Kerala Plus Two Hindi Question Paper March 2021 with Answers

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Kerala Plus Two Hindi Previous Year Question Paper March 2021

Time : 2 1/2 Hours
Maximum : 80 scores

सूचना: कवितांश पढ़ें और 1 से 4 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

नीलांबर परिधान हरित तट पर सुंदर है।
सूर्य-चंद्र युग मुकुट, मेखला रत्नाकर है ।।
नदियाँ प्रेम प्रवाह फूल तारे मंडन हैं।
बंदीजन खग-वृंद, शेषफन सिंहासन है ।।
करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेष की।
हे मातृभूमि! तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की।

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता का है?
(मातृभूमि, सपने का भी हक नहीं, कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की)
उत्तरः
मातृभूमि

प्रश्न 2.
धरती का परिधान क्या है? लिखें। (सूर्य-चंद्र, नीलांबर, खग – वृंद)
उत्तरः
नीलांबर

प्रश्न 3.
कवि ने मातृभूमि का वर्णन किस प्रकार किया है?
उत्तरः
कवि की राय में नीलांबर रूपी वस्त्र पहनकर हरियाली भरे तट पर, सूर्य-चन्द्र का मुकुट धारण करके सागर रूपी मेखला पहनकर मातृभूमि शोभित है।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन – टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
मातृभूमि गुप्तजी की लोकप्रिय कविता है। द्विवेदी युगीन कवियों में सबसे श्रेष्ठ है मैथिली शरण गुप्त। मातृभूमि कविता में उन्होंने अपनी मातृभूमि का गुणगान किया है। कवि कहते हैं- नीलांबर रूपी वस्त्र पहनकर, हरियाली भरे तट पर, सूर्य-चंद्र का मुकुट धारण करके सागर रूपी मेखला पहनकर मातृभूमि शोभित है। नदियाँ यहाँ प्रेम प्रवाह करती हैं। फूल और तारे मातृभूमि के आभूषण हैं। पक्षीगण तेरे बंदीजन हैं। शेष नाग के फन के ऊपर विराजमान मातृभूमि सर्वेश की सगुण मूर्ति है। देशप्रेम से भरी हुई कविता में कवि ने मातृभूमि का गुणगान किया है। हर भारतवासी अपने देश के लिए सर्वस्व समर्पण करने के लिए तैयार हैं।

Kerala Plus Two Hindi Question Paper March 2021 with Answers

प्रश्न 5.
ये कथन पढ़ें और बहादुरशाह जफ़र के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
• दिल्लीवाले मुझको रोते होंगे। वे क्या यह नहीं जानते, कि मैं भी उनको रोता हूँ।
• अब हँसे या रोएँ, कोई फ़ायदा नहीं।
• हमारी कब्र परदेस में बनेगी, तय है! लेकिन अभी तो हम लकड़ी की भीगी हुई कब्र में जिंदा ही दफ़न है।
उत्तरः
दिल्ली के अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फर अपने देश और देशवासियों से अत्यधिक प्यार करते हैं । अपने परिवारवालों से भी वे बहुत प्यार करते हैं। दूसरों के प्रति अनके दिल में सहानुभूति, प्यार और ममता है। वे एक सच्चे शासक हैं।

सूचना: गद्यांश पढ़ें और 6 से 9 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

भारती की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ित लोगों की सेवा करना। इसका मतलब है गरीबी और अज्ञानता की मिटाना। बीमारियों और अवसर की असमानता को मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही महत्वाकांक्षा रही है कि हर एक आँख से आँसू मिट जाएँ। शायद ये हमारे लिए संभव न हो, पर जब तक लोगों की आँखों में आँसू है और वे पीड़ित हैं तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा।

प्रश्न 6.
भारत की सेवा का अर्थ क्या है?
उत्तरः
भारत की सेवा का अर्थ है लाखों करोड़ों पीडित लोगों की सेवा करना।

प्रश्न 7.
कब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा?
उत्तरः
जब तक लोग दुःखी और पीडित हैं तब तक हमारा काम समाप्त नहीं होगा।

प्रश्न 8.
खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
मेरा देश
भारत की सेवा करने के लिए हमें यहाँ से गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को मिटाना है। हर एक मनुष्य की दुख और दर्द हमको मिटाना है। इसके लिए हमें कठिन परिश्रम करना है।

प्रश्न 9.
उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
मेरा देश

सूचना: पद पढ़ें और 10 से 13 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

सुतमुख देखि जसोदा फूली।
हरषित देखि दूध की दतियाँ प्रेम मग्न तनु की
सुधि भूली ।।

बाहिर ते तब नंद बुलाए देखौ धौं सुंदर सुखदाई।
तनक तनक सी दूध की दतियाँ देखौ नैन सुफल करो आई।
आनंद सहित महर तब आए मुख चितवन दोउ नैन अघाई।
‘सूर’ स्याम किलकत द्विज देख्यो मनो कमल पर बीजु जमाई।

प्रश्न 10.
यशोदा कब अपने आपको भूल जाती है?
उत्तरः
पुत्र के मुँह में नए दाँतों को देखकर यशोदा अपने आपको भूल जाती है।

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प्रश्न 11.
यशोदा क्यों खुश हुई?
उत्तरः
श्रीकृष्ण के मुँह पर नए दाँतों को देखने से यशोदा खुश हो गयी।

प्रश्न 12.
यशोदा नंद को बुलाकर क्या दृश्य देखने को कहती है?
उत्तरः
यशोदा नंद को बुलाकर अपने पुत्र के दुधिया दाँतों को देखने को कहती है।

प्रश्न 13.
पद पढ़ें और भावार्थ लिखें।
उत्तरः
अपने बेटे का चेहरा देखकर यशोदा बहुत खुश हुई। बेटे के मुँह में दुधिया दाँतों को देखकर वह अपने आपको भूल जाती है। बाहर से अपने पति नंद को बुलाकर यह सुंदर दृश्य देखने को कहती है। पत्नी की बातें सुनकर नंद अंदर आए और यह दृश्य देखकर अत्यंत खुश हो गए। सूरदास कहते हैं श्रीकृष्ण के दाँतों को देखकर ऐसा लगता है जैसे मनो कमल पर बिजली जम गई हो।

प्रश्न 14.
जीवन-वृत्त पढ़ें और हिमांश जोशी के बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
जीवन-वृत्त
नाम : हिमांशु जोशी
जन्म : 1935
जन्मस्थान : उत्तराखंड
प्रमुख रचनाएँ : यात्राएँ, नोवेंः सूरज चमके आधी रात
उत्तरः

प्रश्न 15.
बेटी के आँसूनामा ने बादशाह के मन को विचलित कर दिया । बादशाह उस दिन की डायरी में इसका जिक्र करते हैं। कल्पना करके वह डायरी तैयार करें।
• देश प्रेम
• दिल्लीवासियों के प्रति आकुलता
• परिवारवालों की सोच
• खत पढ़ने पर उत्पन्न दर्द
उत्तरः

21 जुलाई 1869

रविवार

रात नौ बजे।
आज का दिन…. क्या लिखूं मैं।

कुछ समझ में नहीं आ रहा है। प्यारी बिटिया, तू कैसी है? तुम्हारे और दूसरों के बारे में सोचकर मेरा दिल तडप रहा है। हाय मेरे दिल्लीवासियो क्या दशा है आप लोगों की!
ए खुदा, मेरे देश की और देशवासियों की रभा करें।
बहादुरशाह ज़फर

सूचना: कवितांश पढ़ें और 16 से 19 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

हे मातृभूमि! तुझको निरख, मग्न क्यों न हों मोद में?
पाकर तुझसे सभी सुखों को हमने भोगा।
तेरा प्रत्युपकार कभी क्या हमसे होगा?
तेरी ही यह देह, तुझी से बनी हुई है।
बस तेरे ही सुरस-सार से सनी हुई है।।
फिर अंत समय तू ही इसे अचल देख अपनाएगी।
हे मातृभूमि! यह अंत में तुझमें ही मिल जाएगी।

प्रश्न 16.
‘हर्ष’ शब्द का समानार्थी शब्द है (मोद, निरख, मग्न)
उत्तरः
मोद

प्रश्न 17.
‘तुझमें ही मिल जाएगी’ यहाँ ‘तुझमें’ से क्या तात्पर्य है? (1)
उत्तरः
मातृभूमि में

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प्रश्न 18.
तेरा प्रत्युपकार कभी क्या हमसे होगा?
उत्तरः
मातृभूमि से हमने सब कुछ प्राप्त किया है। इसलिए कवि को लग रहा है मातृभूमि का प्रत्युपकार करना असंभव है।

प्रश्न 19.
कवितांश का आशय लिखें।
उत्तरः
मैथिलीशरण गुप्त की कविता है मातृभूमि। इसमें कवि। ने मातृभूमि का गुणगान किया है। कवि कह रहे हैं मातृभूमि से ही हमने सभी सुखों को प्राप्त किया है। इसका प्रत्युपकार भी हम कर नहीं सकते। हमारा शरीर तो इसी मिट्टी से बनी हुई है। तेरे ही सुरस-सार से ही. यह शरीर बड़ा बन गया है। अंत में जब हम मर जाएँगे, तब मातृभूमि ही हमारे निश्चल शरीर को अपनाएगी। यह कविता देशप्रेम से भरी हुई है। भारतीय परंपरा के अनुसार माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी प्यारी है। 20. श्री भगवतशरण अग्रवाल की एक विख्यात हाइकू है यह। कवि कहते हैं – कोई भी व्यक्ति बुढ़ापा नहीं चाहता है। लेकिन परिवर्तन प्रकृति का नियम है। प्रत्येक व्यक्ति को उसे स्वीकारना ही पड़ता है।

प्रश्न 20.
सूचना: हाइकू पढ़ें और आशय लिखें। बुलाया?
मान न मन
मैं तेरा मेहमान
बने बुढ़ापा।
उत्तरः
श्री भगवतशरण अग्रवाल की एक विख्यात हाइकू है यह। कवि कहते हैं – कोई भी व्यक्ति बुढ़ापा नहीं चाहता है। लेकिन परिवर्तन प्रकृति का नियम है। प्रत्येक व्यक्ति को उसे स्वीकारना ही पड़ता है।

सूचना: गद्यांश पढ़ें और 21 से 23 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

जिस हिंदी को भोजपुरी – अवधी के रूप में, ‘हनुमानचालीसा’ तथा ‘रामचरितमानस’ आदि धर्मग्रंथों के माध्यम से भारत से जाने समय वे ले गाए थे अपने साथ और जिसे उन्होंने तुफ़ान के बीच दीये की तरह जलाए रखा – आज एक सौ तीस साल बाद वह एक नंए रूप में साकार होकर उपस्थित हो रहा है। उसका वैश्विक स्वरूप उभर रहा है। वह अब गिरमिटिया श्रमिकों की ही नहीं, शासकों, राष्ट्रध्यक्षों की भी भाषा बन गई है जो संसार के एक सौ बीस देशों में किसी न किसी रूप में अपनी उपस्थिति का अहसास जता रही है।

प्रश्न 21.
गिरमिटिया श्रमिक किन-किन के माध्यम से हिंदी को भारत से ले गए थे?
उत्तरः
हनुमान चालीसा और रामचरितमानस के रूप में।

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प्रश्न 22.
यहाँ हिंदी की उपस्थिति के बारे में लेखक क्या बताते हैं?
उत्तरः
आज हिंदी संसार के एक सौ बीस देशों में किसी न किसी रूप में अपनी उपस्थिति का एहसास जता रही है।

प्रश्न 23.
लेखक विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने के लिए पारामरिबो पहुँचे। वहाँ की हिंदी भाषा के प्रचार के बारे में अपने मित्र को एक पत्र लिखते हैं, वह पत्र तैयार करें। (8)
उत्तरः

पारामारिबो,
17.05.2007

प्रिय मित्र,
विश्वास है कि तुम सुखी हो। कई दिनों से तुम्हें एक पत्र लिखने के बारे में सोच रहा हूँ। आज ही मुझे फुरसत मिला। अब मैं सूरीनाम के विश्वहिंदी सम्मेलन नगरी में हूँ। यहाँ के पारामरिबो शहर में बड़ी धूम-धाम से इसका आयोजन किया गया है। बड़ी खुशी की बात यह है कि यहाँ बहुत सारे हिंदी सेवी लोग आए हैं । अब पारामारिबो बिलकुल एक भारतीय शहर जैसा लग रहा है। सबके सब अत्यंत खुश हैं। सभी को अपने भाई-बहन जैसा ही लग रहा है। जो कुछ भारत में हैं सब यहाँ नज़र आ रहे हैं। अगली बार के विश्व हिंदी सम्मेलन में तुम्हें भी ज़रूर भाग लेनी है।

अच्छा। आज के सम्मेलन शुरू होनेवाला है। इसलिए खत यहाँ समाप्त कर रहा हूँ।

धन्यवाद।
तुम्हारा मित्र,
हस्ताक्षर।

प्रश्न 24.
सुत पति नेह भवन जन संका लज्जा नहीं करी’ मुरली की ध्वनि में लीन प्रणयातुर दो गोपिकाओं के बीच का वार्तालाप तैयार करें।
• मुरली की ध्वनि
• कृष्ण प्रणय
• कुल मर्यादा छोड़ना
• अपने को भूल जाना
उत्तरः
पहली गोपिका : अरे सुनो! कितना मधुर है मेरे कान्ह की मुरली का धुन।

दूसरी गोपिका : मैं भी वही सुन रही हूँ। उससे मिलने को दिल कहती है।

पहली गोपिका : मेरी भी यही हाल है, री।

दूसरी गोपिका : तो चल, हम जाएँगे, उससे मिलेंगे।

पहली गोपिका : अरे सुनो तो… कैसे जाएँगे हम। किसी को पता चले तो।

दूसरी गोपिका : डर तो मुझे भी है। मगर क्या करूँ..

पहली गोपिका : तो चल… अपने कान्ह से मिलने के लिए न

दूसरी गोपिका : तो चल जल्दी चलें। उससे एक बार मिलना ही कितनी अच्छी है।

प्रश्न 25.
‘मेरे भारतवासियों’ किसका भाषण है? कवि ऐसा क्यों सोचते हैं? (गाँधीजी का, नेहरूजी का, सरदार पटेल का)
उत्तरः
नेहरूजी का

प्रश्न 26.
दुधिए दाँतों को दिखाने के लिए यशोदा ने किसको बुलाया? (नंद को, माँ को, नौकरानी को)
उत्तरः
नंद को

प्रश्न 27.
‘आदमी का चेहरा’ किस विधा की रचना है? (कविता, कहानी, निबंध)
उत्तरः
कविता

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प्रश्न 28.
भटका हुआ पीर क्या देकर दूसरों की सहायता करता है? (पुस्तक, मिठाई, पानी)
उत्तरः
पानी

प्रश्न 29:
इष्ट देव का इष्ट नैवेद्य क्या है? (कुमुद फूल, गुलाब, चमेली)
उत्तरः
कुमुद फूल

प्रश्न 30.
सही मिला करें।
Advance – प्रतिमान
Virus – सर्वाधिकार
Pattern – भौतिकी
Cess – अनुपात
Copyright – पेशगी
Energy – विषाणु
Ratio – उपकर
Physics – ऊर्जा
उत्तरः
Advance – पेशगी
Virus – विषाणु
Pattern – प्रतिमान
Cess – उपकर
Copyright – सर्वाधिकार
Energy – ऊर्जा
Ratio – अनुपात
Physics – भौतिकी

प्रश्न 31.
‘दोस्ती मानव जीवन का अभिन्न अंग है’ – सच्ची दोस्ती के बारे में एक लेख तैयार करें।
• सच्ची दोस्ती
• दोस्ती का गुण
• दोस्ती का महत्व
• दोस्ती की आवश्यकता
उत्तरः
दोस्ती
मानव जीवन का अभिन्न अंग है। दोस्ती में निकटता है, सच्चाई है, प्यार है, पवित्रता है। सच्चा दोस्त हर मुसीबत में साथ रहता है। सुख-दुःख दोनों में सच्चा दोस्त साथ रहता है। दोस्ती का महत्व अतुलनीय है । मृत्यु के सामने भी सच्ची दोस्ती की जीत होती है। दोस्तों का सुख-दुख, विजय-पराजय, सब एक दूसरे के लिए समान ही रहता है। केवल खुशी में ही नहीं दुःख में भी सच्चा दोस्त हमेशा साथ रहता है। एक दूसरे के लिए मर जाने को भी सच्चे दोस्त आपस में तैयार हो जाते हैं।

दुनिया की दृष्टि में दोस्त दो हैं। मगर दिल से वे एक है। ज़िन्दगी भर वे ऐसे ही रहेंगे। दोस्ती को बनाए रखने के लिए दोस्त संसार की दुश्मनी मोल लेने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। साथ-साथ खा-पीकर, साथ-साथ जी भरकर ज़िन्दगी भर वे आपस में दोस्ती निभाते हैं। दोस्ती का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। एक सच्चा दोस्त मिलने पर हम अपने जीवन का हर दुख भूल सकते हैं। दोस्ती महान है। हमें बस, सच्चे दोस्त ढूंढने में सतर्क रहना चाहिए। बाकि सब अपने आप मिल जाएँगे।

प्रश्न 32.
अंग्रेज़ी खंड का हिंदी में अनुवाद करें।
सहायक संकेतः
Sugathakumari was a famous poet in Malayalam. She was born on 22 January, 1934. Her father was a poet and freedom fighter Bhodeswaran and mother was V.K.Karthiyani Amma. Krishna Kavithakal, Rathrimazha, Pathirapookkal are famous works of Sugathakumari. She was dies on 23 December, 2020. (Freedom fighter – स्वतंत्रता सेनानी)
उत्तरः
सुगतकुमारी मलयालम के एक विख्यात कवयित्री हैं। 22 जनवरी 1934 को उनका जन्म हुआ। उनके पिता बोधेश्वरन एक कवि और स्वतंत्रता सेनानी थे। माता का नाम बी. के. कार्त्यायनी अम्मा है। उनकी प्रमुख रचनाएँ है, कृष्ण कवितकल्, रात्रिमषा और पातिराप्पूक्कल। 23 दिसंबर 2020 को उनकी मृत्यु हुई।

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प्रश्न 33.
‘शादी के नाम आडंबर और दुर्व्यय’ विषय पर भाषण तैयार करें।
उत्तरः
प्रिय मित्रो….
आज के समाज की सबसे बड़ी दुश्मनी है धन का दुर्व्यय और अनावश्यक आडंबर। शादी के नाम पर भी यह आडंबर और दुर्व्यय बढ़ रही है। हमें समझना चाहिए कि शादी उसल में प्यार का बंधन है। पुराने ज़माने में शादी के जो आचार होते थे, वे सादगी के नमूने थे। मगर आजकल लोग अपना बडप्पन दिखाने के लिए अनावश्यक आडंबर के पीछे पड़ रहे है। इस बुरी आदत का नतीजा है बढ़ती दहेज प्रथा । गरीब लोग इसका शिकार बन रहे हैं। हमें मिलकर शादी के नाम पर होनेवाले आनावश्यक खर्च को रोकने का प्रयास करना है। में भी इस भाषा का स्थान प्रमुख रहेगा। यह अन्य भाषाओं की तुलना में बोलचाल के लिए आसान भाषा है। आनेवाला कल भारत का रहेगा और साथ साथ हिंदी का भी रहेगा।
जय हिंद।

प्रश्न 34.
मान लें, 14 नवम्बर को स्कूल में बालदिवस का आयोजन होनेवाला है। इसके लिए एक पोस्टर तैयार करें।
उत्तरः
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प्रश्न 35.
‘मगर नींद के खुलने के पूर्व ही नोटिस बैंक की आ धमकी सपने में’ सपना देखनेवाली मज़दूरिन का आत्मकथांश तैयार करें।
• सपने की शान में सोनेवाली मज़दूरिन
• झोंपड़ी की जगह इमारत का सपना
• सपने के अंत में कडुवी सच्चाई
• उदारीकरण के दोष
उत्तरः
मंजिल अपना
बच्चों के सो जाने के बाद मैं नींद में डूब गयी। झोंपडी में नहीं, एक इमारत में मैं सो रही हूँ। नए घर में खानेपीने और सोने के लिए अलग अलग कमरे हैं। पूजा का कमरा तो ऊपर की मंज़िल में चढ़ा दिया है। कॉक्रीट की छत और संगमरमर बीछी ज़मीन। अचानक जब चौंक उठी तो बैंकवाला सामने खड़ी है। एक कड़बी सच्चाई उसके हाथ पर थी – नोटीस। उदारीकरण ने हम जैसे न्यून वर्ग को गहरी चोट ही पहूँचाई है। गरीब को और भी गरीब बना डाला हैं।

प्रश्न 36.
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी विषय पर एक निबंध तैयार करें।
• जन साधारण की भाषा
• भाषा का प्रचार एवं प्रसार
• राजभाषा के रूप में हिंदी (Official language)
• बोलचाल की भाषा
उत्तरः
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी। हम जानते हैं, हिंदी जोड़ने की भाषा है। केवल भारतीयों को ही नहीं पूरे विश्व को आज हिंदी अपनी सूत्र से बाँधी है। एक सौ बीस देशों में आज हिंदी का प्रचार है। विश्व की तीसरी बड़ी भाषा का स्थान आज हिंदी को प्राप्त है। विश्व भर में भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में हिंदी की बड़ी भूमिका है। विश्व के विभिन्न देशों में आज हिंदी बोलचाल की भाषा कें रूप में प्रयुक्त हो रही है। विश्व शांति स्थापित करने

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प्रश्न 37.
एक नया घर बेचना है, इसकी बिक्री के लिए सहायक एक विज्ञापन तैयार करें।
• शहर के पास
• पक्का मकान
• आकर्षक निर्माण
• बैंक लॉन की सुविधा
उत्तरः
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प्रश्न 38.
‘नारी कल और आज’ विषय पर आलेख तैयार करें।
• प्राचीन काल में नारी
• घरेलू वातावरण में नारी
• आधुनिक समाज में नारी
• नारी सुरक्षा के लिए कानूनी मान्यता
उत्तरःनारी कल और आज
आज की नारी कल का भविष्य है। समाज में स्त्री का अपना महत्व और स्थान है। वह समाज का अभिन्न अंग है। समाज और परिवार में पुरुष के साथ समान भूमिका स्त्री की भी है। माँ, पत्नी, बेटी, बहू जैसी अनेक भूमिकाएँ वह निभाती है। अगर परिवार अच्छा है सब खुश रहेगा। सबकुछ ठीक हो जाएगा। समाज कल्याण में नारी अपनी अलग पहचान रखती है। नारी के अभाव में घर घर नहीं रहता।

लेकिन आज के समाज में नारी का स्थान क्या हो रहा है, यह तो विचारणीय बात है। समाज पुरुष को शक्तिशाली मानता है और स्त्री को अबला । इसलिए हर क्षेत्र में उसे पीछे छोड़ दिया जाता है। समाज और स्त्री को यह पहचानना है कि भाज के में उसका अपना महत्व है। नारी को यह पहचानना है कि वह अबला नहीं है। आज तो कई नारी घर से बाहर कई क्षेत्रों में अदालतों शिक्षा संस्थाओं से लेकर संसद तक अपनी अपनी भूमिका निभा रही है।

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