चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

Practicing with SCERT Kerala Syllabus 8th Standard Hindi Textbook Solutions Unit 4 Chapter 2 चौक Chowk Hindi Poem Question Answer Notes Summary in Malayalam & Hindi improves language skills.

Chowk Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary

SCERT Class 8 Hindi Unit 4 Chapter 2 Question Answer Kerala Syllabus चौक

Chowk Hindi Poem Question Answer

विश्लेषणात्मक प्रश्न :

प्रश्न 1.
‘बड़े शहर के बेतरतीब चौक’ – कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?
‘വലിയ നഗരത്തിലെ നിയന്ത്രണമില്ലാത്ത നാൽക്കവല’ കവി എന്തുകൊണ്ടാണ് ഇങ്ങനെ പറഞ്ഞത്?
उत्तर:
कवि ने इस पंक्ति से बड़े शहरों की अव्यवस्था, भीड़-भाड़ और अमानवीयता को व्यक्त किया है। यहाँ लोग तो बहुत हैं, पर आपसी जुड़ाव या अपनापन नहीं। यहाँ सामाजिक और मानवीय मूल्यों की कमी महसूस होती है।

പ്രസ്തുത വരിയിലൂടെ കവി നഗരങ്ങളുടെ അച്ചടക്കമില്ലായ്മ, തിരക്ക്, മനുഷ്യത്വമില്ലാ എന്നിവ വ്യക്തമാക്കുന്നു. ഇവിടെ ആളുകൾ ധാരാളം ഉണ്ട്. പക്ഷെ പരസ് പര ബന്ധം അഥവാ സ്വന്തമെന്ന ഭാവം ഇല്ല. ഇവിടെ സാമൂഹിക, മാനുഷിക മൂല്യങ്ങളുടെ കുറവ് അനുഭവപ്പെടുന്നു.

प्रश्न 2.
‘बीस बरसों के अखबार के पीछे छोड़ आया था’ – इस कथन का तात्पर्य क्या है?
‘ഇരുപത് വർഷത്തെ വർത്തമാന പത്രങ്ങ ളുടെ പിറകിൽ ഉപേക്ഷിച്ചു വന്നതാണ് . ഈ പ്രസ്താവന കൊണ്ട് എന്താണ് അർത്ഥ മാക്കുന്നത്?
उत्तर:
इस कथन का तात्पर्य है कि व्यक्ति ने अपने जीवन के पिछले बीस वर्षों की स्मृतियों, घटनाओं, अनुभवों या चिंताओं को पीछे छोड़ दिया है।

ये बीते हुए अखबारों की तरह अप्रासंगिक हो गए हैं। यहाँ ‘अखबार’ अब महत्व न रखनेवाला बीत चुकी बातों का प्रतीक है। पुराने जीवन से यह व्यक्ति मानसिक या भावनात्मक दूरी बना लेता है।

തന്റെ ജീവിതത്തിന്റെ ഇരുപത് വർഷത്തെ ഓർമ്മകളും, സംഭവങ്ങളും, അനുഭവങ്ങളും ചിന്തകളും പിറകിൽ ഉപേക്ഷിച്ചിരിക്കുക യാണ്.

ഇവ കഴിഞ്ഞുപോയ വർത്തമാന പ്രത ങ്ങളെപ്പോലെ പ്രധാന്യമില്ലാത്തവയാണ്. ‘अखबार’ എന്നത് കഴിഞ്ഞുപോയ കാര്യ ങ്ങളുടെ പ്രതീകമാണ്. ഈ വ്യക്തി പഴയ ജീവിതത്തിൽ നിന്നും മാനസികമായ, ഭാവ നാപരമായ ദൂരം ആഗ്രഹിക്കുന്നു.

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

प्रश्न 1.
आगे…
सही मिलान करें।

इंतज़ार करना सौंप देना
हवाले करना प्रवेश करना
दाखिला लेना उपेक्षित करना
छोड़ आना प्रतीक्षा करना

उत्तर:

इंतज़ार करना प्रतीक्षा करना
हवाले करना सौंप देना
दाखिला लेना प्रवेश करना
छोड़ आना उपेक्षित करना

प्रश्न 2.
समान आशय वाली पंक्तियाँ चुनकर लिखें।
* उन महिलाओं ने मुझे कठिनाइयों को पार करने में मदद दी।
* छोटे शहर के स्कूल में मेरी भर्ती हुई।
* अस्त-व्यस्त चौराहों को पार करते समय मुझे उन स्त्रियों की याद आती है।
* स्त्रियों ने मुझे प्रतीक्षा करना सिखाया।
उत्तर:
* उन महिलाओं ने मुझे कठिनाइयों को पार करने में मदद दी।
उन स्त्रियों का वैभव मेरे साथ रहा
जिन्होंने मुझे चौक पार करना सिखाया

* छोटे शहर के स्कूल में मेरी भर्ती हुई।
कस्बे के स्कूल में
मैंने पहली बार दाखिला लिया था

* अस्त-व्यस्त चौराहों को पार करते समय मुझे उन स्त्रियों की याद आती है।
जब कभी मैं किसी बड़े शहर के
बेतरतीब चौक से गुज़रता हूँ
उन स्त्रियों की याद आती है

* स्त्रियों ने मुझे प्रतीक्षा करना सिखाया।
उन्होंने मुझे इंतज़ार करना सिखाया

प्रश्न 3.
इन प्रसंगों के चित्र खींचें, शीर्षक दें और प्रदर्शनी चलाएँ।
उत्तर:
बच्चे को चौक पार करने में सहारा देने वाली स्त्रियों।
(കുട്ടിയെ നാൽക്കവല മുറിച്ചുകടക്കാൻ സഹായിക്കുന്ന സ്ത്രീകൾ)
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 1

बच्चे को स्त्रियों के हवाले करने वाली माँ।
(കുട്ടിയെ സ്ത്രീകളുടെ കൈയിൽ ഏൽപ്പി ക്കുന്ന അമ്മ)
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 2

अकेले फाटक पार करते हुए स्कूल पहुँचने वाला बच्चा।
(തനിച്ച് ഗേറ്റ് കടന്ന് സ്കൂളിലെത്തുന്ന കുട്ടി)
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 3

दोस्तों के साथ सड़क पार करके स्कूल जाने वाला बच्चा।
(കൂട്ടുകാരുടെ കൂടെ റോഡ് മുറിച്ച് കടന്ന് സ്കൂളിൽ പോകുന്ന കുട്ടി)
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 4

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

प्रश्न 4.
कविता का आशय लिखें।
उत्तर:
श्री आलोक धन्वा आधुनिक कवियों में प्रमुख है। ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998) उनका कविता संग्रह है। ‘चौक’ इस संग्रह की कविता है। प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि अपने स्कूली दिनों को याद करते हैं।

कवि उन स्त्रियों को याद करते हैं, जिन्होंने उन्हें बचपन में चौक पार करना सिखाया था। वे काम पर जाते वक्त कवि को भी साथ लेती थी। स्कूल उन स्त्रियों के रास्ते में था। जब कस्बे के स्कूल में प्रवेश पाया तो खुद ही जाने लगा। कई लड़के दोस्त बनें तो उनके साथ स्कूल जाने लगे।

वर्षो बाद भी किसी बड़े शहर की चौक पार करते तो उन स्त्रियों की याद कवि के मन में आती है।

‘चौक’ के माध्यम से समाज के बदले हुए मूल्यों, अन्याय, असमानता और संवेदन हीनता पर सवाल उठाती है। आजकल यह चौक केवल एक व्यावसायिक और राजनीतिक केंद्र बन गया है। आम आदमी की ज़िंदगी, संघर्ष और संवेदनाएँ गुम हो चुकी हैं। यह कविता कवि के आत्म मंथन, स्मृतियों की वापसी और अपने अतीत से फिर से जुड़ने की इच्छा को दर्शाती है।

ശ്രീ ആലോക് ധന്യ ആധുനിക ഹിന്ദി കവി കളിൽ പ്രമുഖനാണ്. ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998) അദ്ദേഹത്തിന്റെ കവിതാ സംഗ്രഹ മാണ്. ‘चौक’ ഈ സംഗ്രഹത്തിലെ കവിത യാണ്. പ്രസ്തുത കവിതയിലൂടെ കവി തന്റെ സ്കൂൾ ദിനങ്ങളെക്കുറിച്ച് ഓർക്കുകയാണ്.

ചെറുപ്പത്തിൽ തന്നെ നാൽക്കവല മുറിച്ച് കടക്കാൻ പഠിപ്പിച്ച സ്ത്രീകളെ കുറിച്ച് കവി ഓർക്കുകയാണ്. അവർ ജോലിക്ക് പോകുന്ന സമയത്ത് കവിയെയും കൂടെ കൂട്ടാറുണ്ടായിരുന്നു. സ്ത്രീകൾ പോകുന്ന വഴിയിലാണ് സ്കൂൾ സ്ഥിതിചെയ്തിരുന്നത്. പിന്നീട് ചെറിയ പട്ടണത്തിലെ സ്കൂളിൽ പ്രവേശിച്ചപ്പോൾ തനിച്ച് പോകാൻ തുടങ്ങി. കുറച്ച് കൂടി വലുതായപ്പോൾ, സുഹൃ ത്തുക്കളെ കിട്ടിയപ്പോൾ അവരുടെ കൂടെ യായി സ്കൂൾ യാത്ര. വർഷങ്ങൾക്കു ശേഷം ഇപ്പോഴും ഏതെങ്കിലും പട്ടണത്തിലെ ഒരു തിരക്കുപിടിച്ച നാൽക്കവല മുറിച്ച് കടക്കു മ്പോൾ ആ സ്ത്രീകളെ കുറിച്ച് ഓർക്കുന്നു.

‘നാൽക്കവല’ എന്നതിലൂടെ സമൂഹത്തിലെ മാറ്റം വന്ന മൂല്യബോധങ്ങൾ, അന്യായം, സമത്വമില്ലായ്മ, വികാരശൂന്യത എന്നിവയെ ചോദ്യം ചെയ്യുന്നു. ഇന്നത്തെ കാലത്ത് ‘നാൽക്കവല എന്നത് വ്യവസായികളുടെ യും, രാഷ്ട്രീയക്കാരുടെയും കേന്ദ്രമായി മാറിയിരിക്കുകയാണ്. സാധാരണക്കാരുടെ ജീവിതം, സംഘർഷം, വികാരങ്ങൾ എന്നിവ ഇവിടെ നിശ്ശബ്ദമായിരിക്കുകയാണ്. ഈ കവിത കവിയുടെ ആഴത്തിലുള്ള ചിന്ത, ഓർമ്മകളുടെ തിരിച്ചുവരവ്, പഴയകാലത്തെ വീണ്ടും ബന്ധിപ്പിക്കാനുള്ള ആഗ്രഹം എന്നിവയാണ് വെളിപ്പെടുത്തുന്നത്.

अनुबद्ध कार्य

प्रश्न 1.
स्कूली स्मृतियों पर लिखी गई कविताएँ / कहानियाँ संकलित करें।
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 5
उत्तर:
1) बचपन का स्कूल

छोटे-छोटे बैग थे, छोटी-छोटी बातें
संग में चलते थे हम, जैसे हों सौगातें
न कोई चिंता, न कोई डर
हर दिन लगता था खुशियों का घर।

मैडम की डाँट भी प्यारी लगती थी,
होमवर्क की याद सबको लगती थी।
टिफिन की घंटी बजते ही,
दोस्त की मीठी सौगात मिलती थी।

2) विदाई के आँसू

अब नहीं बजती वह घंटी,
नही दौड़ने है क्लास में जल्दी।
छूट गए वो प्यारे दिन,
जहाँ बस हँसी थी, न कोई गम।

दोस्तों की वो बातें, वो लड़ना-झगड़ना,
फिर भी एक-दूजे के लिए सबकुछ कर जाना।
आँखों में अब हैं यादें बस,
स्कूल छोड़ आए, पर वो दिन में हैं बस।

3) मास्टरजी की छड़ी

कड़क आवाज़, सफ़ेद बाल,
मास्टरजी थे स्कूल की ढाल।
कभी डाँटते, कभी हँसते,
ज्ञान के दीपक हमेशा जलाते।

उनकी छड़ी में जादू था,
डर से नहीं, सम्मान से बाँधू था।
आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं,
वो डाँट भी अब प्यार सी लगती है।

4) फिर से जी लूँ वो दिन

काश फिर से जी पाता वो दिन
जहाँ न थी कोई चिंता, न कोई गम।
चॉक और डस्टर की लड़ाई,
दोस्तों के संग वो मस्त लड़ाई।

पढ़ाई कम, शरारत ज़्यादा,
हर बात में मिलती थी आज़ादी सादा।
एक बार फिर मिल जाए मौका,
स्कूल की चौखट चूम लूँ रोका।

प्रश्न 2.
कुछ सड़क चिह्नों को पहचानें।
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 6
लिखें, ये चिह्न किसकी सूचना देते हैं।
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 7
उत्तर:
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 8

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

चौक निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या वाक्य में लिखें :

प्रश्न 1.
‘चौक’ नामक कविता किसने लिखी है?
उत्तर:
आलोक धन्वा

प्रश्न 2.
कवि को किसने चौक पार करना सिखाया?
उत्तर:
मोहल्ले की स्त्रियाँ।

प्रश्न 3.
मोहल्ले की स्त्रियाँ हर दिन कहाँ जाती थीं?
उत्तर:
वे काम पर जाती थीं।

प्रश्न 4.
कवि का स्कूल कहाँ पड़ता था ?
उत्तर:
स्त्रियों के रास्ते में।

प्रश्न 5.
किसने मुझे स्त्रियों के हवाले कर देती थी?
उत्तर:
माँ

प्रश्न 6.
छुट्टी होने पर मैं किनका इंतज़ार करता था?
उत्तर:
स्त्रियों का।

प्रश्न 7.
स्त्रियों ने कवि को क्या सिखाया?
उत्तर:
इंतज़ार करना

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

प्रश्न 8.
मैंने पहली बार कहाँ दाखिला लिया था?
उत्तर:
कस्बे के स्कूल में।

प्रश्न 9.
कुछ दिनों बाद कवि कैसे स्कूल जाने लगा?
उत्तर:
खुद ही

प्रश्न 10.
दोस्तों के साथ कवि कैसे स्कूल आने-जाने लगा?
उत्तर:
कई दूसरे रास्तों से

प्रश्न 11.
कई दशकों के बाद भी कवि को किसकी याद आती है?
उत्तर:
स्त्रियों की

प्रश्न 12.
शहर का चौक कैसा है?
उत्तर:
बेतरतीब

प्रश्न 13.
कवि अपना दायाँ हाथ किसकी ओर बढ़ा देता है?
उत्तर:
स्त्रियों की ओर

प्रश्न 14.
कवि अपने बाएँ हाथ से क्या करता है?
उत्तर:
स्लेट को संभालता है।

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

प्रश्न 15.
कवि स्लेट को कहाँ छोड़ आया था ?
उत्तर:
बीस बरसों के अखबार के पीछे।

Chowk Hindi Poem Summary in Malayalam

चौक Summary in Malayalam

पाठ का सारांश :
(उन स्त्रियों का ……………………… करना सिखाया) [Textbook page no. 74]

श्री आलोक धन्वा हिंदी के जाने माने कवियों में से एक हैं। उनकी कविता संग्रह ‘दुनिया रोज़ बनती है’ 1998 में प्रकाशित हुई। ‘चौक’ इस संग्रह की कविता है। प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘चौक’ नामक कविता से ली गई है।

कवि अपने पुराने दिनों को याद करते हैं। वे कहते हैं कि उन स्त्रियों का महत्व मेरे जीवन पर पड़ा था, जिन्होंने मुझे चौक पार करना सिखाया था। वे स्त्रियाँ उनके मोहल्ले की थीं। वे हर सुबह काम पर जाती थीं। उनके जाने के रास्ते में कवि का स्कूल पड़ा था। कवि की माँ उसे उन स्त्रियों के हवाले कर देती थी। छुट्टी होने पर भी कवि उनका इंतज़ार करता था। क्योंकि उन्होंने कवि को इंतज़ार करना सिखाया था।

यहाँ कवि के प्रति स्त्रियों का प्यार भरा व्यवहार दर्शाता है। गाँव की चौक ऐसी जगह कि जहाँ कई मानवीय मूल्यों का मेल होता है । इंतज़ार करना सिखाने का तात्पर्य है कि दूसरों के प्रति अपनापन दिखाना। |

ശ്രീ ആലോക് ധനം ഹിന്ദി സാഹിത്യത്തിലെ അറിയപ്പെടുന്ന കവികളിൽ ഒരാളാണ്. അദ്ദേഹത്തിന്റെ കവിതാസംഗ്രഹമായ ‘दुनिया रोज़ बनती है’ 1998 ലാണ് പ്രസിദ്ധീകരിച്ചത്. ‘चौक’ എന്ന കവിത ഈ സംഗ്രഹത്തിലുള്ളതാണ്. പ്രസ്തുത വരികൾ ‘चौक’ എന്ന കവിതയിൽ നിന്നും എടുത്തിട്ടുള്ളതാണ്.

കവി തന്റെ പഴയകാലത്തെ ഓർമ്മിക്കുകയാണ്. നാൽക്കവല തന്നെ കടന്നുവെയ്ക്കാൻ പഠിപ്പിച്ച ആ സ്ത്രീകളുടെ മഹത്വം തന്റെ ജീവിതത്തിൽ പതിഞ്ഞിട്ടുണ്ടെന്ന് കവി പറയുന്നു. ആ സ്ത്രീ കൾ അദ്ദേഹത്തിന്റെ തെരുവിൽ കോളനിയിൽ തന്നെ താമസിക്കുന്നവരായിരുന്നു. അവർ എല്ലാ ദിവസവും ജോലിക്ക് പോകുമായിരുന്നു. അവർ പോകുന്ന വഴിയിലായിരുന്നു കവിയുടെ സ്കൂൾ. അതിനാൽ അമ്മ അദ്ദേഹത്തെ ആ സ്ത്രീകളെയാണ് ഏൽപ്പിച്ചിരുന്നത്. അവധിയാണെങ്കിലും കവി അവരെ കാത്തിരിക്കാറുണ്ടായിരുന്നു. എന്തുകൊണ്ടെന്നാൽ ആ സ്ത്രീകൾ കവിയെ കാത്തിരിക്കാൻ പഠിപ്പിച്ചിട്ടുണ്ടായിരുന്നു.

ഇവിടെ കവിയോടുള്ള സ്ത്രീകളുടെ സ്നേഹപൂർണ്ണമായ പെരുമാറ്റമാണ് കാണിച്ചു തരുന്നത്. യഥാർത്ഥത്തിൽ ഗ്രാമത്തിലെ നാൽക്കവല ധാരാളം മാനവീയ മൂല്യങ്ങളുടെ ഒരു സംഗമസ്ഥാനമാണ്. മറ്റുള്ളവരോട് അടുപ്പം കാണിക്കുക എന്നതാണ് ‘പ്രതീക്ഷിക്കാൻ പഠിപ്പിക്കുന്നതി ലൂടെ ഉദ്ദേശിക്കുന്നത്.

(कस्बे के स्कूल ………………. आने-जाने लगे।) [Textbook page no. 75]

जब कवि कसबे के स्कूल में प्रवेश पाया तो वह खुद ही स्कूल जाने लगा। उन दिनों बाद, जब उसके कई दोस्त बनें तो उनके साथ कई दूसरे रास्तों से भी स्कूल आने जाने लगे | कवि अपने स्कूली दिनों की यादों में है। जब वह कुछ बड़ा हुआ तो अकेले और बाद में दोस्तों के साथ जाने लगे।

കവി ടൗൺഷിപ്പിലുള്ള സ്കൂളിൽ പ്രവേശനം നേടിയപ്പോൾ കുറച്ച് ദിവസങ്ങൾക്ക് ശേഷം ഒറ്റയ്ക്ക് സ്കൂളിൽ പോകാൻ തുടങ്ങി. അതിന് ശേഷം കുറച്ച് കുട്ടികളെ കൂട്ടുകാരായി കിട്ടിയപ്പോൾ അവ രുടെ കൂടെ പല വഴികളിലൂടെ സ്കൂളിൽ പോകാനും വരാനും തുടങ്ങി.

കവി തന്റെ സ്കൂൾ ദിനങ്ങളുടെ ഓർമ്മകളിലാണ്. അദ്ദേഹം വലുതായപ്പോൾ ആദ്യം തനിച്ചും പിന്നീട് കൂട്ടുകാരുടെ കൂടെയും പോകാൻ തുടങ്ങി.

(लेकिन ………………….. अखबार के पीछे।) [Textbook page no. 75)

कवि कहते हैं कि कई दशकों के बाद भी जब कभी किसी शहर के भीड़ भरी चौक से गुज़रता हूँ तो उसे उन स्त्रियों की याद आती है। वे अपना दायाँ हाथ उनकी ओर बढ़ा देता है और बाएँ हाथ से स्लेट पकड़ता है। उस स्लेट को उन्होंने बीस बरसों के अखबार के पीछे छोड़ आया था।

यहाँ कवि ‘चौक’ को व्यस्तता और अजनबीपन के प्रतीक बताया है। ‘चौक’ आजकल सामाजिक विघटन और व्यवस्था हीनता का स्थान बन गया है। यहाँ ‘अखबार’ पुरानी, बीत चुकी बातों का प्रतीक है। ‘पीछे छोड़ आ या था’ से आशय है कि पुराने जीवन से एक मानसिक था भावनात्मक दूरी बना लेना।

വർഷങ്ങൾക്ക് ശേഷവും നഗരത്തിലെ ഏതെങ്കിലും തിരക്കുള്ള നാൽക്കവലയിലൂടെ കടന്നുപോകുമ്പോൾ കവിക്ക് ആ സ്ത്രീകളെ കുറിച്ച് ഓർമ്മ വരുന്നു. അദ്ദേഹം തന്റെ വലത് കൈ അവർക്ക് നേരെ നീട്ടുന്നു, ഇടത് കൈ കൊണ്ട് സ്ലേറ്റ് പിടിക്കുന്നു. ആ പ്ലേറ്റ് അദ്ദേഹം ഇരുപത് വർഷത്തെ വാർത്തമാന പത്രങ്ങളുടെ ഇടയിൽ ഉപേക്ഷിച്ച് വന്നതാണ്.

ഇവിടെ കവി ‘നാൽക്കവല’യെ തിരക്കിന്റെയും, അപരിചിതത്വത്തിന്റെയും പ്രതീകമായാണ് പറയുന്നത്. ഇപ്പോൾ നാൽക്കവല സാമൂഹിക വിച്ഛേദനത്തിന്റെയും അക്രമത്തിന്റെയും സ്ഥലമാണ് ‘വർത്തമാനപത്രം’. ഇവിടെ പഴയ, കഴിഞ്ഞു പോയ കാര്യങ്ങളുടെ പ്രതീകമാണ് ‘പഴയ ജീവിതത്തിൽ നിന്നും മാനസികമായും, ഭാവനാപരവുമായ അകൽച്ചയാണ് ‘പിറകിൽ ഉപേക്ഷിച്ച് വന്നത്’ എന്നത് കൊണ്ട് ഉദ്ദേശിക്കുന്നത്.

चौक Hindi Poem कवि परिचय

कविता (आलोक धन्वा)

आलोक धन्वा
चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam 9
आलोक धन्वा का जन्म 2 जुलाई 1948 में बिहार के मुंगेर जिले में हुआ। आपकी पहली कविता ‘जनता का आदमी’ सन् 1972 में प्रकाशित हुई। ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998) आपका कविता संग्रह है। ‘चौक’ इस संग्रह की कविता है। आपको पहल सम्मान, राहुल सम्मान, नागार्जुन सम्मान, फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान, गिरिजाकुमार माथुर सम्मान, भवानी प्रसाद मिश्र सम्मान, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् का सम्मान आदि प्राप्त हुए।

ബീഹാറിലെ മുംഗോർ ജില്ലയിൽ 1948 ജൂലൈ 2 ന് ആലോക് ധന്യ ജനിച്ചു. അദ്ദേഹത്തിന്റെ ആദ്യ കവിത ‘जनता का आदमी’ 1972 ൽ പ്രസി ദ്ധീകരിച്ചു. അദ്ദേഹത്തിന്റെ കവിതാസംഗ്രഹമാണ് ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998). ഈ കവിതാ സങ്കലനത്തിൽ നിന്നുള്ള കവിതയാണ് ‘चौक’ അദ്ദേഹത്തിന് പഹൽ പുരസ്ക്കാരം, രാഹുൽ പുര സ്കാരം, നാഗാർജ്ജുൻ പുരസ്ക്കാരം, ഫിറാക് ഗോരഖ് പുരി പുരസ്ക്കാരം, ഗിരിജാകുമാർ മാഥുർ പുരസ്ക്കാരം, ഭവാനീ പ്രസാദ് മിശ് പുരസ്ക്കാരം, ബീഹാർ രാഷ്ട്രഭാഷാ പരിഷദിന്റെ പുര സ്ക്കാരം എന്നിവ ലഭിച്ചിട്ടുണ്ട്.

चौक Hindi Poem Class 8 Question Answer Notes Summary in Malayalam

चौक शब्दार्थ

मदद लें :
वैभव – മഹത്വം
चौक – നാൽക്കവല, junction
पार करना – കടന്നു വെയ്ക്കുക, to cross
सिखाना – പഠിപ്പിക്കുക
मोहल्ला – തെരുവ്, street
काम पर जाना – ജോലിക്ക് പോവുക
रास्ता – വഴി, Road
हवाले करना – किसीके हाथ में सौंपना (ആരുടെയെങ്കിലും കയ്യിൽ ഏൽപ്പിക്കുക)
छुट्टी – അവധി
इंतज़ार करना – പ്രതീക്ഷിച്ചിരിക്കുക
कस्बा – ചെറിയ നഗരം, township
दाखिला लिया – പ്രവേശിച്ചു
खुद – സ്വയം
दूसरे रास्तों से – മറ്റുള്ള വഴികളിലൂടെ
दशक – പത്ത് വർഷം
थोडेसे – അല്പം
बेतरतीब – നിയന്ത്രണമില്ലാത്ത
गुज़रना – കടന്നു പോവുക
याद – ഓർമ്മ
दायाँ हाथ – വലത് കൈ
बढ़ा देना – നീട്ടുക
बाएँ हाथ – ഇടത് കൈ
संभालना – സംരക്ഷിക്കുക
छोड़ आना – ഉപേക്ഷിക്കുക
अखबार – വർത്തമാന പത്രം

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