Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी)

मुरकी उर्फ़ बुलाकी (Text Book Page No. 68-77)

प्रश्न 1.
स्त्री के चेहरे में कौन-सा भाव झलकता है?
उत्तरः दुःख/निराशा/व्यथा
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q1

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प्रश्न 1.
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q1.1

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
ये कथन पढें
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q1.2
उत्तरः
राजवती घर की माल्किन थी। वह मुरकी को एक नौकरानी के रूप में नहीं बल्कि एक बेठी के रूप में देखती थी, अपने बेठे का देखभाल करने के लिए आई मुरकी से वह बहुत प्यार करती हैं। प्यार भरी दो नाम – मुरकी और बुलाकी पुकारते हैं। मुरकी का भविष्य के बारे में उसे चिंता थी। राजवती दयालू भी थी। दूसरों के प्रति सहानुभूति दिखाती है वह। मुरकी केलिए अपने बेटे से भी वादा करवाती है, राजवती एक सकारात्मक (positive) पात्र है। वह दूसरों को एक अच्छा नमूना (model) बन जाता है।

प्रश्न 2.
पति द्वारा उपेक्षित बुलाकी और राजवती के बीच वार्तालाप।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q2
उत्तरः
राजवती : क्या हुआ मुरकी? तेरा पति कहाँ है?
मुरकी : वह मुझे छोड़कर चला गया।
राजवती : सच-सच वताओ क्या हुआ था?
मुरकी : मेरे गहनों को बेचकर हम एक घर बनाया था, लेकिन उसे और किसी लडकी से प्यार हुआ था। फिर …..
राजवती : फिर क्या हुआ?
मुरकी : दो दिन पहले उसने मुझे दशहरे के मेला दिखाने केलिए ले गया। हम रात एक सराय में सो रहे थे, उसने मेरे साडी से चाबी लेकर चले गये।
राजवती : तुम कैसे यहाँ पहुँचा?
मुरकी : एक दयालू ने मेरे बारे में जानकर कुछ रुपये दिये और मैं यहाँ चली आयी।
राजवती : घबराओ मत, मैं हूँ ना।
मुरकी : मैं अब क्या करूँ? रहने केलिए घर तक नहीं।
राजवती : तुम यहाँ इस कोठरी में रहो। मैं जीते हुए तुमें कोई भी यहाँ से नहीं निकालेगा।
मुरकी : यह एहसान मैं कैसे भूलूँ?

प्रश्न 3.
पति द्वारा उपेक्षित बुलकी का आत्मकथांश तैयार करें।
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q3
उत्तर:
आत्मकथा :
मेरा जीवन संघर्षों से भरा था, मेरे जन्म के कुछ ही दिनों के बाद मेरी माँ मर गयी, पिता ने मुझे चाचा के घर भेजा। वहाँ मेरा जीवन अकेला था। फिर राजवती माँ के यहाँ कुमार की देखपाल केलिए मुझे लाये गये। माँ ने मुझे मुरकी और बुलाकी नाम दिये। खुशी से जीवन बिताते समय बाप ने मेरी शादी किसी बूढे के साथ करनावा चाहा। मैं एक शहरी लड़के के साथ भाग गयी। लेकिन वह मुझे छोड़ दिया, मैं वापस राजवती माँ के पास पहुँच गया। राजवती माँ ने मुझे आश्रय दिया।

मेरा हालत सुनकर मुझे अपने घर में एक कोठरी दिया। मुझे वादा दिया कि इस कोठरी की चाबी किसी ने भी नहीं छीनेगा। अपने बेठे से भी वादा करवायी थी। माँ नहीं होती तो मेरा जीवन कितना कठिन होती, यह चाबी में जीवन भर मेरे पास रखूगी।

Plus Two Hindi मुरकी उर्फ़ बुलाकी Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
पति द्वारा उपेक्षित बुलाकी को राजवंती अपने यहाँ आश्रय देती है। संकेतों के आधार पर बुलाकी का आत्मकथांश तैयार करें।

  • राजवंती के यहाँ आश्रय मिलना।
  • राजवंती द्वारा कोठरी की चाबी पकड़ा जाना।
  • जीवन भर चाबी न छीनने का वादा मिलना।

उत्तर:
आत्मकथा
मेरा जीवन संघर्षों से भरा था। मेरे जन्म के कुछ ही दिनों के बाद मेरी माँ मर गयी, ………. मुझे चाचा के घर भेजा। वहाँ मेरा जीवन अकेला था। फिर राजवती माँ के यहाँ कुमार की देखपाल केलिए मुझे लाये गये। माँ ने मुझे मुरकी और बुलाकी नाम दिये। खुशी से जीवन बिताते समय बाप ने मेरी शादी किसी बूढे के साथ करवाना चाहा। मुझे बिलकुल पसंद नहीं आया। मैं एक शहरी लड़के के साथ भाग गयी। लेकिन वह मुझे छोड़ दिया, मैं वापस राजवती माँ के पास पहुँच गया। राजवती माँ ने मुझे आश्रय दिया।

मेरा हालत सुनकर मुझे अपने घर में एक कोठरी दिया। मुझे वादा दिया कि इस कोठरी की चाबी किसी ने भी नहीं छीनेगा। अपने बेटे से भी वादा करवायी थी। माँ नहीं होती, यह चाबी में जीवन भर मेरे पास रखूगी।

प्रश्न 2.
संकेतों के आधार पर मुरकी का आत्मकथांश तैयार करें।
संकेत : दशहरा का मेला देखने को जाना
पति द्वारा उपेक्षित हो जाना
एक दयालू की सहायता मिलना
राजवंती माँ द्वारा शरण देना
उत्तर:
मेरा जीवन :
हे भगवान! आपको मैं ने देखा राजवंर्ता माता के रूप में। ज़िंदगी में जो कुछ मैं ने पाया, जो कुछ मैं ने देखा सब • व्यर्थ रहा। मेरा शेष जीवनकाल इसी घर में राजवंती माता की बिटिया के रूप में संपन्न होनेवाली है। जिस माता ने मुझे पूरी जिंदगी यहीं पर गुजारने की अनुमति दी है वे ईश्वर से कम नहीं है। मेरी भी एक कोठरी है यहाँ। कोठरी की चाबी मुझे पकडाते हुए उन्होंने मुझे वचन किया है। मुझे यहाँ से कोई भी, कभी भी निकानेगा नहीं। माँ ने बेटे से भी ऐसा वादा कराया है। अब मुझे सब कुछ है। माँ है, भाई है, घर है और यही मेरा परिवार है।

सूचनाः
‘मुरकी उर्फ बुलाकी’ कहानी का अंश पढ़ें और 5 से 9 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“हाँ, कुमार! इसलिए मैंने तुझसे प्रण लिया था। उसके मर्द ने जब उसके घर की चाबी उसके पल्ले से खोल ली थी, मैंने इस कोठरी की चाबी उसको पकड़ाते हुए कहा .. था कि मेरे जीते-जी कभी कोई तुझसे यह चाबी नहीं छीनेगा। और कुमार! आज जब मैंने उसकी मरी को नहलाया, इस कोठरी की चाबी उसके नेफ़े में खोंसी हुई थी। उसके माँस से चिपक गई थी। इस चाबी ने उसकी देह पर जख्म कर दिया था। पर उसने जीते-जी इस चाबी को अपने माँस से नहीं उतारा। मुरकी….. बुलाकी एक औरत ………..”

प्रश्न 3.
“मुरकी उर्फ़ बुलाकी’ किसकी रचना है?
(एकांत श्रीवास्तव, हिमांशु जाशी, अमृता प्रीतम, राज बुद्धिराजा)
उत्तर:
अमृता प्रीतम

प्रश्न 4.
मुरकी की मृत्यु के बाद कोठरी की चाबी कहाँ से मिली?
उत्तर:
माँस से/ देह से/ नेफे से

प्रश्न 5.
कुमार की माँ ने कोठरी की चाबी मुरकी को क्यों दी?
उत्तर:
म मुरकी को किसी भी व्यक्ति द्वारा घर से नहीं निकाला जाने के लिए ही कुमार की माँ ने कोठरी की चाबी मुरकी को दी थी।

प्रश्न 6.
उपर्युक्त खंड का संक्षेपण करें।
उत्तर:
बेचारी मुरकी
मुरकी की मरी के आगे बैठकर राजवंती कह रही थी कि उसने ही कोठरी की चाबी मुरकी को दी थी। वही चाबी आज तक उसके नेफे में खोंसी हुई थी जो उसके देह पर जख्म कर दिया था।

प्रश्न 7.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक दें।
उत्तर:
अभागिन मुरकी

प्रश्न 8.
मुरकी की कथा सुनकर कुमार की आँखें भर आईं। उस दिन की डायरी में वह अपने मन की संवेदनाएँ व्यक्त करता है। वह डायरी तैयार करें।

  • मुरकी का कुमार के घर आना।
  • बचपन में कुमार को खाना खिलाना ।
  • मुरकी का एक लड़के के साथ भाग जाना।
  • मुरकी का लौट आना।
  • मुरकी की मृत्यु हो जाना।

उत्तर:
22 / मई – बुधवार / 2001
आज एक अजीब दिन था। कई सालों के बाद मुरकी की असली कहानी मुझे आज पता चला। आज मुरकी की मृत्यु के बाद माँ ने सब कुछ बता दिया। वह हमारे पुराने नौकर की बेटी थी। उसकी माँ के मृत्यु के बाद उसे यहाँ लाया गया था। मेरा देखपाल यह करते थे। माँ और मुरकी के बीच एक माल्किन-नौकरानी संबंध नहीं था। वह एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे। क्योंकि उसके बाप पैसे केलिए उसकी शादी तय किया तो उसने एक शहरी लड़के के साथ भाग गया। लेकिन लड़के ने उसे धोक्का दिया और छोड़ दिया। मुरकी वापस यहाँ आया तो माँ ने एक कोठरी दिया और चाबी भी। और बेचारी मुरकी उस चाबी को अपने पास सभी समय रखते थे। मृत्यु के बाद नहाते समय उस चाबी को उसकी माँस में छिपे हुए मिली। एक गरीब निस्सहाय नारी का हालत मुझे आज ही पता चला।

प्रश्न 9.
मुरकी उर्फ बुलाकी पाठ का यह अंश पढ़ें।
“वह तुझे खिलाया करेगी और रोटी खा लिया करेगी” – ‘मुरकी उर्फ बुलाकी’ में मुरकी के पिता राजवंती से अपनी अवस्था और मातृहीन बेटी का आश्रय देने की बात कहता है। वह वार्तालाप तैयार करें।
उत्तर:
राजवंती : अरे, तुम आजकल इतना उदास क्यों है?
मुरकी के पिता : क्या कहूँ अम्मा, बेटी की चिंता हर समय सता रही है।
राजवंती : क्या हुआ उसको?
मुरकी के पिता : उसे तो कुछ नहीं हुआ। मगर मेरे जाने के बाद उसका क्या होगा?
राजवंती : तुम बात तो बताओ न?
मुरकी के पिता : हम नौकर-चाकरों की क्या ज़िन्दगी है? गधे की तरह जीते हैं और मर जाते है।
राजवंती : अरे तुमसे तो मैं ने कहा ना, बात साफ साफ बताओ।
मुरकी के पिता : जी, गाँव में मेरी औरत की मृत्यु हुई थी, यह आप जानती हैं।
राजवंती : हाँ मालुम है। अब एक साल होनेवाली है।
मुरकी के पिता : हाँ। तब से मेरी बेटी की हालत अत्यंत दुखभरी है।
राजवंती : क्या हुआ उसको?
मुरकी के पिता : औरत के मरने के बाद गाँव में वह एक रिश्तेदार के यहाँ अकेली रहती है। अब तो वह बड़ी बन गई है।
राजवंती : अपनी लड़की को ऐसे छोड़कर तुम क्यों जाते हो?
मुरकी के पिता : मैं क्या करूँ जी। आप के काम के लिए यहाँ आना ही पड़ता है न?
राजवंती : बेचारा, वहाँ अकेली है।
मुरकी के पिता : जी मैं एक बात पूछू?
राजवंती : क्या है?
मुरकी के पिता : अगर आप मानेंगी तो मैं उसे यहाँ आपके पास लाऊँगा । वह तुझे खिलाया करेगी और रोटी खा लिया करेगी।
राजवंती : यह तो अच्छी बात है। बेचारा वहाँ अकेली नहीं पड़ जाएगी और यहाँ मेरे लिए भी एक संहारा मिलेगी।
मुरकी के पिता : भगवान आपकी भलाई करेंगे। अच्छा जी। कल ही मैं उसे यहाँ लाऊँगा।

प्रश्न 10.
“बाप ने जब बात पक्की की, यह रात ही रात में एक शहरी लड़के के साथ भाग गई।”
मुरकी के भाग जाने पर राजवंती उसके भविष्य के बारे में सोचकर चिंतित है। राजवंती के उस दिन की डायरी तैयार करें।
उत्तर:

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q10
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q10.1

प्रश्न 11.
भाग जाने के पिछले दिन मुरकी का मन तनावपूर्ण बन जाता है। मुरकी के उस दिन की डायरी लिखें।
उत्तर:
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q11

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 3 मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Q11.1

प्रश्न 12.
पति द्वारा उपेक्षित मुरकी वापस आती है और राजवंती उसे अपना लेती है। संकेतों के आधार पर राजवंती का आत्मकथांश तैयार करें।
उत्तर:
जीवन और नियति का खेल कुछ अजीब ही है। जिसे हम अपना मानकर साथ रखते हैं वही हमारे जीवन का दुःख बन जाते हैं। जिसको मैं ने अपनी ही बेटी मानकर पालापोसा और बढ़ा किया वही मुझे छोड़कर – सब कुछ छोड़कर – किसी अजनबी के साथ चली गयी और … और अंत में आ गई वापस, सब कुछ खोकर। अपना मान-सम्मान सब कुछ खोकर वह आ गयी – मेरी बिटिया मुरकी।

सारे पुरुष जाति के प्रति मुझे प्रतिशोध है। साथ-साथ मैं आशंकित हूँ – मेरी बिटिया के बारे में। अब क्या होगा उसका भविष्य? कौन इसे अपनाएगा। यह अत्यंत कठिन बात है, जिसे हम अपना समझते हैं, अचानक उसका पराया बनना। जो भी हो मैं मुरकी को नहीं छोड़नेवाली हूँ। संपूर्ण जीवन में उसका सहारा बनकर मैं रहूँगी। इसीलिए ही इस घर के कोठरी का चाबी मैंने उसको दिया और मेरे बेटे कुमार से उसे घर से कभी भी नहीं निकालने की प्रतिज्ञा भी करवायी।

प्रश्न 13.
यह कथन पढ़ें।
मन के सौदे में जब उसका मन ही मुकर गया तो फिर तन को क्या ढूँढना था?
राजवंती के कथन के आधार पर मुरकी के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
मुरकी रिश्तों को महत्व देनेवाली है। बड़ों के प्रति उसके दिल में प्यार एवं ममता है। पति-पत्नी के संबंध को अत्यधिक महत्व देनेवाली औरत है वह। अपने पति को वह ईश्वर के समान मानती है। उसके लिए सब कुछ समर्पण करने के लिए भी वह तैयार है। उसके अनुसार शादी एक पवित्र बंधन है। इसीलिए ही वह कहती है “मन के सौदे में जब उसका मन ही मुकर गया तो फिर तन को क्या ढूँढना था?” तन के रिश्ते से अधिक मानसिक एकता को महत्व देनेवाली औरत है मुरकी।

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Profile

पंजाबी और हिंदी की विख्यात लेखिका अमृता प्रीतम ने उपन्यास, कहानी, कविता, संस्मरण एवं आत्मकथा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। पंजाब के गुजरांवाला में 1919 को उनका जन्म हुआ। देशी और विदेशी भाषाओं में उनकी रचनाओं का अनुवाद हुआ था। 1982 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से वे सम्मानित हुई। ‘कहानियों के आँगन में’, ‘कहानियाँ जो कहानियाँ नहीं है’ आदि उनके चर्चित कहानी-संग्रह हैं। 2005 को उनकी मृत्यु हुई।
मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Profile 1
– अमृता प्रीतम
मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Profile 2

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 1

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 2

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 3

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 4

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 5

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 6

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 7

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Summary in Malayalam 8

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Glossary

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Glossary 1

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Glossary 2

मुरकी उर्फ बुलाकी (कहानी) Glossary 3

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 2 सपने का भी हक नहीं (कविता)

सपने का भी हक नहीं (Text Book Page No. 65-67)

मेरी खोज

प्रश्न 1.
मगर नींद के टूटने के पूर्व ही नोटीस बैंक की आ धमकी सपने में। कवि यहाँ किस सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं?
उत्तर:
गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ है ‘मुक्तधारा’, ‘उलझन आदि। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। ग्राइन्टर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छिन्न-भिन्न हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को , यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

Plus Two Hindi सपने का भी हक नहीं (कविता) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
“मगर नींद के खुलने के पूर्व ही नोटिस बैंक की आ धमकी सपने में।” – इस सपने के बारे में युवती.अपनी सहेली को एक पत्र लिखती है। वह पत्र तैयार करें।

  • झोंपड़ी में रहकर महल का सपना देखने वाली मज़दूरिन ।
  • सामाजिक सच्चाई का कठोर यथार्थ।
  • सपना देखना भी डरावना बन जाना।

उत्तर:

इलाहाबाद
18.03.2016

प्यारी सीमा,
ईश्वर की असीम अनुकंपा से मैं यहां खुश हूँ। मेरा विश्वास है तुम भी वहाँ खूश होगी। तुम्हें एक पत्र लिखने के बारे में कई दिनों से मैं सोच रहा हूँ। लेकिन अभी समय मिला है।

एक खास बात बताने के लिए ही मैं यह पग लिख रहा हूँ। हम गरीबों की हालत कभी भी युधारेगी नहीं। कितनी सालों से यह झोंपड़ी में रह रही हूँ। कई महलों में मज़दूरिन बनकर काम कर रही भी हूँ। शायद इसीलिए ही आज मैं ने ऐसा एक सपना देखा जिसमें मैं नया घर बनवा रही हूँ। लेकिन क्या करूँ मित्र, मकान तो पूरा नहीं हो गया और सपने में ही बैंक से नोटिस आ गयी। हम गरीबों का हाल सुधरेगा ही नहीं। हमें सपने देखने का भी हक नहीं है।

मित्र, अपनी लाचारी के कारण ही मैं यह पत्र लिख रही हूँ। इतना लिखकर मैं यह पत्र समाप्त कर रही हूँ। घरवालों से मेरा प्यार और प्रणाम कहना। जवाबी पत्र की प्रतीक्षा में……..

तुम्हारी मित्र,
राधा
(हस्ताक्षर)

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“इक कमरेवाली झोपड़ी में
बच्चों के सो जाने पर
मैं अपनी मन-दीवार पर
अपना विस्तृत घर खींचने लगी।
खाने-पीने-सोने के
अलग-अलग कमरे,
रसोई यदि बूठक के
निकट रखती तो
पूजा का कमरा कहाँ होगा?”

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पंक्तियाँ किस कविता का अंश है?
(मातृभूमि, सपने का भी हक नहीं, आदमी का चेहरा)
उत्तरः
सपने का भी हक नहीं।

प्रश्न 2.
स्त्री अपना विस्तृत घर कहाँ खींचने लगी?
उत्तरः
स्त्री के मन दीवार पर |

प्रश्न 3.
स्त्री अपने घर में कौन-कौन से कमरे बनवाना चाहती है?
उत्तरः
स्त्री अपने घर में खाने-पीने-सोने के कमरे, रसोई और पूजा का कमरा बनवाना चाहती है।

प्रश्न 4.
हिंदीतर भाषी कविता की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवितांश की असावादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मजदूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

एक करमेवाली झोंपडी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन नए घर की सपने में लीन हो जाती है। दो मंजिलेंवाली उसकी घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक, रसोई और पूजा के लिए भी अलग-अलग कमरे हैं। गरीब मजदूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार होकर उठी है। वे चैन से सो भी नहीं सकते और सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
काँक्रीट की छत के
नीचे पीले रंग की
दीवारों के मध्य में
खिड़की-दरवाज़े सब रख दिए।
संगमरमर की चमक
ज़मीन पर; उस चमक पर
चमकती मेज़-कुरसियाँ
टी.वी, होम थियेटर बैठक में भाते।

प्रश्न 5.
यह कविता किसकी है?
(कुँवर नारायण, डॉ.जे.बाबु, मैथिलीशरण गुप्त)
उत्तरः
डॉ.जे.बाबु

प्रश्न 6.
खिड़की-दरवाज़े कहाँ है?
उत्तरः
खिड़की-दरवाज़े दीवारों के मध्य में है।

प्रश्न 7.
दीवारों का रंग क्या है?
उत्तरः
दीवारों का रंग पीला है।

प्रश्न 8.
ज़मीन पर किसकी चमक है?
उत्तरः
ज़मीन पर संगमरमर की चमक है।

प्रश्न 9.
बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें क्या-क्या हैं?
उत्तरः
मेज़-कुरसी, टी.वी, होम थियेटर आदि बैठक की शोभा बढ़ानेवाली चीजें हैं।

प्रश्न 10.
कवितांश की अस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिंदीतर भाषी कवियों में डॉ जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। ‘सपने का भी हक नही’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें एक साधारण मज़दूरिन की अवस्था का सच्चा चित्रण है।

सपने में बनाई घर की छत काँक्रीट की है। घर के दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है। चमकती संगमरमर से बनी ज़मीन के ऊपर घर की शोभा और शान बढ़ाने के लिए मेज़, कुरसी, होम थियेटर आदि सब कुछ है। आधुनिक सभी सुविधाओं से युक्त घर की सपना वह देखती है।

गरीब मज़दूरिन की सपने के माध्यम से एक कड़वी सामाजिक सच्चाई की प्रस्तुति यहाँ हुई है। कवि यह बताना चाहते हैं कि आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सपने का भी हक नहीं है। जीवन की भीषणता सपने में भी उसके आगे साकार हो उठे हैं। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते हैं। यही सामाजिक सच्चाई की ओर यह कविता इशारा करती है।

सूचनाः
निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।
क्रांति के लिए उठे कदम
क्रांति के लिए जले मशाल।
भूख के विरुद्ध भात के लिए
रात के विरुद्ध प्रात के लिए
जुल्म के खिलाफ जीत के लिए
हम लड़ेंगे हमने ली कसम।

प्रश्न 11.
कवि ने किसके के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है?
उत्तरः
क्रांति के लिए

प्रश्न 12.
‘शपथ’ शब्द का समानार्थी शब्द कविता से ढूँढें ।
उत्तरः
कसम

प्रश्न 13.
‘हम लड़ेंगे, हमने ली कसम’ – कसम क्या है?
उत्तरः
जुल्म के खिलाफ जीत केलिए लड़ने का कसम हमने लिया है।

प्रश्न 14.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
यह हिंदी की एक विख्यात कविता है। इसमें गरीब लोगों की दीन अवस्था का सुन्दर चित्रण हुआ है। कवि कहते हैं – क्रांति के लिए हमें कदम उठाना चाहिए। दूसरों की भूख मिटाने के लिए हमें कर्मनिरत रहना है। जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हमें ज़रूर शक्तिशाली बनना है। यह एक सुंदर समकालीन कविता है। समकालीन कविताओं में कवि का दृष्टिकोण अत्यंत सुन्दर मात्रा में झलकती है। कविता की भाषा सरल, सरस और जोशीली है।

सपने का भी हक नहीं Profile

हिंदीतर प्रदेश के हिंदी साहित्यकारों में प्रमुख है डॉ जे बाबू । उनका जन्म केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में 1952 को हुआ। मुक्तधारा, उलझन और उलाहना उनकी कविताओं का संकलन है। बिपाशा अखिल भारतीय कहानी पुरस्कार और हिंदीतर भाषी लेखक पुरस्कार से वे सम्मानित हैं।
सपने का भी हक नहीं Profile 1
– डॉ जे बाबू
सपने का भी हक नहीं Profile 2

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Hindi

हिंदीतर प्रदेशों के लेखकों में डॉ.जे बाबू का महत्वपूर्ण स्थान है। “सपने का भी हक नहीं’ उनकी एक महत्वपूर्ण कविता है। इसमें साधारण से साधारण एक मज़दूरिन की अवस्था का चित्रण है।

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहकर बडी महत्व की सपना देखनेवाली मज़दूरिन का चित्र अत्यंत मार्मिक है। सपने में भी उसके आगे बैंक की नोटीस दिखाई दे रही है। कवि कह रहे हैं…..

एक कमरेवाली झोंपड़ी में रहनेवाली गरीब मज़दूरिन अपने बच्चों के सो जाने के बाद नींद में पड़ जाती है और सपने में लीन हो जाती है। सपने में अब वह एक विशाल घर में सो रही है। दो मंज़िलवाली अपने घर में बहुत सारे कमरे हैं। खाने, पीने, सोने से लेकर बैठक और रसोई के लिए भी अलगअलग कमरे हैं। वह सोच रही है कि पूजा की कमरा कहाँ रखना है?

पूजा के लिए भगवान को बिठाने की कमया ऊपर की मंजिल में रखना वह चाहती है ताकि उसकी सारी समस्याएँ दूर हो सके। नये घर की छत काँक्रीट की है, दीवार और खिड़की के रंग भी उसने तय किया है।

ज़मीन तो चमकती संगमरमर का है और पूरा घर मेज़, कुरसी, टी.वी, होम-थियेटर जैसे सभी आधुनिक सुविधाओं से भरा है। रसोई तो अत्यंत नवीन है। ग्रानाइटर, फ्रिड्ज और मैक्रोवेव सभी से युक्त रसोई अत्यंत शानदार लग रहा है। सपने के दुमज़िले घर में रहनेवाली मज़दूरिन धूप के फैलने तक सो रही है। मगर अचानक सपने में ही एक डरावनी सच्चाई उसके आगे बैंक के नोटीस के रूप

में आ धमती है। इसके साथ साथ असकी सारे सपने छित्र-भित्र हो जाती है और जाग जाती है।

प्रस्तुत कविता में डॉ.जे बाबू ने एक कड़वी सच्चाई को यहाँ प्रस्तुत किया है। कवि कह रहे हैं आज के उदारतावादी समाज में साधारण गरीबों को सने का भी हक नहीं है, सपने में भी जीवन की भीषणता और उसके ऊपर लादे कर्ज से वे मुक्त नहीं है। वे चैन से सपना भी नहीं देख सकते।

गरीब लोग बैंक से कर्ज लेते हैं और उसका भुगतान समय पर नहीं कर पाते हैं। अंत में बैंक से आनेवाली नोटीस की भीषणता में जीने के लिए वे विवश हो जाते हैं। कविता यही सामजिक सच्चाई की ओर प्रकाश डालती है।

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 1

सपने का भी हक नहीं (कविता) Summary in Malayalam 2

सपने का भी हक नहीं Glossary

सपने का भी हक नहीं Glossary

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य)

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दवा (Text Book Page No. 98-102)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथन किन-किन पत्रों के हैं?
i. “कुछ एसी दे दें, जिससे ये 5 – 6 घंटे जीवित रह सकें।”
उत्तरः अनंगजी की पत्नी ने कहा।

ii. “मैं इन्हें मज़े में कई घंटे जीवित रख सकता हूँ”।
उत्तरः
अनंगजी के मित्र ने कहा।

iii. “जाते जाते कुछ सुना जाइए।”
उत्तरः
अनंगजी के मित्र ने कहा।

iv. “आपकी प्रार्थना टाली भी नहीं जा सकती।”
उत्तरः
अनंगजी ने कहा।

प्रश्न 2.
मित्र की बात सुनते ही अनंगजी उठकर बैठ गए। इनमें कौन-सा व्यंग्य है?
उत्तरः
जीवन के अंतिम क्षण तर हर मनुष्य अपनी प्रशंसा के भूखे रहते हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कवि अनंग के नये कविता-संग्रह का प्रकाशन हुआ है। कविता-संग्रह की बिक्री बढाने के लिए एक विज्ञापन तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q1

प्रश्न 2.
कहानी के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रसंगों के संवाद आगे बढाएँ।
उत्तरः
संवाद – 1
पत्नी : अरे डॉक्टर साहब! इनको एक्स्टेशन मिलेगा क्या?
डॉक्टर : नहीं, इनको बचाना मुश्किल है।
पत्नी : प्लीस डॉक्टर साहब, ऐस मत कहिएगा।
डॉक्टर : जी सुनिए, जो कुछ करना है, सब हमने कर डाला है।
पत्नी : डॉक्टरजी, मेरे परिवारवाले यह सह नहीं सकते। इनका और कोई दवा नहीं?
डॉक्टर : इसका कोई फायदा नहीं होगा।
पत्नी : जब मेरा बेटा आएगा, उससे मैं क्या कहूँगा। ये पूरे समाज से मैं क्या कहूँगा?
डॉक्टर : आप अपने बेटे से जल्दी ही आने को कहो। शाम तक इनका रहना असंभव है।

संवाद – 2

पात्र
मित्र, पत्नी और डॉक्टर

मित्र : कैसे हैं मेरे दोस्त?
पत्नी : डॉक्टर का कहना है, इनका बचना मुश्किल है।
डॉक्टर : मुश्किल नहीं, असंभव है।
पत्नी : डॉक्टर साहब! आप यह क्या कह रहे हैं?
मित्र : आप निश्चित रहिए। मेरे मित्र को मैं जीवित रह सकता हूँ। केवल शाम तक ही नहीं, अनेकों साल के लिए।
डॉक्टर : नहीं जी। आप कुछ भी नहिं कर सकते।
मित्र : डॉक्टरजी, आप देखिए मेरा कमाल |
पत्नी : क्षमा कीजिए डॉक्टर साहब। मुझे मेरे पतिदेव की जान बचाना है। कृपया आप इसे एक अवसर दीजिए।
डॉक्टर : अच्छा! तो अब हमारा कोई काम नहीं है! आप जो चाहे कर लो।
मित्र : आप निश्चित रहिए बहनजी, मेरि मित्र को बचाना मेरा कर्तव्य है।

संवाद – 3

पात्र
मित्र और कवि

मित्र : अरे यार! मैं पहूँच गया हूँ।
कवि : मित्र, मैं मर जाउँगा क्या?
मित्र : अरे अनग! तुम्हारा यह हाल मैं देख नहीं सकता।
कवि : डॉक्टर क्या कर रहा है, मित्र?
मित्र : उन्हें छोड़ दीजिए। तुम्हारा रक्षा मैं करूँगा।
कवि : मैं अब मरना नहीं चाहता है मित्र। कुछ कीजिएगा।
मित्र : आप निश्चित रहिए। आप के कंठ से एक सुंदर कविता सुनकर कितने दिन हुए?
कवि : अच्छा! अब भी आप तरस रहे हैं, मेरी कविता के लिए? ज़रा वह पुस्तक लीजिए।
मित्र : लो मित्र, सुनाइए। जाते-जाते कुछ सुनाकर ही जाइए।
कवि : अच्छा मित्र, लो, सुनो मेरी कविता।
मित्र : अरे वाह! वाह!! यदि आप न होते तो इस दुनिया का क्या होता?

‘दवा’ परसाईजी के एक व्यंग्य कहानी है। इसमें झूठी प्रशंसा चाहनेवालों पर कवि ने व्यंग्य किया है। कवि अनंगजी अपने अंतिम क्षण बिता रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनका बचना संभव नहीं है। परिवारवाले सब अत्यंत दुःखी है। शाम के समय उसके पुत्र के पहूँचने तक भी उनका जीवित रहना संभव नहीं है।

इसी समय अनंगजी का मित्र आकर कहता है वह अनंगजी की रक्षा करेगा। परिवारवालों को कमरे के बाहर बिठाकर मित्र और अनंगजी बात करने लगे। अनंगजी की झूठी प्रशंसा करके मित्र कहता है वह उनके कंठ से कुछ सुनना चाहता है। यह सुनते ही अनंगजी उसे कविता सुनाना शुरू कर डाला। कई घंटे बीत गए। अंत में जब परिवारवाले कमरे में घुसकर देखा तो अनंगजी कवितापाठ कर रहे हैं और मित्र, जो उन्हें बचाने आया था, मरे पड़े हैं।

इसमें बिना कवित्ववाले कवियों पर परसाईजी ने तीखा व्यंग्य किया है। झूठी प्रशंसा इतनी खतरनाक है कि वह ।। ज़िंदा को मुर्दा बना देता है।

Plus Two Hindi आदमी का चेहरा (कविता) Important Questions and Answers

सूचनाः
‘दवा’ कहानी का अंश पढ़ें।

मित्र ने कहा, “खैर, मुझे कोशिश तो कर लेने दीजिए। आप सब लोग बाहर हो जाइए।” सब बाहर चले गए। मित्र अनंग जी के पास बैठे और बोलो।

प्रश्न 1.
संकेतों के आधार पर मित्र और अनंग जी के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • मित्र द्वारा अनंग जी की प्रशंसा करना।
  • मित्र को देखकर अनंग जी का खुश होना।
  • मित्र द्वारा कविता-पाठ करने की विनती करना।

उत्तरः
मित्र : अरे मित्र मैं पहूँच गया हूँ।
कवि : मित्र, मैं मर जाऊँगा क्या?
मित्र : अरे अनंग, तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम तो इतने मशहूर कवि हो। इतनी आसानी से मर नहीं सकता।
कवि : लेकिन. डॉक्टर कहते है….. कि…
मित्र : तुम यह सब बात छोडो। तुम्हारी कविता सुनकर कितने दिन हुए। मैं तुम्हारा कंठ से एक सुंदर कविता सुनना चाहता हूँ।
कवि : लेकिन क्या मैं कविता आलापन कर पाऊँ।
मित्र : तुम इतने प्रसिद्ध हो। तुमको कुछ नहीं होगा।
कवि : तुम इतने हठ करते हो तो मैं ज़रूर करूँगा। ज़रा वह कविता पुस्तक दीजिए।
मित्र : यह लो, अब शुरू करो।

सूचनाः
दवा कहानी का अंश पवें और 2 से 6 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

कवि अनंग जी का अंतिम क्षण आ पहुंचा था। डॉक्टरों ने कह दिया कि ये अधिक-से-अधिक घंटे-भर के मेहमान हैं। अनंग जी की पत्नी ने कहा कि कुछ ऐसी दवा दे दें, जिससे ये 5-6 घंटे जीवित रह सकें ताकि शाम की गाड़ी से आनेवाले बेटे से मिल लें। डॉक्टरों ने कहा कि कोई भी दवा इन्हें घटे-भर से अधिक जीवित नहीं रख सकती।

प्रश्न 2.
कहानी का रचनाकार कौन है?
उत्तरः
हरिशंकर परसाई

प्रश्न 3.
अनंग जी की पत्नी ने डॉक्टर से क्या कहा?
उत्तरः
अनंग जी की पत्नी ने कहा कि कुछ ऐसी दवा दीजिए जिससे ये 5-6 घंटे जीवित रह सकें, ताकि, शाम की गाडी से आनेवाले बेटे से मिल ले।

प्रश्न 4.
डॉक्टर ने क्या जवाह दिया?
उत्तरः
डॉक्टरों ने कहा कि कोई भी दवा इन्हें घंटे-भर से अधिक जीवित नहीं रख सकती।

प्रश्न 5.
खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
कवि अनंग जी का मृत्यु निकट आया। पत्नी बेटे के आने तक कवि को जीवित रखने के लिए दवा देने को कहते है। लेकिन डॉक्टर कहते है कि यह नमुमकिन है।

प्रश्न 6.
संक्षेपण केलिए शीर्षक दें।
उत्तरः
अजीब दवा।

सूचना :
‘दवा’ कहानी का अंश पढ़ें।

कवि ‘अनंग’ जी का अंतिम क्षण का पहुंचा था। डॉक्टरों ने कह दिया कि ये अधिक-से-अधिक घंटे भर के मेहमान हैं।

प्रश्न 7.
संकेतों के आधार पर डॉक्टर और अनंग जी की पत्नी के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • डॉक्टर द्वारा अनंग जी की हालत के बारे में बताना।
  • अनंग जी की पत्नी की बिनती।
  • डॉक्टर का निष्कर्ष ।

उत्तरः
अनंग जी
की पत्नी : अनंग जी की हालत कैसा है डॉक्टर?
डॉक्टर : अनंग का हालत अच्छा नहीं है। वह बचना मुश्किल है।
पत्नी : यह आप क्या कह रहा है?
डॉक्टर : मैं कुछ भी नहीं कर सकता।
पत्नी : ऐसा मत कहिए। इसे कुछ ऐसा दवा दीजिए ताकि यह कुछ और समय जीवित रहूँ। इसे कुछ समय जीवित रहना ज़रूरी है।
डॉक्टर : आप क्या कह रहे हैं?
पत्नी : हमारा बेटा आज शाम को यहाँ पहुँचेगा। वह आने तक इसे जीवित रहना होगा।
डॉक्टर : लेकिन यह एक घडे के अंतर मर जायेगा।
पत्नी : आप कुछ भी कीजिए। पाँच छः घंडे आप इसे जीवित रखिए।
डॉक्टर : यह असंभव है।
पत्नी : हाय! मैं क्या करूँ।

प्रश्न 8.
अनंगजी के पुत्र ने आने पर देखा कि ‘पिताजी कविता पढ़ रहे हैं और उनके मित्र मरे पड़े हैं।’
इस घटना का वर्णन करते हुए पुत्र अपने मित्र को एक पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तरः

दिल्ली,
25.10.2017

मित्र राजेश,
ईश्वर की असीम कृपा से मैं यहाँ खुश हूँ। मेरा विश्वास है तुम भी वहाँ सपरिवार खुश होंगे। कई दिनों से एक पत्र तुम्हें लिखने के बारे में सोच रहा हूँ। लेकिन आज ही मुझे फुरसत मिला है।

आज तो एक विचित्र घटना हुई। अब मैं दिल्ली में पिताजी के साथ हूँ। पिताजी का तबियत सबेरे खराब हो गया था और वे अस्पताल में हैं । डाक्टरों ने उनका बचना मुशकिल बता दिया था और इसलिए ही शाम की गाड़ी में मैं लोहोर से दिल्ली पहूँचा। अंतिम बार उन्हें देखने के लिए ही यहाँ पहुँचा। लेकिन कमरे में जब मैं खुसा तो देखा कि उनका एक मित्र कमरे में मरा पड़ा है और पिताजी उन्हें कविता पाठ करके सुना रहा है। शायद उनकी कविताओं की विरसत ने ही मित्र को समाप्त कर दिया है। क्या कहूँ मित्र, समाज में मेरे पिताजी जैसे अनेकों कवि और साहित्यकार हैं जो अपनी रचनाओं को सबसे श्रेष्ठ मानते हैं।

इतना लिखकर यह पत्र मैं यहाँ समाप्त करता हूँ। घरवालों से और अम्माजी से मेरा प्यार और प्रणाम कहना । जवाबी पत्र की प्रतीक्षा में ………

राम कुमार अनंग,
(हस्ताक्षर)

प्रश्न 9.
अनंगजी अपनी कविता-संग्रह का प्रकाशन करना चाहते हैं। उसके लिए एक आकर्षक पोस्टर तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q9

प्रश्न 10.
मैं इन्हें मज़े में कई घंटे जीवित रख सकता हूँ।” अनंगजी को जिंदा रखने के लिए आए मित्र अंत में मर जाता है। अनंगजी के डॉक्टर अपने डॉक्टरी जीवन की इस विचित्र घटना को डायरी में लिखता है। वह डायरी तैयार करें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q10

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 4 दवा (व्यंग्य) Q10.1

प्रश्न 11.
अनंगजी की स्थिति बड़ी गंभीर है। बेटे के पहुंचने तक उसे जीवित रखने की बिनती पत्नी करती है। इस संबंध में पत्नी और डॉक्टर के बीच का संभावित वार्तालाप तैयार करें।
उत्तरः
पत्नी : डॉक्टर साहब, मेरे पति की रक्षा कीजिए।
डॉक्टर : बहिन जी, हम सब उनको बचाने की कोशिश में हैं।
पत्नी : मेरी बात तो सुनिए जी।
डॉक्टर : आप बताइए।
पत्नी : शाम की गाड़ी में मेरे बेटे आनेवाला है। कई महीने हुए उसके पिताजी से मिलकर।
डॉक्टर : आप बताइए, हमें क्या करना है?
पत्नी : कम से कम शाम की गाड़ी के आने तक आप उन्हें जिंदा रखने की कोशिश कीजिए।
डॉक्टर : अच्छा, उसकी गाड़ी कब तक आएगी।
पत्नी : शाम को पाँच बजे वह रेलवे स्टेशन पहूँचेगा। वहाँ से यहाँ पहुँचने के लिए आधा घंडा लगेगा।
डॉक्टर : लेकिन, यह कैसा संभव है जी?
पत्नी : डॉक्टर साहब, आप कुछ मत बताइए। मेरा बेटा अपने पिताजी को जीवन में अंतिम बार देखने के लिए ही आ रहा है।
डॉक्टर : आपकी वेदना मैं समझ रहा हूँ जी। हम लोग कोशिश तो ज़रूर करेंगे। आप भगवान पर उम्मीद रखिए।
पत्नी : अच्छा डॉक्टर साहब । आप ही अब हमारे लिए भगवान है। कृपया मेरी इच्छा पूर्ण कीजिए।

दवा Profile:

हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई का जन्म 1924 को मध्यप्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यग्यकार थे। वे हिंदी के पहले रचनाकर हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और हल्के पुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा। ‘हँसते है रोते हैं’, ‘जैसे उनके दिन फिरे’ आदि उनके श्रेष्ठ कहानी संग्रह हैं। उनकी मृत्यु 1995 को हुई। हिन्दी व्यंग्य लेखकों में सबसे श्रेष्ठ है श्री हरिशंकर परसाई। उनका व्यंग्य केवल हँसी-मज़ाक के लिए ही नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं पर तीखा प्रहार है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं ‘हँसते है रोते हैं जैसे उनके दिन फिरे” आदि।
दवा Summary in Malayalam 1

दवा Summary in Malayalam 2

दवा Summary in Malayalam

दवा Summary in Malayalam 3

दवा Summary in Malayalam 4

दवा Glossary

दवा Summary in Malayalam 5

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 3 आदमी का चेहरा (कविता)

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आदमी का चेहरा (Text Book Page No. 95-97)

प्रश्न 1.
कूली को आदमी के रूप में पहचानने से पहले कुली के साथ कवि की यात्रा कैसी थी?
उत्तरः
कुली को आदमी के रूप में पहचानने से पहले हर समय कवि उसके दस कदम पीछे ही चलता था।

प्रश्न 2.
कुली को आदमी मानने के पहले कवि ने उसको किस रूप में पहचाना था?
उत्तरः
कवि ने उसको नंबर के रूप में ही पहचाना था।

प्रश्न 3.
सामान खुद उठाते वक्त कवि के दिमाग में कौन-सा विवेक पैदा हुआ?
उत्तरः
कुली भी एक आदमी है। कुली जो काम करता है, उसका भी अपना महत्व है।

प्रश्न 4.
कुली कहकर पुकारने पर कवि को क्यों लगता है कि कुली नहीं एक इनसान आकर उसके पास खड़ा हो गया है?
उत्तरः
खुद सामान उठाने पर ही कवि को सामान लादने की वेदना और काम का महत्व का पता चला। इसलिए उसे अब कुली भी एक मनुष्य लगता है।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि है। सप्तकीय परंपरा के कवियों में और प्रगतिवादी कवियों में उनका अलग पहचान है। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा क्षेत्रों में भी उनकी प्रतिभा का चमक है। 2005 में उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

देश की प्रगति निम्न-वर्ग के श्रमिक लोगों के बिना संभव नहीं है। लेकिन जाने-अनजाने ही हर ज़माने में निम्न-स्तर के लोगों का तिरस्कार ही होता है। वे हमेशा हाशिएकृत हो जाते हैं। समकालीन कविताओं में ऐसे हाशिएकृत लोगों का चित्रण होता है। ‘आदमी का चेहरा’ कुँवर नारायण की ऐसी एक कविता है जिसमें कठिन मेहनत करनेवाला एक कुली के प्रति कवि अपना विचार प्रकट किया हैं। कवि कह रहे हैं – ‘कुली’ शब्द सुनते ही मेरे दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने खडा हो गया। जब वह मेरा सामान उठाकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलना शुरू किया। मुझे लगा, वह मुझसे तुच्छ है और उसके साथ नहीं चलना चाहिए। अनेकों यात्राओं में जो कुली मेरा सामान लाद था उसे मैं पहचान नहीं सकता। उसका चेहरा मुझे याद नहीं है। केवल नंबर से ही मैं उसको पहचानता था।

लेकिन आज जब मुझे अपना सामान खुद लेना पड़ा, तभी मुझे सामान लादने की वेदना और साथ-साथ परिश्रम के महत्व का पता चला। इसलिए अब मुझे कुली, केवल एक कुली ही नहीं बल्कि मनुष्य ही लगता है। मैं ने पहचान लिया कि इसी निम्न वर्ग के लोगों के परिश्रम से ही देश की प्रगति होती है।

देश की प्रगति ऊँच पदवाले लोगों से ही नहीं बल्कि निम्नवर्ग के मज़दूर, कुली सभी से तन-तोड़ मेहनत से ही संभव है। श्राम का अपना महत्व है। अर्थात् हमें श्रमिकों का महत्व जानकर उनका आदर करना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए श्रमिक और सर्वहारा भी मनुष्य है। उनके मेहनत से ही देश की प्रगति संभव है।

संगोष्ठी
विषयः किसी काम-धंधे का महत्व केवल उस काम पर निर्भर नहीं होता बल्कि काम करनेवाले की ईमानदारी पर भी निर्भर होता हैं।
उत्तरः
संगोष्ठी आलेख
अंग्रेज़ी में एक कहावत है ‘Work is worship’ – यानि श्रम ही ईश्वर साधना हैं। संसार में कई प्रकार के काम धंधे हैं। चपरासी से लेकर मुख्य सचिव तक, मेहतर से लेकर डॉक्टर तक। समाज में कई लोग काम को देखकर दूसरों को मेलते हैं। किसी काम को निम्न मानते है और कुछ को उच्च।

हमें एक बात समझना चाहिए कि हर काम के अपने विशेषताएँ हैं। अगर मेहतर (sweeper) कुछ दिन काम न किया तो हमारे शरहों का हालत क्या होगा? अगर किसान खेती नहीं करें तो क्या होगा? यानि समाज में जो भी काम-धंधे हो वे सब आवश्यक है। लेकिन एक बात याद में रखना चाहिए कि हम यह काम कैसे कर रहा हैं। दिलचस्पी से या विवशता से। ईमानदारी से या बेइमानी से। तहे-दिल से या रूढकर। डॉक्टर हो या अध्यापक, वकील हो या नेता – वे सब ईमानदारी से, दिलचस्पी से और तहे-दिल से अपना काम करना चाहिए। अध्यापक दिलचस्पी से नहीं पढ़ाते है तो छात्रों का हालत क्या होगा। डॉक्टर ईमानदारी से नहीं करते हैं तो मरीज़ के हालत क्या होगा।

काम-धंधे नहीं ईमानदारी पर ज़्यादा बल देकर हमें काम करना हैं। श्रम की महत्ता पहचानकर दिलचस्पी से काम करना हैं।

Plus Two Hindi आदमी का चेहरा (कविता) Important Questions and Answers

सूचनाः

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“कुली!” पुकारते ही
कोई मेरे अंदर चौंका.। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस कदम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान।

प्रश्न 1.
यह किस कविता का अंश है?
(मातृभूमि, आदमी का चेहरा, सपने का भी हक नहीं, कुंमुद फूल बेचने वाली लड़की)
उत्तरः
आदमी का चेहरा।

प्रश्न 2.
कुली पुकारते समय कौन कवि के पास आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
एक आदमी (कुली) आकर खड़ा हो गया कवि के पास ।

प्रश्न 3.
वह सामान सिर पर लादे बढ़ने लगा – कैसे?
उत्तरः
कुली सामान सिर पर लादकर बढ़ने लगा, कवि के स्वाभिमान से दस कदम आगे वह बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण समकालीन कवियों में प्रमुख है। आप ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित है। कविता, कहानी, समीक्षा और सिनेमा के क्षेत्र में वह मशहूर है। आप का एक प्रसिद्ध कविता है – आदमी का चेहरा।

आदमी का चेहरा कुँवर नारायण की ऐसी एक कविता है जिसमें मेहनत करनेवाला एक कुली के प्रति कवि अपना विचार प्रकट किया है। ‘कुली’ शब्द सुनते ही कवि के दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने खड़ा हो गया। जब वह मेरा सामान उठाकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलना शुरू किया। मैं अपने आप को उनसे भी महान समझता था। वह कई यात्राओं में मेरा सामान लादा था।

यहाँ कवि परिश्रम करने वाले साधारण लोगों का किसी भी प्रकार के महत्व न देनेवालों पर व्यंग्य करते हैं। जब कवि एक बार अपना सामान खुद उठाते है तो उसे पता चलता है कि कुली का प्रयत्न कितना महान है। परिश्रम की महत्व हमें पहचानना चाहिए। विशाल अर्थ में देखते है तो देश की प्रगति में साधारण श्रमिक लोगों के महत्वपूर्ण स्थान है। सरल भाषा में सहजीवियों से प्यार और सहानुभूति दिखाने के लिए कवि आह्वाल करते है। यह कविताँश छात्रानुकूल और प्रासंगिक है।

निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों का उत्तर लिखें।
“कुली !” पुकारते ही
कोई मेरे अंदर चौंका। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस कदम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान ।

प्रश्न 1.
इस कविता के रचयिता कौन है?
उत्तरः
कुंवर नारायण

प्रश्न 2.
कवि के पास कौन आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
कुली/ एक आदमी

प्रश्न 3.
कुली किससे आगे बढ़ने लगा?
उत्तरः
कवि के स्वाभिमान से दस कदम् आगे बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
कविता की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
हिन्दी के समकालीन कवियों में श्री कुंवर नाराय सबसे श्रेष्ठ है। समाज की हाशिएकृत लोगों की आवाज़ है समकालीन कविता। कुली ऐसी एक कविता है जिसमें श्रमिकों का महत्व बताया गया है। कवि कह रहे हैं – ‘कुली’ शब्द सुनते ही मेरे दिल में कोई चौंक गया। एक आदमी मेरे सामने आकर मेरा सामान उठाकर चलने लगा और मैं उसके दस कदम पीछे चलने लगा। वह मुझसे तुच्छा है और इसलिए साथ नहीं चलना है। अनेकों यात्राओं में चो मेरा सामान उठाया था, उसका चेहरा तक मुझे याद नहीं।

प्रस्तुत कवितांश द्वारा कवि हमें परिश्रम का महत्व बता रहै हैं। कविता की भाषा सरस और सरल है।

सूचना: निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और 1 से 4 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
“मैंने उसके चेहरे से उसे
कभी नहीं पहचाना,
केवल उस नंबस के जाना
जो उसकी लाल कमीज़ पर टॅका होता।
आज जब अपना सामान खुद उठाया
एक आदमी का चेहरा याद आया।”

प्रश्न 1.
यह किस कविता का अंश है?
(सपने का भी हक नहीं, आदमी का चेहरा, मातृभूमि, कुमुद, फूल बेचने वाली लड़की)
उत्तरः
आदमी का चेहरा

प्रश्न 2.
कमीज़ पर क्या टँका होता था?
उत्तरः
कुली का नंबर/ संख्या

प्रश्न 3.
कवि पहले कुली को कैसे पहचानता था? उसकी आदमी का चेहरा कब याद आया?
उत्तरः
कवि पहले कुली को उसकी लाल कमीज़ पर टॅका नंबर से पहचानता था। अपना सामान खुद उठाने पर कवि को एक आदमी का चेहरा याद आया।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
श्री कुँवर नारायण बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि है। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा आदि क्षेत्रों में भी उनकी चमक हैं। 2005 को उनको ज्ञानपीठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। देश की प्रगति निम्नवर्ग के श्रमिक लोगों के बिना संभव नहीं है। लेकिन इन लोगों को समाज स्थान नहीं देते हैं। ऐसे हाशिएकृत लोगों को कविता के माध्यम से दिखाने का प्रयास प्रस्तुत कविता में किया है।

कवि जब भी कुली को देखते हैं केवल लाल कमीज़ पर टँका नंबर से पहचानते हैं। उसे नाम से नहीं कुली ही पुकारते हैं। वह एक मानव है ऐसे उसे देखते नहीं, लेकिन पहली बार जब अपना सामान खुद उठाया तो कवि को लगता है कि कुली भी आदमी है।

यहाँ कुछ ही शब्दों में सरल शैली में निम्नवर्ग के लोगों की ओर ध्यान दिया हैं। हम सब मानव है, जो भी काम करना पड़े। आज भी यह कविता प्रासंगिक है।

“निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।
“कुली! पुकारते ही
कोई मेरे अंद चौंका। एक आदमी
आकर खड़ा हो गया मेरे पास।
सामान सिर पर लादे
मेरे स्वाभिमान से दस क़दम आगे
बढ़ने लगा वह
जो कितनी ही यात्राओं में
ढो चुका था मेरा सामान।

प्रश्न 1.
यह किस काव्यधारा की कविता है?
(द्विवेदीयुगीन कविता, समकालीन कविता, छायावादी कविता)
उत्तरः
समकालीन कविता

प्रश्न 2.
कवि के पास कौन आकर खड़ा हो गया?
उत्तरः
एक आदमी आकर खड़ा हो गया।

प्रश्न 3.
कवि किससे आगे बढ़ने लगा?
उत्तरः
कवि अपने स्वाभिमान के ‘दस कदम आगे बढ़ने लगा।

प्रश्न 4.
समकालीन कविताओं की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी तैयार करें।
उत्तरः
प्र बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कवि श्री कुंवर नारायण की एक कविता है आदमी का चेहरा। वे ज्ञानपीठ से पुरस्कृत कवि है। प्रस्तुत कविता में श्रम के महत्व के बारे में कवि बता रहे हैं।

कुली शब्द सुनते ही कवि के अंदर कोई चौंक गया। कवि को लगा एक आदमी उसके आगे खड़ा हो गया है। जब वह मेरा सामान लेकर चलने लगा तो मैं उसके दस कदम पीछे चलने लगा। अपने स्वाभिमान के कारण कवि को ऐसा लगा कि कुली के साथ नहीं चलना चाहिए।

अनेकों यात्राओं में जो कुली हमारे सामान उठाते हैं हम उसे कभी नहीं पहचानते हैं। देश की प्रगति के लिए ही हर व्यकति काम करते हैं चाहे वह ऊँचे पदवाले हो या निम्न पदवाले। सभी. के काम का अपना महत्व है। आदमी को यह समझना चाहिए कि देश की प्रगति केवल ऊँचे पदवाले लोगों से ही नहीं, बल्कि निम्नवर्ग के मज़दूर, कुली आदि सभी के तन-तोड़ मेहनत से ही संभव है। हमें यह समझना चाहिए कि श्रमिक और सर्वहारा लोग भी मनुष्य है। और उनके भी मेहनत से देश की प्रगति संभव है।

“निम्नलिखित कवितांश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।
आईना हमारी शक्ल सूरत दिखाता है,
एकदम बराबर सब कुछ बताता है,
किसी को असली नकली में
फर्क समझ में नहीं आता,
इसलिए वो आइना है कहलाता।

प्रश्न 1.
आईना क्या दिखाता है?
उत्तरः
गा आईना हमारी शक्ल-सूरत दिखाता है।

प्रश्न 2.
‘असली’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द कविता से ढूँढें
उत्तरः
नकली

प्रश्न 3.
आईना, आईना क्यों कहलाता है?
उत्तरः
मग आईने में देखने से किसी को असली और नकली में फर्क समझ में नहीं आता है। इसलिए आईना, आईना कहलाता है।

प्रश्न 4.
कविता की व्याख्या करते हुए आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
अ यह हिंदी के एक विख्यात कविता है। समकालीन कविताओं में छोटे-बड़े, निम्न-उच्च सभी स्तर के व्यवतियों और चीज़ों के बारे में कहते हैं। प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक सच्चाई को उजागर करने में समकालीन कविता की निजी विशेषता है।

आईना हमारी शक्ल और सूरत दिखाता है। आईने में देखने से सभी को अपना शक्ल बराबर ही दिखाई देता है। असली और नकली में किसी को कोई फर्क नहीं दिखाई देता है। इसलिए ही आईने को आईना कहलाता है। आईने के द्वारा कवि ने यह बताने की कोशिश की है कि दुनिया भी एक आईना जैसा है। यहाँ किसी का कोई फर्क नहीं है। जिस प्रकार आईने में व्यवति का शक्ल उसी प्रकार दिखाई देता है ठीक उसी प्रकार दुनिया में भी हर व्यक्त का शक्ल एक जैसा है। वहाँ उच्च-निम्न या छोटे-बड़े का कोई भेद नहीं है।

आदमी का चेहरा Profile

कुंवर नारायण का जन्म उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में 1927 को हुआ। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक के प्रमुख कवि वर नारायण नई कविता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर हैं। कविता के अलावा कहानी, समीक्षा और सिनेमा में उन्होंने 7 लेखनी चलाई। ‘चक्रव्यूह’, ‘अपने साम..’, ‘कोई दूसरा नहीं’, ‘इन दिनों’ आदि उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। देश के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ से 2005 में वे सम्मानित हुए।
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आदमी का चेहरा Summary in Malayalam

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आदमी का चेहरा Glossary

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Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर (संस्मरण)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 2 वह भटका हुआ पीर (संस्मरण)

प्रश्न 1.
चित्र और रहीम की पंक्तियों में कौन-सा संदेश मिलता हैं?
उत्तरः
चित्र में मदर तेरेसा बच्चों के देखपाल करने का दृश्य है तो रहीम की पंक्तियों में दूसरों को अपना सर्वस्व देनेवाले प्रकृति का चित्रण हैं। परोपकार हर जीव का फर्ज़ हैं।

मेरी खोज

प्रश्न 1.
लेखिका ने स्कूटरवाले की तुलना गुलमोहर से क्यों की है?
उत्तरः
जिसप्रकार स्कूटरवाला गर्मी में राहगीरों को पानी पिलाता है उसी प्रकार गर्मी के मौसम में गुलमोहर अपने फूलों से दूसरों को छाया और तृप्ति देते हैं, दोनों परोपकार की भावना रखनेवाले हैं।

प्रश्न 2.
स्कूटरवाला कैसे अपने मन का बादशाह बन गया?
उत्तरः
वह मिली नौकरी को भी छोडा और स्कूटर अपने मर्जी के अनुसार चलाता है। अपने दिल के विचार के अनुसार दूसरों की सहायता करके वह जीवन बिताते हैं। संपत्ति के पीछे न भागकर दिलं के अनुसार जीते हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
विशेष समाचार – मशकवाला स्कूटर നെ ആധാരമാക്കി ഒരു കൗതുക വാർത്ത തയ്യാറാക്കുക. സഹായക സൂചനകൾ ഉപയോ ഗിക്കണം. ശീർഷകം, സ്ഥലം എന്നിവ ആവശ്യമാണ്.
उत्तरः
मशकवाला स्कूटर – दिल्ली में
दिल्लीः दिल्ली के साधारण लोगों को देवता के रूप में दिखाई देता है एक स्कूटरवाला, क्योंकि वह रास्ते पर चलनेवाले प्यासे लोगों को मुफ़्तं पानी पिलाता है। वह अपने माँ के, उपदेश के अनुसार अपने पैसे से मशक में पानी भरवाकर सहगीरों को पानी पिलाता है, वह अपने लिए केवल दो जून रोटी ही कमाता है, पैसे के पीछे न … दौड़कर लोगों के दिल से रिस्ते जोडते हैं, लोग उसे मशकवाला स्कूटर कहते हैं। वह केवल एक स्कूटरवाला न होकर एक पीर हो गया है। .

प्रश्न 2.
स्कूटरवाले के चरित्र पर टिप्पणी करते हुए वर्तमान समाज में ऐसे लोगों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तरः
एक साधारण स्कूटरवाला कैसे असाधारण व्यक्ति बनते हैं – इसका उदाहरण है मशकवाला स्कूटर, भौतिक जीवन में वह गरीब हैं। माँ के उपदेश के अनुसार वह दूसरों को मुफ़्त पानी देता हैं, पैसे के पीछे न जाकर लोगों से दिल के रिश्ते जोड़ते हैं। आज के समाज में इसीप्रकार के लोग बहुत विरल है, परोपकार की भावना. हर व्यक्ति के लिए आवश्यक गुण है। यहाँ इसी गुण को दिखाया गया है। केवल अपने बात ही सोचनेवाले इस समाज में एक अजीब चरित्र हैं मशकवाला स्कूटर।

प्रश्न 3.
स्कूटरवाला जैसे लोगों को आपने देखा है? वह अनुभव प्रस्तुत करें।
उत्तरः
जैसे – हमारे गाँव में एक ऐसे व्यक्ति है जो एक साधारण दूकानदार है जो एक छोटी सी दुकान चलाकर आजीविका कमाते है। कई लोगों के लिए वह ईश्वर समान है क्योंकि दुपहर के भोजन से मिलने का कारण है वह । हर दिन वह दुपहर के समय दूकान बंद करके बाहर निकलते है। एक थैली में तैयार किये भोजन लेकर रास्ते में आवश्यकता के अनुसार पड़े रहनेवाले लोगों को भोजन देते है। वह कई सालों से यह करते आ रहे हैं।

Plus Two Hindi वह भटका हुआ पीर (संस्मरण) Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण के स्कूटरवाले पात्र का आत्मकथांश तैयार करें।
* पितृविहीन बालक
* गरीब बचपन
स्कूटर चलाकर रोटी की कमाई
* माँ का उपदेश
* दूसरों की प्यास बुझाने की कोशिश
उत्तरः
आत्मकथांश
मैं एक स्कूटरवाला हूँ, लोग मुझे मशकवाला स्कूटर कहते हैं। मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। मेरा पिता मेरे बचनप में ही चल बसा | मेरी माँ कठिन परिश्रम करके मेरा पालन-पोषण किया। मैं स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई किया, मैं छोटे उम्र में ही छोटे-छोटे काम करने लगे थे, बड़े होकर मैं स्कूटर चलाने के साथ साथ पढ़ाई भी किया। ग्रेजुएट हो गया, मुझे दफ्तर में काम मिला था।

लेकिन मैं आज भी स्कूटर चलाता हूँ – मशकवाला स्कूटर | जब मैं शहर में स्कूटर चलाने लगे तब मैं देख कि कई लोग पानी के लिए गरस रहे हैं। मैं एक मशक में पानी भरकर रास्ते में मिलनेवाले प्यासे लोगों को पानी पिलाने लगे। पानी पिलाने में, जो पुण्य मिलते है वह पैसों से सौ गुना बेहत्तर है। मैं यह काम दम तोडने वक्त तक करूँगा। यही मेरा जीवन का मकसत है।

प्रश्न 2.
सूचनाः वार्तालाप तैयार करें।
संकेतों के अनुसार स्कूटरवाले और लेखिक का बीच का वार्तालाप कल्पना करके लिखें।
* स्कूटरवाले की कहानी
* पितृविहीन बालक
* गरीब माँ
* माँ का उपदेश
* मन का बादशाह
उत्तरः
स्कूटरवाला : आप यहाँ रहते है?
लेखिका : हाँ, आओ, बैठो।
स्कूटरवाला : नहीं, कई लोग पानी की प्रतीक्षा में होगा।
लेखिका : आप ऐसे क्यों करते है।
स्कूटरवाला : मुझे ऐसे करने में बहुत खूशी मिलती है।
लेखिका : आप के घर में कौन-कौन है?
स्कूटरवाला : पिताजी बचपन में चल बसा। माँ छोटे छोटे काम करके मेरा देखबाल किया है।
लेखिका : आप पढ़ाई नहीं किया?
स्कूटरवाला : हाँ। मैं स्ट्रीट लैइट में पढ़कर ग्राजुएट हो गया। मुझे नौकरी भी मिला था।
लेखिका : फिर भी आप स्कूटर चलाते हो?
स्कूटरवाला : मुझे इसमें खुशी है। अपने मन का बादशाह हूँ। जहाँ चाहे जाता हूँ, पानी पिलाता हूँ।
लेखिका : आप एक पीर हो।
स्कूटरवाला : शुक्रिया। अब मैं चलता हूँ।

प्रश्न 3.
दूसरों की सहायता करना सबसे महान कार्य है – इस विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता हो रही है।
‘वह भटका हुआ पीर’ पाठभाग के संकेतों के आधार पर एक भाषण तैयार करें।
संकेत : तू पानी पिलाया कर, पुण्य मिलता है।
वह पूजा के लिए कहीं भी न बैठकर लोगों के दिल में जगह बनाता है।
दिल के रिश्ते जोड़ता है।
उत्तरः
प्र प्यारे भाइयो, बहनो ……….
जीवन की विभिन्न पहलुओं की आज यहाँ चर्चा हो रही है। हम सब जानते हैं “मानव सेवा ही माधव सेवा है। इसका तात्पर्य है मनुष्य की सेवा ही भगवान की सेवा है, वही असली पूजा है।

मित्रो, पुराने जमाने से भारत की ऐसी एक परंपरा है। भारत के ऋषि-मुनि लोग यही करते आते हैं। जो दीन दुःखियों की सेवा करता है, बेसहारों को सहारा देता है, वही सबसे महान है। इससे बढ़कर पुण्य और कुछ भी नहीं है। दूसरों को तू पानी पिलाया कर, तुम्हें पुण्य मिलता है। दिल्ली के,ये जो स्कूटरवाला है, उससे हमें यह समझना चाहिए उसके दिखाए मार्ग हमें अपनाना चाहिए। पूरे मानव राशि के प्रति भाईचारा का संबन्ध ही महान है। तो मित्रों, हम भरोसा करेंगे कि आनेवाला कल एकता, भाईचारा और मानवता का रहेगा।
जय भारत।

सूचनाः
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण का अंश पढ़ें। वह पूजा के लिए कहीं भी न बैठकर लोगों के दिल में जगह बनाता है। दिल के रिश्ते जोड़ता है।

प्रश्न 4.
संकेतों के आधार पर लेखिका और अपनी बहन के बीच का वार्तालाप तैयार करें।

  • लेखिका का स्कूटर वाले से परिचय ।
  • स्कूटर वाले के सेवा मनोभाव से प्रभावी।
  • लेखिका की श्रद्धा-भावना।

उत्तरः
लेखिका : बहनजी, बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर।
बहन : मैं भी खुश हूँ, तुझे यहाँ देखकर। कहो, कैसे आना हुआ?
लेखिका : क्या कहूँ बहनजी। कई दिनों से सोच रहा हूँ। आज ही फुरसत मिली थी।
बहन : तुम्हारी यात्रा कैसी रही?
लेखिका : हाँ जी, बहुत अच्छी रही। एक विचित्र स्कूट्टरवाले से आज भेंट हुई।
बहन : विचित्र क्यों? ज़्यादा पैसा माँगा उनसे? ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो ज़्यादा पैसा माँगकर हमें तंग करते हैं।
लेखिका : नहीं, नहीं। यह जो है एकदम अलग है। वह बड़ा परोपकारी मालूम पड़ता है।
बहन : परोपकारी और स्कूट्टरवाले!
लेखिका : हाँ जी, सुनो तो। वह एक ऐसा स्कूट्टरवाला है जो अपनी यात्रियों को बीच बीच में पानी पिलाया करता है।
बहन : बाप रे! यह तो एकदम विचित्र निकला। दिल्ली की गरमी में वह ऐसा करता है।
लेखिका : वह अपनी गाड़ी में ही पानी रखता है और रास्ते में मिलनेवालों को पानी देता है। पानी के खतम होने पर वह खुद रास्ते से पानी भरता है और राहगिरों को पानी पिलाया करता है।
बहन : कितना अच्छा स्कूटरवाला है।
काश! अज के सभी लोग ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।

प्रश्न 5.
गर्मी की एक साँझ में स्कूटर वाला लेखिका के गेट के सामने आया। उसने लखिका से अपनी जीवन-गाथा बतायी।
संकेतों के आधार पर ‘वह भटका हुआ पीर’ पाठ के स्कूटर वाले का आत्मकथांश तैयार कीजिए।
* पितृविहीन बालक
* स्कूटर चलाकर माँ को संभालना
* माँ के उपदेश का पालन
* लोगों के दिल में जगह बनाना
उत्तरः
आत्मकथा
मेरा जीवन सफल है या नहीं यह मैं नहीं जानता पर मैं खुश हूँ इस जीवन से। मेरा बाप की मृत्यु मेरी छोटी उम्र में ही हुआ था। माँ कठिन परिश्रम करके मेरा देखपाल किया। छोटी उम्र में ही भूख और गरीबी की हालत समझ लिया। स्ट्रीट लइट के नीचे बैठकर पढ़ते थे। बड़े होने पर स्कूटर चलाना शुरू किया। माँ और मेरे लिए भूख मिटाने के लिए मैं काम करता था। साथ साथ पढ़ते थे और ग्राजुइट हो गया। रास्ते में प्यास के मारे तड़पते रहने लोगों को देखकर उन्हें पानी पिलाना शुरु किया। और काम मिला तो भी मैं यह स्कूटर चलाना और राहगीरों को पानी पिलाना पसंद करता हूँ।

एक मशक में पानी खरीदकर स्कूटर में रखता हूँ। रास्ते में जो भी प्यासा आये उन्हें पानी पिलाये घूमता हूँ। माँ कहते हैं पानी पिलाने से पुण्य मिलेगा। पैसे केलिए जीवन में दौड़नेवाले कई लोग होते हैं। मेरे पास पैसे नहीं बल्कि कई लोगों के पुण्य है। मैं बहुत खुश हूँ इस जीवन से क्योंकि मैं लोगों के दिल में जगह बनाता हूँ और वह मुझे प्यार से मशकवाला स्कूटर कहते हैं।

‘वह भटका हुआ पीर’ का अंश पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर लिखें।

जब घर के बड़े बुजुर्गों को कोई पानी नहीं पिलाता और पानी माँगने पर अँगारों जैसी जलती आँखें दिखाई जाती हों, तो यह स्कूटरवाला तो पीर जैसा लगेगा ही न । गर्मी की एक साँझ में वह मेरे गेट के सामने खड़ा होकर मुझसे पूछ रहा था, ‘पानी पिएँगी? अभी भरवा कर ला रहा हूँ।’ ‘हाँ-हाँ, क्यों नहीं।’ मैने उसे बरामदे में बिठाया और उससे कुशलक्षेम पूछने लगी। वह पितृविहीन बालक स्ट्रीट लाइट में बैठकर अखबार पढ़ता, स्कूटर चलाकर माँ और अपने लिए दो जून रोटी का जुगाड़ करता।”

प्रश्न 6.
‘वह भटका हुआ पीर’ संस्मरण किसकी रचना है?
उत्तरः
राज बुद्धिराजा

प्रश्न 7.
बड़े बुजुर्गों के पानी माँगने पर घर के लोग क्या करते हैं?
उत्तरः
बडे बुजुर्गों के पानी माँगने पर घर के लोग अंगारों जैसी जलती आँखों से उन्हें देखते हैं और पानी नहीं देते हैं।

प्रश्न 8.
स्कूटरवाले ने लेखिका से क्या पूछा?
उत्तरः
र स्कूटरवाले ने लेखिका से पूछा कि क्या वह पानी पिएगी?

प्रश्न 9.
पितृहीन बालक अपनी लोटी कैसी जुगाड़ता था?
उत्तरः
का पितृहीन बालक स्ट्रीट लाइट में बैठकर अखबार पढ़कर और स्कूटर चलाकर अपनी रोटी जुगाडता था।

प्रश्न 10.
खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
घर के बुजुर्गों को पानी पिलाना पुण्य माननेवाला है। एक दिन लेखिका के घर में आकर उसने बता दिया कि वह एक पितृहीन बालक है। स्ट्रीट लाइट में बैठकर वह अखबार पढ़ता था और स्कूटर चलाकर कमाता भी था।

प्रश्न 11.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
परिश्रम का महत्व

प्रश्न 12.
“मुझे तो पुण्य मिल ही गया। लाखों लोगों की दुआओं से मैं ग्रेजुएट हो गया। घर बैठे नौकरी चलकर आई, लेकिन मुझे पानी पिलाने में जो सुख मिलता है, वह नौकरी में कहाँ! अपने मन के बादशाह !!
वह भटका हुआ पीर के इस अंश के आधार पर स्कूटरवाले के चरित्र पर टिप्पणी करें।
उत्तरः
स्कूटरवाला परोपकार को पुण्य माननेवाला है। अपने माँ-बाप एवं बुजुर्गों के प्रति उसके दिल में सच्चा प्यार एवं आदर है। अपने माँ की बातों को वह बहुत अधिक मानता है। उसका विश्वास है माँ की बातें सुनने से ही उसे पुण्य मिल गया है और वह ग्रेजुएट भी हो गया है। वह अपने इच्छा के अनुसार जीना चाहता है। इसलिए ही नौकरी छोड़कर वह स्कूटर चलाना शुरु करता है।

प्रश्न 13.
“मुझे लगा कि वह आम आदमी न होकर एक भटका हुआ पीर है, जो आपा-धापी की दुनिया में खुशी बाँटता फिर रहा है।” – ‘वह भटका हुआ पीर’ के स्कूटरवाले के जैसे हमारे समाज में भी ऐसे बहुत से पीर हैं और हुए थे। उनमें से किसी के विवरण के साथ वर्तमान समाज में ऐसे सच्चे पीर की आवश्यकताओं पर निबंध तैयार करें।
उत्तरः
मानव की सेवा ही असल में ईश्वर की सेवा है। हमें भगवान को खोजने मंदिर-मस्जिदों में नहीं जाना है। सच्चे दिल से जब हम समाज की सेवा करेंगे हम ईश्वर से पास पहुँच जाएँगे।

‘पीर’ शब्द का अर्थ ही सन्यासी है। भौतिक सुखों को छोड़कर जो समाज की कल्याण के लिए उतरते हैं उन्हें ही पीर या सन्यासी कह सकते हैं। पीर बनने के लिए किसी वेष-भूषा की ज़रूरत नहीं है। सच्चे दिल चाहिए। मानव को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। समाज के पीड़ितों, गरीबों, मजदूरों की पीड़ा समझ लेना चाहिए। जब हम दूसरों की पीड़ा समझ सकेंगे तभी हम एक इचित मानव बन पाएँगे। हमारे समाज में ऐसे बहुत ही .. इंसान है जो अपने सुखों को त्यागकर दूसरों की भलाई के लिए उतरे हैं। ऐसे लोगों से प्रेरणा पाकर प्रत्येक विद्यार्थी को समाज की भलाई के लिए कर्म निरत रहना चाहिए। विद्यार्थी जीवन का लक्ष्य केवल स्कूली शिक्षा नहीं बल्कि समाज एवं अपने वातावरण से उत्पन्न अनुभवों से जानकारी प्राप्त करना भी है। अपने समाज की भलाई के लिए कर्मनिरत रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। विद्यार्थी लोगों का इसमें खास योगदान है। एक अच्छे समाज एवं मानवराशी के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पीर बनना ही चाहिए।

‘सौ वर्ष का एकांत’ गेब्रियल गार्सिया मार्वेज़ का विख्यात उपन्यास है। इस उपन्यास के छपते ही मार्वेज़ का नाम विश्व के महान उपन्यासकारों में शामिल हो गया। इसकी लाखों प्रतियाँ प्रकाशित हुईं। संसार भर के साहित्य प्रेमी पाठकों ने इसे पूरी रुचि से पढ़ा। इसके संसार की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद हुए। वे इतने अधिक प्रसिद्ध हो गए थे कि उनसे मिलने के लिए सालभर पहले समय लेना होता था। इस प्रसिद्धि के बाद भी वे हर दिन सुबह नौ बजे से दोपहर के तीन बजे तक लिखने का कार्य किया करते थे। उनकी यह दिनचर्या तीस-चालीस वर्षों तक चली। इतने कठिन परिश्रम से ही यह संभव हुआ कि उन्होंने एक के बाद दूसरा सुंदर उपन्यास लिखा। कई सुंदर कहानियाँ लिखीं।

प्रश्न 14.
मार्वेज़ का बहुचर्चित उपन्यास कौन सा है?
उत्तरः
सौ वर्ष का एकांत

प्रश्न 15.
मावेज़ के कठिन परिश्रम का क्या फायदा हुआ?
उत्तरः
अपने कठिन परिश्रम का फायदा यह हुआ कि उन्होंने एक के बाद दूसरा सुंदर उपन्यास लिखा।

प्रश्न 16.
‘सौ वर्ष का एकांत’ की क्या-क्या खूबियाँ थीं?
उत्तरः
इस उपन्यास के छपते ही मावेज़ का नाम विश्व के महान उपन्यासकारों में शामिल हो गया। इसकी लाखों प्रतियाँ प्रकाशित हुई। वे इतने प्रसिद्ध हो गए कि उनसे मिलने के लिए सालभर पहले समय लेना होता था।

प्रश्न 17.
उपर्युक्त खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
गब्रियेल गार्सिया मावेज़ का विख्यात उपन्यास ‘सौ वर्ष का एकांत’ के प्रकाशन से ही वह अत्यंत ख्यातिप्राप्त हो गया। इस प्रसिद्धि के बाद भी वे हर दिन कुछ समय अपना लेखन कार्य करते थे। तीस-चालीस वर्षा की इस दिनचर्या और कठिन परिश्रम के फलस्वरूप उन्होंने अनेक सुंदर उपन्यास और कहानियाँ लिखा।

प्रश्न 18.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
गाब्रियल गार्सिया मावेज़

प्रश्न 19.
‘युवा पीढ़ी पर मोबाइल फोण का प्रभाव’ विषय पर संकेतों की मदद से स्कूल पत्रिका में प्रकाशित करने योग्य एक लेख तैयार करें।
उत्तरः
प्र युवा पीढ़ी पर मोबाइल फोण का प्रभाव
विज्ञान का एक नूतन आविष्कार है मोबाइल फोण | आधुनिक बदलते युग में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। दुनिया का हर बदलाव उसी क्षण में ही विभिन्न जगहों में पहुँचाने में मोबाइल फोण का महत्वपूर्ण योगदान है। हर वैज्ञानिक आविष्कारों का गुण और दोष है। मोबाइल फोण भी इससे अलग नहीं है। आगे हम इसके लाभ और हानियों के बारे में चर्चा करेंगे।

सुविधाजनकः मोबाइल फोण अत्यंत सुविधाजनक है। इसके माध्यम से खबरों को ही नहीं हर बात दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर हम समय समय पर जान सकते हैं।

बहुआयामीः आज मोबाइल फोण केवल एक फोण न होकर एक बहुआयामी चीज़ बन गया है। मोबाइल फोण आज तो सबसे बड़ा मनोरंजन के माध्यम बन गया है।

ज्ञानार्जन का साधनः ज्ञानार्जन के लिए भी आज मोबाइल फोण अत्यंत उपयोगी है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र से संबंधित और दुनिया के हर परिवर्तन से संबंधित सभी प्रकार के खबरें इसके द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

अंतर्जाल का सदुपयोगः मोबाइल फोण के क्षेत्र में सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन है अंतर्जाल का उपयोग। इसके माध्यम से क्षण-क्षण में होनोवाले परिवर्तन दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर हम जान सकते हैं। अंतर्जाल का सदुपयोग से किसी को हानी नहीं पहूँचेगा।

खर्चीलाः विज्ञान के नए आविष्कारों के अनुरूप आज मोबाइल फोण खर्चीला भी बन गया है। इसलिए साधारण जनता के लिए यह अत्यंत हानिकारक भी बन गया है।

तंदुरुस्ती के लिए हानिहारकः मोबाइल फोण से उत्पन्न रेडियेशन कैन्सर जेसे भयानक बीमारियों का कारण बन गया है। इसलिए मोबाइल फोण के उपयोग में आदमी को खुद नियंत्रण रखना है।

अंतर्जाल का दुरुपयोगः अंतर्जाल विज्ञान का सबसे बड़ा देन है। लेकिन इसका दुरुपयोग अत्यंत खतरनाक भी बन गया है। इसलिए अंतर्जाल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
विज्ञान का सबसे श्रेष्ठ चमत्कारों में एक है मोबाइल फोण का आविष्कार । हमें इसका सदुपयोग करना चाहिए।

वह भटका हुआ पीर Profile

डॉ. राज बुद्धिराजा ने हिन्दी की लगभग सभी विधाओं में अपनी क्षमता दिखाई। उनका जन्म लाहोर में 1937 को हुआ था। उन्होने लगभग तीन सौ संस्मरण लिखे है। ‘सफर की यादें’, ‘साकूरा के देश में’, ‘दिल्ली अतीत के झरोखे से’, ‘हाशिए पर दिल्ली’ आदि अपके संस्मरणों के संग्रह है। जापान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वे सम्मानित है।
वह भटका हुआ पीर Profile 1
वह भटका हुआ पीर Profile 2

वह भटका हुआ पीर (संस्मरण) Summary in Malayalam

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Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 Chapter 1 कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता)

मेरी खोज

(Text Book Page No. 84-88)
प्रश्न 1.
कविता के निम्नलिखित वाक्यांश किससे संबंधित हैं? कुमुद फूल या लड़की से?
उत्तरः
1. ईश्वर का इष्ट नैवेद्य – कुमुद फूल
2. लंबे डंठलों के छोरों पर खिले – कुमुद फूल
3. मुरझाये फूल की डंठल-ज्यो – लड़की
4. दीन स्वर में प्रार्थना करती – लड़की

प्रश्न 2.
लटकते हुए लंबे डेठलों की तुलना किससे की गई हैं?
उत्तरः
मृत जल-साँप से किया गया हैं।

प्रश्न 3.
हाय! मुरझा रहे दो सुकोमल रूप’ – कौन-कौन-से हैं?
उत्तरः
कुमुद फूल और फूल बेचनेवाली लड़की – दोनों मुरझाया गया हैं।

अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 1.
कविता की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
श्री ओ.एन.वी. कुरुप मलयालम् के लोकप्रिय कवि हैं। भूमिक्कोरु चरमगीत उनके प्रसिद्ध कविता-संग्रह हैं।
‘कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी कविता में फूल बेचनेवाली एक लड़की की बेबसी का चित्रण है, मंदिर में आराधना के लिए आनेवाला भक्त कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी को देखता है और लड़की की बुरी हालत देखता है। वह लड़की की फूल का पैसा देता हैं फूल नहीं लेते हैं। उसे लगता है कि फूल और लड़की मुरझाया गया है। भक्त को लगता है कि भगवान को फूल देने से अच्छा है एक गरीब लड़की की सहायता करना।

आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। मानवता की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य हैं। सरल भाषा में गरीबों की हालत को सुधारने के कर्तव्य को कवि
व्यक्त किया है।

प्रश्न 2.
वर्तमान सामाजिक परिस्थिति में उपर्युक्त कविता की प्रासंगिकता पर चर्चा करके, टिप्पणी तैयार करें।
उत्तरः
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी’ श्री. ओ.एन.वी.कुरुप की प्रसिद्ध कविता हैं। वर्तमान सामाजिक जीवन के एक मार्मिक चित्र यहाँ पेश किया है। मंदिरों और मस्जितों में प्रार्थना के लिए कई लोग जाते हैं। कई गरीह लोग भी आजीविका के लिए ऐसी जगहों में आते हैं, भारत में गरीबों के संख्या कम नहीं है, लड़की होने के बाबजूद भी. पढने के लिए न जाकर फूल बेचने के लिए विवश लड़की का चित्रण यहाँ किया गया हैं। कविता में वर्णित व्यक्ति नैवेद्य फूल के दाम लड़की को देता है, यहाँ मनुष्यता प्रकट करने की आवश्यकता को दिखाया हैं, मानवता मनुष्य को अन्य जीवियों से अलगां करते हैं। दूसरों केलिए हमें कुछ न कुछ करना ही चाहिए। मानवता कम होते इस समाज में इसी प्रकार का विचार आवश्यक हैं।

Plus Two Hindi कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी (कविता) Important Questions and Answers

पुराना देवालय
उसके निकट है कुमुद-सरोवर
रास्ते में पूजा-द्रव्य
बेचनेवालों के कितने ही दल;

‘इधर इष्टदेव का
इष्ट नैवेद्य है कुमुद फूल
मार्गदर्शी ज्यों
यों कहकर किसी कोने में,
मृत जल-साँप ज्यों
लटके लंबे डंठलों के
छोरों पर खिले
श्वेत कुमुद फूल बेचनेवालियाँ,
‘मेरे हाथ से, मेरे हाथ से।’

प्रश्न 1.
यह कवितांश किस कविता’ का है?
(सपने का भी हक नहीं, कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की, आदमी का चेहरा)
उत्तरः
कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की।

प्रश्न 2.
कुमुद सरोवर कहाँ है? |
उत्तरः
प्र कुमुद सरोवर पुराना देवालय के निकट है।

प्रश्न 3.
इष्टदेव का इष्टनैवेद्य क्या है?
उत्तरः
प्रय इष्टदेव का इष्टनैवेद्य है कुमुद फूल ।

प्रश्न 4.
कवि ने लटके लंबे डंठलों की तुलना किससे की है?
उत्तरः
कवि ने लटके लंबे डंठलों की तुलना मृत जल-साँव से की है।

प्रश्न 5.
अनूदित कविताओं की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
ओ.एन.वी.कुरुप मलयालम् के लोकप्रिय कवि है। उनकी विख्यात कविता है “आंबलपूवु विलकुन्न पेणकुट्टी।” इस कविता का अनुवाद डॉ.एस.तंकमणी अम्मा द्वारा की गयी है जिसका नाम है कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की। इसमें कुमुद फूल बेचनेवाली एक लड़की की माध्यम से एक सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा की है।

पुराना देवालय के पास रास्ते में कुमुद फूल बेचनेवाली अनेक लड़कियाँ हैं। मंदिर में आनेवाले प्रत्येक लोगों के पास जाकर वे फूल बेचने की कोशिश कर रही हैं। अपनी गरीबी, बेबसी और भूख के कारण ही ये लोग ऐसा कर रही है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़कियों के माध्यम से कवि ने एक सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया है। आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि गरीबों की भूख मिटाने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।

“हे फूल, तू अन्न है इस छोटी बहन के लिए
इससे बढ़कर पुण्य भला क्या है!
तुझे चढ़ाकर भला अब
क्या पाऊँ मैं…..!’
खाली हाथ,
आगे बढ़ जाता हूँ मैं
‘मेरे हाथ से, मेरे हाथ से’
का दीन स्वर धीमा होता जाता है…..।

प्रश्न 6.
यह कैसा काव्य हैं?
(अनूदित काव्य, खंड काव्य, विलाप काव्य, महाकाव्य)
उत्तरः
अनूदित काव्य

प्रश्न 7.
‘तुझे चढ़ाकर भला आब
क्या पाऊँ मैं……!’ किसे चढ़ाकर?
उत्तरः
म कुमुद फूल को चढ़ाकर

प्रश्न 8.
‘हे फूल, तू अन्न है इस छोटी बहन के लिए…..’ कवि ऐसा क्यों कहता है?
उत्तरः
फूल के दाम के रूप में उसके साथ में जो सिक्का मिलता है, वही सिक्के से वह अन्न खरीदता है। इसलिए कवि ऐसा कहता है।

प्रश्न 9.
कवितांश की आस्वादन-टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
ओ.एन.वी.कुरुप मलयालम के लोकप्रिय कवि है। उनकी विख्यात कविता है “आंबलपूवु विलकुन्न पेणकुट्टी।” इस कविता का अनुवाद डॉ. एस.तंकमणी अम्मा द्वारा की गयी है जिसका नाम है कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की। इसमें कुमुद फूल बेचनेवाली एक लड़की के माध्यम से एक सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा की है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की के लिए यह फूल उसका अन्न है। फूल के दाम के रूप में जो पैसा उसे मिलता है, वही पैसा इकट्ठा करके वह अपने लिए अन्न खरीदती है। कवि को लगता है इस छोटी लड़की को अन्न के लिए पैसा देने से बढ़कर पुण्य और कुछ भी नहीं है। इसलिए मंदिर में फूल चढ़ाए बिना कवि वापस चला जाता है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लड़कियों के माध्यम से कवि ने एक सामाजिक सच्चाई को यहाँ दिखाया है। आज के समाज में प्रासंगिकता रखनेवाली कविता है यह। इस कविता के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि गरीबों की भूख मिटाने से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile

ओ. एन. वी कुरुप मलयालम के लोकप्रिय कवि है। उनका जन्म 1931 को केरल प्रांत के कोल्लम के चवरा नामक गाँव में हुआ। ‘ताहिक्कुन्न पानपात्रं, ‘माटुविन चट्टले’, ‘भूमिक्कु ओरु चरमगीत’ आदि उनके प्रसिद्ध कवितासंग्रह है। 2007 के ज्ञानपीठ पुरस्कार और 2011 के पद्मविभूषण पुरस्कार से वे सम्मानित है।
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 1
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 2

अनुवादिका – डॉ. एस. तंकमणि अम्मा

हिन्दी मौलिक लेखन तथा अनुवाद के क्षेत्र में डॉ. एस. तंकमणि अम्मा की अलग पहचान है। उनका जन्म 1950 को तिरुवनंतपुरम में हुआ था। ‘गोत्रयान’, ‘स्वयंवर’, ‘लीला’, ‘एक धरती एक आस्मान एक सूरज’ आदि उनकी अनूदित काव्य रचनाएँ हैं। राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार, सौहार्द पुरस्कार, द्विवागीश पुरस्कार आदि से वे सम्मानित है।
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 3
कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Profile 4

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 1

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी शब्दार्थ

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 2

कुमुद फूल बेचनेवाली लडकी Summary in Malayalam 3

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 बुझा दीपक जला दो

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 बुझा दीपक जला दो Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 बुझा दीपक जला दो

बुझा दीपक जला दो इकाई परिचय :

चोथी इकाई है ‘बुझा दीपक जला दो’ दूसरों का उपकार करते हुए हमें पूरा सुख तक मिलता है जब हमारा कर्म स्वार्थता से परे हो। हम सब दूसरों का उपकार करना तो चाहते हैं, पर साहस के अभाव में हम कुछ नहीं कर पाते। मलयालम के विख्यात कवि ओ. एन.वी. कुरुप की कविता का हिंदी अनुवाद ‘कुमुद फूल बेचनेवाली लड़की’ इकाई का पहला पाठ है। इसमें भगवान पर फूल चढ़ाने का पैसा फूल बेचनेवाली लड़की की भूख मिटाने को देनेवाला भक्त मानवता का अनोखा रूप प्रस्तुत करता है। अपनी गाड़ी में दिल्ली के रास्ते पर प्यासे-तड़पे लोगों को अपने ही खर्च से पानी पिलानेवाला गाडीचालक दूसरे पाठ में हमें आश्चर्य में डाल देता है। इकाई का तीसरा पाठ ‘आदमी का चेहरा’ नामक कविता है। अपने सामान उठानेवाले कुली को लंबे अरसे के बाद इनसान के रूप में पहचाननेवाला व्यक्ति एक अनमोल संदेश दे रहा है। अंतिम पाठ एक व्यंग्य है जो जीवन की अस्थिरता की याद दिलाता है। संक्षेप में इकाई परोपकार और मानवता का संदेश देती है।

बुझा दीपक जला दो इकाई परिचय : (Malayalam)

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 बुझा दीपक जला दो 1

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 4 बुझा दीपक जला दो 2

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा)

ज़मीन एक स्लेट का नाम है (Text Book Page No. 57-64)

प्रश्न 1.
चित्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तरः
ए.पि.जे.अब्दुलकलाम और उसके आत्मकथा का चित्र है।

प्रश्न 2.
अग्नि की उड़ान किस विधा की रचना है?
उत्तर:
आत्मकथा । (auto biography)
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा) Page 57 Q2

मेरी खोज

प्रश्न 1.
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा) मेरी खोज Q1
उत्तरः
कल राजिस्ट्रि के बाद ज़मीन अपनी कहाँ रह जाएगी, मैंने झुककर मिट्टी को छुआ। मगर ज़मीन की विदाई आज ही हो रही थी।

प्रश्न 2.
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा) मेरी खोज Q2
मैं ज़मीन नहीं बेचता
……….
मैं बेचता हूँ।
ज़मीन की तुलना हृदय से क्यों की गई है?
उत्तरः
जिसप्रकार एक व्यक्ति के जीवन केलिए हृदय जितना आवश्यक है उसी प्रकार लेखक और पिताजी केलिए ज़मीन उतना ही आवश्यक था। इसलिए ज़मीन की तुलना हृदय से की गई है।

प्रश्न 3.
पाठभाग की कविता केलिए शीर्षक लिखें।
उत्तरः
ज़मीन/हृदय/जीवन

अनुवर्ती कार्य (P.62)

प्रश्न 1.
डायरी लिखें।
(आपको सहायक संकेत के साथ एक डायरी लिखने की आवश्यकता है)
उत्तरः

डायरी

सोमवार
07.07.15

आज मेरी जीवन में एक विशेष दिन है, मेरी शादी की तैयारियाँ हो रही है। पिताजी और भाई शादी के खर्च केलिए ज़मीन बेच रहे हैं। मुझे मालूम है कि वह ज़मीन दोनों के जीवन से कितना संबध रखता हैं। फिर भी वे मेरी शादी केलिए ज़मीन बेच रहा है। कुछ ही दिनों में मेरी शादी हो जाएगी और मैं यह घर छोडकर दूसरा घर जाएगी। मेरे परिवारवालों ने मेरेलिए कितना कष्ट सहन करते हैं। पति के घर जाकर मुझे खुशी मिलेगी या नहीं – पता भी नहीं, सबकुछ देखकर मुझे थोडा सा डर हो रहा है। ईश्वर मेरी रक्षा करें।

प्रश्न 2.
आलेख लिखें।
उत्तरः
“शादी के नाम पर होनेवाले आडंबर और दुर्व्यय” – विषय पर मैं आज एक आलेख प्रस्तुत कर रहा हूँ। आज हमारे समाज में शादी एक ऐसा मौका है जिसमें आडंबर और दुर्व्यय हो, शादी एक पवित्र बंधन है। वहाँ प्रेम को प्रमुखता है। यह दो व्यक्तियों के ही नहीं, दो परिवार – दो समाज – के बीच के रिश्ता है। आज की शादी को देखिए साधारण लोग भी कर्ज़ लेकर शादी के अवसर पर इतना खर्च करते हैं कि करना ही शादी है। खर्च बढाना आज एक आदत बन गया है। अमीर लोगों के नकल करना साधारण लोग भी पसंद करते हैं।

दहेज प्रथा भी आज बढ़ते जा रहा है। दहेज देना और स्वीकार करना एक आदत हो गया। कानूनन अपराध होने पर भी दहेजप्रथा समाज में सर्वत्र देख सकता है। हमें सोचना चाहिए कि क्या हम सही दिशा पर चल रहे हैं। आनावश्यक खर्च और आडंबर हमारे नाश की ओर हमें ले जाएँगे। सोच-विचार के साथ हमें इस विपत्ति के विरुद्ध आवाज़ उड़ाना चाहिए। छात्र जीवन में ही इसके विरुद्ध हमें जानकारी हाजिल करना है।

प्रश्न 3.
टिप्पणी।
उत्तरः
एकांत श्रीवास्तव की आत्मकथा “ज़मीन एक स्लेट का नाम है” में लेखक एक पिता के विवशता को दिखाया है। बेटी की शादी के खर्च केलिए वह अपना ज़मीन बेच रहा है। ज़मीन से उसका संबंध जितना गहरा था बेटी भी उतनी प्यारी थी। ज़मीन उसको अपना हृदय के समान है। फिर भी बेटी और परिवार के लिए वह ज़मीन बेचने केलिए तैयार हो जाता है।

एक अच्छे पिता का चित्रण यहाँ देख सकता है। आज प्रेम और रिश्ते केवल दिखावा हो रहा है। लेकिन एक ऐसा परिवार के चित्रण से आज भी प्रेम की गहराई को यहाँ दिखाया है।

Plus Two Hindi ज़मीन एक स्लेट का नाम है Important Questions and Answers

सूचनाः
‘ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ आत्मकथा का अंश पढ़ें और 5 से 9 तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।
‘हमारे पास समय न था। शादी की तैयारियां शुरू करनी थीं। भविष्य निधि से भी कुछ हज़ार रुपए पिताजी निकाल लाए थे। दीदी बहुत भावुक हो गई थी और बात-बात में रो पड़ती थी। मंडप लगा दिया गया। शादी के कार्ड छप गए। मेहमान आने लगे। हल्दी-तेल चढ़ाना शुरू हो गया। हम सब व्यवथा से संतुष्ट थे पर मन जैसे अबी से खाली-खाली और उदास था। जो उपस्थित था उसकी अनुपस्थिति अभी से दिल में घर कर गई थी।

प्रश्न 1.
“ज़मीन एक स्लेट का नाम है” किसकी रचना है?
(हिमांशु जाशी, मैथिली शरण गुप्त, एकांत श्रीवास्तव, अमृता प्रीतम)
उत्तरः
एकात श्री वास्तव

प्रश्न 2.
पिताजी किससे रुपए निकाल लाए थे।
उत्तरः
पिताजी भविष्य निधि ने कुछ हज़ार रुपए निकाल लाए थे।

प्रश्न 3.
शादी की क्या-क्या तैयारियाँ की गईं?
उत्तरः
रुपए का बंदोबस्त हो गयी थी। मंडप लग दिया गया। शादी के कार्ड छप गए। मेहमान आने लगे, हल्दी-तेल चढ़ाना शुरू हो गए।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
लेखक की दीदी की शादी की तैय्यारियाँ हो रहे थे। लेकिन एक चीज़ की अनुपरस्थिति की चिंता सभी के मन को उदास कर रहे थे।

प्रश्न 5.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक दें।
उत्तरः
दीदी की शादी।

आत्मकथा का अंश पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर लिखें।

उनकी पीड़ा मैं समझ रहा था। मुझे खुद बहुत अच्छा नहीं लग रहा था। खेतों में पहुँचकर वे सूर्यास्त तक उन खेतों में टहलते रहे जो बिकनेवाले थे। वे खामोश थे। कुछ बोल नहीं रहे थे। मगर उनके भीतर का हाहाकार मेरी समझ में आ रहा था। मैंने झुककर मिट्टी को छुआ – चुपचाप – पिताजी के देखे बगैर। क्या जमीन एक स्लेट का नाम है जिसपर हमारे बचपन की कविता लिखी है ? या शायद एक फूल का नाम जिसके रंग में हमारे रक्त की चमक है?

प्रश्न 1.
‘ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ किसकी रचना है?
उत्तरः
एकांत श्रीवास्तव
(मैथिली शरण गुप्त,एकांत श्रीवास्तव,हिमांशु जोशी,जे बाबू)

प्रश्न 2.
पिताजी ने रजिस्ट्री के एक दिन पहले ही खेत में चलने को क्यों कहा?
उत्तरः
रजिस्ट्री के बाद खेत परायों का हो जाएगा। दूसरों की खेत देखना उसे पसंद नहीं है।

प्रश्न 3.
खेत में पहुँचकर पिताजी ने क्या क्या किया?
उत्तरः
सा सुबह से शाम तक वह खेतों में टहलते रहा। किसी से वह कुछ कह नहीं पा रहा था।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त खंड का संक्षेपण करें।
उत्तरः
अपना – पराया
लेखक और पिता खेत पहूँचे। पिता को वहाँ खामोश टहलते देखकर लेखक में मन में भी मिट्टी के प्रति लगाव हो गया। उसके मन में यह शंका उत्पन्न हो गया कि असल में क्या है? यह खेत एक स्लेट ही है?

प्रश्न 5.
संक्षेपण के लिए उचित शीर्षक दें।
उत्तरः
मिट्टी और मानव।

सूचनाः
‘ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ आत्मकथा का यह वाक्य पढ़ें।
बेटी के विदा होने में अभी दो-चार दिन वक्त था। मगर ज़मीन की विदाई आज ही हो रही थी।

प्रश्न 1.
उपर्युक्त वाक्य के आधार पर पिताजी के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
“ज़मीन एक स्लेट का नाम है” पाठभाग का पिताजी आज के साधारण जनता का प्रतीक है। बैटी एवं अपने ज़मीन से उनका गहरा संबंध है। उसका बचपन और यौवनकाल ज़मीन से जुड़ा है। परिवार और ज़मीन दोनों के प्रति उनका लगाव आज के पीढ़ी को समझना चाहिए।

सूचना:
‘ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ आत्मकथा का अंश पढ़ें।
कल रजिस्ट्री के बाद वह ज़मीन अपनी कहाँ रह जाएगी। फिर दूसरों की ज़मीन में क्या जाना ।

प्रश्न 1.
इस कथन के आधार पर लेखक के पिताजी के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
लेखक के पिताजी एक साधारण व्यक्ति है जो अपने ज़मीन और बेटी को प्यार करता है। वह एक अच्छा पिता है जो बेटी केलिए अपना ज़मीन बेचते हैं। वह एक अच्छा किसान है जो धरती को केवल पैसा नहीं मानता है। उसे सहानुभूति हैं। वह प्रकृति को मानते है। अपने यादों को मन में जमाते है। एक सकारात्मक पात्र है पिताजी।

प्रश्न 2.
“सामान लाना इसलिए ज़रूरी था कि अगले वर्ष पुनः साक्षात्कार में मैं चुन ही लिया जाऊँ – इसकी गारंटी नहीं थी।” ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ पाठ का यह वाक्य वास्तव में एक बेकार युवक की बेचैनी को व्यक्त करता है। नौजवानों की बेकारी के कारण और उसे दूर करने के मार्गों पर अपना मंत व्यक्त करते हुए निबंध लिखें।
उत्तरः
बेकारी – एक समस्या
भारत एक प्रगतिशील राष्ट्र है। भारत की प्रगति में हरेक भारतीय का अलग पहचान और परिश्रम है। भारत के नौजवान अपनी मातृभूमि की प्रगति के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। फिर भी नौजवानों के बीच बेकारी की समस्या खूब मात्रा में बढ़ रही हैं। इसके बारे में हम। यहाँ चर्चा करेंगे।

बढ़ती आबादीः बेकारी का मूल कारण भारत की बढ़ती आबादी ही है। आबादी के बढ़ने के कारण पढ़े-लिखे नौजवानों को भी काम-धंधे का अवसर नष्ट हो रहे हैं। बढ़ती आबादी के अनुकूल यहाँ नौकरी का अवसर नहीं है।

सही मार्गदर्शन अभावः जितना ही यहाँ काम-धंधे का अवसर है इनसे आज के नौजवान अपरिचित भी है। स्कूली शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न नौकरी के बारे में भी लोगों को परिचित करवाना है। ऐसा करने से एक हद तक बेकारी की समस्य दूर कर सकते हैं।

मशीनीकरण का प्रचारः आज हर कहीं मशीनीकरण हो रहा है। दैनिक जीवन में छोटे-छोटे क्षेत्रों से लेकर बड़े बड़े दफ्तरों तक हर कहीं आदमी को छोड़कर मशीन काम कर रहा है। बेकारी बढ़ाने में यह भी एक कारण बन गया है।

सभी कामों के महत्व की पहचानः आज पढ़े-लिखे लोग केवल दफ्तरी कामकाज ही पसंद करते हैं। छोटे छोटे काम करने के लिए कोई भी तैयार नहीं हैं। इसलिए नौजवानों को यह भी समझाना चाहिए कि सभी कामकाज का अपना महत्व है।

कुटीर उद्योगों का प्रचारः कुटीर उद्योगों के प्रचार के साथ | साथ उसके महत्व से भी सभी को परिचित करवाना है।

तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षणः तकनीकी शिक्षा का भी प्रचार सभी जगहों में होना चाहिए। इसके साथ साथ तकनीकी प्रशिक्षण भी होना चाहिए। आज सब कहीं तकनीकी धंधों का प्रचार हो रहा है। लेकिन बहुत सारे नौजवान इससे अनभिज्ञ है। इसलिए तकनीकी शिक्षा का उचित प्रचार एवं प्रशिक्षण से भी बेकारी दूर कर सकते हैं।

रुचि के अनुरूप शिक्षाः आज ज्ञान-विज्ञान का क्षेत्र बहुत बढ़ गया है। छोटी आयु में ही प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचि के अनुसार शिक्षा मिलेगा तो भी बेकारी को एक हद तक रोक सकते हैं। मुख्य कारण है बढ़ती आबादी। भारत क बढ़ती आबादी के अनुकूल यहाँ कामकाज का अवसर नहीं हैं। इसलिए ज़रूर ही आबादी का बढ़ाव रोकना चाहिए।

बेकारी के कुछ कारण और उसे दूर कराने के कुछ उपायों के बारे में यहाँ चर्चा हुई है। अगर हम सब मिलकर कोशिश करेंगे तो ज़रूर ही बेकारी की समस्या को एक हद तक दूर कर सकते हैं।

ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ पाठ का यह अंश पढ़ें।
“शादी की तैयारियों शुरू करनी थीं। भविष्य निधि से भी कुछ रुपए पिताजी निकाल लाए थे।”

प्रश्न 1.
भविष्यनिधि से पिताजी को क्यों रुपया लेना पड़ा?
उत्तरः
शादी की तैयारियां शुरू करने के लिए भविष्य निधि से कुछ रुपए निकाल लिए।

प्रश्न 2.
शादी के आड़बर के लिए किया जानेवाला खर्च आज एक सामाजिक दुर्घटना बन गई है। इस विषय पर संगोष्ठी में प्रस्तुत करने केलिए एक आलेख तैयार करें।
उत्तरः
शादी और अडंबर – एक सामाजिक समस्या
शादी एक पवित्र बंधन है। हर व्यक्ति के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और सुप्रधान मोड़ है शादी। हर माँ-बाप का सपना है अपने बेटे या बेटी की शादी। लेकिन आज शादी के नाम पर जो खर्चा हो रहा हैं वह समाज में अपनी बड़प्पन दिखाने का अवसर मानते हैं कुछ लोग। यह अत्यंत बुरी बात है। ज़रूर इस दुर्व्यय पर रोक डालना चाहिए। आगे हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

दुर्व्यय की आदतः समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने आपको बड़े मानते हैं। उन लोगों का यह गलत विचार है कि शादी अत्यंत धूम-धाम से होनी चाहिए। शादी के नाम पर जितना खर्च करेगा उतना ही इनका इज्ज़त बढ़ेगा। लेकिन यह गलत है।

दिखावे के नाम आडंबरः कुछ लोग अपने बड़प्पन दिखाने केलिए आडंबर के नाम पर दुर्व्यय करते हैं। इन लोगों का नकल करके दिखावा करनेवाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। यह अत्यंत बुरी बात है।

बढ़ती दहेज प्रथाः समाज में ऐसे भी लोग हैं जो अपनी ईमान दहेज और दिखावे के आधार पर नापते हैं। ऐसे लोग दहेज के नाम पर कुछ भी देने को तैयार होते हैं। समाज में इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

रिश्ते का आधार प्रेमः रिश्ते का आधार दहेज या बाह्य आडंबर न होकर प्रेम होना चाहिए। प्रेम की पवित्रता सभी को पहचानना है। लोगों को यह समझना चाहिए कि सच्चे रिश्ते प्रेम के आधार पर ही पनपते हैं, न दहेज या दिखावे के आधार पर।

आज के समाज में शादी के नाम पर होनेवाला दुर्व्यय बहुत ही बढ़ गया है। अपने बड़प्पन दिखाने के लिए लोग कर्ज लेकर भी शादी के लिए खर्च करते हैं। फिर वे लोग यह कर्ज चुकाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी बरबाद कर डालते हैं। इन्हें जीवन में किसी भी प्रकार के सुकून या आराम नहीं मिलते हैं। ज़रूर ही शादी के नाम पर होनेवाला दुर्व्यय रोकना ही चाहिए।

प्रश्न 3.
‘ज़मीन एक स्लेट का नाम है’ पाठ के पिता दोनों बिदाइयों से दुःखी है। ज़मीन की रजिस्ट्री के दिन वे अपनी डायरी लिखते हैं। वह डायरी कल्पना करके लिखें।
उत्तरः
Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 Chapter 1 ज़मीन एक स्लेट का नाम है। (आत्मकथा) Q3

लेकिन क्या करूँ, दोनों मुझसे
बिदा लेने की तैयारी में है…..
बेटी ससुराल जाएगी और मेरा ज़मीन पराया हो जाएगा!
जिसके लिए मैं ने एक-एक पैसा इकट्ठा कर रखा था, सब व्यर्थ हो गया।
जिंदगी ………
ज़िंदगी, कुछ ऐसा ही है।

प्रश्न 4.
“मैं ज़मीन नहीं बेचता बेचता हूँ हृदय”
बेटी की शादी के खर्च के लिए अपने पसीने और खून से भीगी ज़मीन बेचने केलिए पिता विवश हो जाते हैं। वे यह विवशता अपने मित्र से बाँट रहे हैं। दोनों के बीच का वार्तालाप तैयार करें।
उत्तरः
मित्र : नमस्ते, श्रीवास्तवजी।
पिता : नमस्ते, नमस्ते। आइए बैठिए।
मित्र : सुना है मित्र, आपके बेटी की शादी बड़ी धूम-धाम से करवा रहे हैं। बधाई हो।
पिता : मित्र, आप यह क्या कह रहे हैं? अरे, शादी तो करवानी ही है। घर के सभी लोगों ने मिलकर तय किया है, बेटी की शादी बड़ी धूम धाम से करवाने की।
मित्र : अच्छा | यह तो बिलकुल सही है। अब पूरे गाँव में आप ही के बारे में चर्चा है।
पिता : लेकिन मुझे तो यह चर्चा पसंद नहीं है। शादी के नाम पर जो दुर्व्यय हो रहा हैं, ज़रूर ही वह रोकना है।
मित्र : ऐसा क्यों कह रहे हो मित्र?
पिता : सुनो, जी । आप यहाँ जो आड़बर देख रहे हैं, सब के सब दिखावा है। मेरे पास जो कुछ था, सब कुछ मैं ने बेच डाला है, यह दिखावे के लिए।
मित्र : श्रीवास्तवजी, छोड़िए ये सब । आप इतना उदास क्यों हो रहे हैं?
पिता : मित्र, पता है आपको, आज यहाँ दो बिदाइयाँ हो रही हैं। एक है ज़मीन की और दूसरी, बेटी की। दोनों मेरेलिए अत्यंत प्रिय हैं। लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना भी पड़ता है न?
मित्र : आप ने क्या खो दिया है?
पिता : अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करवाने के लिए मैं ने अपना पूरा ज़मीन बेच डाला है। अब मेरे पास कुछ भी नहीं रहा। बेटी भी नहीं और ज़मीन भी नहीं।
मित्र : खैर, छोडिए जी। यह तो आनेवाली पीढ़ी के लिए एक सबक भी है।

प्रश्न 5.
दीदी की शादी केलिए पिता को ज़मीन बेचना पड़ता है। लेखक इससे दुखी है और वह अपनी शादी बिना दहेज और कम खर्च में करना चाहता है। अपना यह विचार व्यक्त करते हुए वह अपने मित्र को एक पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
उत्तरः

बिलासपुर,
30.05.1972

प्रिय मित्र रामगोपाल,
भगवान की कृपा से हम यहाँ खुश हैं और मेरा विश्वास है कि उनकी कृपादृष्टि आप लोगों पर भी खूब छा गई हैं। आपको एक पत्र लिखने के बारे में कई दिनों से मैं सोच रहा हूँ। एक खास बात लिखने के लिए ही मैं यह पत्र लिख रहा हूँ।

पिछले महीने बहिन सोनम की शादी हुई थी। बड़ी धूमधाम से हमने शादी करवाई। सब लोग खुश थे। मगर मेरे पिताजी की आँसू अब भी आँखों के आगे छा गयी है। दहेज और शादी की खर्च के लिए वे अपनी सारी ज़मीन बेचने को विवश हो गए। शादी के नाम पर होनेवाला दुर्व्यय और दहेज को ज़रूर ही रोकना है। इसलिए मित्र, मैं ने एक ऐसा फैसला किया है कि मैं अपनी शादी बिना दहेज कर लूँगा। रिश्ते का आधार धन नहीं पवित्र प्रेम होना चाहिए। हमारे सभी मित्रों से भी मेरा यह अनुरोध है कि हम सबको मिलकर यह सामाजिक कलंक दूर करना है।

विस्तार से मैं फोन पर बात करूँगा। अब मेरे दफ्तर – जाने का वक्त हो गया है। माँ जी से मेरा प्यार और प्रणाम कहना। इतना लिखकर मैं यह खत यहाँ समाप्त करता हूँ।
धन्यवाद,

तुम्हारा मित्र,
एकांत श्रीवास्तव

प्रश्न 6.
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है। विषय है ‘बदलती जीवन-शैली स्वास्थ्य के लिए खतरा।’ संगोष्ठी में प्रस्तुत करने के लिए एक आलेख तैयार करें।
उत्तरः
‘बदलती जीवन-शैली स्वास्थ्य के लिए खतरा मानव जीवन में स्वास्थ्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन रहता है। लेकिन आधुनिक युग में मनुष्य ऐसा बदल गया है कि उन्हें अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलत रहा है।

भोजन शैली में बदलावः मनुष्य के भोजन-शैली में जो बदलाव आ गया है यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक है। मनुष्य को अपने परिस्थिति के अनुकूल भोजन चुनना चाहिएं।

फास्ट फुड़ के प्रति मोहः फास्ट फुड़ के प्रति जो मोह है ज़रूर ही उसे छोड़ना चाहिए। कँन्सर जैसे बीमारियाँ फास्ट फुड़ के बढ़ती प्रभाव का बुरा असर है।

शाकाहारी भोजन का गुणः शाकाहारी भोजन का महत्व, आधुनिक पीढ़ी को समझाना बहुत ही ज़रूरी एवं उपयोगी है। असल में मनुष्य शाकाहारी है। जब तक हम शाकाहारी भोजन को पूर्ण रूप से न अपनाएँगे तब तक हमारा तन और मन अस्वस्थ ही रहेगा।

प्रकृति की ओर लंगावः मनुष्य को अपनी प्रकृति एवं परंपरा को पहचानना है। अपनी प्रकृति के अनुकूल उन्हें जीवन बिताना है। प्रकृति के प्रति उन्हें लगाव होनी चाहिए।

कई प्रकार की बीमारियाः आज के बदलते युग में मनुष्य कई प्रकार की बीमारियों से पीड़ित हैं। इसका मूल कारण उनका जीवन-शैली और खाने की तरीके में आए बदलाव है। अपने शरीर के अनुकूल हम जीवन बिताएँगे तो ज़रूर ही हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

जागरण कार्यक्रमः बिगडते स्वास्थ्य और जीवन शैली के बारे में लोगों को जागृत करना है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को कर्मनिरत रहना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों में विद्यार्थियों का भी बड़ा योगदान है। प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम अपने परिवारवालों को ही जागृत करना है और समझाना है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Profile

एकांत श्रीवास्तव हिंदी के जाने माने लेखक हैं। छत्तीसगढ़ के छुटा गाँव में सन् 1964 को उनका जन्म हुआ था। उनके तीन कविता-संग्रह निकले हैं। ‘मेरे दिन मेरे वर्ष’ उनकी आत्मरचना है। वे केदार सम्मान से सम्मानित हैं।
ज़मीन एक स्लेट का नाम है Profile 1

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Profile 2

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 1

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 2

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 3

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 4

एक नज़र

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 5

ज़मीन एक स्लेट का नाम है Glossary

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ज़मीन एक स्लेट का नाम है Summary in Malayalam 8

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Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 मान-सम्मान मिले नारी को

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 मान-सम्मान मिले नारी को Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 3 मान-सम्मान मिले नारी को

मान-सम्मान मिले नारी को इकाई परिचय :

तीसरी इकाई है ‘मान सम्मान मिले नारी को’। इसमें एक आत्मकथांश, हिंदीतर प्रदेश की कविता, कहानी एवं हाइकू कविता है। बिदाई किसी भी हालत में दर्दनाक है, चाहो वह मिट्टी की हो या कन्या की। एकांत श्रीवास्तव का आत्मकथांश संबंधों की गहराई को सच्चे आँकनेवाला आइना बन गया है। अच्छे सपने कौन नहीं चाहते। सपने में हम अपने अभावों की पूर्ति की तसल्ली पाते हैं।

हिंदीतर भाषी कवि डॉ बाबू ने वाणी दी है ऐसी एक औरत की पीड़ा को जिसका सपना भी दर्द भरा है। इकाई का तीसरा पाठ अमृता प्रीतम की कहानी है। कहानी में नारीत्व की रक्षा के लिए जिंदगी भर तड़पती रहनेवाली एक ग्रामीण नारी के संघर्षों का चित्रण किया है। यह कहानी नारी समाज के लिए प्रेरणादायक है। इकाई का अंतिम पाठ जापानी कविता शैली हाइकू में रचित छोटी छोटी कविताओं का है। कुल मिलाकर यह इकाई नारी समस्या को संबोधित करती है।

मान-सम्मान मिले नारी को : (Malayalam)

मान-सम्मान मिले नारी को Summary in Malayalam 1

मान-सम्मान मिले नारी को Summary in Malayalam 2

Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 4 मंजिल की ओर (पारिभाषिक शब्दावली)

Kerala State Board New Syllabus Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 4 मंजिल की ओर Text Book Questions and Answers, Summary, Notes.

Kerala Plus Two Hindi Textbook Answers Unit 2 Chapter 4 मंजिल की ओर (पारिभाषिक शब्दावली)

मंजिल की ओर अनुवर्ती कार्य:

प्रश्न 1.
श्रीवास्तव के नाम वीणा का खत।
उत्तरः

कोल्लम,
15.06.2015

आदरणीय श्रीवास्तव जी,

सादर प्रणाम।
आज मेरे जीवन का अच्छे दिनों में एक है। मुझे आज रिजर्व बैंक की हैदराबाद शाखा में राजभाषा अधिकारी के पद पर नियुक्ति पत्र मिली।

इस सुनहरे दिन में मैं अपनी सभी गुरुजनों के आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे हिंदी पढाया है। आपसे भी मैं आभारी हूँ। मैं आपका आशीर्वाद चाहड़ी हूँ।

सधन्यवाद,
आपका प्रिय छात्र
(हस्ताक्षर)
वीणा

प्रश्न 2.
सही मिलान करें।
Geography – ___________
Energy – ___________
Virus – ___________
Equation – ___________
Certificate – ___________
Humanities – ___________
उत्तरः
Geography – भूगोल
Energy – ऊर्जा
Virus – विषाणु
Equation – समीकरण
Certificate – प्रमाण पत्र
Humanities – मानविकी
പാഠപുസ്തകത്തിൽ കൊടുത്തിട്ടുള്ള സാങ്കേതിക പദങ്ങളും അർത്ഥങ്ങളും പഠിക്കുക.

Plus Two Hindi मंजिल की ओर Questions and Answers

प्रश्न 1.
सूचनाः कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
Advance – ___________
Percentage – ___________
Geography – ___________
Bacteria – ___________
Humanities – ___________
Energy – ___________
Commerce – ___________
Pattern – ___________
उत्तरः
Advance – पेशगी
Percentage – प्रतिशत
Geography – भूगोल
Bacteria – जीवाणु
Humanities – मानविकी
Energy – ऊर्जा
Commerce – वाणिज्य
Pattem – प्रतिमान

प्रश्न 2.
सूचनाः सही मिलान करें।
Algebra – ___________
Atom – ___________
Commerce – ___________
Physics – ___________
Gravitation – ___________
Bio-chemistry – ___________
Sociology – ___________
Trade Union – ___________
उत्तरः
Algebra – बीज गणित
Atom – परमाणु
Commerce – वाणिज्य
Physics – भौतिकी
Gravitation – गुरुत्वाकर्षण
Bio-chemistry – जैव-रसायन
Sociology – समाज-विज्ञान
Trade Union – श्रमिक-संघ

प्रश्न 3
सूचना : सही मिलान करें।
Copyright – ___________
Atom – ___________
Zoology – ___________
Commerce – ___________
Sociology – ___________
Radiation – ___________
Constitution – ___________
Typist – ___________
(समाज विज्ञान, विकिरण, सर्वाधिकार, संविधान, टंकक, वाणिज्य, जंतु विज्ञान, परमाणु, गणतंत्र )
उत्तरः
Copyright – सर्वाधिकार
Atom – परमाणु
Zoology – जंतु विज्ञान
Commerce – वाणिज्य
Sociology – समाज विज्ञान
Radiation – विकिरण
Constitution – संविधान
Typist – टंकक

प्रश्न 4.
सूचनाः कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
Accountancy – रक्तचाप
Atmosphere – वाणिज्य
Blood pressure – सर्वाधिकार
Commerce – वायुमंडल
Ecology – टीकाकरण
Copyright – पारिस्थितिकी
Vaccination – विषाणु
Virus – लेखाशास्त्र
उत्तरः
Accountancy – लेखाशास्त्र
Atmosphere – वायुमंडल
Blood Pressure – रक्तचाप
Commerce – वाणिज्य
Ecology – पारिस्थितिकी
Copyright – सर्वाधिकार
Vaccination – टीकाकरण
Virus – विषाणु

प्रश्न 5.
सूचनाः कोष्ठक से सही हिंदी शब्द चुनकर मिलान करें।
Affidavit – प्रमाण पत्र
Biodiversity – विकिरण
Certificate – शपथ पत्र
Discount – विषम संख्या
Geography – जैव-विविधता
Odd number – बट्टा
Bacteria – भूगोल
Radiation – जीवाणु
उत्तरः
Affidavit – शपथ पत्र
Biodiversity – जैव-विविधता
Certificate – प्रमाण पत्र
Discount – बट्टा
Geography – भूगोल
Odd number – विषम संख्या
Bacteria – जीवाणु
Radiation – विकिरण

प्रश्न 6.
सूचनाः सही मिलान करें।
1. Commerce – परमाणु
2. Atom – श्रमिक-संघ
3. Algebra – समाज-विज्ञान
4. Bio-Chemistry – भौतिकी
5. Trade Union – गुरुत्वाकर्षण
6. Physics – जैव रसायन
7. Sociology – बीज गणित
8. Gravitation – वाणिज्य
उत्तरः
Commerce – वाणिज्य
Atom – परमाणु
Algebra – बीज गणित
Bio-Chemistry – जैव रसायन
Trade Union – श्रमिक-संघ
Physics – भौतिकी
Sociology – समाज-विज्ञान
Gravitation – गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 7.
सूचनाः कोष्ठक से सही शब्द चुनकर लिखें। (बट्टा, विषाणु, उपग्रह, समीकरण, प्रतिशत, उदारतावाद, दर्शनशास्त्र, विकिरण)
1. Discount – ___________
2. Equation – ___________
3. Liberalism – ___________
4. Percent – ___________
5. Philosophy – ___________
6. Radiation – ___________
7. Satellite – ___________
8. Virus – ___________
उत्तरः
1. Discount – बट्टा
2. Equation समीकरण
3. Liberalism – उदारतावाद
4. Percent – प्रतिशत
5. Philosophy – दर्शनशास्त्र
6. Radiation – विकिरण
7. Satellite – उपग्रह
8. Virus – विषाणु

मंजिल की ओर Summary in Malayalam

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