Teachers recommend solving Kerala Syllabus Plus One Hindi Previous Year Question Papers and Answers Pdf Board Model Paper 2021 to improve time management during exams.
Kerala Plus One Hindi Board Model Paper 2021 with Answers
Time: 2½ Hours
Total Score: 80 Marks
सूचनाः 1 से 8 तक के प्रश्नों में किन्हीं 4 के उत्तर लिखें । (4 × 1 = 5)
प्रश्न 1.
‘अनुताप’ किस विधा की रचना है ?
उत्तर:
लघुकथा
प्रश्न 2.
‘जुलूस’ नाटक के किसी एक पात्र का नाम लिखें ।
उत्तर:
इब्राहिम अली / मैकु/ दीनदयाल / बीरबल सिंह
प्रश्न 3.
‘मधुऋतु’ किसकी कविता है ?
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद
प्रश्न 4.
‘प्रभुता से प्रभु दूरि’ – प्रभुता से कौन दूर हो जाता है ?
उत्तर:
प्रभु / अहंकार
प्रश्न 5.
‘जिस पर अंकित हैं आँसू, थकान विश्राम और प्रेम की स्मृतियाँ’ – किस पर ?
उत्तर:
पत्थर की बैंच पर
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प्रश्न 6.
संभ्रांत महिसा किस गाड़ी से यात्रा कर रही थी ?
उत्तर:
रेलगाडी
प्रश्न 7.
‘हेमा’ किस कहानी का पात्र है ?
उत्तर:
दुःख
प्रश्न 8.
‘आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है ।’ – यह किसने कहा ?
उत्तर:
चाँद
सूचनाः 9 से 14 तक के प्रश्नों में से किन्हीं 3 के उत्तर लिखें। (3 × 2 = 6)
प्रश्न 9.
पत्थर की बैंच पर बैठकर बच्चा क्या कर रहा है ?
उत्तर:
बिस्कुट कुतरता है / बिस्कुट खाता है ।
प्रश्न 10.
रिक्शे से उतरकर यात्री अपराधी की भाँति सिर झुकाए चल रहा था – क्यों ?
उत्तर:
असलम की मृत्यु के कारण / अनुताप के कारण ।
प्रश्न 11.
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय |
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे होय । । – इस दोहे का तत्व क्या है ?
उत्तर:
सुख में ईश्वर के स्मरण करना हैं/
सुख में और दुःख में ईश्वर स्मरण करना है ।
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प्रश्न 12.
‘भागो सूखे तिनको’ – ‘सूखे तिनको’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
प्रेम विहीन समय/ अनाकर्षक वस्तु
प्रश्न 13.
वृद्ध संभ्रांत महिला फल और फूलों के बीज क्यों फेंक रही है ?
उत्तर:
कुछ जड़ पकड़ लेंगे तो फायदा होगा / दूसरों को सहायता करने के लिए/ दूसरों को कुछ लाभ होने के लिए ।
प्रश्न 14.
‘अपराध’ कहानी में पिताजी ने बड़े भाई को मारा । क्यों?
उत्तर:
पिताजी के विचार में बड़े भाई के कारण छोटे को घाव हुआ है ।
सूचना: 15 से 24 तक के प्रश्नों में से किन्हीं 5 के उत्तर लिखें । (5 × 6 = 30 )
प्रश्न 15.
कवितांश की आस्वादन – टिप्पणी लिखें ।
आशा से अंकुर झूलेंगे
पल्लव पुलकित होंगे,
मेरे किसलय का लघुभव यह,
आह, खलेगा किनको ?
उत्तर:
प्रसिद्ध छायावादी कवि श्री जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता है मधुऋतु। कवि, नाटककार, कहानिकार और उपन्यासकार है आप। झरना, आँसू, कामायनी आदि आपके प्रमुख रचनायें हैं । प्रस्तुत कविता में वसंद के आगमन के साथ हुए परिवर्तनों को कवि बताते हैं ।
मधुऋतु आने पर जीवन में विविध प्रकार के परिवर्तन हैं । प्रकृति में सुंदरता के कई नज़ारे हम देख सकते हैं। आशा के कारण अंकुर झूलने लगेंगे और पल्लव पुलकित होंगे। वसंद काल में प्रकृति अपने आपको, सजाती है । कवि इस समय में अपने प्रेयसी के लिए सुंदर छोटे संसार बनाते हैं। वह कोमल रेशम जैसा है अर्थात् बहुत अच्छा है । इसलिए किसी को भी बुरा नहीं लगेगा ।
प्रश्न 16.
ये कथन पढ़ें और ‘इब्राहिम अली’ के चरित्र पर टिप्पणी लिखें ।
• वापस तो हम न जाएँगे ।
• हम दूकानें लूटने या मोटरें तोड़ने नहीं निकले हैं……
• हमारा मकसद इससे कहीं ऊँचा है !
उत्तर:
जुलूस नाट्यरूपांतर के प्रमुख पात्र है इब्राहिम अली । नाटक में स्वस्वराजियों के नेता है वह । महात्मा गाँधी के अनुयायी हैं वह। अहिंसा का सही मतलब वह जानते हैं। अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वह पूरी तरह कोशिश करते हैं। वह किसी से डरते नहीं । नाश करना वह अहिंसा के विरुद्ध मानते हैं। एक सच्चा नेता होने के कारण वह अपने साथ आनेवाले लोगों के बारे में सोचते हैं । निड़र, अहिंसावादी, अडिग, सच्चा नेता है वह ।
प्रश्न 17.
बुरा जा देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।
जो दिल खोजौं आपना, मुझ सा बुरा न कोय । । – इस दोहे का भावार्थ लिखें।
उत्तर:
कबीर के एक प्रमुख दोहा है यह । नैतिक दोहा समाज को एक नई विचार सौपते हैं । यहाँ कबीर दूसरों की बुराई देखने के लिए निकलने वाले लोगों को सही बात दिखाते हैं। कोई भी दूसरों की बुराई देखने के बजाय अपने आपके बुराई को खोजना अच्छा है। क्योंकि हम सब में बुराई हैं । दूसरों पर गलती का आरोप करने से पहले अपने आपके गलती का सुधारना चाहिए ।
प्रश्न 18.
जीवन-वृत्त के आधार पर ‘चित्रा मुद्गल’ के बारे में एक अनुच्छेद लिखें ।
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जीवन-वृत्त नाम : चित्रा मुद्गल |
उत्तर:
चित्रा मुदगल
प्रमुख साहित्यकार श्रीमति चित्रा मुद्राल का जन्म 10 दिसंबर 1944 में हुआ । आपकी प्रमुख रचनाएँ गिलिगाडु, आवाँ, भूख, लपटें, एक ज़मीन अपनी, आदि है। इंदुशर्मा कथा सम्मान, उत्तरप्रदेश साहित्य भूषण आदि पुरस्कारों से आप सम्मानित हुए है ।
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प्रश्न 19.
पात्र और घटनाओं का मिलान करें:
| घटना | पात्र | |
| यात्रियों को टिकट देना | – | बूढ़ा आदमी |
| आम की गुठलियाँ बोना | – | बैंक का क्लर्क |
| सुंदर लिपि में लिखना | – | टिकट बाबू |
| घटना | – | पात्र |
उत्तर:
यात्रियों को टिकट देना – टिकट बाबू
आम की गुठलियाँ बोना – बूढ़ा आदमी
सुंदर लिपि में लिखना – बैंक का क्लर्क
प्रश्न 20.
कवितांश का आशय लिखें ।
इस पत्थर की बैंच के लिए भी
शुरू हो सकता है किसी दिन
हत्याओं का सिलसिला
इसे उखाड़ कर ले जाया
अथवा तोड़ा भी जा सकता है ।
उत्तर:
समकालीन कवि श्री चंद्रकांत देववाले द्वारा लिखित एक सशक्त कविता है पत्थर की बैंच । वर्तमान समाज में देखे जाने विद्रूपताओं पर कठोर प्रहार करनेवाला कवि समकालीन कविता के सशक्त हस्ताक्षर है । पत्थर की बैंच एक साधारण वस्तु है । लेकिन वह कई लोगों को सहायता करते है। बच्चों, युवा, बूढ़े – सभी प्रकार के लोगों को वह सहारा देते हैं । यह एक सार्वजनिक जगह के प्रतीक हैं। लेकिन कवि यहाँ यह आशंका व्यक्त करते है कि इस पत्थर की बैंच के लिए भी किसी दिन हत्याओं के सिलसिला शुरू हो सकता हैं । अर्थात् सभी लोगों का सहारा देनेवाले इस पत्थर का भी किसी विभाग के लोग अपने कहकर उसके लिए लड़ाई- जगड़ा शुरू करेंगे । आधुनिक समाज में भी कई लोग अपने संकुचित मनोभाव दिखायेंगे। दूसरों का हानी, पहुँचाने के लिए उस पत्थर की बैंच को उखाड़ कर लेंगे या तोड़ा भी जायेंगे। स्वार्थता, लालच, जलन आदि से भरा हुआ समाज को कवि यहाँ दिखाते हैं ।
प्रश्न 21.
अंग्रेज़ी संवाद का हिंदी में अनुवाद करें ।
(homework – गृहकार्य, finished – पूरा किया)
Ram : Hello Joseph, Did you finish the homework?
Joseph : Yes, I finished
Ram : Did Rahim help you?
Joseph : Yes, what about you?
Ram : Yes, I finished it last night itself.
उत्तर:
राम : नमस्ते जोसफ, क्या तुमने अपना गृहकार्य पूरा किया ?
जोसफ : हाँ मैंने पूरा किया ।
राम : क्या रहीम ने तुम्हारी मदद की ।
जोसफ : हाँ, क्या तुमने अपना गृहकार्य पूरा किया ?
राम : हाँ, मैं ने तो कल रात को ही पूरा किया ।
प्रश्न 22.
“उन थोड़े-से शब्दों द्वारा उस क्लर्क के जीवन में किंचित मात्रा भी क्यों न हो, सुख तो पहुँचा सका ।” लेखक अपनी आत्मकथा में इसका वर्णन करता है । वह आत्मकथांश तैयार करें ।
उत्तर:
मेरे जीवन में अनेक तरह के लोगों के साथ मुलाकात हुआ है । कुछ लोग आज भी मेरे यादों में आज भी जीवित है। कई लोगों के कारण मेरे जीवन में परिवर्तन हुआ है और मेरा विचार है कि मेरी वजह से कुछ न कुछ लोगों के जीवन में परिवर्तन हुए हैं ।
एक घटना आज भी मुझे याद है। एक बार में एक बैंक में एक हिसाब खोलने के लिए गया था । वहाँ के क्लर्क मुझसे सवाल पूछता जाता था और पाँस बुक में दर्ज करता जोता था। मैंने देखा उसके अक्षर बहुत अच्छे हैं । मैंने उसके तारिफ किया। इतना सुंदर अक्षर विरल ही हैं । उस क्लर्क को बहुत खुशी हुई। वह मुझसे बताया कि कुछ लोग उसके तारीफ करते थे और स्कूल में उसका हस्तलिपि के लिए पुरस्कार भी मिला था । मेरी तारीफ के कारण उस क्लर्क के जीवनम में कुछ न कुछ खुशी और आनंद मिलने के लिए मुझे भाग्य मिला । मेरा विचार है कि हम सब लोग दूसरों को सही प्रकार से तारीफ करने को न भूले ।
प्रश्न 23.
बच्चे की माँ और दिलीप, दोनों के मुँह से निकलते हैं – भूख नहीं है।’ दोनों के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इस कथन की विवेचना करके टिप्पणी लिखें ।
उत्तर:
दिलीप एक धनी आदमी है । उसकी पत्नी हेमा रूठकर माँ के घर चली गयी। इस पर दिलीप बड़ी निराशा में है । निराशा और मानसिक संघर्ष के कारण उसे भूख नहीं लगती। लेकिन, बच्चे की माँ दरिद्रता में है । अवश्य भोजन के लिए उसके पास सुविधा नहीं है । उसके पास केवल दो सूखी रोटयाँ हैं । उनको माँ बच्चे को खिलाना चाहती थी । स्वयं भूखी रहकर बेटे को रोटियाँ खिलाने के प्रयत्न में माँ झूठ बोलती है: ‘भूख नहीं है’। बेटे के प्रति बड़ी वत्सलता होने के कारण भी माँ कहती है: ‘भूख नहीं” । दिलीप के बिना भूख की अवस्था मानसिक संघर्ष के कारण से है, लेकिन माँ के बिना भूख का कारण दरिद्रता है ।
प्रश्न 24.
‘कहना नहीं आता’ कविता का आधार पर ‘हाशिएकृत नारी’ विषय पर एक लेख तैयार करें ।
• परिवार में नारी का शोषण
• समाज में नारी का उत्पीड़न
• अपने अधिकारों के प्रति सचेत
उत्तर:
भागवान ने मनुष्य को नर और नारी के रूप में सृष्टि की । नर और नारी बराबर के हैं । वे परस्पर पूरक हैं । एक के अलावा दुसरे का अस्तित्व नहीं है। संसार के विकास के आरंभ से ही नारी तिरस्कृत अवस्था में है । भारत में नारी को ‘देवी माँ’ समझा जाता है । ‘मनुस्मृति’ में नारी के बारें में विकल दृष्टिकोण रखने पर भी भारतीय संस्कृति में नारी ज़रूर बड़े महत्वपूर्ण स्थान में है । फिर भी, दुनिया में सबसे पार्श्ववत्कृत नारीगण भारत में ही है। रानी लक्ष्मी बाई, कल्पना चौला, मदर तेरेसा जैसी अनेक आदर्श महिलाओं को भारत ने ही जन्म दिया है। फिर भी, कुटुंब, समाज, रोज़गार आदि सभी क्षेत्रों में भारत के नारीगण बड़े पैमाने पर पार्श्ववत्कृत अवस्था में ही है। बालिका भ्रूण हत्या, अशिक्षित स्त्री संख्या, बालिका विवाह, नारी आत्महत्या, दहेज-प्रथा आदि अनेक क्षेत्र हैं, जिनसे हमें मालूम होता है कि भारतीय नारी तिरस्कृत और उपेक्षित अवस्था में फँस गयी है ।
नारी को विशेषकर भारतीय नारी को पार्श्ववत्कृत अवस्था से उठायें। नारी कभी भी नारी का शत्रु न बन जाये । स्त्री सत्ता की खूबियों से भारत का भविष्य उज्ज्वल बनायें ।
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सूचना: 25 से 34 तक के प्रश्नों में से किन्हीं 5 के उत्तर लिखें । (5 × 8 = 40 )
प्रश्न 25.
खंड का संक्षेपण करें और उचित शीर्षक दें ।
एक बार मैं बैंक मैं अपना हिसाब खोलने के लिए गया । क्लर्क मुझसे सवाल पूछता जाता था और पासबुक में दर्ज़ करता था। मैंने देखा, उसके अक्षर दरअसल बहुत अच्छे हैं। मैं ने फौरन कहा, “ज़रा पासबुक दिखाइए तो, आपकी लिपि बहुत सुंदर दिखती है।” और उसे नज़दीक से देखकर मैंने कुछ मन ही मन और ज़ोर से कहा, ” ब्यूटिफुल” !” उस क्लर्क का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा ।
उत्तर:
सुंदर लिपी
लेखक एक बार बैंक जाते है और वहाँ के क्लर्क से मिलते हैं । उसकी लिपी बहुत ही अच्छी थी तो लेखक उसका तारीफ करता है । वह क्लर्क प्रसन्न हो जाते है ।
प्रश्न 26.
“कल आपको दफ्तर पहुँचाकर लौटा तो पेशाब बंद हो गया था, अस्पताल ले जाते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था…..।” यात्री असलम की मृत्यु की खबर सुनकर दफ्तर पहुँचता है और अपनी सहेली से बातें करता है। यात्री और सहेली के बीच का वार्तालाप तैयार करें ।
उत्तर:
सहेली : अरे क्या हुआ तुमको ? आज इतनी उदास क्यों है ?
यात्री : क्या बताऊँ । आज तो बहुत दुःख हो रहा है ।
सहेली : दुःख, पर क्यों ?
यात्री : रिक्शेवाला असलम……
सहेली : ‘उसका क्या हुआ?
यात्री : वह मर गया ।
सहेली : अरे बाप रे कैसे ?
यात्री : उसके दोनों गुर्दों में खराबी थी। डॉक्टर उसे रिक्शा चलने से मना कर दिया था ।
सहेली : फिर ?
यात्री : उसने मुझे बहुत कंठिनाई से दफ्तर पहुँचाना था । मैं ज़्यादा ध्यान नहीं दिया ।
सहेली : फिर क्या हुआ ?
यात्री : कल मुझे दफ्तर पहुँचाकर, लौटते वक्त इसका पेशाब बंद हो गया और अस्पताल ले जाते वक्त उसका मृत्यु हुआ। मुझे अपने आप से गुस्सा हो रहा है। बहुत दुःख भी हो रहा है। मैं भी उसकी मृत्यु का एक कारण हूँ ।
सहेली : आप शांत हो जाइए ।
यात्री : मैं यह नहीं समझ पाया कि वह इतनी पीड़ा सह रहे है ।
सहेली : अब तो यह सब सोचकर क्या होगा । आप अपने काम में व्यस्त हो जाओ तो कुछ आराम मिलेगा ।
यात्री : मुझसे दुःख सहा नहीं जाता ।
सहेली : तो आप एक काम करो । असलम की परिवार का कुछ सहायता करो ।
यात्री : यह तो सही है ।
सहेली : हमारी तरह से हुए गलतियों को सुधारने का यही एक मार्ग हैं । मन का शांति भी मिलेगा ।
यात्री : हाँ मैं उन लोगों की सहायता आज ही करूँगा ।
सहेली : अब तो सब ठीक हुआ ।
प्रश्न 27.
जब गरीब विद्यार्थी 20 डॉलर लौटाने के लिए फ्रैंकलीन के पास गया तब उन्होंने कहा ‘आप इसे अपनी ही पास रखिए और जब आपके पास कोई ऐसा ज़रूरतमंद आए तो उसे यह दे दीजिए।’ गरीब विद्यार्थी की उस दिन की डायरी तैयार करें ।
उत्तर:
सोमवार / 27/ अगस्त/ 1982
आज मेरी ज़िंदगी में एक अजीब दिन है । बेंजमिन फ्रेंकलीन जी ने कई साल पहले मुझे सहायता किया और मैं पढ़े लिखे होकर एक अच्छे पद पर पहुँच गया हूँ। आज मैं उस बीस डॉलर लौटाने के लिए फ्रैंकलीन के पास पहुँचा। लेकिन उसने वह रकम स्वीकार नहीं . किया, बल्कि यह बात बताया कि मुझे यह सब बातें याद नहीं हैं। पर, एक बात मन में रखें कि यदि आपके पास कोई ज़रूरतमंद आये तो यह रकम उन्हें दे । सच्च में फ्रेकलीन जी बहुत ही बड़ा आदमी है । वह दिल से बड़े है । उन्हें दूसरों की चिंता है, मैंने अपनी जिंदगी में कई लोगों को देखा है। परंतु ऐसा आदमी को कभी नहीं देखा । ज़्यादा लोग अपने नाम और काम चलाने के लिए कोशिश करते है । लेकिन इस प्रकार के व्यवति बहुत विरले ही है । आज के समाज में इसी प्रकार को लोग ही हमें चाहिए। मेरा विचार है कि मैं भी इस प्रकार के एक हो जाऊँगी ।
प्रश्न 28.
‘वह किसी अपराधी की भाँति सिर झुकाए रिक्शे के साथ-साथ चल रहा था।’ यात्री असलम की मृत्यु की खबर सुनकर पश्चाताप से विवश होकर घर पहुँचता है और अपने मित्र को एक पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें ।
उत्तर:
रहीम
रामनगर,
नई दिल्ली।
प्रिय मित्र रहीम,
तुम कैसे हो? तुम्हारा परिवारवाले कैसे है? तुम तो ठीक-ठीक है न? बच्चों की पढ़ाई कैसे चल रहे है ?
मुझे तुमसे एक ज़रूरी बात बताना है। आज मैं बहुत दुःखी हूँ। मेरी लापरवाही के कारण एक साधारण व्यक्त की मृत्यु हो गई । वह एक रिक्क्षावाला है। उसका नाम असलम, वही मुझे हर रोज़ दफ्तर पहुँचाया देता था। आज वह नहीं आया । नये रिक्शेवाले ने बताया कि असलम मर चुका। पता चला कि कल मुझे दफ्तर तक पहुँचाकर वापस आते वक्त उसे बहुत तकलीफ हुआ । पेशाब बंद हुआ। अस्पताल लेते वक्त ही वह मर गया । “मुझे तब याद आया कि कल चढ़ाई पर असलम बहुत कराह रहे थे। पसीना भी आ रहा था । वह बहुत कोशिश करके ही मुझे चढ़ाई पार करके दफ्तर पहुँचाया था । अगर उस समय उसकी सहायता किया जाता तो वह बच जाते । मैं कितने निर्दयता से व्यवहार किया, अब मुझे पचतावा हो रहा हैं ।
मैं तुमसे वादा करता हूँ कि ज़रूर मैं उसकी परिवारवालों की सहायता करूँगी । अब यही एक रास्ता है कि मेरे दुःख से छुटकारा मिलते के। मुझे यकीन है कि तुम भी इससे सहमत होंगे। कुछ भी हो ज़रूर जवाब लिखना ।
तुम्हारा मित्र,
मनोहर
अगस्त
27 दिसंबर 1992
प्रश्न 29.
आपके विद्यालय के हिंदी क्लब (Hindi Club) द्वारा 15 अगस्त ‘स्वतंत्रता दिवस’ पर देशप्रेम से संबंधित स्किट (Skit) प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है। इसके लिए उचित पोस्टर तैयार करें ।
उत्तर:
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स्वतंत्रता दिवस सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय कोल्लम के हिंदी क्ल्ब द्वारा 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर देशप्रेम से संबंधित स्किट प्रितयोगिता का आयोजन हो रहा हैं। जो इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहता है 10 अगस्त के अंदर नाम और विवरण क्लब सचिव के पास देना हैं । सब भाल लेने का कोशिश करें और स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग ले । |
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प्रश्न 30.
मान लें, प्रकृति संरक्षण से प्रेरणा पौधों की एक नर्सरी (Plant Nursery) खुल रही है। रंग-बिरंगे फल-फूलवाले पौधों की उस नर्सरी के लिए एक आकर्षक विज्ञारन तैयार करें ।
उत्तर:
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छाया नर्सरी प्रकृति हमारा सबकुछ हैं। पौधे लगाये प्रकृति संरक्षण करें । |
प्रश्न 31.
सूचकों के आधार पर ‘समाज में मज़दूरों का शोषण’ . विषय पर एक निबंध तैयार करें ।
• समाज में मज़दूरों का स्थान
• मज़दूरों का शोषण
• कानून की अज्ञता
• शिक्षा का अभाव
उत्तर:
समाज में मज़दूरों का शोषण
मानव के विकास धीरे धीरे संभव हुआ है । पीढ़ी से पीढ़ी उत्तरोत्तर प्रगति की ओर बह रहा है । सामाजिक जीवी होने के नाते समाज उनके जीवन के सबसे बड़े क्षेत्र होते हैं। समाज में कई प्रकार के लोग होते हैं, हर एक को अपने अपने भूमिका हैं । राजनीतिज्ञ, शिल्पी, कारीगर, मज़दूर, अध्यापक डॉक्टर जैसे कई लोग समाज का हिस्सा है । हर विभाग के लोग अपने आपके काम में व्यस्त है। हर सभी के परिश्रम से ही समाज निर्माण संभव हैं । लेकिन कभी कभी ऐसा होता है कि कुछ लोग अपने आपके काम बड़े और दूसरों के छोटे समझते हैं। मज़दूर लोग कभी कभी इसका शिकार हो जाते हैं । उन्हें कई लोग, बहुत नीचे समझते हैं, नगण्यता से देखते हैं। वे लोग यह नहीं सोचते कि मज़दूरों के अभाव में समाज का हालत क्या होगा ।
कई जगहों में मज़दूरों का शोषण हो रहा है। विशेषकर अविकसित और विकासशील देशों में यह ज़्यादा हो रहा हैं । समाज के अमीर लोग मज़दूरों के शोषण करने में मज़ा लेते हैं। सही प्रकार के मज़दूरी न देना, अधिक समय काम करवाना, आवश्यक सुविधायें मज़दूरों को न देना, ज़्यादा काम करनावा आदि कई प्रकार के शोषण मंज़दूरों पर हो रहा हैं। नारी मज़दूरों की हालत और भी दर्दनाक हैं। उन्हें कई प्रकार से तड़पाते है मालिक लोग । विकसित देशों में मज़दूरों की हालत बेहतर हैं । यहाँ एक बात हमें पता चलता है कि समाज में शिक्षा की कमी शोषण का सबसे बड़ी कारण है। लोग शिक्षित है तो वे अपने हक को और दायित्वों से ज़्यादा परिचित होंगे। समाज में होनेवाले परिवर्तनों से जानकारी मिलते होंगे। देश में चलते कानून से परिचित प्राप्त होंगे। इसप्रकार समाज के अन्य लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त मज़दूर शोषण को रोकने के लिए सक्षमता प्राप्त करना ज़रूरी है। जहाँ जानकारी की कमी होगी वहाँ शोषण की मात्रा भी बड़ेगी ।
समाज के सभी लोगों को शिक्षा प्रदान करना सरकार क दायित्व हैं। उसी प्रकार ही शोषण से मुक्त, एक समाज का उदय होगा । मज़दूर लोग शिक्षित होकर उन पर चलनेवाले शोषण से मुक्त होना ज़रूरी हैं ।
प्रश्न 32.
सही मिलान करें ।
File – रद्द करें
Save – अंतर्जाल
Share – संचिका
Trash – खोज
Input – सहेजें
Search – कूड़ेदान
Cancel – साझा करें
Internet – अंतर्पात
उत्तर:
File – संचिका
Save – सहेजें
Share – साझा करें
Trash – कूड़ेदान
Input – अंतर्पात
Search – खोज
Cancel – रद्द करें
Internet – अंतर्जाल
प्रश्न 33.
‘डेंगु’ की रोकथाम (Prevention) के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की ओर से की गई कार्यवाइयों की जानकारी प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी स्वास्थ्य विभाग, केरल के नाम एक सूचना अधिकार पत्र तैयार करें ।
उत्तर:
Rs. 10
सेवा में
सार्वजनिक सूचना अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग,
केरल ।
आवेदक का नाम : मनोज कुमार
गाँधी नगर,
कोच्चि।
विषय : डेंगु की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र की ओर से की गई कार्यवाइयों की जानकारी ।
सूचना का विवरण :
1. डेंगु की चिकित्सा कितने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध है ।
2. डेंगु की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से कौन कौन सी योजनाएँ शुरू किया है ।
3. अब तक कितने कर्मचारियों को इस बीमारी के रोकथाम के लिए नियुक्त किये है ।
4. केरल में अब तक कितने लोगों का अब तक चिकित्सा दिया गया है ।
सूचना डाक या दस्ती में: डाक द्वारा
कोच्चि
15/12/2021
मनोजकुमार
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प्रश्न 34.
किसी एक मनपसंद फिल्म की समीक्षा करें ।
• कथा सार
• निदेशक की क्षमता
• पात्रों का अभिनय
• समग्रता
उत्तर:
तारे ज़मीन पर
बच्चे ओस की बूँदों की तरह एकदम शुद्ध और पवित्र होते हैं। वे कल के नागरिक हैं, लेकिन दुःख की बात है कि बच्चों को अनुशासन के नाम पर तमाम बंदिशों में रहना पड़ता है। आठ वर्षीय ईशान अवस्थी (दर्शील सफ़ारी) का मन पढ़ाई के बजाय कुत्तों, मछलियों और पेटिंग में लगता है। उसके माता-पिता चाहते हैं कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलता ।, ईशान घर पर माता-पिता की डाँट खाता है और स्कूल में शिक्षकों की । कोई भी यह जानने की कोशिश नहीं करता कि ईशान पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है। इसके बजाय वे ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं ।
खिलखिलाता ईशान वहाँ जाकर मुरझा जाता है । वह हमेशा सहमा और उदास रहने लगता है। उस पर निगाह जाती है आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ (आमिर ख़ान) की । निकुंभ उसकी उदासी का पता लगाते हैं और उन्हें पता चलता है कि ईशान बहुत प्रतिभाशाली, लेकिन डिसलेक्सिया की बीमारी से पीड़ित है । उसे अक्षरों को पढ़ने में तकलीफ़ होती है। अपने प्यार और दुलार से निकुंभ ईशान के अंदर छिपी प्रतिभा को सबके सामने लाते हैं ।
कहानी सरल है, जिसे आमिर ख़ान ने बेहद प्रतिभाशाली तरीके से परदे पर उतारा है। पटकथा की बुनावट एकदम चुस्त है। छोटे-छोटे भावनात्मक दृश्य रखे गए हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं । ईशान का स्कूल से भागकर सड़कों पर घूमना, ताज़ा हवा में साँस लेना, बिल्डिंग के कलर होते देखना, फ़ुटपाथ पर रहनेवाले बच्चों को आज़ादी से खेलते देखकर उदास होना, बरफ़ का लड्डू खाना जैसे दृश्यों को देख कई लोगों को बचपन की याद ताज़ा हो जाएगी। सभी बच्चों का दिमाग और सीखने की क्षमता एक-सी- नहीं होती । फ़िल्म देखते समय हर दर्शक इस बात को महसूस करता है ।
ईशान की भूमिका में दर्शील सफ़ारी इस फ़िल्प की जान है। अमीर ख़ान मध्यांतर में आते हैं और छा जाते हैं । टिस्का चोपड़ा (ईशान की मम्मी) ने एक में की बेचैनी को उम्दा तरीके से पेश किया है । विपिन शर्मा (ईशान के पापा), सचेत इंजीनियर और सारे अध्यापकों का अभिमय भी अच्छा है। प्रसून जोशी द्वारा लिखे गीत बहुत कुछ कहते हैं और परदे पर उनको देखते समय उनका प्रभाव और बढ़ जाता है । शंकर – अहसान-लॉय का संगीत भी अच्छा है । फ़िलम की फोटोग्राफी बहुत ही प्रभावशाली हैं ।