Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers

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Kerala Syllabus Class 10 Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers

Time: 1½ Hours
Total Score: 40 Marks

निर्देश :

  • पहले 20 मिनट के समय प्रश्नों का वाचन करें, मनपसंद प्रश्नों का चयन करें तथा उत्तर लिखने की तैयारी करें।
  • सूचनाएँ ध्यान से पढ़ें और उत्तर लिखें।
  • उत्तर लिखते समय अंक और समय पर ध्यान दें।
  • 1 से 31 तक के प्रश्नों के लिए अधिकतम अंक 40 है।

सूचना: ‘बीरबहूटी’ कहानी का यह अंश पढ़ें और 1 से 4 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

बादल बहुत बरस लिए थे। फिर भी बहुत सारा पानी उनमें बचा हुआ था। वे खेतों, जंगलों के उपर छाए हुए थे। सारा आकाश मेघों से भरा था। मेघों की छायाओं में गीली हवाएँ इधर-उधर घूम रही थीं। पेड़ों के तने अभी भी गीले थे।

प्रश्न 1.
बहुत सारा पानी उनमें बचा हुआ था। किनमें? (1)
उत्तर:
बादलों में

प्रश्न 2.
‘उनमें’ में निहित सर्वनाम कौन-सा है? (1)
(क) यह
(ख) वह
(ग) ये
(घ) वे
उत्तर:
(घ) वे

प्रश्न 3.
अभी-अभी हुई बारिश का वर्णन कहानीकार ने कैसे किया है? (3)
उत्तर:
मेघों की छायाओं में गीली हवाएँ इधर-उधर घूम रही थीं। पेड़ों के तने अभी भी गीले थे।

Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers

प्रश्न 4.
उचित वाक्यांश चुनें वाक्यों की पूर्ति करें। (5)

  • पानी से गीले थे
  • बादलों से भरा हुआ था।
  • बादल छाए हुए थे।
  • चल रही थीं।
  • रंग पीला होता है।
(क) खेतों के ऊपर ________________

(ख) गीली हवाएँ ________________

(ग) पेड़ों के तने ________________

(घ) मूँगफली के फूल का ________________

(ड़) सारा आसमान ________________

उत्तर:
(क) खेतों के ऊपर – बादल छाए हुए थे।
(ख) गीली हवाएँ – चल रही थीं।
(ग) पेड़ों के तने – पानी से गीले थे।
(घ) मूँगफली के फूल का – रंग पीला होता है।
(ड) सारा आसमान – बादलों से भरा हुआ था।

सूचना: ‘हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था’ पाठ का यह अंश पढ़ें और 5 से 8 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

सड़क पर घायल पड़े अपरिचित व्यक्ति को देखकर क्या हम कह सकते हैं कि उसे हम नहीं जानते? वास्तव में हम जानते हैं कि यह व्यक्ति मुसीबत मैं है और इसे हमारी मदद की ज़रूरत है। यह कविता मनुष्य को मनुष्य की तरह ‘जानने’ की याद दिलाती है।

प्रश्न 5.
कवि के अनुसार मनुष्य को कैसे जानना चाहिए? (1)
उत्तर:
मनुष्य को मनुष्य की तरह जानना चाहिए।

प्रश्न 6.
तीन सही प्रस्ताव चुनकर लिखें। (3)
हताश व्यक्ति को जानने का मतलब है:
(क) उसकी हताशा को जानना।
(ख) उसकी जाति को जानना।
(ग) उसकी मुसीबत को जानना।
(घ) उसकी असहायता को जानना।
(इ) उसके नाम, पते और उम्र को जानना।
उत्तर:
हताश व्यक्ति को जानने का मतलब है:
(क) उसकी हताशा को जानना।
(ख) उसकी मुसीबत को जानना।
(ग) उसकी असहायता को जानना।

प्रश्न 7.
वाक्य पिरामिड की पूर्ति करें। (2)
(सड़क पर; घायल)
Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers Q7
उत्तर:

  • हमने देखा।
  • हमने एक व्यक्ति को देखा।
  • हमने सड़क पर एक व्यक्ति को देखा।
  • हमने सड़क पर एक घायल व्यक्ति को देखा।

प्रश्न 8.
असहाय मनुष्य की सहायता करना ज़रूरी है। ‘हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था’ कविता के आधार पर टिप्पणी लिखें। (5)
उत्तर:

जानना ज़रूरी है……

हिंदी के आधुनिक काल के कवि श्री विनोद कुमार शुक्ल की समकालीन कविता है ‘हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था।’ इस कविता में कवि मनुष्य को मनुष्य की तरह जानने की याद दिलाता है। कवि कहते हैं कि हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था। वे उस व्यक्ति को नहीं जानते थे। लेकिन उसकी हताशा, निराशा, मुसीबत, असहायता आदि जानते थे। इसलिए कवि उस व्यक्ति के पास गए और उसके हाथ पकड़कर चलने लगे। एक दूसरे को नहीं जानते हुए भी वे साथ-साथ चलने लगे। इस कविता में कवि ‘जानने’ की परंपरागत रूढ़ी को तोड़ देते हैं। सड़क पर घायल एक अपरिचित व्यक्ति को देखकर क्या हम कह सकते है कि उसे हम नहीं जानते? मुसीबत में पड़े व्यक्ति की मदद करना हमारा कर्तव्य है। इस कविता में कवि ‘जानना’ और ‘नहीं जानना’ आदि का बयान करते हैं। यह एक सरल कविता है। कविता की भाषा एकदम सरल है तथा मौलिक है। यह कविता बिलकुल प्रासंगिक है। इस कविता की पहली दो पंक्तियों में ही कवि अपनी पूरी बात कह देते है।

सूचना: ‘टूटा पहिया’ कवितांश की ये पंक्तियाँ पढ़ें और 9 से 12 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ
लेकिन मुझे फेंको मत
इतिहास की सामूहिक गति
सहसा झूठी पड़ जाने पर
क्या जाने
सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले!

प्रश्न 9.
‘लेकिन मुझे फेंको मत’ – किसको? (1)
(क) टूटे पहिए को।
(ख) इतिहास को।
(ग) सच्चाई को।
(घ) रथ को।
उत्तर:
(क) टूटे पहिए को।

प्रश्न 10.
विशेषण शब्द कौन-सा है? (1)
टूटा पहिया
उत्तर:
टूटा

Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers

प्रश्न 11.
टूटा पहिया किसका प्रतिनिधित्व करता है? स्पष्ट करें। (2)
उत्तर:
टूटा पहिया लघु मानव तथा उपेक्षित मानव का प्रतीक है। टूटा पहिया आम तथा साधारण जनता का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो इतिहास की गति को भी बदलने की क्षमता रखता है। टूटे पहिए में अन्याय के प्रति लड़ने की ताकत है।

प्रश्न 12.
कवि और कविता का परिचय देते हुए पंक्तियों का आशय लिखें। (5)
उत्तर:
आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि है धर्मवीर भारती। उनकी एक बहुचर्चित कविता है- ‘टूटा पहिया’। यह आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई कविता है। यह महाभारत की पौराणिक कथा के आधार पर लिखी गई है।

कवि कहते हैं कि मैं रथ का टूटा पहिया हूँ। मुझे तुच्छ समझकर फेंक देना नहीं चाहिए। इतिहासों की गति असत्य या अन्याय की ओर मुड़ जाने पर टूटा पहिया ही काम आता है। शासक वर्ग जनता पर अन्याय करने पर आम जनता रूपी टूटा पहिया अन्याय के विरुद्ध लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। अभिमन्यु जैसे कोई उच्च मानव टूटे पहिए के सहारे अन्याय के विरुद्ध लड़ने के लिए तैयार हो जाएँगे।

टूटा पहिया एक प्रतीकात्मक कविता है। टूटा पहिया उपेक्षित मानव का प्रतीक है, अभिमन्यु उच्च मानव का प्रतीक है। चक्रव्यूह सामाजिक समस्याओं का प्रतीक है। यह कविता बिलकुल प्रासंगिक है।

सूचना: ‘आई एम कलाम के बहाने’ फिल्मी लेख का यह अंश पढ़ें और 13 से 17 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

फिल्म में हमारे नायक का असल नाम ‘कलाम’ नहीं है। ढाणी पर काम करनेवाले और बच्चों की तरह उसे भी सब छोटू कहकर बुलाते हैं। उसकी माँ जैसलमेर के किसी सुदूर देहात से आकर उसे भाटी सा की चाय की धड़ी पर काम करने के लिए छोड़ जाती है। वह अंग्रेज़ी तो क्या हिंदी भी ठीक से नहीं जानती। लेकिन छोटू सिर्फ छोटू होकर नहीं जीना चाहता। वह खुद ही अपना नाम ‘कलाम’ रख लेता है।

प्रश्न 13.
सही वाक्य चुनकर लिखें। (1)
(क) कलाम ढाणी पर काम करती हैं।
(ख) कलाम ढाणी पर काम करती है।
(ग) कलाम ढाणी पर काम करती हूँ।
(घ) कलाम ढाणी पर काम करता है।
उत्तर:
(घ) कलाम ढाणी पर काम करता है।

प्रश्न 14.
माँ कलाम को चाय की घड़ी पर क्यों छोड़ जाती है? (1)
(क) अंग्रेज़ी पढ़ने के लिए।
(ख) काम करने के लिए।
(ग) हिंदी पढ़ने के लिए।
(घ) कलाम बनने के लिए।
उत्तर:
(ख) काम करने के लिए।

प्रश्न 15.
छोटू खुद ही अपना नाम कलाम रख लेते है। क्यों? (3)
उत्तर:
छोटू एक चाय की दुकान में काम करनेवाला बालक है। वह बड़ा होशियार लड़का है। वह पढ़ लिखकर भूतपूर्व राष्ट्रपति कलाम जैसे बड़े आदमी बनना चाहता है। वह स्कूल जाना भी चाहता है। टीवी में कलाम जी के भाषण सुनकर उनसे प्रभावित होकर छोटू स्वयं अपना नाम कलाम रख लेते है।

प्रश्न 16.
कलाम को चाय की धड़ी पर छोड़कर जाने के प्रसंग पर माँ और भाटी सा के बीच में क्या बातचीत हुई होगी। कल्पना करके लिखें। (5)
उत्तर:
माँ : भाई साहब, मैं छोटू को यहाँ छोड़कर देना चाहती हूँ।ཱ
भाटी : अच्छा, चलो छोटू यहाँ आराम से रहेगा।
माँ : छोटू बड़ा होशियार है।
भाटी : है क्या?
माँ : वह पढ़ना-लिखना चाहता है। पाठशाला जाना चाहता है। मगर……
भाटी : तुम चिंता मत करो। सब ठीक हो जाएगा।
माँ : भैया, वह पहली बार हमसे दूर होकर रहता है।
भाटी : तो क्या हुआ? मैं हूँ न? तुम चलो?
माँ : बहुत-बहुत शुक्रिया ।
भाटी : चलो। गाड़ी आ रही है।

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प्रश्न 17.
इस प्रसंग के आधार पर छोटू की डायरी लिखें। (5)
उत्तर:

दिन
दिनांक

न जाने आज कैसा दिन था ! यह दिन मैं भूल नहीं सकता। माँ और मुन्नी के साथ भाटी मामा की चाय की दुकान में माँ मुझे यहाँ छोड़कर चली गई। बेचारी माँ ……….. वे क्या करें……. भाटी मामा बहुत अच्छे हैं। फिर भी ………… मैं सिर्फ छोटू होकर नहीं जीना चाहूँगा। इस चाय की धड़ी में ही नहीं रहना चाहूँगा। पढूँगा……. लिखूँगा…… कलाम जैसे बड़े आदमी बनूँगा। माँ और मुन्नी की देखभाल करूँगा।
बहुत थक गया हूँ। बहुत नींद आ रही है। सुबह पाँच बजे उठना है। एक सफल दिन की प्रतीक्षा में ………. शुभरात्री।

सूचना: ‘सबसे बड़ा शो मैन’ जीवनी का यह अंश पढ़ें और 18 से 22 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

गाना अभी आधा ही हुआ था कि स्टेज पर पैसों की बौछार शुरू हो गई। चार्ली ने गाना रोक दिया और घोषणा की कि पहले मैं यह पैसे बटोरूँगा और उसके बाद ही गाऊँगा। इस बात ने हॉल को हँसीघर में तब्दील कर दिया।

प्रश्न 18.
सही वाक्य चुनकर लिखें। (1)
(क) चार्ली गीत गानी लगे।
(ख) चार्ली गीत गाना लगा।
(ग) चार्ली गीत गाने लगा।
(घ) चार्ली गीत गाने लगी।
उत्तर:
(ग) चार्ली गीत गाने लगा।

प्रश्न 19.
‘पहले मैं ये पैसे बटोरूँगा।’ ऐसा किसने कहा? (1)
उत्तर:
चार्ली ने कहा।

प्रश्न 20.
हॉल हँसीघर में कैसे तब्दील हो गया? (2)
उत्तर:
चार्ली से प्रसन्न होकर लोग स्टेज पर पैसों की बौछार शुरू हो गई। यह देखकर चार्ली ने घोषणा की कि पहले मैं यह पैसे बटोरूँगा और उसके बाद ही गाऊँगा। यह सुनकर हाँल हँसीधर में तब्दील हो गई।

प्रश्न 21.
इस प्रसंग के आधार पर पटकथा का एक दृश्य लिखें। (5)
उत्तर:
सीन संख्याः
स्थान : थियेटर का कमरा।
समय : शाम को 6 बजे।
पात्र, आयु : चार्ली (5 साल), मैनेजर (50 साल)
वेश भूषा : चार्लीः टी शर्ट और जाँघिया
मैनेजर: कुरता, पतलून
(स्टेज पर चार्ली गा रहा है, मैनेजर रूमाल लेकर आता है।)

संवाद
चार्ली : (गुस्से में) ये क्या कर रहा है?
मैनेजर : (हँसते हुए) पैसा बटोर रहा हूँ।
चार्ली : नहीं….. नहीं। ये पैसे मेरा ही है।
मैनेजर : ठीक है चलो।
चार्ली : (दर्शकों से) ये आदमी मेरे पैसे लेना चाहते हैं।
मैनेजर : (धीरे से) चुप रहो चार्ली।
चार्ली : मैं गाना नहीं गाऊँगा। (चला जाता है)
मैनेजर : हे भगवान…अब क्या करें। (चार्ली के पीछे चलता है।)

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प्रश्न 22.
‘चैप्लिन स्मृति मंच’ के नेतृत्व में 16 अप्रैल 2021 का चैप्लिन दिवस पर दिल्ली के करोलबाग में ‘सर्कस फिल्म का समकालीन महत्व’ विषय पर संगोष्ठी होनेवाली है। इसके लिए एक पोस्टर तैयार करें। (5)
उत्तर:
Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers Q22

सूचना: ‘ठाकुर का कुआँ’ कहानी का यह अंश पढ़ें और 23 से 25 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

कुप्पी की धुंधली रोशनी कुएँ पर आ रही थी। गंगी जगत की आड़ में बैठी मौके का इंतज़ार करने लगी। इस कुएँ का पानी सारा गाँव पीता है। किसी के लिए रोक नहीं, सिर्फ ये बदनसीब नहीं भर सकते।

प्रश्न 23.
‘सिर्फ ये बदनसीब नहीं भर सकते’ – यहाँ बदनसीब कौन हैं? (1)
(क) निम्न जाति के लोग।
(ख) साहू लोग।
(ग) ठाकुर लोग।
(घ) ज़मींदार लोग।
उत्तर:
(क) निम्न जाति के लोग।

प्रश्न 24.
‘इस कुएँ का पानी सारा गाँव पीता है।’ – किस कुएँ का? (1)
उत्तर:
ठाकुर के कुएँ का

प्रश्न 25.
यह प्रसंग किस सामाजिक व्यवस्था की ओर संकेत करता है? स्पष्ट करें। (3)
उत्तर:
‘ठाकुर का कुआँ’ प्रेमचंद की एक बहुचर्चित कहानी है। यह कहानी छुआछूत पर लिखी गई है। छुआछूत एक गंभीर सामाजिक समस्या है। निम्न जाति के लोगों को ठाकुर के कुएँ से पानी भरने के लिए अनुमति नहीं है। यह बड़ा अन्याय है। जाति के नाम पर लोगों को उच्च और नीच कहना ठीक नहीं है।

सूचना: ‘बसंत मेरे गाँव का’ लेख का यह अंश पढ़ें और 26 से 28 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

फूलदेई की विदाई के साथ बसंत का यह उत्सव समाप्त हो जाता है। अंतिम दिन इकट्ठी की गई सामग्री से सामूहिक भोज बनाया जाता है। इस आयोजन में बड़ों की भूमिका केवल सलाह देने तक सीमित होती है। बाकी सारे काम बच्चे करते हैं। उत्तराखंड के हिमालयी अंचल में फूलदेई से बड़ा बच्चों का कोई दूसरा त्यौहार नहीं है।

प्रश्न 26.
फूलदेई किसका त्यौहार है? (1)
(क) बड़ों का
(ख) स्त्रियों का
(ग) युवकों का
(घ) बच्चों का
उत्तर:
(घ) बच्चों का

प्रश्न 27.
सामूहिक भोज के आयोजन में बड़ों की क्या भूमिका है? (2)
उत्तर:
सामूहिक भोज फूलदेई का एक प्रमुख हिस्सा है। यह बच्चे स्वयं करते हैं। भोज के आयोजन में बड़ों की भूमिका केवल सलाह देना ही है।

प्रश्न 28.
हरिद्वार में फूलदेई का त्यौहार समाप्त हो गया। इसपर एक रपट तैयार करें। (5)

  • फूलों का त्यौहार
  • बच्चों के कई कार्यक्रम
  • सामूहिक भोज

उत्तर:

हो गई फूलदेई की विदाई

हरिद्वारः इक्कीस दिन का फूलदेई त्योहार कल मस्ती के साथ संपन्न हुआ। यह बच्चों का एक प्रमुख त्योहार है। फूलों का त्याहार है। कल देर तक बच्चों के कई कार्यक्रम थे। सामूहिक भोज का भी आयोजन किया था। बड़ों के सलाह से बच्चे स्वयं भोज का आयोजन किया था। बड़े चैती गीतों की मज़ा लूट रहे थे। फूलदेई की विदाई के साथ बसंत का यह उत्सव समाप्त हो गया।

सूचना: ‘दिशाहीन दिशा’ यात्रावृत्त का यह अंश पढ़ें और 29 से 31 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

अविनाश ने झट से अपना कोट उतारकर उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। कहा, “लो, तुम यह पहन लो। अभी हम लौटकर नहीं चलेंगे। तुम्हें कोई गालिब की चीज़ याद हो, तो सुनाओ।”

प्रश्न 29.
अविनाश ने कोट उतारकर किसको दिया? (1)
(क) मोहन राकेश को।
(ख) बूढ़े मल्लाह को।
(ग) गरीब को।
(घ) भीखारी को।
उत्तर:
(ख) बूढ़े मल्लाह को।

Kerala SSLC Hindi Board Model Paper March 2021 with Answers

प्रश्न 30.
यहाँ ‘गालिब की चीज़’ का तात्पर्य क्या है? (1)
उत्तर:
गालिब का गज़ल

प्रश्न 31.
मान लें, भोपाल से लौटकर मोहन राकेश ने शुक्रिया अदा करते हुए अपना मित्र अविनाश को पत्र लिखा। वह पत्र कल्पना करके लिखें। (5)

  • भोपाल स्टेशन में उतरना।
  • रात को भोपाल में घूमना।
  • नाव में भोपाल ताल की यात्रा।
  • मल्लाह का गज़ल गायन

उत्तर:

स्थान,
तारीख

प्रिय अविनाश,
नमस्ते।
कैसे हो? मैं बंबई पहुँच गया हूँ। अब होटल में हूँ। अविनाश, बहुत-बहुत शुक्रिया तुमने मुझे भोपाल ताल घुमाया न? अजीब आदमी हो तुम। स्टेशन पर मुझे उतरवाकर मेरा बिस्तर वगैरह लपेटकर बाहर फेंक दिया और सूटकेस लिए नीचे उतर गया। रात भर हम भोपाल ताल में नाव में बैठकर यात्रा की। ठंड में बेचारे अब्दुल जब्बार माँझी के गज़ल बहुत मोहक थे। माँझी सिर्फ एक तहमद लगाए था। बनीयान तक नहीं थी। उसका गला काफ़ी अच्छा था। समय आने पर फिर एक बार भोपाल आऊँगा।
बस……..अब इतना ही। बाकी अगले पत्र में घर में भाभी को मेरा प्रणाम और बच्चों को प्यार तुम्हारे पात्र की प्रतीक्षा में।

तुम्हारा मित्र,
मोहन राकेश
(हस्ताक्षर)

सेवा में
अविनाश
भोपाल

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