Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

Teachers recommend solving Kerala Syllabus Plus Two Hindi Previous Year Question Papers and Answers Pdf Board Model Paper 2021 to improve time management during exams.

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

Time : 2 1/2 Hours
Maximum : 80 scores

सूचना: कवितांश पढ़ें और 1 से 4 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

पाकर तुझसे सभी सुखों को हमने भोगा।
तेरा प्रत्युपकार कभी क्या हमसे होगा ?
तेरी ही यह देह, तुझी से बनी हुई है।
बस तेरे ही सुरस – सार से सनी हुई है।
फिर अंत समय तू ही इसे अचल देख अपनाएगी।
हे मातृभूमि ! यह अंत में तुझमें ही मिल जाएगी।

प्रश्न 1.
‘दूसरे के प्रति उपकार’ के अर्थ में प्रयुक्त शब्द कौन सा है?
उत्तरः
प्रत्युपकार

प्रश्न 2.
मातृभूमि के लिए कवि क्या करना चाहते हैं? (1)
उत्तरः
प्रत्युपकार

प्रश्न 3.
तेरा प्रत्युपकार कभी क्या हमसे होगा ?” कवि क्यों कभी क्या हमसे होगा ?” कवि क्यों ऐसा सोचते हैं? (2)
उत्तरः
मातृभूमि से सभी सुखों को हम भोगते हैं। इसलिए प्रत्युपकार करना आसान नहीं है।

प्रश्न 4.
कवितांश की आस्वादन टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
प्रस्तुत पंक्तियाँ श्री मैथिली शरण गुप्त द्वारा लिखा गया मातृभूमि कविता से है। आप द्विवेदी युग के प्रसिद्ध कवि है। साकेत, यशोधरा, पंचवटी आदि आपकी प्रमुख रचनाऐं है। प्रस्तुत कविता में कवि जन्मभूमि का गुणगान करके उसकेलिए अपने जान भी देने के आह्वान करता है।

कवि कहते हैं – जो सुख और शाँति हमने भोगा है, वे सब तुम्हारी ही देन है। तुझसे किए गए उपकारों का बदला देना आसान नहीं है। यह देह तेरा है, तुझसे ही बनी हुई है। तेरे ही जीव-जल से सनी हुई है। अंत में मृत्यु होने पर निर्जीव शरीर तू ही अपनाएगा। है मातृभूमि अंत में हम सब तेरे ही मिट्ठी में विलीन हो जाएगा। यह सरल शब्दों में लिखी गयी कविता हैं। यह छात्रानुकूल कविता है। क्योंकि इस कविता में प्रासंगिकता है। हमें प्रकृति और भारत माँ से प्रेम के साथ व्यवहार करना ज़रूरी हैं। देशप्रेम हमारे जीवन के लिए आवश्यक गुण है।

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 5.
ये कथन पढ़ें और बहादुरशाह जफ़र के चरित्र पर टिप्पणी लिखें।
उत्तरः
चरित्र चित्रण
बहादुरशाह ज़फ़र भारत के अंतिम मुगल बादशाह है। 1857 की स्वतंत्रता संग्राम के बाद बादशाह को अंग्रेजों ने कैदी बनाया। किसी दूर देश के कैद में रहने पर भी मन में देश और परिवारवालों के प्रति अगाध प्रेम झलकता है वह अब भी अपनी प्रजा के बारे में सोचते है। एक सच्चा शासक होने के कारण वह अपने प्रजा के बुरी हालत के बारे में सोचनेवाला है। अपनी लापरवाही को वह ठीक तरह से जानते है।

सूचना: कवितांश पढ़ें और 6 से 8 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही महत्वाकांक्षा रही है कि हर एक आँख से आँसू मिट जाएँ। शायद ये हमारे लिए संभव न हो, पर जब तक लोगों की आँखों आँसु हैं और वे पीड़ित हैं तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा। और इसलिए हमें परिश्रम करना होगा ताकि हम अपने सपनों को साकार कर सकें।

प्रश्न 6.
हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की महात्वाकांक्षा क्या है?
उत्तरः
हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की महत्वाकाँक्षा है कि हर एक आँख से आँसू मिट जाएँ।

प्रश्न 7.
गद्यांश का संक्षेपण करें।
उत्तरः
महात्मा गाँधी की महत्वाकांक्षा हर एक के आँख से आँसू मिटाना पूरा करने तक हमारा काम खतम नहीं होगा।सपनों को साकार करने के लिए हमें परिश्रम करना है।

प्रश्न 8.
उचित शीर्षक लिखें।
उत्तरः
परिश्रम / सपना / महत्वाकांक्षा

सूचना: कवितांश पढ़ें और 9 से 12 से तक के प्रश्नों के उत्तर लिखें।

नीलांबर परिधान हरित तट पर सुंदर है।
सूर्य-चंद्र युग मुकुट, मेखला रत्नाकर है ।।
नदियाँ प्रेम प्रवाह फूल तारे मंडन हैं।
बंदीजन खग-वृंद, शेषफल सिंहासन है।।
करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेष की।
हे मातृभूमि ! तू सत्य ही सगुण मूर्ति सर्वेश की ।।

प्रश्न 9.
यह किस कविता का अंश है?
उत्तरः
मातृभूमि

प्रश्न 10.
धरती का परिधान क्या है? (नीलांबर, रत्नाकर, सूर्य-चंद्र)
उत्तरः
नीलांबर

प्रश्न 11.
कवि ने नदियों और फूलों का वर्णन किस प्रकार किया है?
उत्तरः
कवि नदियों को प्रेम प्रवाह और फूलों को मंडन का वर्णन किया है।

प्रश्न 12.
कवितांश का आशय लिखें।
उत्तरः
द्विवेदी युग के प्रसिद्ध कवि मैथिली शरण गुप्त राष्ट्रकवि के नाम से जाने जाते हैं। कवि धरती की सुंदरता दिखाकर पर्यावरण और देश के प्रति प्रेम करने का आह्वान करती है। मातृभूमि के हरित शरीर में नीलाकाश वस्त्र होकर सुंदरता बढ़ाती है। सूरज और चाँद इसकी मुकुट हैं। सागर इसकी करधनी है। यहाँ बहनेवाली नदियाँ प्रेम का प्रवाह हैं। तारे और फूल आभूषण है। पक्षियाँ वंदना करते हैं। शेषनाग का फन सिंहासन है। बादल इस सुंदर वेष का अभिषेक आत्मसमर्पण के साथ करते हैं। इसलिए हे मातृभूमि तुम सत्य ही ईश्वर का सगुण मूर्ति है। यहाँ कवि धरती माँ को ईश्वर का पर्याय दिया हैं; क्योंकि ईश्वर हमें सब कुछ देते हैं और धरती ईश्वर का साकार रूप हैं।

सूचना: 13 से 17 तक के प्रश्नों के उत्तर कोष्ठक से चुनकर लिखें।

प्रश्न 13.
‘दोस्ती’ गीत के संगीतकार कौन हैं? (ए. आर. रहमान, आर. डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल)
उत्तरः
आर. डी. बर्मन

प्रश्न 14.
सपना देखनेवाली मज़दूरिन कहाँ रहती है। (झोंपड़ी में, बंगले में, प्लैट में)
उत्तरः
झोंपडी में

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 15.
मंदिर के रास्ते में लड़कियाँ क्या बेच रही थीं? (गुलाब का फूल, चंपा का फूल, कुमुद का फूल)
उत्तरः
कुमुद का फूल

प्रश्न 16.
‘यह भटका हुआ पीर’ किस विधा की रचना है? (उपन्यास, कहानी, संस्मरण)
उत्तरः
संस्मरण

प्रश्न 17.
ज़मीन की रजिस्ट्री के एक दिन पहले पिताजी ने कहाँ जाने को कहा? (खेत, गाँव, शहर)
उत्तरः
खेत

सूचना: पद पढ़ें, प्रश्न 18 से 19 के उत्तर लिखें।

जबहीं बन मुरली श्रवण परी
चकित भई गोप कन्या सब धाम काम बिसरीं।

प्रश्न 18.
‘भूल गईं ‘ शब्द का समानार्थी शब्द पद से चुनकर लिखें।
(बिसरी, चकित भई, श्रवण परी)
उत्तरः
बिसरीं

प्रश्न 19.
मुरली की ध्वनि में लीन प्रणयातुर दो गोपिकाओं के बीच होनेवाली बातचीत लिखें।
सहायक संकेतः
• मुरली की ध्वनि की मधुरिमा
• कृष्ण के प्रति अनुराग
• अपने को भूल जाना
उत्तरः
गोपिका 1 : अरे, सखी, सुनो। क्या है यह मीठा शब्द?

गोपिका 2 : वह तो मुरली नाद है

गोपिका 1 : मुरती नाद? कौन ? यहाँ इस वृंदावन में?

गोपिका 2 : जानती नहीं, कृष्ण।

गोपिका 1 : कृष्ण, चलो, वृंदावन की ओर।

गोपिका 2 : यह काम !

गोपिका 1 : काम छोड दो जल्दी कान्हा के पास जाओ।

गोपिका 2 : कान्ह की मुरली नाद जादू की तरह हमें खींचते हैं।

गोपिका 1 : ठीक है, जल्दी चलो।

गोपिका 2 : : अच्छा, चलो।

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 20.
कवितांश पढ़ें और व्याख्या करें।
ये दोस्ती…
हम नहीं तोड़ेंगे
तोड़ेंगे दम मगर
तेरा साथ ना छोड़ेंगे
उत्तरः
प्रसिद्ध गीतकार श्री आनंद बख्शी करीब 4000 गीत लिखे हैं। अनेक पुरस्कारों से आप सम्मानित है। प्रस्तुत गीत मशहूर हिंदी सिनेमा ‘शोले’ से है। दोस्ती के बारे में लिखे मार्मिक गीत है यह गीत। दोस्त कभी भी दोस्ती नहीं तोड़ने के वादा करते हैं।

मरने पड़े तो भी दोस्ती छोड़ेंगे नहीं। दोस्त है, इसलिए जीत, हार, गम जान ये सब एक जैसा है। जानपर खेलकर भी अपने दोस्त केलिए दूसरों से दुश्मनी लेने के लिए तैयार है। लोगों को हम दो लगते हैं लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। ईश्वर से प्रार्थना है कि कभी भी अलग और एक दूसरे से नाराज़ न हो जाये, खाना और पीना, मरना और जीना पूरी ज़िन्दगी में एक साथ करेंगे। बहुत सरल शब्दों में असली दोस्ती का चित्र यहाँ खींच लिया है। आज भी यह गीत सब गुनगुनाते हैं और प्रासंगिक भी है।

प्रश्न 21.
जीवनवृत्त पढ़ें और कुँवर नारायण के बारे में एक अनुच्छेद लिखें।
जीवनवृत्त
नाम : कुँवर नारायण
जन्म : सन् 1927 को
जन्मस्थान : उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद
रचनाएँ : चक्रव्यूह, अपने सामने, कोई दूसरा
पुरस्कार : 2005 में ज्ञानपीठ
उत्तरः
प्रसिद्ध साहित्यकार श्री कुँवर नारायण का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में सन् 1927 को हुआ। चक्रव्यूह, अपने सामने कोई दूसरा नहीं, इन दिनों, आदि उनके प्रमुख काव्य संग्रह है। भारत के सर्वोच्च साहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ से 2005 में वे सम्मानित हुए।

प्रश्न 22.
हाइकू पढ़ें और आशय लिखें।
मान न मान
मैं तेरा मेहमान
बने बुढ़ापा।
उत्तरः
हाइकू एक विशेष काव्य शैली है। जापानी कविता से प्रेरणा पाकर ही हिन्दी में भी हाइकू का उदय हुआ। हिंदी काव्य जगत में हाइकू को एक अलग पहचान दिलाने में श्री भगवत शरण अग्रवाल का विशेष योगदान रहा है। ‘इन्द्रधनुष’ उनका प्रसिद्ध हाइकू संग्रह है। बुढ़ापे के बारे में कवि कहते हैं हर व्यक्ति बुढापे को अपना दुश्मन मानता है। परंतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हर व्यक्ति को उसे मानना ही पड़ता है। अर्थात् एक न एक दिन हर व्यक्ति बूढ़ा हो जाएगा। बुढापे के बारे में कवि ने यहाँ कहा गया है। प्रत्येक हाइकू अपने आप में पूर्ण एवं गरिमामय है।

प्रश्न 23.
सही मिलान करें।
Atmosphere – जीवाणु
Average – प्रमाणपत्र
Bacteria – ऊर्जा
Certificate – औसत
Energy – वायुमंडल
Percent – अनुपात
Ratio – विषाणु
Virus – प्रतिशत
उत्तरः
Atmosphere – वायुमंडल
Average – औसत
Bacteria – जीवाणु
Certificate – प्रमाणपत्र
Energy – ऊर्जा
Percent – प्रतिशत
Ratio – अनुपात
Virus – विषाणु

प्रश्न 24.
पद पढ़ें और भावार्थ लिखें।
सुतमुख देखि जसोदा फूली।
हरषित देखि दूध की दैनियाँ प्रेम मगन
तनु की सुधि भूली ।।
बाहिर ते तब नंद बुलाए देखौ धौं सुंदर सुखदाई।
तनक तनक सी दूध दी दैनियाँ देखो नैव सुफल करो आई।
आनंद सहित महर तब आए मुख चितवन दोउ नैन अघाई।
‘सूर’ स्याम किलकत द्विज देख्यौ मनो कमल पर बीजु जमाई ।।
उत्तरः
सूरदास हिंदी साहित्य के कृष्ण भक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। उन्होंने व्रज भाषा में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया है। मध्यकालीन काव्यधारा की प्रमुख विशेषतायें इस पद में देखा जा सकता है। भक्ति का वर्णन, सौंदर्य बोध, आराध्य देव का वर्णन, सामाजिक भावना आदि गुण इस पद में है। प्रस्तुत पद सूरदास के बाल लीला का पद है, जो सूरसागर से लिया गया है। अपने बेटे के मुख देखकर माता यशोदा बहुत खुश हई। बहुत हर्ष के साथ अपने बेटे के दूध की दाँत को देखकर लाड़-प्यार में मग्न यशोदा का होश खो गया है।

वह बाहर से अपने पतिदेव नंद को बुलाकर पुत्र का सुंदर रूप देखने को कहती है। पुत्र के छोटे-छोटे दाँत को देखकर उसकी आँखें सजल होती है। उनके मुख और दृष्टि खुशी से भर गए। सूरदास कहते हैं कि किलकारी करनेवाले कृष्ण के दाँतों के देखकर ऐसा लगता है मानो कमल पर बिजली जम गई है। श्रीकृष्ण का सौंदर्य अनुपम है। बच्चों को देखकर माँ- बाप सबकुछ भूल जाते हैं। वात्सल्य रस का प्रभाव हमारे मन में आवश्यक है। यह आज भी प्रासंगिक है।

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 25.
पति द्वारा उपेक्षित होने पर मुर्की किसी दयालु व्यक्ति से भाड़ा लेकर राजवंती के यहाँ आश्रय लेती है। संकेतों के आधार पर मुर्की का आत्मकथांश तैयार करें। (8) सहायक संकेतः
• राजवंती से अपनी व्यथा सुनाना
• राजवंती द्वारा आश्रय देना
• कोठरी की चाबी देना।
• जीवन-भर चाबी न छीनने का वादा करना
उत्तरः
मेरा जीवन संघर्षों से भरा था, मेरे जन्म के कुछ ही दिनों के बाद मेरी माँ मर गयी, पिता ने मुझे चाचा के भेजा। वहाँ मेरा जीवन अकेला था। फिर राजवती माँ के यहाँ कुमार की देखपाल केलिए मुझे लाये गयें। माँ ने मुझे मुरकी और बुलाकी नाम दिये। खुशी से जीवन बिताते समय बाप ने मेरी शादी किसी बूढे के साथ करनावा चाहा। मैं एक शहरी लड़के के साथ भाग गयी। लेकिन वह मुझे छोड़ दिया, मैं वापस राजवती माँ के पास पहूँच गया। राजवती माँ ने मुझे आश्रय दिया। मेरा हालत सुनकर मुझे अपने घर में एक कोठरी दिया। मुझे वादा दिया कि इस कोठरी की चाबी किसी ने भी नहीं छीनेगा। अपने बेठे से भी वादा करवायी थी। माँ नहीं होती तो मेरा जीवन कितना कठिन होती, यह चाबी में जीवन भर मेरे पास रखूँगी।

प्रश्न 26.
मान लें, आपके स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह होनेवाला है। उसके लिए एक आकर्षक पोस्टर तैयार करें। (8)
उत्तरः
Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers - 1

प्रश्न 27.
‘कितने बच्चे यतीम हो गए, कितनी औरतें बेवा हो गईं।’ बहादुरशाह जफ़र के पत्र के इस प्रसंग पर ‘युद्ध भीषण परिणाम’ विषय पर आलेख तैयार करें। (8)
सहायक संकेतः
• युद्ध का विनाश
• सामूहिक क्षति
• शांति का महत्व
उत्तरः

संगोष्टी आलेख
युद्ध के भीषण परिणाम

पूज्य अध्यापक गण और, मेरे प्रिय दोस्तों, नमस्कार। मैं आज युद्ध के भीषण परिणाम विषय में एक आलेख प्रस्तुत कर रहा हूँ। ध्यान दीजिए। युद्ध एक ऐसा शब्द है जो किसी को भी सुनने में खुशी नहीं होते हैं। सिर्फर्मांग लेने वाल्लों को ही नहीं जुड़े और जुदा कई लोगों को, धरती को, पर्यावरण को, जीवजंतुओं को, समाज को – भी यह हानी पहुँचाते हैं। विनाश और बरबादी ही युद्ध का परिणाम होते हैं। दोनों पक्षों के लोगों को यह नुकसान देते हैं।

आधुनिक समाज में होनेवाले युद्ध अधिक विनाशकारी होते हैं, क्योंकि नये नये आविष्कारों के कारण विनाश की मात्रा बढ़ते हैं, नये नये बंदूकें, टान्कों, युद्धपोत, हवाई जहास से लेकर रासायनिक औज़ार, अणुबँम्ब, मिज़ेल जैसे के भी दुरुपयोग युद्ध के क्षेत्र में उपयुक्त करने लगे हैं। पुराने समय से ज़्यादा खतरनाक और जटिल समस्या हो रहे हैं यह।

हर देश अपने देश की सुरक्षा के लिए ज़्यादा औज़ार इकट्ठा कर रहे हैं। समाज के हित के लिए आवश्यक ऊर्जा और संपत्ति को इसी प्रकार विनाशकारी औजारों के निर्माण और खरीदने के लिए प्रयुक्त करते हैं। शिक्षा, चिकित्सा, वाणिज्य, खेती आदि को छोड़कर युद्ध के लिए अधिक पैसे खर्च करते हैं। आतंकवाद और सांप्रदायिकता भी युद्ध के गति को प्रवेग देते हैं। समाज निर्माण के बदले सामाजिक विनाश हो रहे हैं। अणुबॉम्ब के उपयोग से हुए नुकसान कई पीढ़ियों तक फैल जाते हैं। आज भी जापान इसका शिकार है। युद्ध लगातार होनेवाले देशों में विकास रुक जाता है, और सामाजिक नुकसान भी होते है। भौतिक नुकसान ही नहीं लोगों के दिलों में हुए चोट भी बहुत दर्दनाक हैं।

ये सब मुसीबतों को पार करने के लिए एक ही उपाय है। शांति का महत्व को पहचानना और इसकेलिए कदम उठाना, शांति लाने केलिए लोगों को सही जानकारी होना ज़रूरी है। इसकेलिए शिक्षा ही चाहिए। बच्चों से लेकर युवा पीढ़ी तक को सही शिक्षा देकर उन्हें सही रास्ते पर ले जाना समाज का दायित्व है। सिर्फ अपने आप के बारे में ही नहीं दूसरों के बारे में सही जानकारी होने से ही शांति का भाव हर एक के मन में होंगे। अलग अलग प्रकार के धर्म, जाति, वर्ण, भाषा, संस्कृति होने पर भी हम सब मानव है।

हम सब एक ही माँ-धरती माँ – का संतान है। इसी प्रकार हम सब भाई बहन हैं। धरती का नाश हमारा ही नाश है। ये सब बातों को सही रूप में पहचानकर शांति से जीवन बिताना मानव का अनिवार्यता है। ‘वसुधेव कुडुम्बक़ं’ मंत्र हमारे मन में होना है। ‘लोका समस्ता सुखिनो भवंतु’ हमारी रक्षा का एक ही विचार है। दूसरों की भलाई हमारा भी भलाई हैं। ये सब मन में रखकर हमें एक अच्छा कल के लिए काम करना है ताकि आनेवाली पीढ़ी भी शांति से इस धरती में जी सके। इतना कहकर मैं आलेख समाप्त करता हूँ।

धन्यवाद।

प्रश्न 28.
“तुमने अपने कैदी बाप को खत भेजा । खत क्या भेजा, मेरी जान, आँसूनामा था।” बेटी के आँसूनामा ने बादशाह के मन को विचलित कर दिया। वे डायरी में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं। वह डायरी लिखें।
सहायक संकेतः
• परिवारवालों की सोच.
• दिल्लीवासियों के प्रति आकुलता
• खत पढ़ने से उत्पन्न दर्द
• कैदी हो जाने की वेदना
उत्तरः

रंगून, 18 /5/1857

बुधवार

आज बेटी का खत मिला। बार-बार पढा। मन न भरा। हाँ, आज का दिन आँसू से भीगा एक दिन था। मेरी बेटी की अवस्था अब कैसी होगी? एक बार उसे देखने की इच्छा है, लेकिन कैसे? हमारी दिल्लीवासियों की हालत! वे लोग मेरे प्रति रोते हैं। मेरी स्थिति भी भिन्न नहीं है। एक बार उन लोगों को देख सकने की इच्छा थी। बेटी का खत मिला, जवाब भी लिखा। कैसे भेजूँ ? हाँ, कल किसी व्यक्ति का आश्रय लेना है। यदि उसने धोखा दे तो…..। शायद मेरे अंतिम शब्द होगा। यहाँ इस कैद से बाहर आना मुश्किल है। किसी दिन हमारा देश स्वतंत्र होगा तब मैं नहीं होगा। स्वतंत्रता की प्रतीक्षा में ……

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 29.
“भविष्य में हमें विश्राम करना या चैन से नहीं बैठना है, बल्कि निरंतर प्रयास करना है।” नेहरूजी के इस कथन के आधार पर ‘परिश्रम का महत्व’ विषय पर भाषण तैयार करें।
सहायक संकेतः
• जीवन में परिश्रम का स्थान
• जीत की पहली सीढ़ी
• परिश्रम का फल
उत्तरः
सबको नमस्कार,
मैं ‘परिश्रम का महत्व’ विषय पर एक छोटा से भाषण प्रस्तुत कर रहा हूँ, ध्यान दीजिए। अंग्रेज़ी में एक कहावत है Work is Worship यानि परिश्रम ही आराधना है। संसार में हर जीव-जंतु परिश्रम करके ही जीवन बिताते हैं। सेन धर्म में कहा गया है कि जो परिश्रम नहीं करते हैं उन्हें भोजन खाने की हक नहीं हैं। परिश्रम विजय का पहली सीढी है। हम मानव परिश्रम करके ही इतनी प्रगति प्राप्त किया है। आदि मानव से आज के मानव तक जितने भी प्रगति संभव हुआ हैं वहाँ परिश्रम का हाथ है।

जीवन में सफल हुए हर व्यक्ति के पीछे परिश्रम का मंत्र ज़रूर होगा। सिर्फ वाणिज्य के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि कला, साहित्य, सिनेमा, राजनीति, चिकित्सा, निर्माण सभी क्षेत्रों में हज़ारों नमूने हमें देखने को मिलेगा। धीरूभाई अंबानी, बिलगेट्स, डॉ गंगाधरन मृणालिनी, गाँधीजी, आमीर खान, अमर्त्या सेन, सत्यजित रॉय आदि अनेक नाम हमें दिखाई देंगे।

जो परिश्रम नहीं करते हैं उनकी गति पीछे की ओर जाते हैं। जीवन में मुसीबतें देखकर भागने से अच्छा है उन्हें पार करने के लिए निरंतर परिश्रम करना। निरंतर परिश्रम के कारण रुकावट दूर हो जाते हैं और विजय का रास्ता खुल जाता है। परिश्रम करने वालों के मन में जोश और ओज भरे रहते हैं। वह किसी से डरते नहीं, हर सवाल के जवाब उसे मिलते हैं। समाज भी उन लोगों को सहायता करते हैं। परिश्राम से मिले फल की मधुरिमा भी बहुत अजीब है। बिना परिश्रम से मिले फल से 100 प्रतिशत रुचि और लगाव उनमें होते हैं। हमें एक ऐसा प्रण लेना चाहिए कि हर तरह के परिश्रम के महत्व को पहचानकर सही दिशा में विजय प्राप्त करने के लिए कोशिश करेंगे। इतना कहकर मैं भाषण समाप्त करता हूँ।

धन्यवाद,
जयहिंद

प्रश्न 30.
मान लें, ‘दोस्ती’ फिल्मी गीत सुनने के बाद एक छात्र पने पुराने मित्र को पत्र लिखता है। वह पत्र तैयार करें।
सहायक संकेतः
• दोस्ती के गुण
• दोस्ती का महत्व
• दोस्ती से लाभ
उत्तरः

दिल्ली,
20/02/2021

प्रिय राजू,
नमस्कार।
कई दिनों से तुम्हारी याद आती है। कई सालों से तुम्हारी कोई खबर नहीं है। तुम्हारी पढ़ाई ठीक तरह से चलते है ना। तुम उसी स्कूल में ही हो जहाँ हम एक साथ पढ़ते थे या तुम भी मेरी तरह और किसी स्कूल में चल गई? जो भी हो मेरा विचार है कि सब कुछ ठीक चल रहे हैं।

मैं यहाँ ठीक हूँ। पिता के तबादला के कारण ही मैं पाँचवीं कक्षा से लेकर यहाँ आये। यहाँ सब कुछ ठीक है, मुझे यहाँ भी कई दोस्त मिले, स्कूल भी बहुत अच्छा है। मैं यह खत लिखने का एक विशेष वजह है। मेरी बारहीं कक्षा के हिंदी पुस्तक में दोस्ती नामक एक फिल्मी गीत है। अध्यापक वह कक्षा में प्रस्तुत करते वक्त मुझे तुम्हारी याद आई। इस गीत में दो मित्रों के दोस्ती का चित्रण है। दोनों एक दूसरे को इतना प्यार करता है कि उन्हें अलग होना दुखदायी है और मृत्यु से भी खतरनाक लगते हैं। दोस्ती के गुण, महत्व और लाभ के बारे में भी अध्यापक बताया।

हम कई साल एक साथ एक ही कक्षा में बड़ी समीपता से रहते थे। मुझे वो सभी दिनों के बारे में याद आई। इसलिए मैं ने यह खत तुमको लिखा। हमें आगे हमारी दोस्ती को कायम रखने के लिए परिश्रम करना चाहिए। यही मेरी इच्छा है। खत समाप्त करता हूँ। घर में माँ-बाप को मेरा प्रणाम। जवाब की प्रतीक्षा में,

तुम्हारा सोनु

प्रश्न 31.
अंग्रेज़ी खंड का हिंदी में अनुवाद करें।
The world consists of numerous types of people. The beauty and attraction of this world is in its diversity. This fact is applicable not only in the case of society, but also in the case of each and every individual. (world – विश्व, numerous – बहुत, diversity – विविधता, applicable – लागू होना)
उत्तरः
विश्व में बहुत तरह के लोग होते हैं। विविधता में ही विश्व के सुंदरता और आकर्षकत्व रहते हैं। यह तत्व सिर्फ समाज के बारे में ही नहीं बल्कि, हर एक व्यक्ति के बारे में भी लागू होते हैं।

Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers

प्रश्न 32.
बाज़ार में एक नया चेस ‘कोशिनी’ निकला है, जो बाल बढ़ने में सहायक है। उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन तैयार करें।
सहायक संकेतः
• चार हफ़्तों (weeks ) में बाल लंबा
• औषधि गुणवाला
• कीमत का सही फ़ायदा
उत्तरः
Kerala Plus Two Hindi Board Model Paper 2021 with Answers - 2

प्रश्न 33.
भाषा भावों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती है। आज विश्व की एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी उभर रही है। विश्व भाषा के रूप में हिंदी का प्रचार-प्रसार विषय पर निबंध तैयार करें।
सहायक संकेतः
• संसार की सबसे बड़ी भाषाओं में एक
• सांस्कृतिक विकास में सहायक
• विश्व सौहार्द का संवाहक
• बोलचाल में आसान
उत्तरः

विश्व भाषा के रूप में हिंदी

भाषा भावों के अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती है। अन्य जीव-जंतुओं से मानव को अलग बनाये रखने के लिए भाषा का अविर्भाव ही मुख्य कारण बना। सूक्ष्म से सूक्ष्म भावों को भी अभिव्यक्त करने का माध्यम हम मानव के पास है, वह है भाषा।

संसार में हज़ारों भाषा प्रचलित है। उसमें सिर्फ हज़ार से भी कम व्यक्तियों प्रयुक्त भाषाओं से लेकर करोड़ों लोग प्रयुक्त भाषा भी है। संसार में अब लगभग 800 करोड लोग है।

हिंदी भाषा 80 करोड से अधिक लोग उपयुक्त बड़ी भाषा के गण में आते हैं। अर्थात् 10 में एक व्यक्ति हिंदी बोलते है। इतनी अधिक लोग उपयोग करनेवाले तीन-चार भाषायें ही होते है। इसलिए संसार के सबसे बड़ी भाषाओं में एक है हिंदी।

भाषा की गुण सिर्फ उसकी संख्या में ही सीमित न होता है। उसकी सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक पहलु भी हमें देखना चाहिए। इन सभी क्षेत्रों में हिंदी श्रेष्ठ ही आते हैं। भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में हिंदी की विशेष भूमिका है। वह सांस्कृतिक विकास में सहायक हुआ है। विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में बाँधने की शक्ति हिंदी में हैं। खुले मानस रहकर सभी संस्कृतियों को वह उसमें सम्मिलित करते हैं।

साहित्य के क्षेत्र में भी हिंदी का योगदान गणनीय है। विश्व के प्रमुख साहित्यकारों में हिंदी का कई साहित्यकार आते हैं। प्रसाद, पंत, प्रेमचंद, निराला, कबीर, सूरदास, तुलसीदास, बिहारी जैसे उच्च कोटि के साहित्यकार हिंदी का देन हैं। साहित्य के हर विधाओं में हिंदी साहित्यकार सफलतापूर्वक कलम चलाई है। कविता, नाटक, उपन्यास, कहानी, संस्मरण, रेखाचित्र, डायरी, यात्रा-वृतांत आदि सभी विधायें संपन्न है।

सामाजिक क्षेत्र में भी हिंदी की अपनी अलग पहचान है। भारत के विविध भाषा, संस्कृति, रहन-सहन वाले लोगों को एक समाज में लाने की भूमिका हिंदी निभाते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय में हिंदी की अमुक स्थान था। देश प्रेम को जगाकर हमारे सुरक्षा दलों की भाषा भी हिंदी है। समाज में यातायात, व्यवसाय, रहन-सहन आदि क्षेत्रों में भेदभावों को भुलाने के लिए हिंदी सहायक है।

सिर्फ भारत में ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले भारतीयों को इकट्ठा करने के लिए हिंदी काम आते है। हिंदी विश्व के 40 से अधिक देशों में पढ़ीपढ़ाये जाते हैं। दुनिया के अनेक विश्व विद्यालयों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन होती है। फिजी, सूरीनाम, दक्षिण आफ्रिका, अमेरिका, लंदन आदि जगहों में हिंदी का प्रयुक्त लोगों की संख्या कम नहीं है। एक सरल और सरस भाषा के रूप में विश्व सौहार्द का संवाहक बन गया है हिंदी।

आसान होने के कारण हिंदीतर भाषी भी बहुत आसानी से हिंदी भाषा का उपयोग करता है; हिंदी सभी भाषाओं से अच्छी अच्छी बातें स्वीकार करते हैं और उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे है। हिंदी सिनेमा और गीतों भी संसार में ख्याति प्राप्त है। सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि अनेक देशों के लोग हिंदी फिल्मी सितारों के फान हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों के कारण हिंदी के अधिक प्रचार-प्रसार हो रहे है। हम निस्संदेह कह सकते है कि हिंदी एक विश्व भाषा ही है।

प्रश्न 34.
अंग्रेज़ी संवाद का हिंदी में अनुवाद करें।
Ravi : Which period is it now?
Raju : Now it is Hindi.
Ravi : Yesterday our teacher taught Hindi lesson Mathrubhumi.
Raju : How was it?
Ravi : It was an interesting poem about the beauty of our country.
Raju : Who was the author of this poem?
Ravi : Famous Hindi poet Sri. Mydhili Saran Gupta.
Raju : OK. Thank you.
(Period – कालांश, taught- सिखाया, interest-दिलचस्प, author-रचनाकार, famous-विख्यात्)
उत्तरः
रवि : अब कौनसा कालांश है?

राजु : अब हिंदी है।

रवि : कल हमारा अध्यापक हिंदी पाठ मातृभूमि सिखाया।

राजु : वह कैसी थी?

रवि : हमारे देश की सौंदर्य के बारे में बहुत दिलचस्प कविता थी।

राजु : इस कविता की रचनाकार कौन है?

रवि : विख्यात हिंदी कवि श्री मैधिली शरण गुप्त।

राज् : हाँ। धन्यवाद।

Leave a Comment