचनीय अवस्था ।

प्रश्न 30.
कोठरी के भीतर दिलीप ने क्या-क्या देखा?
उत्तर:
धुआँ उगलती मिट्टी के तेल की एक ढिबरी, एक छोटी चारपाई , दो-एक मैले कपड़े और आधी उमर की एक स्त्री मैली -सी धोती में शरीर लपेटे बैठी थी।

प्रश्न 31.
‘बेटा, रुपया बाबुजी को लौटाकर घर का पता पूछ लें, पैसे कल ले आना’। यहाँ माँ की कौन-सी चरित्रगत विशेषता प्रकट होती है?
उत्तर:
ईमानदारी, दूसरों पर विश्वास, दूसरों को मानना और स्वाभिमान।

प्रश्न 32.
दिलीप ने शरमाते हुए कहा। क्यों?
उत्तर:
माँ की सच्चाई और ईमानदारी से प्रमावित होकर।

प्रश्न 33.
स्त्री क्यों ‘नहीं-नहीं’ करती रह गयी?
उत्तर:
छुट्टे वापस देने केलिए न होने पर भी स्त्री के मन में बड़ा स्वाभिमान और ईमानदारी होने के कारण ।

प्रश्न 34.
स्त्री के चेहरे पर कृतज्ञता और प्रसन्नता की झलक कब छा गयी?
उत्तर:
दिलीप ने बाकी पैसे न लेने पर स्त्री के चेहरे पर कृतज्ञता और प्रसन्नता की झलक छा गयी।

प्रश्न 35.
बेटा कब रीझ गया?
उत्तर:
उसे सुबह रोटी के साथ दाल भी खिलाने की बात माँ से सुनकर बेटा रीझ गया।

प्रश्न 36.
लड़का पुलकित हो रहा था। क्यों?
उत्तर:
अपनी मेहनत की कमाई से रोटी खाने की प्रतीक्षा में लड़का पुलकित हो रहा था। हम जानते हैं कि मेहनत की रोटी मीठी होती है।

प्रश्न 37.
बेटा बचपन के कारण रूठा था। मगर घर की हालत से परिचित भी था। इस कथन का तात्पर्य क्या है?
उत्तर:
बेटा बचपन की चपलता के कारण रूखी-सूखी रोटी पर रूठ जाता है। मगर अपने अनुभव से घर की परेशानी परचानता है। तब बचपन की चपलता परिपक्वता में बदल जाती है। बचपन में ही बालक माँ के साथ परिवार का भार अपने कंधे पर उठाता था। परंतु अच्छा भोजन खाने के लिए वह दिन-दिन ललचा रहा था। इसलिए थोड़े समय के लिए वह रूठ गया था।

प्रश्न 38.
मुझे अभी भूख नहीं, तू खा’ – माँ ऐसा क्यों कह रही है?
उत्तर:
माँ को खाने के लिए आवश्यक रोटी नहीं थी। जितना भोजन घर में था. उसे माँ बेटे को खिलाना चाहती थी। माँ की ममता और बेटे के भविष्य की सोच में माँ ऐसा कह रही है।

प्रश्न 39.
सौदा बेचनेवाले बच्चे के घर आए दिलीप ने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? वह डायरी तैयार करें।
उत्तर:

तारीक

मिंटोपार्क नगर :
आज मैंने समझा कि सच्चा दुःख क्या है। सबेरे से हेमा के बारे में सोचकर मन चिंता से भरा था। फिर टहलने गया। बारिश का मौसम बीत गया था। फिर भी, शाम को सड़क और पार्क सुनसान था। मैं धीरे चलते वक्त सड़क पर एक बालक को देखा। वह सौदा बेच रहा था। उससे बातें करते समय मैंने समझ लिया कि उसका बाप मर गया था और माँ बीमार है। घर की परेशानी उसे इस ठंडी रात में सौदा बेचने के लिए मजबूर करती है। मैंने उससे पूरा सौदा खरीदा और एक रूपया दिया। बाकी पैसे देने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। उसके साथ दिलीप उसके घर चला। कितनी दयनीय थी वहाँ की अवस्था! रूखी रोटी पर गुस्सा उतारनेवाला बच्चा अब भी मेरे मन में है। घर में पैसा नहीं था। फिर भी मुफ्त के पैसे वे नहीं चाहते थे। उनके दुःख के सामने मेरा दुःख कितना छोटा है? उसे और भी मैं जरूर मिलूँगा।

प्रश्न 40.
सौदा बेचनेवाले बच्चे को दिलीप ने फिर देखा । तब दोनों के बीच का वार्तालाप तैयार करें।
उत्तर:
दिलीप : हाँ बेटा, कैसे हो?
बच्चा : ठीक हूँ जी। आपको मैंने कई बार देखा था।
दिलीप : फिर क्यों पास न आया?
बच्चा : मैं आपके पास आने लगा तो आप कहीं निकल जाते हैं।
दिलीप : अच्छा। तो, आज मुझे कैसे मिला?
बच्चा : आप मेरे सामने से निकलते समय ही मैंने आपको बुलाया।
दिलीप : घर में माँ सकुशल हैं?
बच्चा : माँ की बीमारी कुछ कम हुई है।
दिलीप : क्या ये दो पकौड़े मुझे दोगे?
बच्चा : ठीक है, लेकिन पैसा न देना।
दिलीप : पैसा नहीं, रूपया हूँ और यह लूँ।
बच्चा : बाकी देने के लिए घर में पैसे नहीं हैं ….
दिलीप : बाकी तुम्हारे पास रखो। बड़ा होकर वापस देना।
बच्चा : ठीक है। धन्यवाद।

प्रश्न 41.
मिट्टी के तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था। उस दिन की दिलीप की डायरी लिखें।
उत्तर:

तारीक

मिंटोपार्क नगर :
आज के दिन के बारे में क्या लिखू? कैसा दृश्य था वह? अपने बेटे की प्रतीक्षा में ठंडी रात में चादर ओढ़कर बैठी उस गरीब और बीमार माँ की आँखों में क्या क्या भाव थे? अपने बेटे को देखकर उसका चेहरा खिल उठा। सौदा बेचने की बात कहते समय उसके मुख पर खुशी आयी। बाकी पैसे की बात सुनकर उसने रूपए वापस देने की बात कही। गरीबी में भी उसे मुफ्त के पैसे की चाह नहीं! फिर उस माँ ने अपनी भूख भूलकर बेटे को भोजन खिलाया। दोनों का प्यार देख कर मेरा मन द्रवित हो गया। अभाव के इस दुःख के सामने मेरा दुःख कितना छोटा है ? कल ज़रूर उस बच्चे से मिलूँगा।

प्रश्न 42.
नौ कर विस्मित खड़ा रहा । क्यों?
उत्तर:
दिलीप की ‘भूख नहीं’ है बात सुनकर नौकर विस्मित खड़ा रहा।

प्रश्न 43.
दिलीप को भूख नहीं लगी। क्यों?
उत्तर:
खोमचे बेचनेवाले लड़के की माँ का ‘भूख नहीं’ कहना याद आने पर।

प्रश्न 44.
हेमा ने पत्र की पहली लाइन में क्या लिखा था?
उत्तर:
“मैं इस जीवन में दुःख ही देखने को पैदा हुई हूँ।”

प्रश्न 45.
‘रसीला दुख’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यशपालजी की दुःख कहानी से यह समझते हैं कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। इसको न समझनेवाले दिलीप की पत्नी हेमा जैसे धनी लोगों का दुःख अमीरीप्रदत्त नकली दुःख है। सब कुछ होने पर भी, इस प्रकार दुःख करनेवाले लोगों का दुःख केवल तमाशा केलिए है, रस -विनोद के लिए है, सस्ती बातों पर है। अभाव – प्रदत्त असली दुःख की तुलना में यह एक प्रकार का सुखदायक दुःख है। इस दुःख में असलियत नहीं है और यह अनावश्यक दुःख है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 1

प्रश्न 46.
‘काश तुम जानती दुःख किसे कहते है। तुम्हारा यह रसीला दुःख तुम्हें न मिले तो जिंदंगी दूभर हो जाए।’ प्रस्तुत घटना को दिलीप अपनी आत्मकथा में लिखता है। आत्मकथांश तैयार करें।
उत्तर:

यह दुःख नहीं

हेमा की सहेली के साथ मैं सिनेमा देख आने के कारण, रात भर वह रूठी रही। अगले दिन सुबह उठते ही हेमा अपनी माँ के घर चली गयी। तब मेरे मन में क्षोभ का अंत न रहा। मेरी पत्नी की इस व्यवहार से मेरा मन वितृष्णा और ग्लानि से भर गया। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। सिर में ठंड लगने से मेरे मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई।

मिंटो पार्क से लौटते समय एक गरीब बच्चे से मेरी भेंट हुई। वह सड़क के किनारे नींबू के वृक्षों की छाया में बैठकर पकौड़े बेच रहा था। मैंने उससे पूरे पकौड़े खरीदे। मैंने उसे एक रूपया दिया। लेकिन बाकी पैसे वापस करने के लिए उसके पास छुट्टे नहीं थे। उसकी माँ से छुट्टे लेने के नाम पर मैं उसका घर गया। वहँ मैं ने उसकी माँ को देखा।

कितनी गरीब थी वह! बाकी पैसे देने के लिए माँ के पास पैसे नहीं थे। बेचारी औरत! माँ की परेशानी देखकर मेरा मन उत्कंठित हो गया। माँ के पास अच्छे कपड़े नहीं थे। खाने के लिए आवश्यक भोजन नहीं था। घर भी बहुत दयनीय अवस्था में थी।

मैंने वहाँ पर असली दुःख देखा। मुझे उस कोठरी में असली दुःख की पहचान हुई। मैंने पहचाना कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। हेमा का दुःख अमीरी -प्रदत्त नकली दुःख है। वह एक प्रकार का रसीली दुःख है। हेमा का दुःख सही में दुःख नहीं है।

प्रश्न 47.
‘वन-संरक्षण सबका दायित्व’ विषय पर संगोष्ठी में प्रस्तुत करने के लिए आलेख तैयार करें।
उत्तर:

वन-संरक्षण : सबका दायित्व

पेड़-पौधे प्रकृति के वरदान हैं। धरती की हरियाली जीवन के लिए अत्यावश्क है। पेड़ – पौधे धरती की हरियाली सदा संरक्षित रखते हैं। पेड़-पौधों के अभाव में धरती में गर्मी बढ़ जाती है। गर्मि से धरती का बचाव पेड़-पौधों से ही होता है। भूक्षरण की रोक भी पेड़-पौधों से होती है। पेड़-पौधे मनुष्य को और भी विविध प्रकार लाभदायक होते हैं। मनुष्य को खाने के लिए अनेक प्रकार के भक्ष्य-पदार्थ पेड़-पौधों से मिलते हैं। वन के पेड़-पौधों से मनुष्य के उपयोग के लिए अनेक प्रकार की औषधी भी मिलती है।

पक्षी, जीव-जन्तु भी वनसंरक्षण से जीवित रहते हैं। अनेक प्रकार के पक्षी और जीव-जतु वंश-नाश के खतरे में है। इनके बचाव भी वन को संरक्षित रखने से संभव होता है।

वन-संरक्षण सामाजिक दायित्व है। प्रत्येक साल वन-संरक्षण केलिए वन-महोत्सव की आयोजना होती है। वन महोत्सव को हर प्रकार प्रोत्साहन करना हमारा कर्तव्य है।

वन संरक्षण सब का दायित्व है। इसलिए वन-संरक्षण संबंधित सभी आयोजनाओं को हमें प्रोत्साहन करते रहना चाहिए।

दुःख Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘मिट्टी के तेल की ढिबरी के प्रकाश में देखा वह दृश्य उनकी आँखों के सामने से न हटता था’ उस दिन की दिलीप की डायरी निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से लिखिए।
सहायक बिंदु:

  • बच्चे से भेंट
  • माँ की परेशानी
  • माँ-बेटे का प्यार
  • असली दुःख की पहचान और तुलना

उत्तर:

डायरी

25/7/2016,
सोमवार.

आज एक अजीब दिन था। हेमा मुझसे रूठकर अपनी माँ के घर चली गई। मैं कुछ समय तक उदास होकर रहे। श्याम होते होते बाहर कुछ देर घूमने केलिए निकला। रास्ते में एक बालक से मिला। वह कुछ पकोडों बेचने केलिए ठंडी रात में बैठे थे। उनके पास ठीक तरह से कपड़े तक नहीं था। मैं उनके पास जो पकोडे थे – पूरा खरीद लिया और बाकी पैसे न होने के कारण उनके साथ उनके घर चला। घर की हालत देखकर मैं स्तब्ध रह गया। उनकी माँ एक गरीब निस्सहाय औरत थी। फिर भी वह कितने प्यार से अपने बेटे के खयाल रखते हैं। मैं वहाँ से निकला तो मुझे समझ में आया असली दुःख क्या है। हम तो फालतू बातों को दुःख समझकर जी रहे हैं। हमें ज़रूर बाहरी दुनिया के बारे में सोचना चाहिए।

शुभरात्री

प्रश्न 2.
मान लीजिए ‘दुःख’ कहानी का पात्र दिलीप अपनी आत्मकथा लिखता है। आत्मकथा में गरीब माँ-बेटे का उल्लेख है। निम्नलिखित सहायत बिन्दुओं के आधार पर वह आत्मकथांश तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • बच्चे से भेंट
  • माँ की परेशानी
  • माँ-बेटे का प्यार
  • हेमा का दुःख और खोमचेवाले लड़के का दुःखतुलना

उत्तर:

यह दुःख नहीं

हेमा की सहेली के साथ मैं सिनेमा देख आने के कारण, रात भर वह रूठी रही। अगले दिन सुबह उठते ही हेमा अपनी माँ के घर चली गयी। तब मेरे मन में क्षोभ का अंत न रहा। मेरी पत्नी की इस व्यवहार से मेरा मन वितृष्णा और ग्लानि से भर गया। मन बहलाने के लिए मैं मिंटो पार्क गया। सिर में ठंड लगने से मेरे मस्तिष्क की व्याकुलता कुछ कम हुई। मिंटो पार्क से लौटते समय एक गरीब बच्चे से मेरी भेट हुई। वह सड़क के किनारे नींबू के वृक्षों की छाया में बैठकर पकौड़े बेच रहा था। मैंने उससे पूरे पकौड़े खरीदे। मैंने उसे एक रूपया दिया। लेकिन बाकी पैसे वापस करने के लिए उसके पास छुट्टे नहीं थे। उसकी माँ से छुटटे लेने के नाम पर मैं उसका घर गया। वहँ मैं ने उसकी माँ को देखा। कितनी गरीब थी वह! बाकी पैसे देने के लिए माँ के पास पैसे नहीं थे। बेचारी औरत! माँ की परेशानी देखकर मेरा मन उत्कंठित हो गया। माँ के पास अच्छे कपड़े नहीं थे। खाने के लिए आवश्यक भोजन नहीं था। घर भी बहुत दयनीय अवस्था में थी।

मैंने वहाँ पर असली दुःख देखा। मुझे उस कोठरी में असली दुःख की पहचान हुई। मैंने पहचाना कि जीवन का यथार्थ दुःख गरीबी है। हेमा का दुःख अमीरी -प्रदत्त नकली दुःख है। वह एक प्रकार का रसीली दुःख है। हेमा का दुःख सही में दुःख नहीं है।

प्रश्न 3.
‘दुख’ कहानी के आधार पर असली दुख तथा नकली दुख के संबंध में संगोष्ठी में प्रस्तुत करने योग्य एक आलेख तैयार कीजिए।

  • गरीब तथा अमीर लोगों के दुख
  • दुख को हल करने का उपाय
  • मानवता का उदय

उत्तर:
दुःख एक ऐसी समस्या है जिसके कारण सभी लोग आज चिंतित है। गरीब और अमीर सभी लोग दुःखी है। सब के सब अपने दुःखों के लिए दूसरों को ही दोषी ठहराते हैं।

पहले हमें यह जानना चाहिए कि दुःख क्यों होता है और क्या होता है। जब तक हम अपने आप पर खुश नहीं है, अपने विजय पर खुश नहीं है, हमें दुःख ही दुःख मिलेगा। जो कुछ हमने पाया है या जो कुछ हमें है इस पर हमें खुश होना चाहिए। लेकिन मानव कभी भी ऐसा नहीं है। वह दूसरों की सुख-सुविधा और ऐश्वर्य देखता है और जो कुछ उसके पास नहीं है उसके बारे में सोचकर दुखी बन जाता है।

अपने दुःखों को हल करने का उपाय भी हमें खुद निकालना चाहिए। गरीबों के दुःख और अमीरों के दुःख में बहुत बड़ा अंतर है। जब अमीर बड़ी बड़ी सुखसुविधाओं के बारे में सोचकर दुःखी होते हैं तब गरीब रोज़ी-रोटी के बारे में सोचकर दुःखी हो जाते हैं। एक प्रकार से देखने पर अमीरों का दुःख कुछ रसीला है जब गरीबों का दुःख असली है।

जब तक पूरे समाज में मानव-मानव के बीच प्रेम और भाईचारे का संबंध नहीं पनपेगा, तब तक, दुःखी लोगों की संख्या कम नहीं होगा।

दुःख लेखक परिचय

यशपाल हिन्दी साहित्य के प्रगतिशील कहानीकारों में श्रेष्ठ माने जाते हैं। वे क्रांतिकारी साहित्यकार थे। कहानियाँ, उपन्यास, निबंध आदि अनेक विधाओं में साहित्य रचना कर यशपाल हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार बने। सामाजिक कुरीतियाँ, शोषण और अंधविश्वास के खिलाफ समाज को सचेत करना यशपाल का लक्ष्य था। ‘झुठा-सच’, ‘दिव्या’, ‘देशद्रोही’, ‘मनुष्य के रूप’, ‘अमिता’, ‘पिंजरे का उडान’, ‘सच बोलने की भूल’आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। निम्नवर्ग के दुःख और निराशा भरी ज़िन्दगी का चित्रण दुःख कहानी में हुआ है।

दुःख Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 3
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 18
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 19

दुःख शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 20
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 21
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 22
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 23
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 24
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 25
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 26
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 27
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 28
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 12 दुःख 29

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर

प्रश्न 1.
पाठकनामा पढ़ें और लिखें –
i. पाठक संपादक को बधाइयाँ दे रहा है, क्यों?
उत्तर:
संपादकीय समकालीन समस्या से संबंधित होने के कारण संपादक को पाठक बधाइयाँ दे रहा है।

ii. हमारा घमंड किस पर है?
उत्तर:
विज्ञान और प्रोद्योगिकी की उपलब्धियों पर।

iii. हमारी कमी क्या है?
उत्तर:
संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रहे हैं।

iv. संचार माध्यमों की कौन-सी भूमिका है?
उत्तर:
सराहनीय भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रक्रियाओं से गुज़रते हुए पाठकनामा के अनुवाद का संशोधन करें।

  • वैयक्तिक संशोधन
  • ग्रूप में प्रस्तुति एवं चर्चा
  • ग्रूप में परिमार्जन
  • ग्रूपों की प्रस्तुति

उत्तर:
अध्यापिका की ओर से तैयार की गई सामग्री की प्रस्तुति। इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ़्तार से फैलते जा रहे हैं, बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकता है जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगे। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करती जाती है दूसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहा है। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकती हैं।

प्रश्न 3.
संकेतों का अनुवाद हिंन्दी में करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 1
i. Clean the water storage containers and cover it
उत्तर:
पानी की टंकी साफ रखें और ढक रखें।

ii. Keep the surroundings clean and improve basic sanitation facilities
उत्तर:
परिवेश स्वच्छ रखें और बुनियादी सफाई सुविधाएँ सुधारके संभालें।

iii. Create an awareness about dengue chikungunya etc.
उत्तर:
डेंगू, मलेरिया इत्यादि के बारे में जनजागरण वनाये रखें।

iv. Seek the co-operation for the removal of breeding places
उत्तर:
मच्छरों के प्रजनन रोकने के लिए सहयोग का प्रबंध बनाये रखें।

Plus One Hindi सृजन की ओर Important Questions and Answers

अनुवादः

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 3

इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ्तार से फैलते जा रहे हैं। बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकता है जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगे। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करती जाती है दुसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहा है। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकती हैं

प्रश्न 1.
ऊपर के अनुवाद की व्याकरणिक त्रुटियों को सुधारें।
उत्तर:
इस भीषण परिस्थिति में, जहाँ संक्रामक बीमारियाँ तेज़ रफ्तार से फैलती जा रही हैं। बढ़ती बीमारियाँ संपादकीय विशेष प्रशंसनीय है। इस क़हर पर हम तभी लगाम डाल सकते हैं जबकि सरकार और जनता हमदिल से प्रयास करेंगी। खेद की बात है, एक ओर हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर घमंड करते जाते हैं दूसरी ओर ऐसी संक्रामक बीमारियों को रोकने में हम नाकामयाब रह रहे हैं। इसपर पैबंद डालने के लिए समाज को सतर्क करने में संचार माध्यम सराहनीय भूमिका निभा सकता हैं

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 2a

प्रश्न 2.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Aravind : I send the mail to chandrakanth Devthale?
Razia : Yes, I sent Yesterday
Aravind : Did you get the reply?
Razia : Yes, he described a lot of things about his poem
Aravind : Can you send his message to me?
Razia : Ofcourse
उत्तर:
अरविंद : क्या आपने चंद्रकांत देवताले को डाक भेजा?
रज़िया : जी हाँ, मैंने कल भेजा।
अरविंद : क्या आपको जवाब मिला?
रज़िया : जी हाँ, उन्होंने उनकी कविता के बारे में बहुत सारी बातों का विवरण दिया।
अरविंद : क्या उनका सदेश मेरे लिए आप भेज सकती हैं?
रज़िया : जरूर।

प्रश्न 3.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Athul : Why didn’t you come yesterday?
Sam : I was not well
Athul : What happend?
Sam : It was raining heavily yesterday, I had no umbrella
Athul : Don’t forget to take umbrella during this season
Sam : Ok, my mother also told me.
उत्तर:
अतुल : तुम कल क्यों न आये?
शाम : मैं ठीक नहीं था।
अतुल : क्या हुआ?
शाम : कल भारी बरसात हो रही थी। मेरे पास छतरी नहीं थी।
अतुल : इस मौसम में छतरी ले जाने के लिए मत भूलो।
शाम : जी हाँ, मेरी माँ ने भी मुझे यह कहा था।

प्रश्न 4.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Mahesh : Where are you going Ram?
Ram : I am going to the railway station.
Mahesh : Why do you go there?
Ram : To take my uncle and aunty from the station.
Mahesh : Where are they coming from?
Ram : From Delhi, Sorry Mahesh, I am getting late, Bye Bye.
उत्तर:
महेश : राम, तुम कहाँ जा रहे हो?
राम : मैं रेल्वे-स्टेशन जा रहा हूँ।
महेश : तुम वहाँ क्यों जा रहे हो?
राम : मेरे मामा और मामी को स्टेशन से लेने के लिए।
महेश : वे कहाँ से आ रहे हैं?
राम : दिल्ली से, मॉफ करना महेश, मैं देर हो रहा हूँ… बाई…..बाई….

प्रश्न 5.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Mili : Daddy, Can you get me a toy?
Father : Of course dear, What kind?
Mili : I would to like to get a doll
Father : In the evening we will go together to the shop and you can buy one.
Mili : Today itself?
Father : Definitely, we will have it.
उत्तर:
मिली : पापा, आप मेरे लिए एक खिलौना देंगे?
पापा : बिल्कुल मिली, किस तरह की?
मिली : मैं एक गुड़िया मिलना चाहती हूँ।
पापा : शाम हम एक साथ दूकान जायेंगे और तुम गुड़िया खरीद सकती हो।
मिली : आज ही?
पापा : निश्चय, हम उसे खरीद लेंगे।

प्रश्न 6.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Arun : May I come in Teacher?
Teacher : Yes, why didn’t you come yesterday?
Arun : Sorry Teacher, my mother was ill. I was looking after her.
Teacher: Oh! How is she now?
Arun : Now she is all right.
Teacher : Okay, go to your seat.
उत्तर:
अरुण : मैं अंदर आँऊ टीचरजी?
टीचर : जी हाँ, तुम कल क्यों नहीं आये?
अरुण : मॉफ कीजिए, मेरी माँ बीमार थी। मैं उसकी देखभाल कर रहा था।
टीचर : अरे बापरे! अब वे कैसी हैं?
अरुण : अब ठीक है।
टीचर : ठीक, तुम आपनी जागह पर जाओ।

प्रश्न 7.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Student : Could you please give me the audio CD of Juloose drama?
Teacher : Sure, what for?
Student : We wish to present this drama on Hindi Day.
Teacher : Very good. Have you started rehersal?
Student : Yes. we started it yesterday.
Teacher : All the best.
Student : Thank you.
उत्तर :
छात्र : आप मेरे लिए ‘जुलूस’ नाटक की एक सि. डी. दे सकती हैं?
टीचर : बिल्कुल, क्या के लिए?
छात्र : हिंदी दिवस पर हम एक नाटक प्रस्तुत करना चाहते हैं।
टीचर : बहुत अच्छा, क्या तुम लोग पूर्वाभिनय (रिहर्सल) शुरु किया?
छात्र : जी हाँ, हमने कल शुरु किया।
टीचर : शुभ कामनाएँ…
छात्र : धन्यवाद टीचरजी।

प्रश्न 8.
अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद करें।
Teacher : Why are you late Puneeth?
Puneeth : Sorry Teacher, I saw a tragic incident on the road.
Teacher : Oh! What happened?
Puneeth : A person was lying on the road. He was severely injured.
Teacher : What did you do then?
Puneeth : I took him to the hospital.
उत्तर:
टीचर : पुनीत, तुम क्यों देर हो गये?
पुनीत : मॉफ कीजिए, मैंने सड़क पर एक दुखात्मक घटना देखी।
टीचर : अरे बापरे! क्या हुआ ?
पुनीत : एक आदमी सड़क पर लेट रहा था। वह बुरी तरह घायल था।
टीचर : तुमने उस समय क्या किया ?
पुनीत : मैं उसे अस्पताल ले गया।

सृजन की ओर Previous Years Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Hema : Hello, Sreekala! Where are you going?
Sreekala : I am going to Ernakulam
Hema : For what?
Sreekala : Thave an interview for a teacher’s post at Navodaya Vidyalaya.
Hema : Which subject you have taken for your M.A.?
Sreekala : Hindi. It is my favourate subject
(interview – साक्षात्कार, favourable -पसंदीदा)
उत्तर:
हेमा : अरे श्रीकला, तुम कहाँ जा रही हो?
श्रीकला : मैं एरनाकुलम जा रही हूँ।
हेमा : क्या बात है?
श्रीकला : मुझे नवोदया विद्यालय में अध्यापक पद का साक्षात्कार हैं।
हेमा : आप एक.ए. के लिए कौनसा विषय चुना छा।
श्रीकला : हिंदी ही मेरा पसंदीदा विषय हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Vineeth : Hello Suresh, How are you?
Suresh : I am fine.
Vineeth : Yesterday, I say your brother at hospital. What was the matter?
Suresh : My father was admitted there.
Vineeth : What happened to him?
Suresh : He had severe fever, now he is okay.
(was admitted – प्रवेश किया गया, Severe fever-कठिन बुखार)
उत्तर:
विनीत : अरे सुरेष, कैसे हो?
सुरेष : मैं ठीक हूँ।
विनीत : कल मैं तुम्हारे भाई को अस्पताल में देखा। क्या बात है?
सुरेष : मेरा पिताजी को वहाँ प्रवेश किया गया है।
विनीत : उसे क्या हुआ?
सुरुष : उसे कठिन बुखार था, अब वह ठीक है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Teacher : Why are you late Puneeth?
Puneeth : Sorry Teacher, I saw a tragic incident on the road.
Teacher : Oh! What happened?
Puneeth: A person was lying on the road. He was severely injured.
Teacher : What did you do then?
Puneeth : I took him to the hospital.
(Tragic incident – दुखात्मक घटना, severely – बुरी तरह, injured – घायल हुआ)
उत्तर:
टीचर : पुनीत, तुम क्यों देर हो गये?
पुनीत : मॉफ कीजिए, मैंने सड़क पर एक दुखात्मक घटना देखी।
टीचर : अरे बापरे! क्या हुआ ?
पुनीत : एक आदमी सड़क पर लेट रहा था। वह बुरी तरह घायल था।
टीचर : तुमने उस समय क्या किया ?
पुनीत : मैं उसे अस्पताल ले गया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए:
Kiran : Sooraj, do you have a pet?
Sooraj : Yes. I have a parrot, I call her ‘sweety’
Kiran : What do you feed him with?
Sooraj : Some fruits and bread.
Kiran : Do you feel happy, taking care of your pet?
Sooraj : Yes, I feel good.
(Pet – पालतू जीव, Parrot – तोता, feed with – खिलाना, bread – रोटी)
उत्तर:
किरण : सूरज, क्या तुम्हारे पास कोई पालतू जीव है?
सूरज : हाँ, मेरे पास एक तोता है। मैं उसे स्वीटी कहता हूँ।
किरण : तुम उसे क्या खिलाया करते है।
सूरज : फल और रोटी।
सूरज किरण
किरण : तुम्हारे पालतू जीव की देखबाल करने पर क्या आप खुश है।
सूरज : हाँ, मैं बहुत अच्छा महसूस करता हूँ।

प्रश्न 5.
सूचनाः निम्नलिखित अंग्रेज़ी बातचीत का हिंदी में अनुवाद कीजिए।
Mridula : Hello Veena, How are you?
Veena : Hai Mridula, I am fine. Where are you going now?
Mridula : I am going to a dance class. I wish to compose a new performance.
Veena : Very good. I am also waiting for your excellent performance. All the best.
Mridula : Thank you.
Veena : Ok, Bye Mridula
(Performance – प्रस्तुति, Compose – तैयार करना, Dance class – नाट्यशाला, Excellent – समर्थ)
उत्तर:
मृदुला : हलो वीणा, कैसी हो?
वीणा : हाय मृदुला, मैं ठीक हूँ। तुम कहाँ जा रही हो?
मृदुला : मैं नृत्य के एक क्लास में जा रही हूँ। एक नया नृत्य प्रस्तुत करने की तैयारी में हूँ।
वीणा : बहुत अच्छा। मैं भी तुम्हारी समर्थ प्रस्तुति की प्रतीक्षा कर रही हूँ। शुभ कामनाएँ।
मृदुला : धन्यवाद।
वीणा : अच्छा, चलती हूँ।

सृजन की ओर Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 11 सृजन की ओर 6

Letter to the Editor

In this fearful situation of increasing epidemics, an editorial like ‘Badti Beem ariyam’ of current relevance deserves special appreciation. The malody can be put to an end only of the government and public work single mindedly. Even in this age where we boast off great scientific and technological advancement, it is an utter disgrace that we cannot prevent such epidemics. Media has a great role in creating social awareness to prevent such epidemic.

Abhinav. S.
New Delhi

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच

प्रश्न 1.
कविता पढ़कर भरें –
जैसे-बच्चा रो रहा है, फिर भी बिस्कुट कुतरता है।
i. युवक थका हुआ है, फिर भी…….
उत्तर:
अपने कुचले सपनों को सहला रहा है।

ii. बूढ़े ने अपनी आँखों को हाथों से ढाँप लिया है, फिर भी….
उत्तर:
भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के बारे में कवि क्यों आशंकित है?
उत्तर:
उसे उखाड़ ले जाया सकता है अथवा तोड़ भी जा सकता है।

प्रश्न 3.
चित्र-वाचन
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 1
उत्तर:
लड़के-लड़कियाँ अपने खेल-खूद, विश्राम आदि के लिए प्रयुक्त पार्क का विनाश देखकर चिंतित हैं। वे शायद यह सोचते होंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है, यहाँ पर इसको रोकने के लिए कोई नहीं है आदि… आदि..। पार्क, समुद्र तट, प्रपात, पहाड़ आदि ऐसी सार्वजनिक स्थल हैं, जो आज घटते जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों के नष्ट होने से मानसिक उल्लास की सुविधा और अवसर कम हो जाते हैं। इससे मनुष्य संघर्ष में पड़ जाता है।

हम इनको यह सांत्वना दें कि ऐसे आगे न होने देंगे। संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत देकर इस जगह को संरक्षित रखेंगे। उनके खेल-खूद और मानसिक उल्लास केलिए उचित स्थान ढूँढ देंगे। पोस्टर, पत्र आदि द्वारा जनजागरण और जनमत जगायेंगे।

प्रश्न 4.
‘समाज-निर्माण में सार्वजनिक जगहों का योगदान’ पर लेख लिखें।
उत्तर:
सार्वजनिक जगहों का महत्व
सार्वजनिक जगह सामाजिकता का संगम-स्थान है। पार्क, समुद्र-तट, प्रपात की जगह, पहाड़ आदि इस प्रकार की हैं। हमें उसे संभालना चाहिए। सरकार की ओर से इन सार्वजनिक स्थानों को संभालने के लिए सदा ध्यान होना चाहिए। यदि दूसरों के सुख-दुख पर हमदर्दी है तो, इनका संरक्षण ज़रूर होगा। सार्वजनिक स्थानों का विनाश होते समय मनुष्य का पराजय होता है, स्वार्थ की विजय होती है। सार्वजनिक जगहों का संरक्षण करना आज अत्यंत प्रासंगिक है। यह इसलिए कि सार्वजनिक जगह आज घटती जा रही है।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।?
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि देखते हैं कि पार्क में वर्षों पुरानी एक पत्थर की बैंच पड़ी है। कवि उस बैंच के चार दृश्य हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। एक दृश्य में एक रोनेवाला बच्चा पत्थर की बैंच पर बैठ कर रोता है। लेकिन वह विस्कुट कुतरते हुए चुप हो जाता है। दूसरे दृश्य में एक थका हुआ युवक अपने कुचले हुए सपनों को सहलाकर बैंच पर बैठा है। तीसरे दृश्य में एक रिटायर्ड बुढ़ा भरी दोपहरी में हाथों से आँखें ढाँपकर सो रहा है। चौथा दृश्य एक प्रेम-जोड़ा का है जो बैंच पर बैठकर जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

Plus One Hindi पत्थर की बैंच Important Questions and Answers

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर रोता हुआ बच्चा
बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है
जिसपर एक थका युवक
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है
जिसपर हाथों से आँखें ढाँप
एक रिटायर्ड बूढ़ा भर दोपहरी सो रहा है
जिसपर वे दोनों
जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता का है?
उत्तर:
पत्थर की बैंच ।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच पर कौन-कौन बैठे हैं?
उत्तर:
बच्चा, चुवक, बूढ़ा, प्रेमी-प्रेमिका आदि बैठे हैं।

प्रश्न 3.
बच्चा क्या कर रहा है?
उत्तर:
रोता हुआ बच्चा बिस्कुट कुतरते चुप हो रहा है।

प्रश्न 4.
युवक क्या कर रहा है?
उत्तर:
अपने कुचले हुए सपनों को सहला रहा है।

प्रश्न 5.
रिटायर्ड बूढ़ा क्या कर रहा है?
उत्तर:
हाथों से आँखें ढाँप भर दोपहरी सो रहा है।

प्रश्न 6.
‘वे दोनों’ कौन-कौन हैं?
उत्तर:
वे दोनों प्रेमी-प्रेमिका हैं।

प्रश्न 7.
‘वे दोनों’ क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
अशा जिंदगी के सपने बुन रहे हैं।

प्रश्न 8.
सबों ने पत्थर की बैंच का सहारा लिया। क्यों?
उत्तर:
पत्थर की बैंच किसी की निजी सामग्री नहीं है। बैंच पार्क में उपस्थित है। कोई उस पर जाकर बैठ सकता है। बच्चा, युवक और बूढा तीनों अपने अपने विकट समय में है। विश्राम करने के लिए तीनों पार्क की बैंच का आश्रय लेते हैं।

प्रश्न 9.
पत्थर का बैंच किसका प्रतीक है?
उत्तर:
घटती सार्वजनिक जगह का प्रतीक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़कर प्रश्नों का उत्तर लिखें।

पत्थर की बैंच
जिसपर अंकित हैं आँसू, थकान
विश्राम और फ्रें की स्मृतियाँ
इस पत्थर की बैंच के लिए भी
शुरु हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इस उखाड़ कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बैंच पर!

प्रश्न 1.
इस पंक्तियों के कवि कौन हैं?
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले।

प्रश्न 2.
पत्थर की बैंच के लिए क्या शुरु हो सकता हैं?
उत्तर:
हत्याओं का सिलसिला।

प्रश्न 3.
पत्थर की बैंच पर क्या-क्या अंकित हैं?
उत्तर:
कवि ने देखा, पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं।

प्रश्न 4.
कवि को किस बात का पता नहीं है?
उत्तर:
पता नही कि सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा उस पत्थर की बैंच पर।

प्रश्न 5.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
यह कवितांश गद्य कविता ‘पत्थर की बैंच’ से प्रस्तुत है। ‘पत्थर की बैंच’ समकालीन कविता है। इस कविता के कवि हैं सुप्रसिद्ध समकालीन कवि चद्रकांत देवताले।

कवि ने देखा कि पत्थर की बैंच के इतिहास में आँसू, थकान, विश्राम, प्रेम जैसे अनेक मानुषिक विकार अंकित हैं। लेकिन यह सब जाननेवाला कवि आशंकित हो जाता है। यह इसलिए है कि किसी दिन इस पत्थर की बैंच के लिए हत्याओं का सिलसिला शुरु हो सकता है। उसे उखाड़ कर ले जाया सकता है। अथवा तोड़ भी जा सकता है। कवि को यह नहीं मालूम है कि सबसे पहले इस पत्थर की बैंच पर कौन आसीन हुआ होगा? अर्थात कवि डरता है कि इस पत्थर की बैंच के बारे में अधिकार स्थापित करने केलिए कब लड़ाई शुरु हो जायेगी।

कवितांश प्रतीकात्मक है। पत्थर की बैंच सार्वजनिक स्थल का प्रतीक है। उसपर बैठे चार प्रकार के लोग साधारण आमजनता का प्रतीक है। पत्थर की बैंच जैसे सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण करने की आवश्यकता की सूचना कवितांश में निहित है। सार्वजनिक स्थलों का संरक्षण करना आवश्यक है, क्योंकि ऐसे स्थल साधारण लोगों के अनियंत्रित संवेदनाओं से भरी हुई है। जाति, धर्म, राजनीति, स्वार्थता आदि के नाम पर और उनकी सस्ती प्रतिस्पर्धा के लिए सार्वजनिक स्थलों का शिकार बनकर उन्हें सत्यनाश न करना चाहिए।

कवितांश गद्यकविता की शैली में है। भाषा सरल और प्रवाहमय है। कवितांश द्वारा कवि के आशय हममें लाने में कवि सफल हुए हैं।

सूचना : निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

इस पत्थर की बेंच के लिए भी
शुरू हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इसे उखाड़कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है
पता नहीं सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा
इस पत्थर की बेंच पर।

प्रश्न 1.
यह कवितांश के कवि कौन है?
उत्तर:
चन्द्रकांत देवताले

प्रश्न 2.
कविता के ‘आसीन’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए।
(खड़ा, बैठा, सुना)
उत्तर:
बैठा

प्रश्न 3.
कवि को किसका संदेह है?
उत्तर:
कवि का संदेह यह है कि इस पत्थर की बेंच पर सबसे पहले कौन आसीन हुआ होगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चंद्रकांत देवताले हिंदी का विख्यात कवि है। समकालीन कविता के क्षेत्र में वे अत्यंत ख्याति प्राप्त है। ‘पत्थर की बेंच’ समकालीन सामाजिक समस्याओं को सूचित करनेवाली एक कविता है।

सार्वजनिक जगहों के नाश पर कवि आशंकित है। कवि की आशंका यह है कि पत्थर की बेंच के लिए भी किसी दिन हत्याओं का सिलसिला शुरू हो सकता है। अपनी स्वार्थता के लिए कोई भी, किसी भी समय ऐसे सार्वजनिक जगहों का सर्वनाश कर सकता है। कवि का डर यह है कि इन जगहों के नाश होने पर साधारण जनता अपनी संवेदनाओं को कैसे शांत कर सकेगा।

‘पत्थर की बेंच’ एक समकालीन कविता है जिसमें सार्वजनिक जगहों के नाश पर आशंकित कवि को हम देख सकते हैं।

पत्थर की बैंच Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 2
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 3
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 7

पत्थर की बैंच शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 10 पत्थर की बैंच 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ

प्रश्न 1.
पात्र और घटनाओं का सही मिलान करें।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 1
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 2

प्रश्न 2.
संक्षेपण करें: “एक बूढ़ा आदमी, जिसके बाल सफ़ेद हो गए थे इसके फल मेरे नाती-पोते खाएँगे।”
उत्तर:
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 3

सत्कृत्य:
बूढ़े आदमी से नवजवान ने समझा कि पेड़ पौधे लगाने से प्रकृति सुन्दर हो जाती है और भविष्य में उपयोग में आता है।

प्रश्न 3.
संभ्रांत महिला रेलगाड़ी से कुछ चीजें बाहर फेंकती जा रही है तब सहयात्री और संभ्रांत महिला के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार करें।
उत्तर:
संहयात्री : यह आप क्या फेंक रही हैं?
महिला : मैं…….?
सहयात्री : हाँ…. हाँ…….
महिला : तुम देखते नहीं?
सहयात्री : इसलिए तो पूछता हूँ।
महिला : ये तो बीज हैं।
सहयात्री : बीज?
महिला : हाँ… हाँ… फल-फूलों के बीज हैं।
सहयात्री : इनको खिड़की से क्यों फैंकती हैं?
महिला : इनमें कुछ जड़ पकड़ लेंगे।
सहयात्री : तो फिर?
महिला : तब फायदा होगा।
सहयात्री : फायदा? किस प्रकार?
महिला : फूलेंगे, फलेंगे।
सहयात्री : तब?
महिला : मनुष्य के लिए उपयोगी होंगे।
सहयात्री : अरे बापरे! आप तो महान कार्य कर रही हैं।
महिला : यह लो….आप भी फेंकिए।
सहयात्री : हाँ…… हाँ….. दीजिए।

प्रश्न 4.
मान लें, रेलगाड़ी में सफर करनेवाली वृद्ध संभ्रांत महिला की नज़र डिब्बे में चिपके हुए विज्ञापन पर पड़ती है जो रक्तदान के महत्व को रेखांकित करता है। संकेतों के सहारे वह विज्ञापन तैयार करें।

  • समभाव
  • सहिष्णुता
  • मानव-प्रेम
  • जीवनदान

उत्तर:

स्वास्थ्य मंत्रालय का विज्ञापन
‘रक्तदान महादान है।’

भाईयो,…… बहनो,…..
रोगावस्था में पीड़ित भाई-बहनों से समभाव रखिए । सहिष्णुता और अनुकंपा रखकर जान बचाने के लिए रक्तदान करके सहायता दीजिए। रक्तदान जीवनदान ही है!! सरकारी रक्तदान केन्द्रों में जाकर खुशी से रक्तदान कीजिए!! आपका रक्त कटेगा नहीं बढ़ेगा!! दूसरों की जान बचेगी।

प्रश्न 5.
‘आज भी वह रक़म अमेरिका में ज़रूरतमंदों के हाथों में घूम रही है’ – मान लें, वह रक़म अपने वर्तमान अनुभवों का आत्मकथा के रूप में ज़िक्र करती है। वह आत्मकथांश लिखें।
उत्तर:

मैं हूँ जरूरतमंदों के सामने

मैं रकम हूँ। मैं साधारण रकम नहीं। मैं एक अपूर्व रकम हूँ। मैं जन्म से अमेरिकी हूँ। अमेरिका के प्रसिडेंट बेंजमिन फ्रैंकलीन के हाथों से मेरा जन्म हुआ। मुझे प्रसिडेंटजी ने एक गरीब विद्यार्थी की सहायता में दिया था। मैंने उसे भाग्यवान् बनाया। विद्यार्थी ने मुझे वापस करने के लिए प्रसिडेंट के पास गया। लेकिन, बेंजमिनजी ने उससे बतायाः “आप इसे अपने ही पास रखिए और जब आपके पास कोई ऐसा ही ज़रूरतमंद आये तो उसे यह दे दीजिए” । उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया। आज भी मैं अमेरिका के ज़रूरतमंदों के हाथों में घूम रही हूँ। मैं कितना सौभाग्यवान हूँ! ज़रूरत पड़े, मुझे बुलाईए। मैं ज़रूर आऊँगा।

मेरे इतने जीवनकाल से मैंने समझा कि समाज की पूँजी धनवानों के हाथों में है। पूँजी का समुचित विवरण से समाज का संतुलन होता है। जरूरतमंदों के हाथों में पूँजी का सौगुना मूल्य होगा। मैं रकम, पूँजी समान है। मैं जरूरतमंदों को जीवनदान करता हूँ।

Plus One Hindi आनंद की फूलझडियाँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
ज़मीन कौन खोद रहा था?
उत्तर:
एक बूढ़ा आदमी।

प्रश्न 2.
बूढ़े आदमी क्या बो रहे हैं?
उत्तर:
आम की गुठलियाँ।

प्रश्न 3.
नौजवान के प्रश्न पर बूढ़े का उत्तर क्या था?
उत्तर:
भविष्य में दूसरों की भलाई के लिए आम की गुठलियाँ बो रहा हूँ।

प्रश्न 4.
पूर्वजों के मनोवृत्ति का फल क्या है?
उत्तर:
वर्तमान के लोगों के लिए भलाई होती है।

प्रश्न 5.
लेखक ने सुंदर स्वभाव की परिभाषा कैसे दी है?
उत्तर:
अशा दूसरों को सुख और आनंद पधुंचानेवाले सात्विक आनंद का स्वभाव।

प्रश्न 6.
हमारे पूर्वजों की इसी मनोवृत्ती का फल है, जो हम जगह-जगह अमराई देखते हैं। कौन-सी मनोवृत्ति?
उत्तर:
अपने स्वार्थी जीवन को त्यागकर दूसरों को सुख और आनंद पहुँचाने के सुंदर स्वभाव की मनोवृत्ति ।

प्रश्न 7.
बूढ़ा आदमी का ‘आम की गुठलियाँ बोना’ घटना का मुख्य आशय क्या है?
उत्तर:
हमें दूसरों को सुख और आनंद पहूँचानेवाले सात्विक आनंद के स्वभाव अपनाना चाहिए।

प्रश्न 8.
मान लें, रेलगाड़ी में सफर करनेवाली वृद्ध संभ्रांत महिला की नज़र डिब्बे में चिपके हुए विज्ञापन पर पड़ती है जो रक्तदान के महत्व को रेखांकित करता है। संकेतों के सहारे वह विज्ञापन तैयार करें।

  • समभाव
  • सहिष्णुता
  • मानव-प्रेम
  • जीवनदान

उत्तर:

स्वास्थ्य मंत्रालय का विज्ञापन
‘रक्तदान महादान है।’

भाईयो,…… बहनो,…..
रोगावस्था में पीड़ित भाई-बहनों से समभाव रखिए। सहिष्णुता और अनुकंपा रखकर जान बचाने के लिए | रक्तदान करके सहायता दीजिए। रक्तदान जीवनदान ही है!! सरकारी रक्तदान केन्द्रों में जाकर खुशी से रक्तदान कीजिए!! आपका रक्त कटेगा नहीं बढ़ेगा!! दूसरों की जान बचेगी।

प्रश्न 9.
संभ्रान्त महिला किस उम्मीद से फल और फूलों के बज़ फेंक रही है?
उत्तर:
उनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेगें तो लोगों का इससे कुछ फायदा होगा।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।

एक वृद्ध संभ्रांत महिला रेलगाड़ी से सफ़र कर रही थी। वे खिड़की के पास बैठकर, बीच-बीच में अपनी मुट्ठी से कुछ चीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं। एक सहयात्री ने, जो यह देख रहा था, पूछा, “यह आप क्या कर रही हैं?” उस महिला ने जवाब दिया, “ये सुंदर फलों और फूलों के बीज़ हैं। मैं इन्हें इस उम्मीद से फेंक रही हूँ कि इनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेंगे तो लोगों का इससे कुछ फायदा होगा । पता नहीं इस रास्ते से फिर गुजरूँ या न गुजरूँ, इसलिए क्यों न मैं इस संधि का उपयोग क लूँ?”

i. रेलगाड़ी से कौन यात्रा कर रहीं थी?
उत्तर:
एक वृद्ध संभ्रात महिला।

ii. वे क्या कर रही थीं?
उत्तर:
अपनी मुट्ठी से सुंदर फलों और फूलों के बीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं।

iii. सहयात्री ने क्या पूछा?
उत्तर:
सहयात्री ने पूछा : यह आप क्या कर रही हैं?

iv. गद्यांश का संक्षेपण करें।
उत्तर:
एक वृद्ध संभ्रात महिला रेलगाड़ी से सफर करते समय सुंदर फलों और फूलों के बीज़ बाहर फेंकती जा रही थीं। उनका उद्धेश्य था कि उनमें से कुछ भी अगर जड़ पकड़ लेंगे तो, लोगों का उससे कुछ फायदा होगा।

v. संक्षेपण केलिए उचित शीर्षक दें।
उत्तर:
जन-सेवा।

प्रश्न 11.
हमें किसके परे रहना चाहिए?
उत्तर:
घर भौतिकवाद और भोग-विलास की हाय-हाय से परे ।

प्रश्न 12.
किस प्रकार के लोगों को देखकर मानव जाति के भविष्य पर श्रद्धा और विश्वास कर सकते हैं?
उत्तर:
जमाने के अंधकार में भी आनंद की फुलझड़ियों से प्रकाश फैलाते रहनेवालों को देखकर ।

प्रश्न 13.
बेंचमिन फ्रांक्लिन ने विद्यार्थी की मदद कैसे की?
उत्तर:
उन्होंने विद्यार्थी को बीस डॉलर देकर मदद की।

प्रश्न 14.
कुछ दिनों के बाद विद्यार्थी डॉलर लौटाने आए तो फ्रांक्लिन ने क्या कहा?
उत्तर:
उन्होंने कहा : “मुझे याद तो नहीं है कि मैंने यह रक़म आपको कब दी। लेकिन खैर, आप इसे अपने ही पास रखिए और जब आपके पास कोई ऐसा ही जरूरतमंद आए तो उसे यह दे दीजिए।”

प्रश्न 15.
बीस डॉलर किनके हाथों में घूम रही है?
उत्तर:
जरूरतमंदों के हाथों में।

प्रश्न 16.
ज़रूरतमंद कौन-कौन हो सकता है?
उत्तर:
सहायता मिलने के लिए व्याकुल रहनेवाले सभी लोग ज़रूरतमंद होते हैं।

प्रश्न 17.
हमारा जीवन मुसीबतों से भरा पड़ा है । कैसे?
उत्तर:
अब लड़ाई, गरीबी, महंगाई और गुलामी से।

प्रश्न 18.
दुनिया रहने लायक कैसे बनी?
उत्तर:
निस्वार्थ और आदर्श-प्रिय लोगों की उपस्थिति से।

प्रश्न 19.
पैसा वापस देने आया छात्र औह बेंजमिन फ्रैंकलीन के बीच का वार्तालाप तैयार करें?
उत्तर:
छात्र : नमस्कार जी!
फ्रैंकलीन : नमस्कार।
छात्र : आप मुझे जानते हैं?
फ्रैंकलीन : याद नहीं, लगता है कि देखा है।
छात्र : मैंने आप से कुछ डॉलर माँग लिया था।
फ्रैंकलीन : कब?
छात्र : कुछ साल पहले मेरी पढ़ाई केलिए। अब मेरी पढ़ाई खतम हुई। वह डॉलर वापस देने आया हूँ।
फ्रैंकलीन : यह डॉलर मुझे नहीं, किसी ज़रूरतमंद को दो।
छात्र : आप का मन कितना अच्छा है!
फ्रैंकलीन : तुम से कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति माँगे है तो उसे यह डॉलर दो। जाओ।
छात्र : ठीक है, धन्यवाद ।

प्रश्न 20.
किसके लिए छीना-झपटी होती थी?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए।

प्रश्न 21.
टिकट बाबू किन बातों को सुना-अनसुना करके अपना काम करते रहे?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए छीना-झपटी करनेवालों के परिहासों और धमकियों को।

प्रश्न 22.
टिकट बाबू की परेशानी का कारण क्या था?
उत्तर:
टिकट लेने के लिए बड़ी भीड़ थी। वहाँ पर छीना-झपटी होती थी। छोटी-सी खिड़की से टिकट के लिए घुसानेवाले अनेक हाथों को टिकट देने केलिए टिकटबाबू अकेला था।

प्रश्न 23.
टिकट बाबू पर इन शब्दों का अजीब असर पड़ा । क्यों?
उत्तर:
लेखक ने टिकट बाबू की परेशानी समझकर बड़ी सहानुभूति से व्यवहार करके मुसाफिरों को शांत किया।

प्रश्न 24.
टिकट बाबू को नई ताकत कैसे मिली?
उत्तर:
लेखक की सहानुभूति के शब्दों से टिकट बाबू को नयी … ताकत मिली।

प्रश्न 25.
टिकट बाबू का हृदय कब मोम-सा हो गया?
उत्तर:
टिकट बाबू के प्रति लेखक सहानुभूति दर्शाने पर।

प्रश्न 26.
टिकट बाबू से संबंधित घटना का ज़िक्र करते हुए लेखक अपने मित्र को पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तर:

स्थान,
तारीख,

प्रिय मित्र रामू,

तुम कैसे हो? ठीक हो न? यहाँ पर मैं ठीक ही हूँ।
रामू, कुछ दिन पहले अपने काम से मुंबई जाने के लिए मैं टिकट लेने गया। वहाँ पर बड़ी छीना-झपटी होती थी। टिकट बाबू बड़ी परेशानी में था। लोग हल्ला करते थे, टिकट बाबू का परिहास करते थे। कुछ लोग उनको धमकी भी करता था। लेकिन टिकट बाबू इन बातों को सुना- अनसुना करके आपना काम करते रहे। मैं पास ही खड़ा था। मैंने बड़ी सहानुभूति से टिकट बाबू के बारे में यात्रियों से बात की। मेरी सहानुभूति देखकर टिकटबाबू को बड़ा आश्वास मिल गया। उन्होंने जल्दी मेरा टिकट दे दिया और एक नए उत्साह से अन्य यात्रियों को वे टिकट देने लगे।

प्रिय मित्र, दुसरों की कठिनाइयों को समझकर हमें व्यवहार करना चाहिए। हमारे कर्म और वचन से दूसरों को आश्वास मिला चाहिए।
यहाँ पर तुम कब आवोगो? तुम्हारी प्रतीक्षा में मित्र,

(हस्ताक्षर)
शेवड़े।

पताः
नाम

प्रश्न 27.
क्लर्क का तमाम दिन कैसे बीतता है?
उत्तर:
बैंक के रूखे आँकड़ों से माथापच्ची करते -करते क्लर्क का तमाम दिन बीतता है।

प्रश्न 28.
क्लर्क के किस गुण का सम्मान किया गया?
उत्तर:
अच्छी हस्तलिपि का।

प्रश्न 29.
क्लर्क का चेहरा प्रसन्नता से क्यों खिल उठा?
उत्तर:
लेखक के थोड़े-से शब्दों द्वारा क्लर्क के जीवन में किंचितमात्र सुख पहुँचने पर।

प्रश्न 30.
लेखक को क्यों प्रसन्नता महसूस हुई?
उत्तर:
प्रय लेखक को थोड़े-से शब्दों द्वारा बैंक के क्लर्क के जीवन में थोड़ा सुख पहूँचते देखकर लेखक को प्रसन्नता महसूस हुई।

प्रश्न 31.
बैंक का क्लर्क अपनी हस्तलिपि की तारीफ सुनने पर बहुत खुश हुआ। घर आने पर पत्नी उसकी खुशी का कारण जानना चाहती है-दोनो के बीच का संभावित वार्तालप लिखें।
उत्तर:
पत्नी : आज आप बहुत खुश है ….
क्लर्क : हाँ-हाँ….
पत्नी : कारण क्या है?
क्लर्क : एक कारण है।
पत्नी : मुझे भी बताओ….
क्लर्क : तुम जानना चाहती हो?
पत्नी : क्यों नहीं?
क्लर्क : तुम अनंत गोपाल शेवड़े को…
पत्नी : ओहो… सुप्रसिद्ध लेखक?
क्लर्क : जानती हो उन्हें?
पत्नी : सुनी तो है।
क्लर्क : आज उन्होंने मेरे बैंक में…
पत्नी : बैंक में?
क्लर्क : आये थे।
पत्नी : तो ?
क्लर्क : उन्होंने मेरी हस्तलिपि की …..
पत्नी : प्रशंसा की?
क्लर्क : हाँ…हाँ…
पत्नी : बड़ी बात है।
क्लर्क : हाँ…हाँ…

प्रश्न 32.
बैंक क्लर्क ने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? वह डायरी तैयार करें।
उत्तर:
तारीख
आनंद नगर :
आज का दिन बहुत अच्छा है। आज मुझे मिली प्रशंसा एक पंखुडी के समान मुझे अब भी सहलाती है। वह आदमी कितना अच्छा है! आज पहली बार बैंक के बोरिंग समय में कुछ राहत मिली। उस आदमी ने खाता खोलने के लिए आया था। मैं उनका नाम और पता लिखते समय उन्होंने मेरी हस्तलिपि पर ध्यान दिया और कहा ‘ब्यूटिफुल’! मेरा मन खुशी से भरा। सब लोगों ने मेरी हस्तलिपि देखी थी, पर किसीने भी मुझ से कुछ नहीं कहा था । अब मैं गर्व का अनुभव करने लगा। बड़ी खुशी से मैंने उनसे बातें कीं। पत्नी से भी यह बात कही। यह दिन में कभी नहीं भूलूंगा।

प्रश्न 33.
आनंद की फुलझड़ियाँ निबन्ध में लेखकने रेल विभाग के एक टिकट बाबू से करुणा प्रकट की थी। उस दिन के टिकट बाबू की डायरी तैयार करें।
उत्तर:

तारीख

आनंद शहर :
आज का दिन अच्छा दिन था। एक आदमी ने मुझे आज ठीक समझा है। यह बात मेरे मन में खुशी भरती है। यात्रियों की भीड़, उनकी परेशानियाँ, धमकियाँ आदि – आदि ने मुझे बहुत परेशानियाँ देती थीं। टिकट कौंटर में हर दिन अकेला रह गया हूँ। मेरी कठिनाइयों पर किसी ने ध्यान नहीं किया था। पर आज एक सज्जन ने मुझपर ध्यान देकर मेरी मदद की। टिकट लेने केलिए खड़े लोगों से मेरी परेशानियों के बारे में बताने की कृपा उन्होंने की। यह एक अजीब बात थी। उनकी सहानुभूति देखते वक्त मेरा हृदय मोम जैसा बन गया। वे शब्द मेरे मन में सांत्वना देने लायक थे। उस घटना के बाद मैं शांत भाव से टिकट देने में समर्थ हुआ।

वे कौन होंगे? जाते वक्त उन्होंने कहा कि फिर मिलें। ज़रूर उनसे मिलना चाहिए। ऐसे सज्जनों से परिचय पा लेना कितनी अच्छी बात है! आज का दिन मैं कभी नहीं भूलूंगा।

प्रश्न 34.
निम्नलिखित अर्थों के समानार्थी मुहावरों को लेख से छाँटकर लिखें।
(नष्ट होना, विपत्ति के दिनों के बाद सुख का दिन आना, सहन करना, हिम्मत करना, किसी के अच्छे काम की न्यायदृष्टि से प्रशंसा करना)
उत्तर:
रसातल में जाना = नष्ट होना
दिन फिरना = विपत्ति के दिनों के बाद सुख का दिन आना
ताना कसना = सहन करना
दिल कडा करना = हिम्मत करना
दाद देना = किसी के अच्छे काम की न्यायदृष्टि से प्रशंसा करना

प्रश्न 35.
सूचनाः यह गद्यांश पढ़िए और नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

नाविक भोलाराम रेलगाड़ी के वातानुकूलित डिब्बे में बैठ रहे थे। उनके पास काफ़ी रुपये थे। एक लड़की भी उस डिब्बे में आ बैठी। उसने नाविक से बातें शुरू की। उसने अपनी गरीबी का जिक्र किया तो नाविक ने पूछा कि इतनी गरीबी में भी वातानुकूलित डिब्बे में तुम क्यों यात्रा कर रही हो? तब लड़की ने कहा कि उसकी शादी तय हो चुकी है। और अपने ससुरालवालों को प्रभावित. करने केलिए वह इस डिब्बे में यात्रा कर रही है। फिर उस लड़की ने नाविक से कुछ रुपया माँग लिया तो उसने देने से इनकार कर दिया। तब लड़की ने उसको धमकी देकर कहा कि मुझे बीस हज़ार रुपये दें दो, नहीं तो मैं तुम्हारे ऊपर झूठे इल्ज़ाम लगाउँगी। गाड़ी रुकी तो लड़की ने पुलिस से कहा कि नाविक ने अपने हाथ से मेरा मुँह बंद कर लिया और दूसरे हाथ से मुझे खींचकर मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की है। लेकिन जाँच करने पर पुलिस को मालूम हुआ कि नाविक के दोनों हाथ कटे हुए हैं। झूठे इल्ज़ाम लगाने के अपराध में लड़की पकड़ी गयी।
(इल्ज़ाम – आरोप, इज्जत लूटना – अपमानित करना)

i) इस गद्यांश से कौन सा सन्देश मिलता है?
उत्तर:
हमें कभी भी कपट न होना चाहिए।

ii) इस गद्यांश का संक्षेपण करें और उचित शीर्षण लिखे।
उत्तर:
कपटता :
एक लड़की ने भोलाराम नामक एक बिना हाथवाला नाविक के साथ रेलगाड़ी में यात्रा करते समय धोखा देने की कोशिश की। पुलिस आकर लड़की को पकड़ा।

प्रश्न 36.
हिंदी भारत की राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा है- ‘सीखें हिंदी, सिखाएँ हिंदी’ – इस विषय पर निबंध लिखिए।
उत्तर:

सीखें हिंदी, सिखाएँ हिंदी

भारत में अनेक भाषाएँ हैं। भाषाओं को उपभाषाएँ और प्रादेशिक भाषाएँ भी हैं। लेकिन भारत के अधिकांश लोगों से बोलनेवाली भाषा हिंदी है। इसलिए हिंदी को भारत की संपर्क भाषा के रूप में माना जाता है। हिंदी भारत की राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा है। हिंदी एक सरल भाषा है। हमें यह जानने से खुशी होगी कि संसार में सबसे ज्यादा बोलनेवाली तीसरी भाषा हिंदी है। आज हिंदी अन्तर्देशीय भाषा के रूप में प्रचलित होती जाती है।

भारत विविधता का देश है। लेकिन हिंदी एकता की कड़ी है। भारत की संस्कृति हिंदी से जुड़ी रहती है। हिंदी समृद्ध साहित्य से भी संपन्न है।

हिंदी का प्रचार करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। हिंदी के प्रचार से भारत में एकता बढ़ेगी। इससे यह .मतलब नहीं है कि अन्य प्रादेशिक भाषाएँ महत्वपूर्ण नहीं है और वे तिरस्कृत हो जायें। प्रादेशिक भाषाओं का भी संरक्षण होना चाहिए। हिंदी के प्रचार से भारत की अखंडता सदा सुरक्षित रखें।

आनंद की फूलझडियाँ Previous Years Questions & Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर वार्तालाप तैयार कीजिए।
संभ्रान्त महिला रेलगाड़ी से कुछ चीजें बाहर फेंकती जा रही थी। तब सहयात्री और संभ्रान्त महिला के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार कीजिए। सहायक बिंदुः

  • रेलगाड़ी से चीजें बाहर फेंकना
  • सहयात्री द्वारा पूछा जाना
  • निःस्वार्थ सेवा
  • दुनिया में रहने लायक

उत्तर:
सहयात्री : यह आप क्या फेंक रही हैं?
महिला : मैं……?
सहयात्री : हाँ…. हाँ…….
महिला : तुम देखते नहीं?
सहयात्री : इसलिए तो पूछता हूँ।
महिला : ये तो बीज हैं।
सहयात्री : बीज?
महिला : हाँ… हाँ… फल-फूलों के बीज हैं।
सहयात्री : इनको खिड़की से क्यों फैंकती हैं?
महिला : इनमें कुछ जड़ पकड़ लेंगे।
सहयात्री : तो फिर?
महिला : तब फायदा होगा।
सहयात्री : फायदा? किस प्रकार?
महिला : फूलेंगे, फलेंगे।
सहयात्री : तब?
महिला : मनुष्य के लिए उपयोगी होंगे।
सहयात्री : अरे बापरे! आप तो महान कार्य कर रही हैं।
महिला : यह लो….आप भी फेंकिए।
सहयात्री : हाँ…… हाँ….. दीजिए।

प्रश्न 2.
मान लीजिए, आनंद की फूलझड़ियाँ इस निबंध का लेखक आत्मकथा लिखता है। आत्मकथा में टिकट बाबू के प्रसंग का उल्लेख है। निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर वह आत्मकथांश तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • लेखक का मुंबई जाना।
  • टिकट काऊंटर के पास भीड़ लगना ।
  • टिकट बाबू का परेशान होना ।
  • लेखक द्वारा टिकट बाबू के प्रति सहानुभूति प्रकट करना।

उत्तर:
आत्मकथा  :
कुछ साल पहले की बात है। मुझे जल्द ही मुंबई पहूँचना था। मैं टिकट लेने केलिए टिकट काउंटर पहूँचा । लड़ाई के कारण गाड़ियों की संख्या कम थी। इसलिए काउंटर के पास बहुत भीड़ लगी हुई थी। टिकट बाबू परेशानी से टिकट बनाते थे। लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण उसे ठीक तरह से सभी लोगों को टिकट बन नहीं पा रहे थे। लोगों की ओर से कई प्रकार के बुरे टिप्पणियाँ उन पर हो रहे थे। इसका असर उपनर और बुरी तरह से हो रहे थे। बाबू कितने ही ईमानदारी से काम करें लोग उनपर शक से बात करते थे। यह सब देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। वह पूरी ताकत से काम कर रहे थे, फिर भी लोग उनपर गालियाँ दे रहे थे। मैं वहाँ के लोगों को समझाया कि बाबू बहुत कोशिश कर रहे हैं और उसे कुछ समय दीजिए। मैं बाबु से ऐसे बातें किया कि उसे कुछ आश्वास मिला। मेरा सहानुभूति का असर उनपर हुआ। वह फिर पूरी कोशिश की और मुझे धन्यवाद भी अदा की। मुझे पूरा यकीन था कि अच्छे वाक्यों का अच्छा असर हो जायेगा।

आनंद की फूलझडियाँ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 4
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 5
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 6
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 7
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 8

आनंद की फूलझडियाँ शब्दार्थ

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 12
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 9 आनंद की फूलझडियाँ 13

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि

प्रश्न 1.
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है’, चाँद क्यों ऐसा कह रहा है?
उत्तर:
आदमी स्वयं उलझनें बनाकर अपने आप को उसमें फँस देता है। फिर, बैचेन होकर वह न जगता है, न सोता है।

प्रश्न 2.
आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है- अपना मत प्रकट करे।
उत्तर:
कवि रामधारी सिंह दिनकर के अभिप्राय में आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला है। वह आज बनता है और कल फूट जाता है। कभी कभी यह बात ठीक है। लेकिन सदा ऐसा नहीं होता। स्वप्न को आदमी यथार्थ में ले आकर महान कार्य करता है। हमें व्यर्थ में स्वप्न न देखना चाहिए। यथार्थ में फलनेवाले स्वप्न देखना चाहिए। अब्दुल कलाम जी ने कहा है: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 3.
कवि के बदले रागिनी क्यों बोल उठी?
उत्तर:
स्पप्न को ठीक रूप से समझने में असमर्थ होकर कवि मौन रहा। इसलिए रोगिनी बोल उठी।

प्रश्न 4.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?
उत्तर:
धारवाली।

प्रश्न 5.
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?
उत्तर:
व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कविता में प्रस्तुत किया गया है।

चाँद और कवि अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 6.
समान भाववाली पंक्ति चुनकर लिखें।
a. स्वप्नों को आग में गलाकर लोहा बनाता है।
b. मनु पुत्र के कल्पना भरे सपने तीखे होते हैं।
c. चाँद इतना पुराना है कि उसने मनु का जन्म और मरण देखा है।
d. आदमी स्वयं उलझनें बनाकर चैन खो बैठता है।
उत्तर:
a. आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
b. जिसकी कल्पना की जीभ में भी धार होती है।
c. मैं कितना पूराना हूँ?, मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते।
d. उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता है और फिर वैचैन हो जगता न सोता है।

प्रश्न 7.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।

प्रश्न 8.
विश्लेषणात्मक टिप्पणी की परख, मेरी ओर से

  • पंक्तियों का विश्लेषण किया है।
  • अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है।
  • पंक्तियों के विचार से अपने विचार की तुलना की है।

प्रश्न 9.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है। कवि से चाँद कहता है कि मनुष्य विचित्र जीव है। यह इसलिए है कि आदमी जान-बूझकर उलझनें उत्पन्न करता है, उसीमें फंस रहता है, फिर बेचैन होकर उसको नींद तक दुस्सह होता है ।चाँद सृष्टि के पुराने पदार्थ होने पर अहं करता है। चाँद कहता है कि उसने आदि मानव मनु के जन्म और मरण देखा है। चाँदनी में पागल की तरह बैठ स्वप्नों को यथार्थ में परिवर्तन करने का परिश्रम करनेवाले कवि को चाँद तुच्छ मानता है। हमारे समाज में कई प्रकार की रूढ़ियाँ हैं। वे सदा परिवर्तन के विरुद्ध खड़ी रहती हैं। कवितांश में चाँद रूढ़ियों का प्रतिनिधि है। परिवर्तन एक क्षण में नहीं होता। उसके पीछे दशकों की कल्पनाएँ और स्वप्न समाहित हैं। परिवर्तन केलिए कल्पना करनेवालों और स्वप्न देखनेवालों का प्रतिनिधि हैं कवि। कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 1

प्रश्न 10.
निम्नांकित कथन पर अपना विचार प्रस्तुत करें
“महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।”
– डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर:
सपनों का महत्व
जीवन को आगे बढ़ाने के लिए स्वप्ने होना आवश्यक है। दिवास्वप्नों से कोई उपयोग नहीं। ये जल के बुलबुले समान है। यथार्थ से इनको कोई संबंध नहीं है। हमें सच्छे स्वप्न देखना चाहिए। महान व्यक्ति ही महान सपने देखते हैं। महान स्वप्नों से ही महान कार्य निकलते हैं। महान लोग व्यर्थ स्वप्नों को कभी प्रधानता नहीं देते। महान लोग अपने स्वप्नों को यथार्थ में बदल देने के लिए उत्सुक रहते हैं। अब्दुल कलामजी ने ठी कहा है कि: ‘महान सपने देखनेवालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है।
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बैचैन हो जगता न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?
मैं चुका हैं देख मनु को जनमते-मरते?
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी पर बैठ स्वपनों पर सही करते।

i) यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
रामधारी सिंह दिनकर की ‘चाँद और कवि’ से।

ii) यहाँ किन के बीच बातचीत हो रही है?
उत्तर:
चाँद और कवि के बीच।

iii) कविता के ‘अनोखा’ शब्द का समानार्थी शब्द लिखें?
उत्तर:
विचित्र।

iv) निम्नलिखित शब्दों के लिए कविता में प्रयुक्त शब्द छाँटकर लिखें? आसमान, विचित्र, मानव
उत्तर:
गगन, अनोखा, आदमी

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
आदमी का स्वप्न? है वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है,
किंतु, तो भी धन्य; टहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु, मेरी रागिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तू?
स्वप्न मेरे बुलबुले हैं? हे यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!
मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाती हूँ।
और उसपर नींव रखती हूँ नए घर की,
इस तरह, दीवार फ़ौलादी उठाती हूँ।

i) चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न किसके समान है?
उत्तर:
जल के बुलबुले के समान।

ii) बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
कवि।

iii) कवि केलिए कौन बोलने लगी?
उत्तर:
कवि की रागिनी। (कवि की काव्य चेतना, कविता)

iv) कवि आग में किसको गलाकर लोहा बनाता है?
उत्तर:
स्वप्न को।

v) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

आदमी के स्वप्न की तुलना जल के बुलबुलों से चाँद करता है। बुलबुलों से खेलकर कवि कविता बनाता है। क्षण में टूट जानेवाले बुलबुलों को सच मानकर कविता करनेवाले कवि पर चाँद यहाँ व्यंग्य करता है।

चाँद का व्यंग्य -परिहास सुनकर कवि चुप रहा। पर, परिवर्तन की आग मन में छिपाई हुई कवि की काव्य चेतना आर्थात कविता चुप नहीं रह सकी। वह चाँद को ललकारने लगी। अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई काव्य चेतना चाँद से सही पहचान करने को बताती है। काव्य चेतना की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ा करती है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, उन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

प्रश्न 14.
उलझनों में फँसकर कौन बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
आदमी।

प्रश्न 15.
कौन उलझनें बनाता है?
उत्तर:
प्रणा मानव।

प्रश्न 16.
आदमी किस में फँसकर बेचैन हो जाता है?
उत्तर:
उलझनों में

प्रश्न 17.
किसने मनु को जनमते -मरते देखा है?
उत्तर:
चाँद ने।

प्रश्न 18.
‘पागल कहकर चाँद किसका उपहास करता है?
उत्तर:
स्वपनों को यथार्थ में परिवर्तित करने का परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि को।

प्रश्न 19.
बुलबुलों से खेलकर कविता बनाता, कौन?
उत्तर:
परिवर्तन के लिए परिश्रम करनेवाले दिनकरजी जैसे कवि।

प्रश्न 20.
स्वप्न जल का बुलबुला है या नहीं, क्यों?
उत्तर:
स्वप्न केवल जल का बुलबुला नहीं। यह इसलिए कि परिवर्तन का तूफान सपनों में समावेश हुआ है।
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 16

प्रश्न 21.
चाँद का उपहास सुनकर कौन चुप रहा?
उत्तर:
कवि।

प्रश्न 22.
रागिनी ने चाँद से क्या-क्या कहा?
उत्तर:
अपनी शक्ति की घोषणा करती हुई चाँद से सही पहचान करने को रागिनी बताती है। रागिनी की घोषणा थी कि वह केवल स्वप्न को सच माननेवाली नहीं है, परंतु स्वप्न को अपने मनन की आग में गला-गलाकर लोहे में परिवर्तित करती है। फिर, उस मज़बूत नींव पर नए निर्माण की फौलादी दीवार खड़ी करती है।

प्रश्न 23.
स्वप्नो को गलाकर रागिनी (कविता) क्या बना देती है?
उत्तर:
लोहा बनाती है।

प्रश्न 24.
लोहे की नींव पर किसकी स्थापना होती है?
उत्तर:
नए घर की फौलादी दीवार की।

प्रश्न 25.
नए घर की दीवार कैसे होती है?
उत्तर:
फौलादी।

प्रश्न 26.
यहाँ दीवारों को फौलादी क्यों कहा गया है?
उत्तर:
मन में उठनेवाले विचार चाहे शुरु में अस्पष्ट दिखते हो, परंतु मन रूपी धौंकिनी में गल-गलाकर वे सुदृढ़ बनते जाते हैं। वे विचार समाज को सुदृढ़ बनाने में काम आते हैं।

प्रश्न 27.
मनु के स्थान पर आज कौन है?
उत्तर:
मानव।

प्रश्न 28.
मनु-पुत्र के हाथ में बाण और तलवार के रूप में क्या-क्या है?
उत्तर:
विचार और स्वप्न।

प्रश्न 29.
मनु-पुत्र की कल्पना कैसी है?

प्रश्न 30.
जिह्वा, तीर, खड़ग- आदि शब्दों के समानार्थी पद कविता से छाँटकर लिखें।
उत्तर:
जिह्वा = जीभ, तीर = बाण, खड़ग = तलवार

प्रश्न 31.
स्वर्ग के सम्राट को क्या खबर पहूँचाना है?
उत्तर:
जिस को स्वप्नजीव कहकर उपहास करता है, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

प्रश्न 32.
स्वर्ग के सम्राट से क्या ललकार किया जाता है?
उत्तर:
मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूकियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है।

प्रश्न 33
स्वर्ग का सम्राट कौन हो सकता है?

Plus One Hindi चाँद और कवि Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़िये और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
आदमी का स्वप्न? वह बुलबुला जल का,
आज बनता और कल फिर फूट जाता है;
किंतु, तो भी धन्य; ठहरा आदमी ही तो!
बुलबुलों से खेलता, कविता बनाता है।
मैं न बोला, किंतु मेरी रोगिनी बोली,
चाँद! फिर से देख, मुझको जानता है तूऊ
स्वप्न मेरे बुलबुले है? है यही पानी?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू!

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
उत्तर:
चाँद और कवि

प्रश्न 2
कविता के ‘रागिनी’ शब्द का समानार्थी शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (उपन्यास, नाटक, कविता, कन्या)
उत्तर:
कविता

प्रश्न 3.
जल के बुलबुले की विशेषता क्या है?
उत्तर:
जल के बुलबुले आज बनते हैं और कल फिर टूट जाते हैं।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री रामदारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध कविता ‘चाँद और कवि’ से है। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि हे दिनकर। उर्वशी, रेणुका, कुरुक्षेत्र आदि आपके प्रसिद्ध रचनायें है। चाँद कवि को मानव के पागलपन के बारे में कहते हैं। कवि जवाब के रूप में कहते हैं कि आदमी का स्वप्न जल का बुलबुला जैसा है – आज बनता हैं कल टूट जाते हैं। फिर भी वह धन्य है क्योंकि आदमी ऐसे स्वप्नों से खेलकर कविता बनाता है।

अर्थात् नये नये सृजन करते है। कवि के अंतर की रागिनी बोलती है कि चाँद तुम जो पानी और बुलबुले कहकर पुकारनेवाला मानव का स्वप्न असल में आग हैं। तुम इसे ठीक तरह से पहचानते नहीं। .. यहाँ कवि सरल भाषा में समाज को आह्वान कर रहे हैं कि हम मानव किसी भी बात में पीछे नहीं होना चाहिए। हम जिसे स्वप्न के रूप में देखते हैं कह कर भी डालते हैं। छात्रों को जागरित होकर प्रयत्न करने का प्रोत्साहन देनेवाले कविता है यह।

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
मनु नहीं मनु-पुत्र है यह सामने, जिसकी,
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न को भी हाथ में तलवार होती है
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे
रोड़ ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं ते
रोकिए, जैसे बने, इन स्वप्नवालों को
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं ये।

1. यह कवितांश किस कविता से लिया गया है?
2. कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द कोष्ठक से चुनकर लिखिए। (तलवार, तेज, बाण, रोज़)
3. मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
4. कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
i) कवितांश के ‘धार’ शब्द का समानार्थि शब्द लिखिए।
उत्तर:
तेज़।

ii) मनु-पुत्र की कल्पना कैसी होती है?
उत्तर:
मानव है मनु-पुत्र। उस में असीम शक्ति है। उसकी कल्पना धारवाली होती है। इसमें विचारों के बाण ही नहीं, हाथों में सपनों के तीक्ष्ण तलवार भी रहती है। आर्थात, मानव के सपने और विचार में असीम शक्ति होती है।

iii) कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कवितांश ‘चाँद और कवि’ कविता से अवतरित है। इसके कवि हैं सुप्रसिद्ध देशभक्त कवि रामधारी सिंह दिनकर। ‘चाँद और कवि’ दिनकरजी का प्रगतिशील कविता है।

कवितांश की भाषा सरल है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। कवितांश का भाव स्पष्ट करने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

कवितांश मनुपुत्र मानव की अपार शक्ति से चाँद को परिचित कराती है। मानव के मन, वचन और कर्म की अपार समन्वयशक्ति की घोषणा करके चाँद को ललकारती है कि मानव अपनी मननशक्ति के सहारे रूढ़ियों पर विजय प्राप्त करता आ रहा है। जिस को स्वप्नजीव कहकर परिहास करते हो, उसे रोकने की क्षमता किसी में नहीं है।

कवितांश की भाषा ओजस्वी है। पंक्तियाँ प्रतीकात्मक और बिम्ब-प्रधान हैं। व्यक्ति, समाज, राष्ट्र एवं विश्व की सकारात्मक प्रगति के विरुद्ध खड़ी होनेवाली समस्त नकारात्मक शक्तियों को स्वर्ग के सम्राट के रूप में प्रतीकात्मक रीति से कवितांश में प्रस्तुत किया गया है। कवितांश का भाव हममें लाने में कवि सफल हो गए हैं। कवि ने यहाँ मानव की क्रियात्मक प्रतिभाशक्ति को महत्व दिया है।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 17

चाँद और कवि Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 2

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 3

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 8

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 9

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 10
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 11
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 12

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 8 चाँद और कवि 13

चाँद और कवि Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़

प्रश्न 1.
बीमारियाँ कैसे जन्म लेती हैं?
उत्तर:
बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में मच्छर पैदा होना एक सामान्य बात है, जिसके परिणामस्वरूप मलेरिया व डेंगु जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं।

प्रश्न 2.
बीमारियाँ कैसे फैलती हैं?
उत्तर:
स्थाई निवारण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। इसलिए बीमारियाँ फैलती हैं।

आपकी आवाज़ अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
चर्चा करें – संपादकीय लेखन कैसे?

चर्चा बिंदु :

  • विषय का चुनाव
  • विषय के ज़रूरी तथ्य
  • समस्या-प्रस्तुति का ढाँचा
  • समर्थन का तरीका
  • संपादकीय भाषा
  • शीर्षक

(सहायक संकेत-परिशिष्ट, पृष्ठ संख्या-110-111, संपादकीय)

प्रश्न 2.
‘बढ़ती बीमारियाँ’ में
a. किस विषय की चर्चा हुई है?
b. विषय-प्रस्तुति के लिए कौन-कौन से तथ्य जुटाए हैं?
c. समस्या का समर्थन करने के लिए क्या-क्या तर्क उठाए हैं?
d. समस्या प्रस्तुत करने के लिए कौन-सी भाषा-शैली का प्रयोग किया है?
e. संपादकीय का शीर्षक कैसे चुना है?
उत्तर:
a. राजधानी दिल्ली में बढ़ती बीमारियों की चर्चा हुई है।
b. विषय संबंधी आवश्यक जानकारी, सांख्यिकीय स्पष्टीकरण ज़रूरी प्रस्ताव आदि तथ्य जुटाए हैं।
c. स्थिति की गंभीरता, सरकार का उत्तरदायित्व आदि तर्क उठाये है।
d. सरल शब्दों में आकर्षक एवं प्रभावशाली भाषा शैली।
e. समकालीन समस्या संबन्धी।

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 1

प्रश्न 3.
रपट के लिए एक नया शीर्षक लिखें।
शीर्षक की परख, मेरी ओर से

  • पढ़ने को प्रेरित करता है।
  • केंद्र आशय को उद्दीप्त करता है।
  • भ्रमात्मकता से रहित है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से ‘बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ’ पर संपादकीय तैयार करें।

  • कच्ची-टूटी सड़कें
  • गाड़ियों की बढ़ती संख्या
  • ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन
  • नशीली चीज़ों का उपयोग
  • नियमों का सज़ पालन
  • जागरण-कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमकार 19 मार्च 2016
बढ़ती सड़क दुर्घटनाएँ

केरल में सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती जाती हैं। कल कोल्लम जिले में एक मिनी बस के पलटने से 2 लोगों की मृत्यु हो गयी और 12 लोग घायल हो गये। सड़क कच्ची-टूटी अवस्था में है। गाड़ियों की संख्या रोज़ बढ़ती जाती है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता जाता है। सरकार की ओर से आवश्यक ध्यान इन बातों पर नहीं है। अनेक ड्राईवर लोग नशीली चीज़ों के उपयोग करके गाड़ियाँ चलाते हैं। इनको पकड़ने के लिए सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाता है। नियमों का सख्त पालन पर सरकार की ओर से ज़रूरी ध्यान होना चाहिए। जनजागरण-कार्यक्रम भी होना चाहिए। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सहयोग देना चाहिए।

प्रश्न 4.
संपादकीय की परख, मेरी ओर से

  • तथ्यों की सटीक प्रस्तुति हुई है।
  • समस्या के विभिन्न कारण प्रस्तुत किए हैं।
  • समस्या-समाधान के सुझाव प्रस्तुत किए हैं।
  • अनावश्यक विस्तार नहीं है।
  • आकर्षक शीर्षक है।

उत्तर:
संपादकीय समाचार पत्र या अन्य पत्रिका का अभिमत प्रकट करनेवाला एक लेख है। जनहित और जनमत संपादकीय का विषय होना चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक या अन्य समस्याओं पर अपना मंतव्य प्रकट करना संपादकीय के विषय का जरूरी तथ्य होता है। आवश्यक जानकारी और तथ्यों का समाहर करना संपादकीय लिखने के पहले ज़रूरी है। मर्म छूटे बिना विषय को संक्षिप्त रूप में प्रकट करना चाहिए। विषयानुकूल तथ्यों का समर्थन और विरोधी विचारों का खंडन संपादकीय में होना चाहिए। भाषा प्रवाहमय और सरल शब्दों में होनी चारिए। विषयोचित आकर्षक शीर्षक होना चाहिए। संपादकीय का अंत अत्यंत प्रभावशाली होना चाहिए। संपादकीय रोचक एवं पठनीय होना भी है।

प्रश्न 5.
संपादकीय तैयार करें- जनसंख्या विस्फोडन पर दैनिक समाचार में छापने योग्य संपादकीय तैयार करें। जल की कमी और जल का दुरुपयोग जीव-जंतुओं के लिए खतरा उत्पन्न करता है।

  • जल जीवन का आधार
  • जल प्रदूषण और दुरुपयोग
  • जल की सुलभता में कमी
  • जल शोषण के प्रकार
  • जल स्रोतों का संरक्षण

उत्तर:

दैनिक सूरज –
सोमवार 19 मार्च 2016
बढ़ती जल-समस्या

केरल में अनेक नदियाँ हैं। वर्षा का भी कमी नहीं है। लेकिन शुद्ध जल का अभाव केरल की सबसे बड़ी समश्या हो रही है। जीवन का आधार है जल। यह जानकर भी केरल सरकार की ओर से पानी के संरक्षण केलिए उचित ध्यान नहीं होता। केरल की नदियों के और जलाशयों का जल निरंतर प्रदूषण है खतरे में है। जल का दुरुपयोग भी खूब होता रहता है। इसके प्रति सरकार और संबंधित अधिकारी लोग ध्यान क्यों नहीं देते? जल की सुलभता में कमी से केरल जनता की कठिनाईयाँ निरंतर बढ़ती रहती है। विभिन्न प्रकार से जल का शोषण हो रहा है। अक्सर अधिकारी लोग इसके लिए साथ देते रहते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण करना अनिवार्य है। सरकार के जल-विभाग की ओर से तुरंत इस दिशा में उचित कर्मपरिपाटियों की आयोजना होनी चाहिए। नहीं तो, सरकार सतर्क रहिए! सरकार से पेयजल और शुद्ध जल मिलने केलिए हड़ताल करने के लिए जनता मज़बूर हो जायेगी।

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प्रश्न 6.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’

बच्चे ओस की बूंदों की तरह एक दम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं। लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों के विरुद्ध अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। अधिकांश बच्छे सुरक्षाहीन वातावरण में रहते हैं। बच्चों के विरुद्ध बढ़नेवाले अत्याचारों को नियंत्रण में रखने के लिए कोई रास्ता है? मार्ग तो है, लेकिन मन नहीं है। निषकलंक बच्चों को अत्याचार के कारण अनावश्यक रूप से कष्ट सहने के अवसर होना बिलकुल पैशाचिक है, राक्षसीय है। अत्याचार बढ़ने का मुख्य कारण मानविकता का अभाव ही है। बड़ों के मन में मानविकुजा के भावों को जागरूक रखना चाहिए। सरकार की ओर से सख्त, नियमों के पालन के लिए सतर्कता होनी चाहिए। अपराधियों की मनोवृत्ति में बदलाव लाने के लिए सरकारी और अन्य संस्थाएँ सदा परिश्रम करते रहना चाहिए। अपराधियों को कठिन दंड दिलाने में विलंब न होना चाहिए। बच्चे देवदूत जैसे हैं। बच्चों से ही राष्ट्र की प्रगति हो सकती है। बच्चों के विरुद्ध कोई अत्याचार न होना चाहिए। हमारे बच्चे अत्याचारों से सदा सुरक्षित रहें।

प्रश्न 7.
सड़कों की बुरी हालत पर एक संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2016
हमारी सडकों की हालत

हमारी सडकें आजकल सुगम यात्रा के पथ नहीं हैं। सभी जगह गड्ढे हैं। उन गड्ढों से बचाकर गाडी चलाना आसान नहीं। बारिश के समय सड़कों की हालत और बुरी हो जाती है। बारिश के मौसम में सड़कें लोगों को इस भ्रम में डालती है कि वे सडक है या तालाब? इस स्थिति के बारे में हमेशा सूचित करते हुए भी सड़क परिवहन विभाग का ध्यान इस बात पर नहीं आया है। वह विभाग ज़रूरत के अवसर पर कुछ न कुछ करता है पर यह पर्याप्त नहीं है। हमारी सड़कों की रक्षा और लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार को इस विषय पर ज़रूर ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित बिंदुओं की सहायता से वृक्षारोपण: हमारा दायित्व पर एक संपादकीय तैयार करें।

  • पेड़ों की बरबादी – मौसम पर बुरा असर
  • जीव -जंतुओं पर असर
  • प्राकृतिक -संतुलन पर बुरा असर
  • मानव की स्वार्थता
  • वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व

उत्तर:

दैनिक सूरज
सोमवार 19 मार्च 2015
वृक्षारोपण: हमारा दायिच्च

पेड़-पौधों के बिना हमें जीना असंभव है। पुराने ज़माने से मनुष्य और पेड़ के बीच अटूट संबंध रहा है। शुद्धवायु मिलने के लिए, भोजन मिलने के लिए, छाया मिलने के लिए ऐसे अनेक लाभ के लिए पेड़ लगाकर संरक्षण करना जरूरी है। लेकिन आज पेड़ों की बड़ी बरबादी हो रही है। सरकार की ओर से इसको रोकने के लिए उचित कर्मपरिपाटी न होती। अक्सर यह भी होता है कि भ्रष्टाचारवाले सरकारी अधिकारी लोग पेड़ों की बरबादी के लिए साथ देते भी है। इसकी ओर सरकार जागरूक रहना चाहिए।

पेड़ -नशीकरण से मौसम पर बुरा असर होता है। जीवजंतुओं का उत्तरजीवन में बाधा होती है। प्राकृतिकसंतुलन पर भी बुरा असर होता है। मानव की स्वार्थता, संबंधित अधिकारी वर्ग के भ्रष्टाचार और लापरवाही आदि से पेड़ों की बरबादी न होनी चाहिए। वृक्षों की रक्षा हमारा दायित्व है। वृक्षारोपण प्रत्येक नागरिक का और सरकारी संस्था का दायित्व है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगायें और हमारे पर्यावरण का संरक्षण करें। राज्य सरकार इस दिशा में नेतृत्व, मातृका और प्रोत्साहन सदा देते रहे।

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 7

प्रश्न 9.
बाज़ार में रिंग-टोन कंपनी की ओर से नया मोबाईल फोन आया है। उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
नया मोबाईल आया है!!!
रिंग-टोन कंपनी की ओर से!
बहुरंगी है!
डेढ़ साल की वारंटी है।
2 जीबी मेमरी मुफ्त!
अदला-बदला की सुविधायें भी हैं।
जल्दी खरीद लीजिए।
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: रिंग-टोन कंपनी, आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 10.
मान लें, अनंतपुरम के शांतिनगर में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनाया है। दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इस मकान के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

Plus One Hindi आपकी आवाज़ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
‘जनसंचार माध्यम का प्रभाव – छात्रों में लाभ और हानि’ इस विषय पर सम्पादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदुः

  • मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट – आधुनिक युग का वरदान
  • बटन दबाने पर दुनिया भर की खबरें
  • दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क
  • युवा पीढ़ी का आकर्षण
  • विपत्तियाँ – माध्यमों का दुरुपयोग

उत्तर:

संपादकीय
दैनिक भास्कर 28.08.2016
जनसंचार माध्यम का प्रभाव
छात्रों में लाभ और हानि

आज हम तकनीकी विकास को सबसे ज़्यादा प्रमुखता देते हैं। मोबैल, टेलिविजन, इन्टरनेट आदि तकनीकी विकास के कारण हमें वरदान के रूप में मिले हैं। समय, दूरी आदि का मतलब ही आज बदल गया है। एक बटन दबाने से दुनिया भर की खबरें हमें मिलते है। कितने भी दूर के लोगों से हमें आसानी से बात कर सकते हैं। पहले चिट्टी के माध्यम से दिनों या हफ्तों के बाद मिलते थे वह आज निमिष मात्रा में मिल जाते है। मोबैल और इन्टरनेट से दुनिया भर के लोगों से सम्पर्क करना इतना आसान हो गया है कि दूरी आज मिट गया है। इसप्रकार के माध्यमों का प्रभाव युवा पीढ़ी में सबसे ज़्यादा हैं। आज इसका प्रभाव इतना है कि वह बाकी सब को छोडने लगे हैं। इसमें कुछ सामाजिक विपत्तियाँ भी है। बड़े लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। समय माध्यमों में ……………… रहने से नष्ट हो जाते है। कई लोग देखे में भी पड़ जाते हैं। समाज में आवश्यक आदान-प्रदान भी युवा पीढ़ी में कम हो रहे हैं।

हमें सतर्कता से काम करना चाहिए कि सामाजिक माध्यम हमारा विकास केलिए है – हम माध्य केलिए नहीं।

प्रश्न 2.
आज हम देख रहे हैं कि व्यक्ति अपना घर साफ करता है और वह गंदगी सड़क या बाहर फेंकता है। इस प्रसंग में ‘स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज के लिए अनिवार्य है’ – इस विषय पर निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार से संपादकीय तैयार कीजिए।
सहायक बिंदु:

  • सफाई का महत्व
  • गंदगी से हानियाँ
  • वातावरण को साफ रखना नागरिक का कर्तव्य
  • सख्त नियमों का पालन
  • स्वच्छता की शुरुआत घर से
  • अनेक प्रकार की बीमारियाँ
  • जागरण कार्यक्रम

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार 15 अगस्त 2016
स्वच्छ और साफ वातावरण की सृष्टि समाज केलिए
अनीवार्य

आधुनिक समाज में सब लोग सफाई का महत्व जानते हैं। सफाई केवल दिखाने केलिए नहीं बल्कि हमारे सुरक्षा केलिए है। गंदगी से कई प्रकार के बीमारियाँ फैलते है। आज कई प्रकार के बुखार फैल रहे हैं। मच्छर और मक्खी के कारण ही इसी प्रकार के बीमारियाँ ज्यादा फैल रहे हैं। ये दोनों जीव गंदगी में ही तेज़ी से बड़ते है। इसलिए हमें जल्द ही गंदगी को रोकना ही चाहिए।

स्वच्छता की शुरुवात घर से ही शुरू होता है। घर का और आसपास के वातावरण के साफ रखना नागरिक रा कर्तव्य है। लेकिन आजकल हम नागरिक ही गंदगी फैलने का कारण हो जाते हैं। कभी कभी घर की गंदगी को सड़क पर ही फेंकते हैं।

सरकारी तौर पर कई जानकारी योजनायें सफाई केलिए हो रहे हैं। कई संस्थायें और व्यक्तियों द्वारा भी सफाई के प्रोत्साहन केलिए कार्यक्रम हो रहे हैं। फिर भी कई लोग यह अपना कर्तव्य न मानकर समाज के विनाशक हो जाते हैं। हमें जानकारी के साथ सख्त नियमों का भी आवश्यकता है। नियमों का पालन हमारा कर्तव्य है। हमें प्रतिज्ञा करना है कि हम सब मिलकर हमारा ही रक्षा केलिए काम करने केलिए तैयार होंगे।

प्रश्न 3.
‘बच्चों के प्रति अत्याचार रोकें’ – इस विषय पर संपादकीय तैयार करें।
उत्तर:
सुन्दर मकान कम दाम में!!!
अनंतपुरम के शांतिनग में हरिता कन्स्ट्रक्शन्स ने एक नया मकान बनवाया है।
दो और तीन बेडरूमवाले इस मकान में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
मकान चाहनेवाले
जल्दी आ जाइए!!
तुरन्त 9800 में संपर्क कीजिए।
हमारा पता: हिंरिता कन्स्ट्रक्शन्स,
आनंदपुरम, शांतिनगर-5

प्रश्न 4
निम्नलिखित विषय पर सहायक बिंदु के आधार से सम्पादकीय तैयार कीजिए। विषयः ‘प्रदूषण – जैव मण्डल का अस्तित्व संकट में’
सहायक बिंदु:

  • प्रदूषण – जल, वायू और मिट्टी
  • प्रदूषणजन्य रोग
  • कूड़े-कचरे से बायोगैस
  • जैव कृषि का महत्व

उत्तर:

दैनिक भास्कर
10/5/2017
प्रदूषणः जैव मण्डल
का अस्तित्व संकट में

आज सब लोग जानते हैं प्रदूषण माने क्या है। सम्पूर्ण धरती प्रदूषण से विषलिप्त हो गया है। प्रकृति की स्वाभाविक हालत में आनेवाले हानिकारक परिवर्तन को ही प्रदूषण कहते हैं। जल, वायु और मिट्टी में प्रदूषण हो रहा है। रासायनिक पदार्थों, प्लास्टिक, विविध तरह के कचरे- यह सब हमारे पर्यावरण पर बुरा असर कर रहा है। यह हम जानते हैं लेकिन इसे रोकने के लिए कुछ नहीं करते हैं। जनता कहते हैं इसके ज़िम्मेदार सरकार हैं। सरकार कहते हैं नागरिक अपना दायित्व ठीक तरह से न निभाने से प्रदूषण बड़ते हैं। एक दूसरे को दोषी कहने से इस समस्या का समाधान नहीं मिलेगा। सरकार, नागरिक, संस्थायें – सब एकत्रित होकर प्रदूषण से प्रकृति को बचाने का प्रयत्न शुरू करता है।

पहले हमारे मन में यह सोच ठीक तरह से भरना होगा कि यह हमारा ही भलाई के लिए है। हम ही नहीं आनेवाली पीढ़ी के लिए भी हमें इस प्रकृति को बचाते रहना चाहिए। कई प्रकार के प्रदूषणजन्य रोग होते हैं तो इससे बचाव भी हमारे पास है। कूड़े-कचरे के सही रूप में उपयोग करके – बयोग्यास, कम्पोस्ट आदि का निर्माण करनी है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग बंद करना हैं। कीटनाशकों से बचने के लिए जैवकृषि का महत्व का प्रोत्साहन करना है। प्लास्टिक का उपयोग कम करना हैं। सरकार द्वारा जानकारी योजनायें करवाना हैं और जनता यह अपना दायित्व समझने है। आनेवाले कल के लिए हमें इस पर्यावरण को बचाने का प्रण लेना हैं।

प्रश्न 5.
सापदकीय तैयार कीजिए। विषयः हिंदी का प्रचार
सहायक बिंदुः

  • भारतीय भाषाओं में हिंदी का स्थान
  • हिंदी दिवस का महत्व
  • जनसाधारण का विचारविनिमय
  • भारतीयता का विकास

उत्तर:

दैनिक जागरण
सोमवार, 20 अप्रैल 2017
हिंदी हमारी पहचान

भारतीय भाषाओं में हिंदी सबसे श्रेष्ठ और महान है। भारत के अलावा अनेक देशों में हिंदी लेखक, हिंदी प्राध्यापक, हिंदी प्रचारक, हिंदी सेवी आदि लोग काम कर रहे हैं। आज हिंदी शासकों, राष्ट्राध्यक्षों की भी भाषा बन गई है जो संसार के एक सौ बीस देशों में किसी-न-किसी रूप में प्रचलित भी है। प्रचीन भारत और संस्कृति के बारे में जानने का सशक्त माध्यम है हिंदी भाषा और इसका सशक्त साहित्य। आज विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी उभर आ रही है। विश्व हिंदी सम्मेलन इसका सशक्त प्रमाण है। इसके अलावा पूरे भारत भर में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में आज हिंदी का प्रचार इतना बढ़ गया है कि जो व्यक्ति हिंदी जानता है वह पूरे भारत के किसी भी कोने में जाकर आसानी से बात कर सकता है और जीवन बिता सकता है। क्योंकि आज हिंदी जनसाधारण के विचारविनिमय का माध्यम बन गई है। एक सच्चे भारतीय होने के नाते हम सब को मिलकर हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए काम करना है। भारतीयता का विकास भी इसमें निहित है। राष्ट्र और राष्ट्रभाषा का विकास प्रत्येक भारतीयों के हाथ में निहित है। जिसके पास राष्ट्रभाषा नहीं है उसका कोई राष्ट्र भी नहीं है।

||जय हिंद, जय हिंदी||

आपकी आवाज़ Summary in Malayalam

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 3
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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 6

आपकी आवाज़ Glossary

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Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 9
Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 7 आपकी आवाज़ 10

Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

Kerala State Board New Syllabus Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus One Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 6 ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है

प्रश्न 1.
ब्लैक फिल्म देखें। (फिल्म देखते वक्त इन मुद्दों पर बारीकी से ध्यान दें)

  • पात्रों का अभिनय
  • संवादों की प्रासंगिकता
  • दृश्यों की विविधता
  • कथा का प्रवाह

प्रश्न 2.
फिल्म के आधार पर लिखें।

  • सबसे आकर्षक दृश्य
  • सबसे श्रेष्ठ अभिनेता
  • सबसे हृदयस्पर्शी संवाद
  • सबसे दर्दनाक दृश्य

प्रश्न 3.
फिल्म के निम्नांकित अंगों के लिए गुणवत्ता के अनुसार दें (अधिकांश)

  • कथा
  • पटकथा
  • अभिनय
  • छायांकन
  • साज-सज्जा
  • ध्वन्यांकन
  • संपादन
  • निदेशन

फिल्म से समीक्षा की ओर…

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
समीक्षा में किन-किन बिंदुओं की चर्चा की गई है?
उत्तर:
पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, संपादन-कार्य, छायांकन, ध्वन्यांकन, अभिनय, गीत, प्रार्श्व संगीत आदि की चर्चा की गयी है।

प्रश्न 2.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

प्रश्न 3.
फिल्म समीक्षा की परख, मेरी ओर से

  • फिल्म का संक्षिप्त परिचय दिया है।
  • अभिनय की खूबियाँ/कमियाँ बताई हैं।
  • निदेशक की क्षमता को अंकित किया है।
  • फिल्म के अन्य बिंदुओं की (पटकथा, संवाद-योजना, छायांकन, ध्वन्यांकन, संपादन, गीत आदि) चर्चा की है।
  • अपने विचारों का समर्थन किया है।

प्रश्न 4.
मान लें, ब्लैक फिल्म थियटर में 100 दिन पूरी करते वक्त पोस्टर में यह अनुशीर्षक (Caption) निकलता है।

संजय लीला भंसाली के निदेशन में अमिताभ बच्चन और राणी मुखर्जी के अभिनय-जीवन की अनमोल प्रस्तुति
‘ब्लैक’
101 वें दिन की ओर…

पोस्टर में छपने के लिए इसी प्रकार के विभिन्न अनुशीर्षक लिखें।
उत्तर:
i) सौ दिन के बाद भी ब्लैक भीड़ भरी।
ii) 101 वें दिन ……… 350 शो……. गजब! गजब!!
iii) सारा शहर ‘ब्लैक’ के पीछे

प्रश्न 5.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखें।
उत्तर:
i) तारे ज़मीं पर – फिल्मी समीक्षा
बच्चे ओस की बूंदों की तरह एकदम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं, लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों को अनुशासन के नाम पर तमाम बंदिशों में रहना पड़ता है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी (दर्शील सफ़ारी) का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों और पेटिंग में लगता है। उसके मातापिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता। ईशान घर पर माता-पिता की डाँट खाता है और स्कूल में शिक्षकों की। कोई भी यह जानने की कोशिश नहीं करता कि ईशान पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। इसके बजाय वे ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं।

खिलखिलाता ईशान वहाँ जाकर मुरझा जाता है। वह हमेशा सहमा और उदास रहने लगता है। उस पर निगाह जाती है आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ (आमिर खान)की। निकुंभ उसकी उदासी का पता लगाते हैं और उन्हें पता चलता है कि ईशान बहुत प्रतिभाशाली, लेकिन डिसलेक्सिया की बीमारी से पीड़ित है। उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। अपने प्यार और दुलार से निकुंभ ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं।

कहानी सरल है, जिसे आमिर खान ने बेहद प्रतिभाशाली तरीके से परदे पर उतारा है। पटकथा की बुनावट एकदम चुस्त है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं। ईशान का स्कूल से भागकर सड़कों पर घूमना, ताज़ा हवा में साँस लेना, बिल्डिंग के कलर होते देखना, फुटपाथ पर रहनेवाले बच्चों को आज़ादी से खेलते देखकर उदास होना, बरफ़ का लड्डू खाना जैसे दृश्यों को देख कई लोगों को बचपन की याद ताज़ा हो जाएगी।

सभी बच्चों का दिमाग और सीखने की क्षमता एक-सी-नहीं होती। फ़िल्म देखते समय हर दर्शक इस बात को महसूस करता है। ईशान की भूमिका में दर्शील सफ़ारी इस फ़िल्प की जान है। अमीर खान मध्यांतर में आते हैं और छा जाते हैं। टिस्का चोपड़ा (ईशान की मम्मी) ने एक में की बेचैनी को उम्दा तरीके से पेश किया है। विपिन शर्मा (ईशान के पापा), सचेत इंजीनियर और सारे अध्यापकों का अभिमय भी अच्छा है। प्रसून जोशी द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत भी अच्छा है। फ़िलम की फोटोग्राफी बहुत ही प्रभावशाली हैं।

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ii) पूस की रात – फिल्मी समीक्षा
किसान का जीवन कितना करुणापूर्ण है! खेती से उसको कोई सुख नहीं मिला। पूरा जीवन गरीबी में गुज़रता है। इन बातों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करनेवाली एक सुंदर फिल्म है ‘पूस की रात’। प्रेमचंद की एक छोटी कहानी गुलजार के निदेशन में फिल्म के रूप में पर्दे पर आयी है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है।

एक गरीब किसान हल्कू अपनी पत्नी के साथ रहता है। खेत में फसल पकने लगी है। रात के समय खेत में नीलगायों के आने की संभावना है। इसलिए हल्कू रात में खेत का पहरावा करता है। हड्डियाँ भी तोडनेवाली ठंड में वह अपने कुत्ते का साथ गीत गाकर या बातें करके ठंड से बचने की कोशिश करता है। गर्मी के लिए वह चिलम फूंकता भी है।

खेती के लिए महाजनों से लिए पैसे वापस देने में भी वह असमर्थ है। हल्कू की पत्नी के मत में खेती की अपेक्षा मज़दूरी करना ही अच्छा है। एक ठंडी रात में हल्कू ठंड सह न सका। वह कुछ सूखे पत्ते लाकर आग जलाकर उसके साथ नाच गाकर सर्दी से बचकर लेटा। आग की गर्मी के कारण उसको गहरी नींद मिली। पर उस रात में आग फैलकर सारी फसल जल गयी। सबेरे पत्नी आकर हल्कू को उठाते वक्त ही उसने देखा कि सारा खेत जल चुका है। रोती हुई पत्नी से हल्कू ने कहा कि ‘अच्छा हुआ…. आज से रात में ठंड सहने की ज़रूरत नहीं है।’

हल्कू की ये बातें उसकी निराशा से उत्पन्न हैं। खेत में कठिन काम करने पर भी या सभी कठिनाइयाँ सहने पर भी किसान को कोई फायदा नहीं मिलता है। इन बातों को स्पष्ट रूप में गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘पूस की रात’ में व्यक्त किया है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। कुत्ते का साथ हल्कू का वार्तालाप, चंद्रमा की सुविधा का वर्णन, नीलगायों को भगाने की आवाज़ आदि के प्रसंगानुकूल दृश्य दर्शकों को मज़ा देनेवाले ही हैं।

किसान के दैन्य दिखाने के लिए फटे हुए कंबल को दिखाते वक्त उसकी गरीबी हमारे मन पर चोट लगाती है। प्रेमचंद किसानी जीवन की दर्दनाक कहानी लिखनेवाला कहानीकार है। उनकी एक कहानी को गुलजार ने ज्यादा चमकदार बनाकर फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है। रघुवीर करण और मानसी उपध्याय ने अपने अपने पात्रों को उज्वल बनाए। दोनों का अभिनय देखकर हम विस्मित हो जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में रूपकुमार का एक अच्छा गीत है। दिन और रात के समय के दृश्यों की फोटोग्राफी भी अव्वल दर्जे की है। संपादन अच्छा हुआ है। पटकथा भी बहुत अच्छा हुई है। साज-सज्जा अनुकूल ही है। ध्वन्यांकन उत्तम कोटि की है।

Plus One Hindi ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सहायक बिंदु के आधार पर किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा लिखिए। सहायक बिंदुः

  • फिल्म का कथासार
  • पात्रों का अभिनय
  • निदेशक की भूमिका
  • पटकथा, संवाद, छायांकन, गीत आदि
  • फिल्म की समग्रता पर अपना दृष्टिकोण

उत्तर:
माणिक्यकल्ल् – फिल्मी समीक्षा
निर्माता : गिरीश लाल
निर्देशक : एम्. मोहनन्
गीत : अनिल पनचूरान्, रमेश काविल्
संगीत : एम्. जयचन्द्रन्

कलाकार : पृथ्वीराज, संवृता सुनिल, नेडुमुड़ी वेणु आदि गौरी मीनाक्षी सिनेमा के बैनर में बनाया हुआ ‘माणिक्यकल्ल्’ फिल्म एक अच्छा फिल्म है। इसका निर्माता है श्री गिरिश लाल। फिल्म का निर्देशन किया है श्री एम्. मोहनन् ने। ‘माणिक्यकल्ल्’ एक विचारात्मक फिल्म है। फिल्म की कहानी इस प्रकार है: वणान्मला सरकारी हाईस्कूल को एक गौरवशाली अतीत था। वर्तमान शिक्षामंत्री इस स्कूल के पूर्व विध्यार्थी थे। लेकिन, आज इस स्कूल की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी है। आज स्कूल में पढ़ते हैं केवल 50 छात्र। स्कूल में 8 अध्यापक पढ़ाने केलिए सरकार से नियुक्त हैं। वे अपने सरकारी वेतन समय पर लेने केलिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। लेकिन, पढ़ाने में कोई रुचि नहीं लेते। वे अपने अपने निजी काम-धंधों में लगकर पैसे कमाने में इच्छुक रहते हैं।

इस अवसर पर विनयचंद्रन् (पृथ्वीराज) नामक एक नया अध्यापक सरकार नियुक्ति से स्कूल में नौकरी करने के लिए आता है। नया अध्यापक छात्रों की उन्नति की ओर बड़ा ध्यान देने लगता है। पहलेपहले सह अध्यापकों से उसे कोई सहयोग नहीं मिलता। लेकिन, विनयचंद्रन् अपने सह-अध्यापकों को इमानदार और जिम्मेदार रहने को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे स्कूल में बड़ा परिवर्तन आने लगता है।

विनयचंद्रन् को चांदनी नामक अध्यापिका बड़ा साथ देती है। वह स्कूल की शारीरिक-शिक्षा अध्यापिका थी समय की गति में विनयचंद्रन और चांदनी के बीच प्यार होने लगता है। हेडमास्टर करुणाकर कुरुप्प (नेडुमुड़ी वेणु) विनयचंद्रन् को अपने अधिकार और प्यार से बड़ा प्रोत्साहन देते हैं। अंत में स्कूल में बड़ा बदलाव आता है। स्कूल में शत-प्रतिशत विजय होती है।

पृथ्वीराज और संवृता अपनी अभिनय-कला से अनेक रोचक मुहूर्त देते हैं। इन्द्रन्स्, जगदीश, कोट्टयम् नसीर, सलीम कुमार आदि अभिनेताओं ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ दर्शकों को हँसाने में भी सफल हुए हैं।

अनिल पनचूरान और रमेश काविल द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ता जाता है। एम्. जयचंद्रन् का संगीत भी अच्छा है। श्रेया गोशाल की आवाज़ में ‘चेम्परत्ती’…. बहुत सुरीली हो गयी है।

फिल्म की फोटोग्राफी पी. सुकुमार ने बहुत ही प्रभावशाली ढ़ग से की है। रंजन एब्राहम् का संपादन (Editing) कुछ और अच्छा होना था। इससे फिल्म को अनावश्य लंबाई से बचा सकता था।

‘माणिक्यकल्ल’ में अच्छा संदेश शामिल हुआ है। आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ की याद हमें इस फिल्म से होती है।

ब्लैक : स्पर्श जहाँ भाषा बनता है Summary in Malayalam

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